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20150915

आम आदमी वाली मेरी क्वालिटी लोगों से मुझे जोड़ती हैं : कपिल शर्मा


कॉमेडी नाइट्स विद् कपिल से घर घर का परिचित चेहरा बन चुके कपिल शर्मा जल्द ही फिल्म किस किस से प्यार करूं में बतौर अभिनेता अपनी नयी पारी की शुरुआत करने जा रहे हैं. वह अपनी इस नयी पारी को लेकर उत्साहित हैं. 

किस तरह से किस किस को प्यार करूं फिल्म से जुड़ना हुआ
अनुकल्प मेरे कॉमेडी शो कॉमेडी नाइट्स विद् कपिल में लेखक हैं. एक बार उन्होंने मुझे इस फिल्म की वनलाइनर कहानी डिस्कस की थी कि एक आदमी जिसकी तीन बीवियां हैं और एक गर्लफ्रेंड भी हैं. कैसे उसकी हालत होती है. मुझे कहानी अपीलिंग लगी. मुझे लगा कि अब तक सिर्फ दो बीवियों की ही कहानी को दिखाया गया है. मैंने अनुकल्प को कहा कि मैं इस फिल्म से जुड़ना चाहूंगा. उसने कहा कि उसने अब्बास मस्तान को इस फिल्म की कहानी दी है.उसके बाद उनसे मेरी मुलाकात हुई. उन्होंने कहा कि मेरे सिवाए वह इस फिल्म में किसी और कास्ट नहीं करेंगे. भले ही उन्हें कितना भी लंबे वक्त का इंतजार करना पड़े. जिसके बाद मैं इस फिल्म से जुड़ा. 

आप अपने शो कॉमेडी विद् कपिल में क्रिएटिवली भी जुड़े हैं इस फिल्म में भी क्या क्रिएटिवली तौर पर आप जुड़े हैं. 
अब्बास मस्तान सर ने मेरा चयन ही इसी वजह से किया है कि मैं फिल्म में अपने क्रिएटिव इनपुट्स दे सकूं. सिर्फ कपड़े पहनकर एक्टिंग करना मेरा काम भर नहीं है. इस फिल्म में कॉमिक सिचुएशन से लेकर इमोशनल सिचुएशन तक सभी में मैंने अपने इनपुट्स दिए हैं. जिंहे अब्बास मस्तान सर ने माना भी है. मेरी कॉमेडी अच्छी है यह सभी जानते हैं इसलिए कॉमिक सिचुएशन पर मेरे इनपुट्स काम आ जाएंगे. मैं जानता था लेकिन फिल्म के क्लाइमेक्स में एक इमोशनल सीन भी हैं. जिस पर मैंने अपनी राय दी कि इसे ऐसा करते तो बहुत अच्छा होता था. अब्बास मस्तान सर ने मेरी बात मान ली. 

आप यशराज बैनर की फिल्म से लांच होने वाले थे क्या इस बात का दुख है. 
मुझे दुख नहीं है. मुझे यशराज बैनर की फिल्म मेरे कॉमेडी नाइट्स विद् कपिल की वजह से मिली थी.   मैंने उन्हें एप्रोच नहीं किया था. हां चीजें नहीं बनी. वहां कॉरपोरेट कल्चर की तरह काम होता है. ९० पेज की डील होती है. हर दूसरे पन्ने पर साइन करना होता है. अब्बास मस्तान के साथ घर वाली बात है. कोई कॉट्रेक्ट साइन नहीं हुआ है. मैं उनकी अगली फिल्म भी कर रहा हूं. आप मेरे खुद के आॅफिस में भी आओगे तो देखोगे कि वहां दूसरे प्रोडक्शन हाउस की तरह नहीं है. पूरा घर जैसा माहौल है. कोई जमीन पर लेटा हुआ दाल चावल खा रहा है तो कोई मेरे कुत्ते के साथ लेट हुआ है. उसी में काम भी हो रहा है कि फलां सीन पर क्या करना है. क्या नहीं. मुझे घरेलू माहौल में काम करने की आदत है. 

 स्टैंडअप कॉमेडी और एक्टिंग में कितना फर्क पाते हैं. 
फर्क है बहुत.एक्टिंग में आपको सारे इमोशन को जिंदा करना पड़ता है. आपको कॉमेडी, इमोशन, रोमांस सभी कुछ दिखाना पड़ता है . वैसे मैं पंजाब में थिएटर से बहुत लंबे समय से जुड़ा था. एक एक्टर के तौर पर भी मैंने खुद को बहुत मांजा है. 

 कॉमेडी बिलो द बेल्ट की बात आपको पसंद नहीं है लेकिन आपके शोज पर यह इल्जाम लगता है कि आप दूसरों का मजाक ज्यादा बनाते हैं. 
मैं अपना भी मजाक बनाता हूं. मजाक की शुरुआत मुझसे ही होती है. अगर मैं दूसरों का मजाक बनाता तो मेरे शो में सेलिब्रिटी बार बार नहीं आते. मैं सभी की रिसपेक्ट भी बहुत करता हूं. जहां तक आॅडियंस की बात है तो वह मेरे परिवार की तरह हो गयी है. देश विदेश से लोग इस शो का हिस्सा बनना चाहते हैं. पूरे परिवार के साथ. आप कैमरा आॅफ होने के बाद देखते नहीं हो लेकिन आइए मेरे सेट पर आपको मालूम पड़ेगा कि जो आॅडियंस आती है वह मुझे अपने परिवार का ही सदस्य मानती हैं. यही वजह है कि फोटो खींचवाते हुए वह मुझसे पूछती नहीं है बल्कि मेरे गले में हाथ डालकर सब शुरु हो जाते हैं. 

क्या वजह है जो आपसे लोग इतना कनेक्ट होते हैं और कॉमेडी इस दौर में कॉमेडी नाइट्स विद कपिल ने क्या बदलाव लाया है. 
मुझे लगता है कि मेरे आम आदमी वाली जो क्वालिटी है. वहीं लोगों को मुझसे आराम से जोड़ देती हैं. उन्हें मैं उनके बीच का लगता हूं. जहां तक बात बदलाव की है तो कॉमेडी नाइट्स विद् कपिल ने परिवार को जोड़ा है. यह ऐसा शो है जिसे पूरा परिवार एक साथ देखना पसंद करता है. 

अपनी अब तक की जर्नी को कैसे देखते हैं. 
मैं किस्मत का खुद को धनी मानता हूं. मैंने तो ज्यादा कुछ सोचा नहीं था. मैं बस चाहता था कि लाफ्टर चैलेंज के आॅडिशन में मैं सलेक्ट हो जाऊं बस  लेकिन फिर काम मिलता चला गया. आप रहते रहते और ज्यादा सीख लेते हैं. मैं भी जब कई कॉमेडी शो से जुड़ा तो मैंने पाया कि मैं भी अपना एक अलग शो कर सकता हूं क्योंकि लोग जब मुझे अपने शो में बुलाते थे तो मेरा दस मिनट होता था उसके बाद के २० मिनट उनके होते थे. उसमे कॉमेडी बिलो द बेल्ट चली जाती थी. मुझे वह पसंद नहीं थी लेकिन मेरा भी नाम जुड़ जाता था इसलिए मैंने अपना शो लाने का मन बनाया. कईयों ने कहा कि नहीं चल पाएगा लेकिन मैंने कोशिश की और कोशिश रंग लायी.

सेलिब्रिटी होने का सबसे बड़ा खामियाजा क्या है. 
आपको हमेशा खूबसूरत दिखना पड़ता है. हमेशा अच्छे कपड़े पहनने पड़ते हैं. एक कपड़े को आप रिपिट नहीं कर सकते हैं. मेरी मां कहती हैं कि यह तो पैसों की बर्बादी हैं. वह पंजाब के छोटे से पिंड से हैं इसलिए उन्हें ज्यादा पता नहीं कि यह इंडस्ट्री कैसे चलती हैं. वैसे मेरी मां मेरी कॉमेडी नाइट्स विद् कपिल के हर शो में होती हैं. मैं उन्हें भी कहता हूं कि वह कपड़े न रिपिट करें लेकिन वह नहीं मानती हैं. मैं अपनी मां के बहुत क्लोज हूं. सेलिब्रिटी होने के लिए मुझे अपना गांव छोड़ना पड़ा. जिसे मैं बहुत ही ज्यादा मिस करता हूं. 

अक्सर खबरें आती रहती हैं कि कॉमेडी नाइट्स विद कपिल आॅफ एयर होने वाला है. 
नहीं होगा. जब तक लोग पसंद करते रहेंगे और जब तक मैं खुद बोर नहीं हो जाऊंगा. मैं इस शो से जुड़ा रहूंगा. 

आपकी आनेवाली फिल्में 
इस फिल्म के बाद अब्बास मस्तान सर की एक फिल्म का हिस्सा हूं. इसके अलावा एक और फिल्म पर बातचीत चल रही हैं लेकिन कुछ कहना जल्दीबाजी होगी. 

20150905

ुद से है मेरी प्रतियोगिता : दीपिका कक्कड़


दीपिका कक्कड़ इन दिनों कलर्स के धारावाहिक ससुराल सिमर का के अलावा झलक दिखला जा पर भी नजर आ रही हैं. इस बार उन्हें जजेज से अच्छे कमेंट्स भी मिले हैं. 

दीपिका, झलक को हां कहने की कोई खास वजह रही?
जी मुझे डांस करना बहुत ज्यादा पसंद है. हमेशा से चाहती थी कि डांस में ट्रेनिंग लूं. लेकिन ले नहीं पा रही थी. झलक ने वह मौका दिया तो इसे हाथ से नहीं जाने देना चाहती थी. जहां तक बात है शो और मेरे अपने शो ससुराल सिमर का तो हां, मैं मैनेज कर रही हूं. मुझे लगता है  िक आप जो करना चाहते हैं. वह आप करने के लिए वक्त निकाल ही लेते हैं. मेरी दिलचस्पी है और इसलिए हेक्टीक होने के बावजूद मुझे मजा आ रहा है. मैं एक स्टूडेंट बन चुकी हूं अपने गुरु की और मैं इसका भरपूर आनंद उठा रही हूं.
झलक में आप नये अवतार में नजर आ रही हैं.?
जी हां, बिल्कुल मुझे बेहद खुशी है कि मैं अपने दर्शकों के सामने सिमर नहीं बल्कि दीपिका बन कर आ रही हूं. और इस बार दीपिका को अपने दर्शकों से जुड़ने का मौका मिल रहा है और दर्शक अपनी दीपिका के वास्तविक पक्ष को सही तरीके से देख पायेंगे कि असल जिंदगी में मैं कैसी हूं.
नये जजेज को लेकर और अब तक के आपके परफॉरमेंस के बारे में क्या कहेंगी?
मैं खुश हूं कि जजेज को धीरे धीरे मेरा परफॉरमेंस अच्छा लग रहा है और मैं अधिक मेहनत करने वाली हूं अब तो. शाहिद कपूर अच्छे डांसर हैं तो लॉरेन और गणेश दोनों ही कोरियोग्राफर हैं तो मेरे लिए हर किसी के कमेंट्स महत्वपूर्ण होंगे. शाहिद सर की मैं फैन रही हूं डांस की और अभी उनके सामने परफॉर्म कर रही हूं तो जब उनके कमेंट्स मिलेंगे अच्छे अच्छे तो खुशी होगी.
डेली सोप के साथ झलक के लिए कैसे वक्त निकाल पा रही हैं?
मैं दिन में शूटिंग कर रही हूं और रात में झलक के लिए रिहर्सल कर रही हूं. मुझे उम्मीद है कि मैं अपने धारावाहिक के किरदार और अपने परफॉरमेंस दोनों के बीच अच्छा संतुलन बना पाऊंगी.
आपको झलक से पहले किसी रियलिटी शोज के आॅफर आये हैं और आप रियलिटी शोज देखने में दिलचस्पी रखती हैं?
जी हां, आॅफर तो कई बार आये हैं. लेकिन मुझे ऐसा कुछ भी एक्साइटिंग नहीं लगा था. इसलिए मैं शो का हिस्सा नहीं बन पाती थी. आपको याद हो तो मेरे शो में मुझे डांस का शौक रहता है और मैं डांस शो जीत भी जाती हूं. तो आप समझ सकते हैं कि किसी डांसिंग शो में मुझे कितनी दिलचस्पी रही होगी. जहां तक बात है रियलिटी शोज के पसंद आने की तो हां मैं नच बलिये, इंडिया गॉट टैलेंट, इंडियन आयडल, डांस इंडिया डांस सबकुछ देख सकती हूं.
आपकी नजर में आपका सबसे बड़ा प्रतिद्वंदी कौन है?
इस सीजन में प्रशिक्षित डांसर्स भी हिस्सा ले रहे हैं. इसलिए अभी यह कहना बहुत जल्दबाजी है. लेकिन हां, मुकाबला कड़ा है और मैं इसमें सिर्फ खुद से प्रतियोगिता करूंगी कि मैं हर बार खुद को कितना बेस्ट साबित कर पा रही हूं. आगे का मुझे पता नहीं. यह तो दर्शकों पर भी निर्भर करता है कि वह मुझे शो में आगे देखना चाहेंगे या नहीं.
जब आप शूटिंग नहीं कर रही होती हैं तो क्या करती हैं?
मुझे घूमने, डांस, म्यूजिक में दिलचस्पी है. इन्हीं चीजों से मन बहलाती हूं.

