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20141216

छोटे छोटे प्रयास

मुंबई में थियेटर, कविता, साहित्य से प्यार करने वालों की भी अलग दुनिया है. लोगों के जेहन में भले ही यह बाते हों कि मुंबई में केवल ग्लैमर बॉलीवुड का हावी है. लेकिन हकीकत यह है कि कलाप्रेमी अपने अंदाज में एक अलग दुनिया बसा लेते हैं और वे बेहद सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं. चौपाल चौपाल एक ऐसा ही समूह है,जो अतूल तिवारी, अशोल बिंदल, कुलदीप सिंह व कई ऐसे कलाप्रेमियों की वजह से पिछले कई सालों से अब तक अपने अंदाज में साहित्य की सेवा कर रहा है.इस समूह में महीने के पहले या आखिरी रविवार को कविता, कहानी या साहित्य, नाटक से जुड़े कलाकार एक जगह एकत्रित होते हैं और अलग अलग विधाओं को बढ़ावा देते हैं. कभी कबीर, कभी मुंशी प्रेमचंद्र तो कभी कुदसिया जैदी...आज भी यहां जिंदा है. इसके संचालन के लिए वे किसी पांच सितारा होटल में नहीं बल्कि सामान्य से किसी स्थान पर एकत्रित होते हैं. कुछ इसी तरह पिछले कुछ महीनों से लगातार रंगकर्मी विभा रानी व उनके कुछ मित्रगण अवितको के अंतगर्त लगातार रूम थियेटर, एकल नाटक, कविता, कहानी, एंकरिंग की कला को बढ़ावा दिया जा रहा है.  बाल दिवस पर बच्चों से संबंधित कार्यक्रम. हाल ही में उन्होंने संचालन की कला को प्रोत्साहित करने के लिए कई दिग्गजों को शामिल किया. इस कार्यक्रम में विविध भारती के सुप्रसिद्ध एंकर युनूस खान व रेडियो सखी ममता सिंह भी मौजूद थीं. खास बात यह थी कि इस कार्यक्रम में उनके छोटे से बेटे जादू ने संचालन के कई गुर सिखाये. भीड़ से दूर ऐसे प्रयास भी हो रहे हैं. यह काबिलएतारीफ है. ऐसे समूहों का सम्मान होना चाहिए. चूंकि इसी तरह के प्रयासों और माध्यम से कला व साहित्य को बढ़ावा मिलेगा. बच्चे भी जागरूक होंगे. जरूरी है कि  मुंबई के पृथ्वी थियेटर की तरह अन्य थियेटर भी सफलता की कहानी गढ़े

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