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20141203

धर्म निरपेक्ष जगत


मैरी कॉम का किरदार प्रियंका ने निभाया और लगातार इस बात पर चर्चा हो रही है कि प्रियंका को यह किरदार नहीं बल्कि किसी उत्तर पूर्वी कलाकार को उनका किरदार निभाने का मौका मिलना चाहिए था. कई आलोचक लगातार यह आलोचना कर रहे कि प्रियंका का मेकअप नकली था. उनका अप्रोच नकली था. फिल्म का अच्छा या बुरा या जिस विषय पर वह फिल्म बनी है. उसके साथ न्याय होना ना होना बाद की बात है. सर्वप्रथम यह जो सवाल है कि प्रियंका को मैरी कॉम का किरदार निभाना ही नहीं चाहिए था. सरासर गलत है. यह सवाल किसी ने मिल्खा सिंह का किरदार निभाने वाले फरहान अख्तर से नहीं किया. गौरतलब है कि फिल्म गांधी में गांधीजी का मुख्य किरदार बेन किंगस्ले ने निभाया था. जबकि इस फिल्म के लिए नसीरुद्दीन शाह व कई अन्य भारतीय कलाकारों ने आॅडिशन दिया था. जिस जीवटता से बेन ने गांधीजी का किरदार निभाया, शायद ही कोई भारतीय कलाकार निभा पाते. वह अब तक गांधी पर बनी सबसे लोकप्रिय और महत्वपूर्ण फिल्मों में से एक है. इस लिहाज से कला को किसी राज्य में सीमित करना सही नहीं. जैसे पीके में आमिर खान भोजपुरी भाषा में बात कर सकते. जरूरत पड़ने पर रवि किशन मुंबईकर बन सकते. अगर कला और अभिनय को भी राज्य की तरह मेरा तुम्हारा तर्ज पर बांट लिया जाये तो संस्कृति कभी विकास नहीं कर सकती. विलास राव देशमुख हिंदी फिल्मों में हास्य फिल्में करते हंै और मराठी में वे गंभीर फिल्म बनाते हैं. सो, यह बेहद जरूरी है कि हम आलोचना के इस समुद्र में जबरन ऐसे मुद्दों पर खींचातानी करने की कोशिश न करें. अच्छा है कि हिंदी सिनेमा जगत अब भी धर्म निरपेक्ष है. वरना, कभी रेखा उमराव जान को सार्थक न कर जातीं. हेमा मालिनी रजिया सुलतान न बनतीं. पान सिंह तोमर की भूमिका इरफान खान न जीवंत बना पाते.

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