पापा ने अभिनय की दुनिया में आने के लिए प्रेरित किया : करम


स्टार प्लस के शो मेरे अंगने में शिवम का किरदार निभा रहे करम राजपाल इस बात से खुश हैं कि उनके किरदार को काफी लोकप्रियता मिल रही है.

मेरे अंगने शो को काफी लोकप्रियता मिल रही है. आपकी क्या राय है, क्या बातें हैं जो शो से लोगों को जोड़ रही हैं?
मुझे लगता है कि आधुनिक समय में यह एक रुढ़िवादी नजरिये की कहानी है. यह एक कांसेप्ट आधारित शो है जो एक परिवार में तानाशाही विचारधारा और लोकतांत्रिक विचारधारा के टकराव पर आधारित है. यह श्रीवास्तव परिवार की कहानी है, जिसमें परिवार की मुखिया शांतिदेवी का राज चलता है. वह परिवार का फैसला लेती है. मुझे लगता है कि कई लोग इस कहानी से खुद को कनेक्ट कर पाते हैं. चूंकि अब भी ऐसे कई घर हैं. जहां ऐसी औरतें होती हैं. लेकिन उन्हें पाठ कैसे पढ़ाया जा सकता है. यह भी इस शो में आगे दिखाया जायेगा और इसलिए लोग शो को पसंद कर रहे हैं.
यह शो आपको अन्य सास बहू वाले फैमिली ड्रामा से कितना अलग लगता है?
मेरे अंगने में मूल रूप से एक ऐसे परिवार की कहानी है, जो अपनी जिंदगी में कुछ बदलावों को स्वीकार करता है. यह सास बहू की लड़ाई नहीं हैं, बल्कि यह कुछ विश्वासों और विचारधाराओं की लड़ाई है. हम एक परिवार में मौजूद दोनों तरह के विचारों और उन्हें बरतने के तरीकों को दिखाना चाहते हैं.
आप एक अच्छे कूक हैं और हमने सुना सेट पर आप खुद अपना खाना बनाना भी पसंद करते हैं?
मैं अक्सर सेट पर कुकिंग कर लेता हूं. वहां सेट पर हमारा किचन बहुत अच्छा है. मैं हफ्ते में 4 से 5 दिन सेट पर कुक करता हूं. दरअसल, मेरे कास्ट और क्रू के लोगों को मेरे हाथ का खाना इतना पसंद है कि मैं लगभग सबके लिए कुकिंग कर लेता हूं. मुझे कुकिंग की प्रतिभा मेरी मां से मिली है. वह कमाल का खाना पकाती है. दूसरी वजह ये है कि हम पंजाबी हैं. तो अच्छा खाना पकाना हमारे खून में ही है.
हमने सुना आपको क्रिकेट खेलना भी काफी पसंद है?
मेरे पिता ने मुझे अभिनय की दुनिया में आने के लिए प्रेरित किया. वरना मैं क्रिकेटर बन सकता था. मैंने अब तक हमेशा यही सुना है कि हर किसी के पिता अभिनय की दुनिया में आने से रोकते हैं. लेकिन मेरे पिताजी ने हमेशा मुझे प्रेरित किया. हालांकि उन्हें मेरा क्रिकेट खेलना नापसंद था. ऐसा नहीं था. लेकिन उनकी इच्छा थी कि मैं अभिनय में कोशिश करूं. मैंने कोशिश की और यह काम कर गया.मैंने इसके बाद अपनी अभिनय क्षमता को ही और दुरुस्त करने में मेहनत की और इसी में आगे बढ़ने का फैसला किया. और मैं बेहद खुश हूं कि मैं यह कर पाया.
क्या करम और शिवम के किरदार में कोई समानता है?
काफी हद तक़ . मेरा किरदार और मैं असल जिंदगी में लगभग एक जैसे हैं. मैं भी कम और जरूरी बातें करना ही पसंद करता हूं. मैं अपने काम की जिम्मेदारी लेता हूं और जो मुझे सही लगता है मैं वही करता हूं. 

9 से 5 की नौकरी कभी नहीं करना चाहती थी : विनिता जोशी


स्टार प्लस पर प्रसारित हो रहे धारावाहिक मोही में लीड किरदार निभा रहीं विनिता जोशी बेहद खुश हैं कि उन्हें ऐसा बेहतरीन किरदार निभाने का आॅनस्क्रीन मौका मिला है.

विनिता, मोही शो की लीड किरदार को लेकर काफी विवाद रहे. कई बार चेहरे बदले. अब जाकर आप इस शो का हिस्सा हैं? इस पर आपकी क्या प्रतिक्रिया हैं?
मैं तो उन सबको थैंक्स कहना चाहूंगी, जिन्होंने यह आॅफर नहीं स्वीकारा क्योंकि यह इतना बेहतरीन किरदार है जिसने मेरे करियर को नयी ऊंचाई दी है और मुझे इस बात की खुशी है कि दर्शकों को मेरा यह किरदार पसंद आ रहा है. मेरी पूरी कोशिश रहेगी कि मैं अपना 100 प्रतिशत दूं. और मुझे यकीन है कि मेरे बाकी किरदारों की तरह दर्शक इसे भी स्वीकार रहे हैं.
मोही में लीड किरदार निभाने का मौका कैसे मिला?
मेरे लिए यह किसी सपने के पूरे होने जैसा ही था. मोही की टीम ने मेरा आॅडिशन लिया और उसी दिन मुझे शाम में केरल शूटिंग करने के लिए भेज दिया गया. सो मैं मानती हूं कि यह मेरे लिए किसी ड्रीम रोल से कम नहीं है.
लेकिन इस शो को शाम के पांच बजे का स्लॉट मिला है. आपको लगता है कि इसे अच्छे दर्शक मिल पायेंगे या मिल रहे हैं?
मुझे लगता है कि स्टार प्लस ही एकमात्र ऐसा चैनल है जो नये स्लॉट गढ़ता है. स्टार प्लस ने ही सबसे पहले 7 बजे का स्लॉट शुरू किया और उस वक्त साथिया शो आ रहा था. सबको लग रहा था कि पता नहीं शो को टीआरपी मिलेगी कि नहीं. लेकिन आज वह टीवी का नंबर वन शो है. इसके बाद धीरे धीरे 6.30. 6 बजे, 5.30 बजे भी स्टार प्लस नये शोज लेकर आता है और यह इस चैनल की खास बात है. मुझे लगता है कि धीरे धीरे लोग 5 बजे के स्लॉट को भी पसंद करने लगेंगे. और फिलहाल हमें अच्छी रेटिंग मिल रही है.
आप इस शो में एक आदिवासी लड़की का किरदार निभा रही हैं. तो क्या आप वास्तविक जिंदगी में कभी किसी ऐसी लड़की से मिलीं, किरदार के लिए होम वर्क करने के दौरान?
नहीं लड़की से तो नहीं मिली. लेकिन हम जहां केरल के गांवों में इस शो की शूटिंग कर रहे थे. वहां हम काफी लोगों से मिले और हमने काफी रिसर्च किया है. उनके साथ काफी दिन हम रहे. उनके तौर तरीके. बातचीत के लहेजे, उनके रहन सहन को समझने की कोशिश की है और साथ ही वहां के ऐसे गांवों की मजबूरियों को समझने की कोशिश की, जहां वाकई आज भी बिजली, पानी की पहुंच नहीं है.लेकिन फिर भी लोग अपनी जिंदगी जी रहे हैं और खुशी से जी रहे हैं. आप जब इस तरह की जिंदगी नजदीक से देखते हैं तो आप महसूस करने लगते हैं कि हम ग्लैमर की जिंदगी में कितने ऐशो आराम से हैं और वही दूसरी तरफ  कई जिंदगियां ऐसी भी हैं, जहां लोग पानी बिजली को तरस जाते हैं. तो उनकी परेशानियों को समझ कर अपने अभिनय में इंप्रोवाइज किया है.  इसके अलावा मैंने शो के लिए फॉर्मल ट्रेनिंग ली. भाषा की ट्रेनिंग ली. साथ ही फिजिकल ट्रेनिंग भी ली है.
शो में आप एक डॉक्टर बनना चाहती हैं. तो वास्तविक जिंदगी में आपने कभी ऐसी इच्छा हुई कि आपको भी डॉक्टर बनना चाहिए?
नहीं बिल्कुल नहीं. मैं शुरू से पढ़ाई में इतनी भी तेज नहीं रही कि मुझे डॉक्टर बनने की इच्छा रहे. लेकिन हां, मैं हमेशा से जो करना चाहती थी. कर रही हूं. मुझे हमेशा मेरे परिवार से सपोर्ट मिला है. मेरे पेरेंट्स का बस इतना कहना था कि तुम अपनी पढ़ाई पूरी कर लो. फिर तुम्हें जो भी करना है. हमें कोई दिक्कत नहीं तो मैंने भी अपने पेरेंट्स की सोच का पूरा ख्याल रखा और पढ़ाई पूरी करके ही मैं इस फील्ड में आयी हूं. मैंने ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी करने के बाद ही एक्टिंग की तरफ रुख किया.
अब तक के अपने सफर को किस तरह देखती हैं?
मैं तो बेहद खुश हूं कि मुझे उम्मीद से अधिक काम मिल रहा है. स्टार प्लस के साथ ही मेरे रिश्ते हमेशा खास रहे हैं. मैंने इनके पहले भी शोज में काम किया है. मुझे लगातार अच्छे लोगों के साथ काम करने के मौके मिल रहे हैं और यही मेरे लिए खास बात है. मैं अपने सफर से बेहद खुश हूं. मेहनत तो हर किसी को करनी होती है. मैं भी कर रही हूं. लेकिन कम समय में आपको अगर नये मौके मिल रहे हैं.  लीड किरदार निभाने के मौके मिल रहे हैं. यही बड़ी बात है मेरे लिए. मैं कभी भी 9 टू फाइव जॉब नहीं करना चाहती थी और अभिनय ने मुझे वह मौका दिया है. इसलिए मैं अपने काम से बहुत संतुष्ट हूं.

आराध्या को दादाजी की कविताएं सुनाते हैं पापा : अभिषेक बच्चन

अभिषेक बच्चन जल्द ही आॅल इज वेल में खास भूमिका में नजर आयेंगे. अभिषेक का मानना है कि यह एक पारिवारिक फिल्म है. 

 अभिषेक, आॅल इज वेल किस तरह की फिल्म है. फिल्म पीकू की याद दिला रही है?
नहीं मुझे नहीं लगता कि किसी भी फिल्म किसी फिल्म से तुलना करना ठीक है. पीकू  की अपनी कहानी थी. इस फिल्म की अपनी कहानी है. ऐसे तो हर फिल्म प्रेम कहानी हो जायेगी. लेकिन ऐसा नहीं है. हां, मगर आॅल इज वेल भी एक पारिवारिक फिल्म है और इसे देखने के बाद हर बच्चे को यह जरूर महसूस होगा कि वे अपने पेरेंट्स से प्यार करें. हम में से कितने लोग हैं, जो हर दिन घर जाकर अपने माता पिता को देखते हैं कमरे में कि वह ठीक से सो रहे हैं या नहीं. वह ठीक हैं या नहीं. जो साथ नहीं रहते वे कितनी बार माता पिता को फोन करके बोलते हैं कि आइ लव यू. लेकिन वही माता पिता को देखिए. आज भी मैं जब कहीं बाहर डिनर पर जाता हूं. पापा कहते हैं मुझे देर से मत आना. वक्त पर आ जाना. ठीक से खाया या नहीं. मां को चिंता रहती हैं. इस फिल्म को करने के बाद एक दिन मैंने अचानक मां को फोन करके आइलव यू कहा मां ने पूछा भी कि अरे अचानक तूझे क्या हुआ. मैंने बस यही कहा कि कुछ नहीं यूं ही कह दिया. तो बस इन्हीं छोटी छोटी चीजों को दिखाने वाली है यह फिल्म.
आप अपने माता पिता से प्यार का इजहार किस तरह करते हैं?
माता पिता से प्यार का इजहार कर पाना बच्चे के लिए बहुत कठिन है. मुझे नहीं लगता कि कोई भी बच्चा यह पूरी तरह कर पाता होगा. हां, बस मैं यह मानता हूं और समझता हूं कि माता पिता ने जो मुझे मूल्य दिये जिंदगी के. उन्हें मैंने अपनी जिंदगी में शामिल किया तो यही खास बात है. मैं तो बहुत लकी रहा हूं कि मेरे माता पिता मेरे साथ रहे. उनके माता पिता उनके साथ रहते थे. आप सोच कर देखें मेरी बेटी आराध्या कितनी खुशनसीब है कि उसे अमिताभ बच्चन का सानिध्य मिल रहा है. आज भी पापा का मूड होता है तो वे आराध्या को दादाजी की कविताएं सुनाते हैं. जाहिर है, वह काफी छोटी है अभी. उसे कुछ समझ नहीं आता होगा. लेकिन उसके चेहरे पर जो मुस्कान होती है और पापा के चेहरे पर जो मुस्कान होती है वह आत्मसंतुष्टि देती है. न सिर्फ आराध्या बल्कि हम पूरे परिवार जब साथ बैठते हैं तो पापा दादाजी की कविताएं सुनाते हैं और उससे हम सभी को बहुत ताकत मिलती है तो यह सब क्यों संभव हो पा रहा चूंकि पापा मां साथ हैं. सो, अगर आप खुद को समृद्ध करना चाहते हैं तो बड़ों का साथ बेहद जरूरी है. उनका आशीर्वाद बहुत जरूरी है.
इस फिल्म में आप ऋषि कपूर के साथ हैं. ऋषि कपूर से आपका रिश्ता कैसा रहा है?
चिंटू अंकल के साथ मैंन ेपहले भी काम किया है. दिल्ली 6 में. मैं उन्हें जानता तो बचपन से हूं और मैं उनका बहुत बड़ा एडमायर हूं. उनकी फिल्में मुझे अच्छी लगती थी. उन्होंने पापा के साथ काफी फिल्में की हैं. सो, हम बचपन में भी उनके सेट पर जाया करते थे. एक बात जो आज भी चिंटू अंकल में नहीं बदली है. वह यह कि अगर चिंटू अंकल को कोई प्यारा लगता है तो वे उसकी जम कर तारीफ कर देते हैं. कुछ कमी दिखे तब भी वे बता देते हैं. काफी सीखने का मौका मिलता है. पापा और चिंटू अंकल की जोड़ी हमेशा पसंद की गयी है. उम्मीद है दर्शकों को हमारी जोड़ी भी अच्छी लगेगी. फिल्म में सुप्रिया जी भी हैं. उनके  साथ भी मैंने कई फिल्में की हैं. अच्छा लगता है ऐसे सीनियर के साथ काम करने में.
हाल ही में आपने इंडस्ट्री में अपने 15 साल पूरे किये. इस पूरे सफर को किस तरह देखते हैं आप?
मैं बहुत सकारात्मक आदमी हूं और हमेशा पोजिटिव ही रहता हूं. मुझे लगता है कि मुझे काफी कुछ मिला है. कई लोगों का प्यार मिला है. अच्छे निर्देशकों का साथ मिला है. अभी तक जो कुछ भी किया है, मेहनत से किया है. आगे भी मेहनत करूंगा.
हाल ही में आपने तुषार कपूर व अपने स्कूल की तसवीर शेयर की थी. अपने बचपन की यादों के बारे में कुछ बताएं?
जी हां, मैं और तुषार एक साथ एक ही स्कूल में पढ़ते थे. शाद अली की पत् नी हमारे साथ थीं और हम तब भी अच्छे दोस्त थे. अब भी हैं. बचपन में भी हम खूब मस्ती किया करते थे. बाद में मैं बाहर चला गया था पढ़ने. लेकिन बचपन की यादें साथ तो रह ही जाती हैं.
आपकी आनेवाली फिल्म
फिलहाल हाउसफुल 3 आयेगी. 

इनसेक्योर नहीं मैं


जॉन अब्राह्म जल्द ही वेलकम बैक में एक ऐसे अवतार में नजर आनेवाले हैं, कि लोग उन्हें देख कर चौंकेंगे. गंभीर फिल्मों का निर्माण और हास्य व मसाला फिल्मों में अभिनय करना उन्हें पसंद है.
अब भी मीडिल क्लास ही रहना पसंद है : जॉन अब्राह्म
जॉन,  आपने फिल्म शूटआउट एट वडाला में भी डॉन की भूमिका निभाई है. इस बार भी आप डॉन की भूमिका में हैं, तो कोई खास वजह डॉन की भूमिकाओं को दोहराने की?
दरअसल, मुझे लगता है कि मैंने जब जब ऐसे किरदार निभाये हैं. दर्शकों ने मुझे पसंद किया है. आप देखें कि मैंने जब भी कुछ स्ट्रेट किरदार निभाये हैं, जैसे झूठा ही सही, आइ मी और मैं जैसी फिल्में तो लोगों ने बिल्कुल पसंद नहीं किया है. सो, मैंने देखा है कि जब मैं अपने किरदार में थोड़ा नेगेटिव हेल्प लेता हूं तो वह दर्शकों को पसंद आ जाता है. यह जो डॉन है, इसका नाम अज्जू भाई है और यह काफी लवेबल है. गुंडा है. बदमाश है. लड़की से प्यार हो जाता है. लेकिन लड़की के भाई को मनाना होता है और इसके लिए वह नये नये हथकंडे अपनाता है.इसमें कॉमेडी आॅफ एरर है. मैं इस फिल्म से कोई ग्रेट फिल्म बनाने की कोशिश नहीं कर रहा हूं. मंै सिर्फ एंटरटेनमेंट की बात कर रहा हूं. मुझे फिल्म का कंटेंट काफी अच्छा लगा था. मैं हमेशा से क्लीयर था कि मुझे कॉमेडी करना है. मैं कॉमेडी का फैन हूं. मैं अनीस का फैन रहा हूं. उनकी फिल्में देखता रहा हूं. मेरे इसमें जो भी को स्टार हैं, उन सबके साथ मैं फिल्मों में पहले काम कर चुका हूं. सभी के साथ इक् वेशन अच्छा है, शूटिंग में इसलिए काफी मजा आया. नाना पाटेकर ने यह फिल्म देख ली है और उन्हें मेरा किरदार काफी पसंद आया है. अच्छा लगता है कि जब सीनियर कलाकार आपकी तारीफ करें तो. लोगों को हंसाना सबसे मुश्किल है. और मैं इसका क्रेडिट रोहित, अनीस, प्रियदर्शन को देना चाहता हूं और सबसे ज्यादा क्रेडिट मैं अक्षय को देता हूं. उनकी अच्छी कॉमेडी टाइमिंग है.
जॉन आप हमेशा यह बातें कहते हैं कि आप अब भी मीडिल क्लास जिंदगी जीते हैं. ऐसा कहने से आपका तात्पर्य क्या है?
जी हां, बिल्कुल. मैं एक बहुत सामान्य से परिवार से इस इंडस्ट्री का हिस्सा बना हूं.लेकिन मेरे पैर, मेरे मुल्य अब भी आम परिवार की तरह ही है. मैं पार्टियां ज्यादा नहीं करता. मैंने महंगी गाड़ी नहीं खरीद रखी है. मुझे याद है मुझे मारुति जिप्सी खरीदनी थी. उस वक्त उसकी कीमत 80 हजार थी. लेकिन मैं खरीद नहीं पाया था. लेकिन जब पैसे आये भी तो मैंने जिप्सी ही खरीदी और आज भी इसी से घूमता फिरता हूं. मेरे दोस्त कहते भी हैं कि क्या यार जॉन चेंज कर ले गाड़ी अनकंर्फेटेबल है. लेकिन फिर भी मुझे मेरी गाड़ी पसंद है. मैं अधिक शो नहीं कर सकता. दोस्तों में विश्वास करता हूं और जो मेरे अच्छे दोस्त बने हैं. वे मेरे इसी व्यवहार से दोस्त बने हैं कि मैं कभी पैसे को तवज्जो नहीं देता हूं.
कुछ दोस्तों के बारे में बताएं?
इंडस्ट्री में कई दोस्त हैं मेरे. अक्षय को मैं गुरुजी कह कर बुलाता हूं. मैं अक्षय से कभी भी काम के बारे में बात नहीं करते हैं. हर रिलीज से पहले मैं अक्षय से बात करता हूं कि मैं कुछ करूं...आपके लिए कुछ करूं. तो वह मुझे बेहद प्यार करते हैं. रोहित धवन मेरे काफी करीबी मित्र हैं. वह मुझसे छोटा है. लेकिन हम दोनों की काफी जमती है.  अभिषेक अच्छा दोस्त हैं. लेकिन कुछ ऐसे दोस्त हैं, जो स्कूल व कॉलेज के दिनों के दोस्त हैं और आज भी सभी मेरे बेहद करीब है. वे जानते हैं कि जॉन न कभी बदला है और न कभी बदलेगा. मुझे याद है कि यह खबर काफी चर्चा में थी कि वेलकम बैक मैं कर रहा हूं और अक्षय को मैंने रिप्लेस किया है तो अक्षय मुझसे नाराज हैं, जबकि हकीकत यह है कि उन्होंने तो फोन करके मुझे कहा कि यारा कर ले तू ये फिल्म. बड़ा मजा आयेगा. अक्षय ने कहा कि इस फिल्म से मुझे फैमिली आॅडियंस मिलेगा. तुझे करना चाहिए. मैं आऊंगा देखने. उन्होंने तो मुझे काफी टिप्स भी दिये. सो, कई बार खबरें आती हैं. लेकिन जो मेरे इंडस्ट्री में दोस्त बने. वे हमेशा मेरे साथ रहे हैं और आगे भी रहेंगे.
आप अपनी फिल्मों से रिस्क लेते आये हैं. एक तरफ आप कमर्शियल फिल्में करते हैं और दूसरी तरफ कंटेंट वाली फिल्में करते हैं.
आदित्य  चोपड़ा ने मुझे यह बात कही थी कि जॉन तुम्हारी सबसे खास बात मुझे यह लगती है कि तुम पूरी तरह से कमर्शियल मार्केट में नहीं जा रहे.तुमने वॉटर किया,काबूल एक्सप्रेस, नो स्मोकिंग और तुम्हारी जो आॅडियंस बेस बनी है वह इन फिल्मों की वजह से बनी है. इन फिल्मों से तुमने अपनी एक पहचान बना ली है.और यह काम शायद ही एक लोकप्रिय अभिनेता करता है. तुमने किया है और यही वजह है कि तुम अच्छा काम करोगे और लंबे समय तक टिकोगे. इसलिए मैं ब्रेक लेता हूं क्योंकि मुझे लगता है कि अगर घर में हर दिन मेहमान आये तो आप चाहेंगे कि वह जल्द से जल्द जाये. लेकिन जो कम आते हैं. उनका मान सम्मान बना रहता है और इसलिए मैं भी इन्हीं बातों को फॉलो करता हूं. मैं खुश हूं कि फिर भी मेरी फैन फॉलोइंग में कोई कमी नहीं आयी है.
आपकी आनेवाली फिल्में?
डिशूम कर रहा हूं. फूटबॉल पर एक फिल्म लेकर आ रहा हूं. और भी कई फिल्में लाइन अप हैं. जल्द ही घोषणा करूंगा.

किरदार को उम्र की सीमा में नहीं बांधती मैं : तब्बू


हैदर के बाद एक बार फिर से तब्बू दृश्यम में एक नये अवतार में हैं. इस बार भी वे अपने किरदार से दर्शकों को चौंकानेवाली हैं.
आप हमेशा अलग तरह की फिल्मों का चुनाव करती रही हैं. दृश्यम में ऐसी क्या खास बातें थीं जो आप फिल्म का हिस्सा बनीं?
हां, मेरे लिए स्क्रिप्ट हमेशा सबसे अहम महत्व रखता है. दृश्यम देख कर आपलोग भी चौकेंगे. अजय की भी यह अलग तरह की फिल्मों में से एक है. इस फिल्म में मैं एक पुलिस आॅफिसर की भूमिका में हूं. मैंने इससे पहले एक तमिल फिल्म में पुलिस आॅफिसर की भूमिका निभाई है. इस फिल्म में मैं एक कड़ी पुलिस आॅफिसर की भूमिका में हूं, जिसे शर्म करना बिल्कुल पसंद नहीं है और वह इमोशनल को बिल्कुल नहीं हैं.
अजय के साथ आप लंबे समय के बाद काम कर रही हैं. उनके साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा?
अजय मेरे करीबी दोस्तों में से एक है. बचपन का दोस्त है. और इसलिए मैं उसे अच्छे तरीके से जानती हूं. इन 15 सालों में भी वह बिल्कुल नहीं बदला है. उस पर स्टारडम हावी नहीं है. आम इंसान ही लगता है वह और उसकी मस्ती करने की आदत, किसी की टांग खिंचाई करने की आदत भी अब भी वैसी है. हमने विजयपथ में साथ काम किया था. वह मेरे करियर के शुरुआती दिनों की फिल्म थी और इसलिए अजय उस लिहाज से भी मेरे लिए हमेशा खास ही महत्व रखेंगे. अजय की फिल्में देखती हूं. मजा आता है मुझे. लेकिन मुझे लगता है कि अजय को दृश्यम जैसी फिल्में अधिक करनी चाहिए. वह काफी अच्छे अभिनेता हैं. बस निर्देशक को यह बात समझ आ जाये कि उनकी खूबी क्या है तो वह अजय के अभिनय से काफी कुछ निकाल सकते हैं.
निशिकांत कामत के साथ भी आपकी यह पहली फिल्म है?
हां, निशिकांत बेहतरीन निर्देशक हैं और उससे भी बड़ी बात यह है कि वह काफी अच्छे इंसान हैं. मैं उनसे सिर्फ फिल्मों के बारे में नहीं और भी कई बातें शेयर करती हूं. उन्हें ट्रैवलिंग पसंद है और मुझे भी तो हमारे पास कई विषय रहते थे बातचीत के. खास बात यह है कि मैं जिस तरह के लोगों को पसंद करती हूं जो कि ज्यादा फेक न हों. जो रियल हों तो निशिकांत उनमें से एक हैं.
पिछले दिनों आपने रेखा की जगह फितूर में ली तो आपके और रेखा के बीच की दरार की खबरें काफी आ रही थीं?
मेरे और रेखा जी का रिश्ता किसी फिल्म से बढ़ कर है. मैं रेखाजी को तबसे जानती हूं जब मैं फिल्मों में आयी भी नहीं थी. रेखाजी और मेरी बहन फराह काफी करीबी हैं. और मेरी मां की आज भी पसंदीदा अभिनेत्री में से रेखा हैं. वे आज भी हमारे घर पर आती हैं. और हम में काफी बातचीत होती है. रेखा जी को मैं एडमायर करती हूं. उनके अभिनय से मैंने सीखा है. फिर इस तरह की खबरें आती हैं तो दुख होता है. फिल्म जिंदगी नहीं है. फिल्म रिश्ता बनाता बिगाड़ता नहीं है. कम से कम हमारे बीच ऐसा कुछ भी नहीं हैं. फितूर में मैं जो किरदार निभा रही हूं. वह एक किरदार है. वह मेरी वास्तविक जिंदगी पर कभी हावी नहीं होगा. रेखाजी आदरणीय हैं और रहेंगी. जहां तक बात है फिल्म की तो अभिषेक मेरे दोस्त हैं और हम एक दूसरे को काफी दिनों से जानते हैं. अगर मैं दोस्त की फिल्म में काम करूं तो और मजा आता है. वह आपकी क्षमता से वाकिफ होते हैं क्योंक़ि. मैंने अभी कुछ दृश्य ही शूट किये हैं और मैं काफी एंजॉय कर रही हूं.
आपने हैदर में शाहिद की मां का किरदार निभाया, क्या आप अभिनेताओं की मां के किरदार निभाने में सहज हैं?
मैंने कभी भी किसी किरदार को उम्र के नजरिये से नहीं देखा है. ऐसा नहीं है कि मैं टिपिकल मां बन जाऊंगी किसी भी स्टार की. हैदर में मां के किरदार करने की क्या वजह थी. यह आपने फिल्म देखी होगी तो यह बात समझ आयी होगी. उस फिल्म में एक मां और उसके बेटे की कहानी किस तरह से दर्शाया गया है. एक मां को फिल्मी परदे पर जिस तरह से विशाल ने दर्शाया है. ऐसी मां शायद कम दिखाई दी है फिल्मों में. सो, ऐसा नहीं है कि बस मां के किरदार यों ही कर लूंगी. हां, मगर अगर कोई दमदार किरदार मिले, जिसमें मुझे मां बनना है तो मुझे वह करने में कोई शर्म नहीं है.
आपने अब तक जो भी किरदार निभाये हैं. आप मानती हैं कि उन किरदारों में कहीं न कहीं वास्तविक तब्बू हैं?
हां बिल्कुल मैं अपने किरदारों के माध्यम से महसूस करती हूं कि मैं जो किरदार निभा रही हूं. अगर मैं वाकई वही होती तो. वाकई में मेरी जिंदगी में वे चीजें होती तो. मैं उस किरदार की तरह ही वास्तविकता में जिंदगी जी रही होती तो. ये सब बातें तो किरदार निभाते वक्त आती ही हैं. और शायद यही वजह है कि मैं अपने किरदारों के साथ न्याय कर पाती हूं.

50 की हो जाऊंगी फिर भी एक्टिंग ही करूंगी : करीना कपूर

करीना कपूर सलमान खान के साथ एक बार फिर फिल्म बजरंगी भाईजान में नजर आयेंगी. करीना अब फिल्मों को स्वीकारने से पहले सचेत हो गयी हैं. 
एक बार फिर आप और सलमान साथ आ रहे हैं, फिल्म को लेकर प्रशंसकों में काफी उत्सुकता है?
हां, मेरी और सलमान की जोड़ी लोगों को पसंद आती है. ऐसा मैं मानती हूं. बॉडीगार्ड के बाद हम फिर से साथ आ रहे हैं. हालांकि मैं सोशल साइट्स पर नहीं हूं, लेकिन मुझे लगातार जानकारी मिल रही है कि लोग किस तरह फिल्म को लेकर उत्सुक हैं.
फिल्म के शीर्षक को लेकर काफी विवाद हो चुके हैं?
लोग बेवजह बातों को तूल दे रहे हैं. लोगों को लग रहा है कि यह हिंदू लड़के या मुसलिम लड़की की प्रेम कहानी है. जबकि हकीकत यह है कि ऐसा कुछ भी नहीं है. यह एक सफर की कहानी है. एक बच्ची है उसे किस तरह उसके देश पहुंचाया जा रहा है. यह वह कहानी है. यह मासूमियत की कहानी है. इंसानियत की कहानी है. इस फिल्म का धर्म से कोई लेना देना नहीं है. फिल्म बिल्कुल सही वक्त पर आ रही है और यह फिल्म एक अच्छा मेसेज भी देगी.ऐसे मेरा मानना है.
धर्म को लेकर हाल ही में एक पत्रिका ने आपकी भड़काऊ तसवीर प्रकाशित की थी. उस वक्त हिंदू मुसलिम प्रेम विवाह को लेकर काफी विवाद हुए? आपकी क्या प्रतिक्रिया है?
मेरा मानना है कि हम धर्म निरपेक्ष देश में हैं. इस तरह की भड़काऊ तसवीरें प्रकाशित कर उन्होंने अपनी मानसिकता का प्रमाण दिया है. मेरे फैन्स मुझे जानते हैं और वह मुझे अब भी प्यार करते हैं. उनके प्यार में तो कोई कमी नहीं आयी है. फिर मैं दुखी क्यों हो जाऊं. साथ ही मैं ऐसी खबरों के खंडन के लिए कभी सामने नहीं आऊंगी. मैं अगर हर बात का स्पष्टीकरण देने लगूं तो मुझे लगता है कि लोगों को लगेगा कि मुझ पर इन बातों का असर हो रहा है और वह मैं नहीं चाहती. मैं यहां काम करने आयी हूं. एक्टिंग करना अच्छा लगता है और वही करूंगी.
आप लगातार नये निर्देशकों के साथ काम कर रही हैं? किसी खास कारणवश यह निर्णय लिया है?
हां, मुझे लगता है कि मैंने अब इंडस्ट्री में काफी वक्त बीता लिया है. यही सही वक्त है, जब मैं कुछ नया ट्राइ करूं. अब नहीं तो कब करूंगी. ऐसा नहीं है कि मैंने सोच रखा है कि मैं अब जिन निर्देशकों के साथ काम कर चुकी हूं. उनकी फिल्में नहीं करूंगी. लेकिन मैं नये लोगों के साथ अधिक काम करना चाहती हूं.इसलिए मैं अभिषेक चौबे की फिल्म उड़ता पंजाब कर रही हूं, राजकुमार गुप्ता की फिल्म कर रही हूं, आर बाल्की के साथ कभी काम नहीं किया है. उनके साथ कर रही हूं. मुझे मजा आ रहा है अब. उड़ता पंजाब एक ड्रग ड्रामा है और आप देखेंगे कि अभिषेक ने मुझे किस तरह उसमें बिल्कुल अलग अवतार दिया है. उस फिल्म को लेकर काफी उत्साहित हूं.
काम के साथ साथ व्यक्तिगत जिंदगी में किस तरह सामंजस्य बिठा रही हैं?
सैफ बहुत सर्पोटिव है. इसलिए कुछ खास परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता. हालांकि हम अपनी फिल्मों को लेकर अधिक बातें नहीं करते. लेकिन वे मेरे काम का सम्मान करते हैं. वह कहते हैं कि उन्हें इस बात का गर्व है कि मैं एक्ट्रेस हूं. उनकी मां शर्मिला जी ने परिवार के साथ साथ अपना करियर आगे बढ़ाया. उन्हें कभी रोका नहीं गया. तो मुझे भी आजादी है. मुझे अभिनय करना सबसे ज्यादा पसंद है और मैं जिंदगी भर यही करूंगी. मुझसे कुछ भी नहीं होगा. आप मुझे 50 साल वाली करीना के रूप में भी एक्टिंग करते ही देखेंगे.
कश्मीर में शूटिंग का कैसा अनुभव रहा?
काफी मजेदार रहा. मैं पहले भी रणबीर के साथ बहुत छोटे में वहां गयी थी. वहां चिंटू अंकल की फिल्म की शूटिंग हो रही थी. वहां हमने बहुत मस्ती की थी. शूटिंग इस बार पहली बार किया. वहां हमारे बहुत फैन हैं. वे हमारी सारी फिल्में देखते हैं. उन्हें मेरी फिल्मों के किरदार के नाम भी याद थे. मैंने वहां का खाना, वहां की सभ्यता बहुत एंजॉय किया. और वाकई में जन्नत कहीं हैं तो वह वही हैं. यादगार रहेगी इस फिल्म की शूटिंग़.

दोस्त हैं न...

 आमतौर पर यह अवधारणा है कि दो अभिनेत्रियां अच्छी दोस्त हरगिज नहीं हो सकती हैं. लेकिन इन दिनों कुछ अभिनेत्रियां ऐसी भी हैं, जो आपस में काफी गहरी दोस्त हैं. और उन्हें इन्हें इस बात की फिक्र नहीं कि मीडिया उनके बारे में क्या कहती है.

 इन दिनों अभिनेत्रियां भी दोस्ती के मायने बदल रही हैं और अभिनेताओं की तरह वे भी दोस्ती के रिश्ते को अहमियत दे रही हैं. ये अभिनेत्रियां एक दूसरे की न सिर्फ तारीफ करती हैं, बल्कि जरूरत पड़ने पर एक दूसरे का साथ भी दे रही हैं.

 प्रियंका चोपड़ा- दीपिका, कंगना, अनुष्का
दीपिका पादुकोण और प्रियंका चोपड़ा इन दिनों काफी गहरी दोस्त बन चुकी हैं. उनकी दोस्ती लंबे समय से चली आ रही है. प्रियंका ने दीपिका के साथ अब तक किसी फिल्म में काम नहीं किया था. फिर भी दोनों में अच्छा रिश्ता बना. दोनों साथ साथ करन जौहर के शो का हिस्सा भी बनी थीं. शायद यही वजह रही कि जब दीपिका और प्रियंका को संजय लीला भंसाली की फिल्म बाजीराव मस्तानी में साथ काम करने का मौका मिला तो उन्होंने तुरंत हां कह दिया. खास बात यह है कि इस फिल्म के सेट पर कभी भी दोनों में झगड़ा नहीं हुआ, बल्कि प्रियंका ने हाल ही मेंअमेरिका से जब अपने लिए डांसिंग गियर मंगाया तो उन्होंने दीपिका के लिए भी मंगाया. और दोनों हमेशा एक दूसरे की तारीफ करती हैं.प्रियंका की दोस्ती केवल दीपिका तक ही सीमित नहीं हैं. वे और कंगना भी काफी अच्छी दोस्त हैं. कंगना हमेशा स्वीकारती हैं कि प्रियंका और कंगना फैशन फिल्म के दौरान मिलीं और उस वक्त से दोनों में अच्छी दोस्ती है. मीडिया में भले ही दोनों के अनबन की खबरें आयीं. लेकिन दोनों के रिश्ते में कभी कोई दूरी नहीं आयी. कंगना मानती हैं कि शुुरुआती दौर में प्रियंका और वे करीब इसलिए आये, क्योंकि दोनों आउटसाइडर थे और एक दूसरे की परेशानी को समझने लगे थे. प्रियंका की दोस्तों की श्रेणी में हाल ही में अनुष्का भी शामिल हुई हैं. चूंकि अनुष्का प्रियंका ने साथ साथ दिल धड़कने दो में काम किया और गहरी दोस्त बन गयीं.
कट्रीना-अनुष्का, करीना
कट्रीना कैफ की दोस्ती फिल्म इंडस्ट्री में निर्देशकों से अधिक है.कबीर खान, अली अब्बास जफर उनके खास दोस्तों में से एक हैं. लेकिन अभिनेत्रियों में उनकी अच्छी दोस्ती अनुष्का से भी है. अनुष्का और कैट ने साथ साथ फिल्म जब तक हैं जान में काम किया था और उस वक्त से दोनों एक दूसरे को काफी प्यार करती हैं. दोनों बीबीएम फ्रेंड हैं और एक दूसरे से काफी बातचीत करती हैं. कट्रीना की इन दिनों नयी दोस्त बनी हैं करीना. करीना कट्रीना की और कट्रीना करीना की तारीफ करते नहीं थकती. दोनों में दोस्ती की वजह करीना के भाई रणबीर बने. लेकिन करीना को कट्रीना की सादगी पसंद है और कट्रीना को करीना की यह बात खास तौर से पसंद है कि वह स्टारडम को हावी नहीं रखतीं और इस वजह से दोनों के रिश्ते आपस में बेहद खास हो गये हैं.
जैकलीन-सोनम, श्रद्धा 
जैकलीन ने भी फिल्म इंडस्ट्री में अच्छे दोस्त बना लिये हैं. जैकलीन को सोनम कपूर काफी पसंद हैं और दोनों काफी गहरी मित्र हैं और आये दिन दोनों साथ साथ डिनर पर जाती हैं. पब्लिक अपीयरेंस में भी अगर दोनों साथ दिखीं तो हंसते हुए एक दूसरे के साथ तसवीरें खींचवाती हैं और काफी खुश होती हैं. जैकलीन की सोनम के अलावा श्रद्धा कपूर से भी काफी अच्छी दोस्ती है. एक दौर में श्रद्धा व जैकलीन जब दोनों का ही करियर ढलान पर था. उस वक्त जैकलीन और श्रद्धा करीब आये. दोनों साथ साथ डांस क्लास किया करते थे.वर्तमान दौर में भी दोनों एक दूसरे की तारीफ करते रहते हैं.
परिणीति-आलिया
परिणीति चोपड़ा और आलिया भट्ट के बारे में हमेशा यह खबरें आयीं कि दोनों एक दूसरे की प्रतिद्वंदी हैं. लेकिन दोनों ने हमेशा ऐसी खबरों को झूठा करार दिया और हकीकत भी यही है कि परिणीति चोपड़ा और आलिया अच्छी दोस्त हैं, बल्कि आलिया भट्ट ही परिणीति को फैशन टिप्स देती रहती हैं. और इस बात से परिणीति बेहद खुश भी रहती हैं.
प्रीति-ऐश
प्रीति जिंटा और ऐश्वर्य राय भी काफी अच्छे दोस्त रहे हैं. हाल ही में उनसे जब किसी पत्रकार ने पूछा कि उन्हें ऐश की फिल्म का टीजर कैसा लगा तो उन्होंने कहा कि ऐश बेहद सुंदर और अच्छी अभिनेत्री हैं. और शादी के बाद वे और अधिक निखर गयी हैं. गौरतलब है कि किसी दौर में प्रीति और रानी की भी गहरी दोस्ती थी.
वहीदा की टीम
वहीदा रहमान, हेलेन, आशा पारेख भी काफी करीबी दोस्त हैं और दोनों कई मौकों पर मिलती हैं और एक दूसरे से प्यार साझा करती हैं. 

अब्बास मस्तान के साथ काम करने का था सपना : वरुण शर्मा


वरुण शर्मा इस बात से बेहद खुश हैं कि उन्हें लगातार अच्छी फिल्मों के आॅफर मिल रहे हैं. उनके लिए अब्बास मस्तान की फिल्म में काम करना किसी सपने को पूरा होने जैसा रहा. फिल्म किस किस को प्यार करूं में वे अहम किरदार में हैं. 

वरुण आपको लगातार अच्छी फिल्में मिल रही हैं. आप अपने अब तक के सफर को कैसे देखते हैं?
मैं तो बहुत खुश हूं. मुझे एक्टिंग करने का तो शौक हमेशा से रहा था. स्कूल के दिनों में मैं स्टेज पर पेड़ बन कर भी नाटक का हिस्सा बनता था. लेकिन हिस्सा जरूर लेता था. मेरे स्कूल में एक बार संजय दत्त आये थे. और मैं पेड़ बना हुआ था. तो मैं सिर्फ उन्हें ही देख रहा था कि वे कैसे बात करते हैं. क्या कहते हैं क्या नहीं. उन्हें पूरी तरह से फॉलो कर रहा था. उस वक्त से ही मुझमें ये कीड़ा आ गया था तो मैं तो खुश हूं कि मुझे अब उस इंडस्ट्री का हिस्सा बनने का मौका मिला है, जहां संजय सर काम करते हैं.
आप अपने संघर्ष के दिनों को किस तरह देखते हैं.
मुझे लगता है कि हर कोई संघर्ष और मेहनत से ही इस इंडस्ट्री का हिस्सा बनता है. मुझे भी शुरुआत में मेहनत करनी पड़ी. सभी करते हैं. मैंने मुंबई आने के बाद सबसे पहले  शुरुआत कास्टिंग डायरेक्टर के रूप में की थी. मुझे लगा था कि फिल्मों में जाने से पहले मुझे थोड़ी जानकारी होनी ही चाहिए. कास्टिंग करने से यह हुआ कि मैं आॅडिशन लेते हुए देते हुए देखता था तो काफी कुछ समझ आने लगा था मुझे और फिर धीरे धीरे मैंने फिल्मों की तरफ रुख किया.
अब्बास मस्तान के साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा?
मैं शुरू से ही फिल्में बहुत देखता था. हिंदी फिल्में तो खासतौर से. मैंने अब्बास मस्तान की सारी फिल्में देखी हैं. खासतौर से मुझे बाजीगर बहुत पसंद थी. फिल्म के गाने ये काली काली आंखें पर मैं बहुत डांस करता था. फिर जब मुझे मौका मिला कि मैं उनके साथ काम करूं तो मेरे लिए तो सपने को साकार करने जैसा था. मैंने अब्बास मस्तान सर को यह बात बताई भी है. वे काफी खुश हो गये थे. उन्होंने मुझे इस फिल्म में फिल्म फुकरे देख कर लिया था. उन्हें मेरा किरदार बहुत पसंद आया था.
आपने अब तक सारी फिल्मों में कॉमेडी किरदार ही निभाया है, क्या आप सिर्फ कॉमेडी फिल्में ही करना चाहते हैं?
नहीं ऐसा बिल्कुल नहीं है. अभी तो मेरी बस शुरुआत है. मैं चाहता हूं कि नेगेटिव किरदार भी निभाऊं. गंभीर किरदार भी निभाऊं. लेकिन अब तक मुझे वैसे रोल आॅफर नहीं हुए हैं. उम्मीद है कि आनेवाले समय में मुझे अलग तरह के किरदार भी आॅफर हों. हालांकि कॉमेडी करना मुझे सबसे कठिन जॉनर लगता है, क्योंकि आपकी कॉमिक टाइमिंग पर कब लोग हंसेंगे. कब नहीं. यह तय कर पाना बहुत कठिन हो जाता है. तो मेरे लिए भी वह मुश्किल होता है.लेकिन जब दर्शकों से सुनता हूं कि उन्हें मेरा किरदार पसंद आया है तो मुझे बहुत खुशी मिलती है.
आप शाहरुख के साथ दिलवाले भी कर रहे हैं, कैसा है अनुभव?
अभी तक शाहरुख सर के साथ फिल्म में शूटिंग नहीं की है. लेकिन जल्द ही करूंगा. उनके साथ एक एड फिल्म शूट की है और उनको मैंने बताया कि मैं आपकी फिल्में देख कर ही एक्टिंग में आया हूं. उन्होंने बहुत प्यार से बात की मेरे से. और कहा कि दिलवाले में अच्छे से काम करो. मैं मिलता हूं तुम्हें वहां. शाहरुख सर का यह जेश्चर मुझे बहुत अच्छा लगा. मैं बेहद खुश हूं कि मुझे उनके साथ काम करने का मौका मिल रहा है.
बॉलीवुड में दोस्त बना पाये हैं?
जी बिल्कुल पुलकित से मेरी बहुत अच्छी बनती है. ऋचा से मेरी बहुत अच्छी दोस्ती है. फुकरे के सारे को स्टार आज भी दोस्त हैं. मैं खुशनसीब हूं कि मुझे अच्छे लोगों का साथ मिला. मुझे तो लगता है कि लोग इस इंडस्ट्री के बारे में बेकार यह सोच कर बैठते हैं कि यहां अच्छे दोस्त नहीं बन सकते. मुझे तो लगता है कि यह आपके व्यवहार पर निर्भर करता है. अगर आप अच्छे हैं तो आपको अच्छे लोगों का साथ मिल ही जाता है.
आपकी आनेवाली फिल्म कौन सी है?
मैं अभी यारा द केचअप कर रहा हूं और दिलवाले की शूटिंग शुरू करूंगा और भी कई फिल्में लाइन अप हो रही हैं.

बाहुबली में प्रभास के आवाज की डबिंग मैंने की है : शरद केलकर

शरद केलकर टेलीविजन के साथ साथ फिल्मों में भी अपनी पहचान स्थापित करने में कामयाब हो चुके हैं. फिलवक्त वे एंड टीवी के धारावाहिक एजेंट राघव में नजर आ रहे हैं. 

खुश हूं कि लगातार अच्छे मौके मिल रहे हैं
मैं बिल्कुल संतुष्ट हूं कि मुझे लगातार अच्छे मौके मिल रहे हैं. फिर चाहे वह फिल्मों में हो या धारावाहिकों में. मैं अपने काम को लेकर ज्यादा फिक्र नहीं करता. मैं बहुत टेंशन नहीं लेता. जो सोचता हूं वह करता हूं और अच्छे काम करने की कोशिश करता हूं. एक सा काम करके मैं बोर हो जाता हूं तो कोशिश होती है कि हमेशा नये तरीके के काम करता रहूं. फिल्मों में काम करने के बारे में कभी सोचा नहीं था. लेकिन मुझे लगातार अच्छे मौके मिल रहे हैं. फिर चाहे वह रामलीला फिल्म हो या फिर हीरो या फिर लय भारी. लय भारी से काफी सफलता मिली है. लोगों ने उस फिल्म से मुझे काफी नोटिस करना शुरू किया है. तो अच्छा फेज चल रहा है मेरे करियर का.
हिंदी भाषा पर है पकड़
यहां जब मैं किसी से हिंदी में बातचीत करता हूं और शुद्ध हिंदी में बात करता हूं तो लोग चौंकते हैं कि मैं एक्टर होने के बावजूद अच्छी भाषा में बात कैसे कर लेता हूं. तो इसकी वजह यह है कि मैं मध्य प्रदेश से  हूं. ग्वालियर से हूं और हिंदी भाषी हूं. हिंदी भाषा पर मेरी अच्छी पकड़ है. और इस वजह से मेरे उच्चारण भी दुरुस्त है.
आवाज को मिली नयी पहचान
मुझे याद है, पहले लोग मेरी आवाज को कहते थे कि बाप रे कितनी भारी आवाज है. मेरे घर फोन आया और अगर मैंने फोन उठा लिया तो सामने वाले मेरी भारी आवाज को सुनते तो कहते कि अरे जरा अपनी बेटी से बातचीत करा दीजिए. जबकि उन्हें मेरी बहन से बातचीत करनी होती थी. और उसी आवाज की जब आज लोग तारीफ करते हैं तो मुझे काफी खुशी मिलती है. आपको सुन कर आश्चर्य होगा लेकिन यह हकीकत है कि फिल्म बाहुबली में प्रभास, जिन्होंने लीड किरदार निभाया है. उनकी डबिंग मैंने ही की है हिंदी भाषा में. राजमौली ने पहले किसी और से डबिंग करायी थी. लेकिन उन्हें आवाज पसंद नहीं आयी थी तो फिर उन्होंने मेरी आवाज सुनी और उन्हें काफी पसंद आयी. फिल्म को कामयाबी मिली है और लोगों को मेरी आवाज पसंद आयी है. मैं एक्टिंग के साथ साथ इसलिए डबिंग भी करता रहता हूं. इससे मेरी आवाज की प्रैक्टिस तो होती ही है. साथ ही साथ एक अलग जोन में काम करने का मौका भी मिलता है.
गोपीनाथ मुंडे की बायोपिक
मैंने कभी सोचा नहीं था कि मुझे कभी किसी बायोपिक फिल्म के भी आॅफर मिल सकते हैं. लेकिन मुझे मराठी फिल्म के निर्देशक ने जब गोपीनाथ मुंडे की बायोपिक फिल्म का आॅफर दिया तो मैं चौंका और मैंने उनसे पूछा भी कि क्या आपको लगता है कि मैं कर पाऊंगा. उन्होंने विश्वास जताया तो मैंने गोपीनाथ के वेश में अपनी फोयोग्राफी करायी. और फिर इंडस्ट्री में लोगों को दिखाया तो लोगों ने कहा कि ये तो गोपीनाथ मुंडे की तसवीर है. तुम क्यों लेकर घूम रहे हो. तब मुझे लगा कि अगर लोग अभी तसवीरों में नहीं पहचान पा रहे हैं तो शायद वाकई मैं कर पाऊंगा. तो उस पर काम जारी है.
बेटी से ही बहुत लगाव
मैं अपनी बेटी से बहुत करीब हूं. बल्कि मैं अपनी जिंदगी में तीन औरतों को काफी महत्व देता हूं. अपनी पत् नी, मां और बेटी को. तीनों से ही मुझे बेहद प्यार है. इन दिनों बेटी को ज्यादा प्यार दे रहा हूं. उसके साथ वक्त बिताने का समय कम मिलता है. तो लगता है कि पता नहीं मैं अच्छा पापा हूं कि नहीं. इन दिनों मैं उसे सेट पर ही बुला लेता हूं और फिर उसके साथ वक्त बिताता हूं. तो अच्छा लगता है.
एजेंट राघव वाले गुण
यह हकीकत है कि मुझ में भी एजेंट राघव वाले कई गुण हैं, जैसे मुझे लोगों के चेहरे बहुत याद रहते हैं. अगर मैं दो बार किसी से मिल लूं तो समझ जाता हूं कि सामने वाला व्यक्ति अच्छा है या नहीं. मुझे भविष्यवाणी हो जाती है. व्यक्ति को देख कर उसके बारे में अनुमान लगा लेता हूं कि वह किस तरह का आदमी है और मुझसे क्यों जुड़ना चाहता है. मेरी मेमोरी भी बहुत शार्प है. फोटोग्राफी मेमोरी है. दिमाग में बातें और चेहरे दर्ज हो जाते हैं. इस गुण के कारण मेरी जिंदगी में जो भी मेरे दोस्त बने हैं. वे अच्छे दोस्त बने हैं. बुरे लोगों को आस पास भटकने भी नहीं देता.
मेरे स्वभाव के बारे में गलतफहमी
कई लोगों को मेरे स्वभाव के बारे में गलतफहमी है कि मैं वास्तविक जिंदगी में काफी गंभीर रहनेवाले लोगों में से हूं. हकीकत तो यह है कि मैं बहुत बातुनी हूं. अपने दोस्तों में सबसे ज्यादा बातें मैं करता हूं. काफी मस्ती करता हूं. मैं गंभीर बिल्कुल नहीं हूं. जिंदगी को एंजॉय करके जीता हूं. और जिंदादिली से जीता हूं.

औकाद से बड़ी फिल्में कर रहा हूं : नवाजुद्दीन सिद्दिकी

 नवाजुद्दीन सिद्दिकी फिल्म मांझी द माउटेन मैन में दशरथ मांझी की भूमिका में हैं और वे इसे अपने करियर की कठिन फिल्मों में से एक मानते हैं. 
 मेरे करियर की कठिन फिल्मों में से एक
हां, मैं मानता हूं कि यह मेरे करियर की कठिन फिल्मों में से एक है. चूंकि इस फिल्म की कहानी ने मुझे झकझोर कर रख दिया. मैंने इस फिल्म को सिर्फ एक लाइन की वजह से साइन कर दिया था. केतन सर ने मुझसे कहा कि एक ऐसा व्यक्ति है, जिसने अपनी पत् नी के प्रेम में पहाड़ को तोड़ कर रास्ता बनाया. मुझे लगा कि क्या ऐसा प्रेम करने वाला व्यक्ति वाकई इस दुनिया में पैदा भी हुआ होगा.  मुझे लगता है कि वर्ल्ड का कोई भी एक्टर सिर्फ इस लाइन पर ही यह फिल्म करने को तैयार हो जाता कि किसी ने प्रेम के लिए वाकई में पहाड़ तोड़ दिया. वरना, लोग तो सिर्फ कहानी कविताओं में जीने मरने की कसमें खाते रहते हैं.मैं वास्तविक जिंदगी में खुद इतना प्यार नहीं कर सकता किसी से.लेकिन जब दशरथ जी को नजदीक से जाना तो महसूस किया कि ऐसी कहानी को परदे पर कहना कितना जरूरी है. मैं खुश हूं कि मुझे यह किरदार मिला है. इस फिल्म के किरदार के पास एक मैडनेस है. आज के डेट में प्यार व्यार नहीं होता, और वहां कोई ऐसा व्यक्ति है तो वह बहुत इंस्पायर किया है.
शूटिंग गहलौर में ही हुई
इस फिल्म की शूटिंग उसी जगह पर हुई है, जहां वह पहाड़ तोड़ कर रास्ता बना है. हमलोग जब वहां गये. हमने पहाड़ देखा तो उस पहाड़ को देख कर ही एक अलग सा जोश आ जाता था. मैं शूटिंग के पहले अपने फिल्म के गेटअप में आकर उस पहाड़ के बीच में खड़ा हो जाता था.और मेरा विश्वास किजिंग मेरे रोंगटे खड़े हो जाते थे. आप सोचें कि कोई आदमी सिर्फ हथोड़े से  उसने जो पूरा पहाड़ तोड़ दिया. वह पहाड़ इतना बड़ा है कि आप इमेजिन ही नहीं कर सकते.उनके काम को देख कर रोंगटे खड़े हो जाते थे मेरे. मांझी के किरदार को निभाने के लिए मैंने तैयारी यही की कि मैंने वहां के लोगों से पूछा कि मांझी किस तरह के व्यक्ति थे. तो लोगों से पता चला था कि वह काफी ह्मुमरस थे. रोमांटिक थे.पतले दुबले छोटे से थे. लेकिन लोगों को काफी एंटरटेन करते थे.तो लोगों ने काफी मदद किया.
खुद की तूलना फिल्म से
यह हकीकत है कि जिस तरह मांझीजी ने कई सालों में पहाड़ तोड़ कर रास्ता बनाया और उन्होंने अपनी मेहनत और जुनून को जाने नहीं दिया. ठीक वैसे ही मुझे इस इंडस्ट्री में निखरते निखरते, चमकते चमकते काफी वक्त लगा. इसलिए मैं भी मानता हूं कि मेरा संघर्ष वैसा ही संघर्ष रहा है. हां, मगर मैं यह तूलना नहीं कर सकता कि जिस तरह मांझी जी ने इतना बड़ा कार्य किया अपनी प्रेम की खातिर. लेकिन  उनका कार्य जन कल्याण के लिए काम आया. मैं शायद उतना महना नहीं हो सकता. मुझे यह जरूर लगता है कि आप जब भी कोई कैरेक्टर करते हैं तो आप अपनी रियल लाइफ से कहीं न कहीं से उससे रिलेट जरूर करते हैं. 15 सालों में मैंने भी एक्टिंग का पैशन बरकरार रखा और मांझी जी ने भी अपना पैशन बरकरार रहा. शायद यही वजह है कि मैंने फिल्म से खुद को करीब पाया. मुझे लगता है कि इस फिल्म से हर वह आदमी कनेक्ट करेगा, जो जिंदगी में कुछ करना चाहता है. सारी विपरीत परिस्थितियों के बावजूद एक व्यक्ति कामयाब हो पाता है. यह इस फिल्म को देख कर लोगों को समझ आयेगा.
केतन मेहता के साथ काम करने का अनुभव
मेरे लिए हमेशा फिल्म का कंटेट मैटर करता है. बॉक्स आॅफिस खास महत्वपूर्ण नहीं है. इसलिए जब मुझसे लोग पूछते हैं कि केतन जी की फिल्में बॉक्स आॅफिस पर खास कामयाब नहीं हुई हैं, तब भी मैं काम क्यों कर रहा हूं. तो मैं उन्हें जवाब देता हूं कि  एक फिल्म थी एक डॉक्टर की मौत, जिसे बॉक्स आॅफिस पर सफलता नहीं मिली. लेकिन मैंने उस फिल्म से काफी कुछ सीखा. और उस फिल्म ने मेरी जिंदगी बदल दी. फिल्म आपके साथ कितने सालों तक रहती है. यह आपकी फिल्म की सफलता का मानक है और केतन जी ऐसी ही फिल्में बनाने में माहिर हैं. और वे लगातार बेहतरीन काम कर रहे. जिन विषयों को लोग छूते नहीं. वे वैसी फिल्में चुनते हैं.
मिल रहे अच्छे अवसर
मैं यहां मुंबई कभी यह सोच कर नहीं आया था कि मुझे इतनी बड़ी बड़ी फिल्में मिलेंगी. मेरे किरदारों को लोग पसंद करेंगे. लेकिन मुझे लगता है कि मुझे मेरे औकाद से बढ़ कर सबकुछ मिल रहा है. मुझे इतने अच्छे लोगों के साथ काम करने के मौके मिल रहे हैं. यही मेरे लिए बहुत है.
किरदारों को साथ नहीं रखता
मैं कभी भी किसी भी किरदार को लेकर घर नहीं जाता. फिल्म खत्म हुई तो बस दूसरे किरदार की तैयारी में जुट जाता हूं और मुझे लगता है कि एक अच्छे एक्टर को ऐसा ही करना भी चाहिए. मुझे लगता है कि किरदार को ग्लोरिफाइ नहीं करना चाहिए. मैं अगर किरदार का हैंगओवर करके अगली फिल्म करूंगा तो मुझे नहीं लगता मैं उसे सही तरीके से निभा पाऊंगा. इसलिए मैं कभी भी किरदारों को खुद पर हावी नहीं होने देता.

स्टार्स भी मानते हैं सलाह मशविरा

बॉलीवुड में  आमतौर पर यह खबरें आती हैं कि कलाकार एक दूसरे की फिल्में छीनते हैं. लेकिन हकीकत यह भी है कि ऐसी कई फिल्में हैं, जिन्हें सुपरस्टार दूसरे सुपरस्टार का नाम निर्देशक को सुझाते हैं. 

 बजरंगी में सलमान

जी हां, सलमान खान की फिल्म बजरंगी काफी कामयाब हो चुकी है और अब इस फिल्म से जुड़ी एक खबर सामने आ रही है कि यह फिल्म पहले आमिर खान को आॅफर हुई थी. लेकिन आमिर खान को लगा कि सलमान इस किरदार को बखूबी निभा सकते हैं, क्योंकि सलमान व्यक्तिगत जिंदगी में भी कई लोगों की मदद करते हैं तो उन्होंने ही कबीर खान को कहा कि उन्हें सलमान से बातचीत करनी चाहिए.
कट्टी बट्टी में कंगना
जल्द ही कंगना की फिल्म कट्टी बट्टी भी रिलीज होगी. यह फिल्म कंगना को सलमान के कहने पर मिली थी. सलमान को निखिल आडवाणी ने स्क्रिप्ट पढ़वाई थी, तो सलमान को लगा कि इस किरदार के लिए कंगना ही सबसे बेस्ट एक्टर होंगी. तो सलमान ने निखिल से कहा कि उन्हें कंगना से बातचीत करनी चाहिए. सलमान के कहने पर निखिल ने कंगना से बात की और कंगना फिल्म का हिस्सा बनीं.
शानदार व उड़ता पंजाब में आलिया
आलिया ने शानदार फिल्म को हां शाहिद की वजह से कही थी. इसके बाद फिल्म के निर्देशक विकास बहल जिनकी अगली निर्मित फिल्म उड़ता पंजाब है,चाहते थे कि उस फिल्म में भी आलिया काम करें. लेकिन वह आलिया को फिल्म की स्क्रिप्ट सुना नहीं पा रहे थे. चूंकि फिल्म थोड़ी डार्क फिल्म है और आलिया कर्मशियल फिल्में ज्यादा करती हैं. सो, उन्होंने शाहिद से कहा. शाहिद उड़ता पंजाब में लीड किरदार निभा रहे हैं और उन्होंने ही आलिया से कहा कि उन्हें यह फिल्म करनी चाहिए. आलिया ने शाहिद की बात मान भी ली.
अलविरा ka kehna mante  सलमान
गौरतलब है कि सलमान खान की बहन अलविरा भले ही सक्रिय रूप से फिल्मों में सक्रिय न हों. लेकिन व ेसलमान खान की मदद करती रहती हैं नये कलाकारों को तलाशने में. हीरो फिल्म में लीड किरदार निभा रहीं आथिया शेट्टी को पहली बार अलविरा ने ही जिम में देखा था और  वही उन्हें लगा कि आथिया को लांच करना चाहिए, और उन्होंने सलमान से बातचीत की. इसी तरह अलविरा ने ही स्वरा भाष्कर का नाम फिल्म प्रेम रतन धन पायो में सलमान की बहन के किरदार के लिए सुझाया क्योंकि उन्हें स्वरा का अभिनय फिल्म रांझणा में काफी पसंद आया था.
कृष में कंगना
पहले कृष में जैकलीन काम करने वाली थीं लेकिन बाद में कंगना फिल्म का हिस्सा बनी.कंगना ने खुद जैकलीन को फोन पर कहा था कि उन्हें यह फिल्म करनी चाहिए थी. यह बेहतरीन फिल्म है.
अक्षय की जॉन को सलाह
भले ही यह खबरें बाहर उड़ती रहें कि अक्षय कुमार फिल्म वेलकम बैक का हिस्सा न बनने की वजह से काफी नाराज थे और जॉन से उनकी अनबन हो गयी थी. लेकिन हकीकत यह है कि जॉन अक्षय को गुरु कह कर बुलाते हैं और जॉन ने जब अक्षय को यह बात बतायी तो अक्षय काफी खुश हुए थे और उन्होंने जॉन को सलाह दी थी कि यह फिल्म उन्हें करनी ही चाहिए, क्योंकि वेलकम बैक कॉमेडी फिल्मों में मजेदार फिल्म है.
सलमान की सलाह पर सूरज
सलमान इंडस्ट्री में काफी लोगों को सलाह देते हैं. इसी क्रम में उन्होंने सूरज पंचोली को भी फिल्म में काम करने की सलाह दी थी. इसके लिए उन्होंने पहले कबीर खान की फिल्म एक था टाइगर में सूरज को अस्टिेंट के रूप में काम सीखने को कहा था और अब सूरज सलमान की बात मान कर जल्द ही फिल्म हीरो से दर्शकों के सामने होंगे.

श्रीदेवी रखती हैं खास ख्याल : असीन

असीन जल्द ही फिल्म आॅल इल वेल में नजर आनेवाली हैं. उन्होंने बॉलीवुड से लंबा ब्रेक लिया था. लेकिन अब फिर से वह बॉलीवुड की फिल्मों में नजर आती रहेंगी. 

बॉलीवुड का सफर
मुझे लगता है कि बॉलीवुड ने मुझे बहुत कुछ दिया है. मुझे यहां कई नये लोगों के साथ काम करने का मौका मिला. अब तक कई दोस्त बने. मेरी फिल्मों को लोगों ने पसंद किया है और यह मेरे लिए खास बात है. मैं जब अपने शहर से मुंबई आयी तो मुझे श्रीदेवी जी का बहुत सहयोग मिला. मैं उनके ही अपार्टमेंट में रहती हूं और वे हमेशा मुझे सपोर्ट करती हैं. हमेशा कॉल करके पूछती हैं कि असीन तुम्हें कुछ चाहिए तो नहीं. एक दिन बिजली चली गयी थी तो उन्होंने फोन करके कहा कि घबराना नहीं, वॉचमैन को बोला है...जल्द ही आ जायेगा. आप जब किसी ऐसे शहर में रह रहे हैं, जहां आपकी फिक्र करने वाले लोग मिल जायें तो आपको महसूस होगा कि आपका सफर काफी अच्छा है. मेरी फिल्मों के साथ साथ मुझे लोग भी अच्छे मिल जाते हैं. सच कहूं तो अभी तक मैंने जितने भी लोगों के साथ काम किया है, सभी के साथ मेरी टयूनिंग बहुत अच्छी है. सभी मेरे दोस्त हैं. बॉलीवुड में मेरी सारी फिल्मों को लोगों का प्यार मिला है तो मुझे लगता है कि बॉलीवुड और मुंबई दोनों का ही सफर अच्छा रहा है.
जानबूझ कर ब्रेक लिया
हां, मुझसे यह सवाल लगातार पूछे जा रहे हैं कि मैंने बॉलीवुड से एक तरह से लंबा ब्रेक क्यों ले लिया था. उसकी बहुत बड़ी वजह है कि मेरे पास जब अच्छी फिल्मों की स्क्रिप्ट आ रही थी, जिसमें मुझे सबकुछ एक्साइटिंग लग रहा था तो मैंने किया. बाद में मुझे स्क्रिप्ट में बिल्कुल मजा नहीं आ रहा था. तो मैंने ब्रेक ले लिया था. चूंकि मुझे पैसों के लिए कमाना है,ऐसी मेरी कोई मजबूरी नहीं है.
इकलौती हूं लेकिन बिगड़ैल नहीं
हां, यह सच है कि मैं अपने माता पिता की इकलौती बच्ची हूं. लेकिन जैसा लोगों को लगता है कि इकलौते बच्चे बर्बाद बच्चे होते हैं. मैं वैसी बिल्कुल नहीं हूं. मेरे पापा इस बारे में बेहतर बता पायेंगे. लेकिन जहां तक मैं जानती हूं. मैंने अपने पापा को कभी भी तंग नहीं किया है. मुझे उन्होंने जो  संस्कार दिया है. मैंने उसे हमेशा फॉलो किया है. मुझे अपना समय बहुत प्यारा है. और यह बात मेरे माता पिता भी जानते हैं तो वे मुझे बिल्कुल डिस्टर्ब नहीं करते उस वक्त. उस वक्त में मैं पढ़ना लिखना, बहुत कुछ करती हूं. मुझे नहीं लगता कि एक बिगड़ैल बच्चे के ये गुण होते हैं. ेमेरे पापा ही साउथ में मैं जब फिल्में करती हूं तो वे मेरा काम मैनेज करते हैं. सो, वे जानते हैं कि मैं किस मिजाज की हूं. उन्हें भी पता है कि मुझे क्या नहीं करना है. तो वैसे प्रोजेक्ट्स मेरे पास आने ही नहीं देते हैं.
खुश हूं कि अपनी शर्तों पर काम कर रही हूं
यह हकीकत है कि बॉलीवुड या किसी भी इंडस्ट्री में आप अगर अपने शर्तों पर काम कर लें तो वही बहुत है. आप गौर करें तो न सिर्फ बॉलीवुड मैंने तय कर रखा है कि मैं बिकनी सीन नहीं दूंगी. किसिंग सीन नहीं करूंगी. इसके बावजूद मुझे फिल्में आॅफर होती हैं और मैं लगातार काम कर रही हूं. मतलब आपमें कुछ तो बात होगी. सो, मेरे लिए इतना ही बहुत है.
अभिषेक को भाईजान
अभिषेक बच्चन के साथ मैं इससे पहले फिल्म बोल बच्चन में काम कर चुकी हूं, जिसमें उनका किरदार भाईजान का था. वे मेरे भाई बने थे. तो मैं उस वक्त से उन्हें भाईजान कह कर ही बुलाती थी. हमारी जब भी बात होती थी. लेकिन जब इस फिल्म की बात आयी तो मुझे अभिषेक ने कहा कि मुझे भाईजान बोलना बंद करो. वरना, रोमांटिक सीन नहीं कर पायेंगे. तो मैंने अब भाईजान कहना बंद किया है और मैं अब उन्हें एबी बुलाती हूं.
ऋषि जी पिता के समान
ऋषि जी के साथ मैंने फिल्म हाउसफुल 2 में साथ काम किया था. और यह हमारी दूसरी फिल्म है, जिसमें हमें एक दूसरे का बहुत साथ मिला है. ऋषि जी की यह खासियत है कि वह मुंह पर कुछ भी कहते हैं. उन्हें जो प्यार जताना है. वे सामने से जतायेंगे. यह नहीं कि मन में रखेंगे. बुरा लगा तब भी. और अच्छा लगा तब भी. और मुझे वह बहुत प्यार करते हैं और मुझे लगता है कि हाल के दौर में किसी सीनियर से सबसे ज्यादा मुझे प्यार मिला है तो वह ऋषि जी ही हैं.
इमोशनल हूं मैं
मैं बहुत इमोशनल हूं निजी जिंदगी में भी. शायद यही वजह है कि कई बार मुझे इमोशनल दृश्यों को निभाने के लिए ग्लीसरीन की जरूरत भी नहीं पड़ती है.
पर्सनल जिंदगी को पूरा वक्त
हां, मैं जल्द ही शादी करने जा रही हूं. मैंने तय किया है कि मैं अपने सारे प्रोफेशनल कमिटमेंट्स पूरी कर लूंगी. ताकि पर्सनल जिंदगी के लिए मैं थोड़ा वक्त निकालूं. फिलहाल नये प्रोजेक्ट्स साइन करने का खास इरादा नहीं. 

आज की पार्टी मेरी तरफ से


बॉलीवुड में फिल्मी कलाकारों का आपसी प्रेम इन दिनों भले ही कम नजर आता हो. लेकिन फिर भी यहां के कुछ कलाकारों ने मिल कर अपना एक गैंग बना लिया है. और वे हर पार्टी में साथ साथ ही नजर आते हैं. ये स्टार्स एक अच्छे होस्ट होते हैं और हमेशा ही यह गीत गाते हैं कि आज की पार्टी मेरी तरफ से

 फराह खान की गैंग
फराह खान सारे सुपरस्टार्स की करीबी दोस्त हैं. लेकिन आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि फराह खान की एक अलग गैंग है. जिनमें सुपरस्टार्स नहीं, बल्कि कुछ ऐसे लोग शामिल हैं, जिन्हें वे वाकई में बहुत प्यार करती हैं. इस गैंग में पहले कभी करन और शाहरुख शामिल थे. लेकिन वक्त के साथ अब रिश्ते भी बदल गये हैं. इस टीम में इन दिनों रितेश देशमुख और उनकी पत् नी जिनिलिया शामिल हैं. इनके अलावा उनके भाई साजिद खान, सोनू सूद और सानिया मिर्जा शामिल हैं. फराह की कोशिश होती है कि वह हर पार्टी में या अपने घर के किसी भी आयोजन में कम से कम इन दोस्तों को जरूर शामिल कर सकें. हाल ही में ईद की पार्टी में फराह ने अपने घर पर सबको दावत दी थी और सबने जम कर मस्ती की.

अर्पिता खान की गैंग
सलमान खान की प्यारी बहना अर्पिता खान की भले ही शादी हो चुकी है. लेकिन उनमें अब भी काफी बचपना है और वे खूब पार्टी करती हैं. और उनकी भी एक अलग गैंग है, जिसमें उनके प्रिय दोस्तों के अलावा इंडस्ट्री के भी कई लोग शामिल हैं. उनकी पार्टी में सोनाक्षी सिन्हा, श्रद्धा कपूर, वरुण धवन, प्रियंका चोपड़ा, पुलकित सम्राट और उनकी पत् नी जरूर नजर आते हैं. हाल ही में अर्पिता की गैंग ने प्रियंका को उनकी जन्मदिन पर एक सरप्राइज पार्टी दी थी.
कट्रीना कैफ की गैंग
कट्रीना कैफ इन दिनों रणबीर कपूर के साथ रह रही हैं और दोनों साथ में मिल कर काफी पार्टी करते हैं. उनकी पार्टी में कबीर खान, मिनी माथुर, अर्जुन कपूर और कट्रीना के खास दोस्त अली अब्बास जफर जरूर होते हैं और रणबीर कपूर अपने दोस्तों में अयान मुखर्जी को जरूर पार्टी में बुलाते हैं. इन पार्टी में कभी कभी ऐश और करन जौहर भी नजर आ जाते हैं.
करीना की गैंग
करीना की गैंग में उनकी बेस्ट फ्रेंड अमृता अरोड़ा शामिल होती हैं. और साथ ही साथ इस पार्टी में करीना की बहन करिश्मा भी होती हैं. अमृता अरोड़ा की बहन मलायैका भी पार्टी में होती हैं. हाल ही में सभी ने मिल कर कॉकटेल पार्टी की थी. आजकल इस गैंग में नीरंजन नांबियार और आलिया भट्ट भी शामिल होने लगी हैं.
करन जौहर की गैंग
करन जौहर इंडस्ट्री में सबके चहेते हैं और यही वजह है कि उनकी पार्टी में लगभग कई लोग शामिल हैं. इनमें गौरी खान, सुजैन खान, ऐश अभिषेक, रणबीर, सिद्धार्थ मल्होत्रा, करीना कपूर, आलिया भट्ट वरुण धवन,टिष्ट्वंकल खन्ना शामिल होते हैं. करन जौहर भी हमेशा पार्टी करते रहते हैं.
आमिर की गैंग
आमिर जब भी पार्टी करते हैं. उनमें विशाल भारद्वाज, विधु चोपड़ा, राजू हिरानी, कंगना,जैकी, अनिल कपूर जैसे कलाकार शामिल होते हैं. सलमान खान भी कभी कभी इसका हिस्सा होते हैं. आमिर खान की पत् नी किरन राव भी इसका हिस्सा होती हैं.
अनुराग कश्यप
अनुराग कश्यप की गैंग में उनके दोस्त विकास बहल और विक्रमादित्य मोटवाणे का नाम सबसे पहले आता है. इनके अलावा मधु मोंटेना भी शामिल होते हैं. इम्तियाज, तिग्मांशु भी अनुराग की गैंग में शामिल होते हैं. इनके अलावा कंगना भी ऐसी पार्टी का हिस्सा जरूर होती  हैं.
दीपिका पादुकोण
दीपिका पादुकोण की गैंग में कोई हों न हों. संजय लीला भंसाली और रणवीर सिंह जरूर होते हैं. इन दिनों कंगना भी उनकी पार्टियों में नजर आती हैं. दीपिका की दोस्त सहाना गोस्वामी भी शामिल हैं. सो, वह भी इस गैंग का हिस्सा होती हैं. कल्कि भी कभी कभी इस गैंग में दिखाई देती हैं. अर्जुन कपूर भी हिस्सा होते हैं.
सोहा की गैंग
सोहा की गैंग में सोहा के खास दोस्त अरशद वारसी और उनकी पत् नी उनके पति कुणाल खेमू, करीना, सोहेल खान जैसे कलाकार शामिल होते हैं. 

एक बार फिर से लेखक रिटर्न्स


एक बार फिर से दर्शकों ने साबित कर दिया है कि फिल्मों की साज सज्जा, गाने चाहे कितने भी ग्लैमरस हों लेकिन फिल्म तो वही कामयाब है, जिसकी कहानी से दर्शकों का राबतां कायम हो सके. सो, एक बार फिर से बॉलीवुड में लेखकों और अच्छी कहानियों का दौर शुरू हो चुका है. गौर करें तो बॉलीवुड को फिर से हिमांशु, जूही जैसे लीक से हट कर लिखने वाले लेखकों के रूप में सलीम जावेद जैसे लेखक मिल रहे हैं. इन दिनों कुछ ही फिल्में ऐसी बनती हंै, जिनमें दर्शक अंत में तालियां बजा कर फिल्म की तारीफ करें. ऐसी कुछ फिल्में बन रही हैं. यह बॉलीवुड के लिए सकारात्मक संकेत हैं. 
हिमांशु शर्मा( तनु वेड्स मनु रिटर्न्स)
लेखक हिमांशु शर्मा और निर्देशक आनंद एल राय की जोड़ी लगातार कमाल कर रही हैं. उस दौर में जब कंगना को सारे ट्रेजेडी वाले किरदार मिल रहे थे. उस दौर में आनंद एल राय और हिमांशु शर्मा ने तनु वेड्स मनु में कंगना को एक नया रूप दिया और दर्शकों ने कहानी की वजह से फिल्म को बेइतहां प्यार मिला. इसी प्यार का नतीजा था कि फिल्म रांझणा में जब प्यार के अलग अवतार दिखाये गये. तब भी लेखक हिमांशु शर्मा ने अपनी कहानी से दर्शकों का दिल जीता. रांझणा के संवाद अब भी दर्शकों को मुंहजुबानी याद हैं. कुंदन का किरदार अगर आज भी दर्शकों के दिलों में जिंदा है तो इसकी वजह भी फिल्म के लेखक हिमांशु ही हैं. हिमांशु आमतौर पर लो प्रोफाइल रहना ही पसंद करते हैं. लेकिन यह भी स्पष्ट है कि उनका काम लगातार बोल रहा है. और एक बार फिर से वे तनु वेड्स मनु रिटर्न्स में अपना तेवर दिखा रहे हैं. फिल्म के प्रोमोज काफी पसंद किये गये हैं और रिलीज से पहले ही फिल्म के कई संवाद हिट हो चुके हैं. उम्मीदन यह फिल्म भी हिमांशु जैसे लेखक की एक और जीत होगी. हिमांशु की लेखनी की यह खूबी है कि वे पृष्ठभूमि, किरदार सबको उस दौर, उस स्थान को ध्यान में रख कर रचते हैं और संवाद देते हैं. वे फिल्मी संवाद होते भी वास्तविक से लगते हैं.
जूही चतुर्वेदी ( पीकू)
फिल्म विक्की डोनर में शूजीत सरकार के निर्देशन में जूही चतुर्वेदी ने एक ऐसे विषय पर कहानी रच डाली, जो बॉलीवुड के लिए बिल्कुल नया विषय था. फिल्म को लेकर लोगों के मन में पहले बहुत सारी आशंकाएं थीं. लेकिन फिल्म के विषय ने दर्शकों को छुआ चूंकि इसकी लेखनी लाजवाब थी और दर्शक वाकई में कुछ नया देख रहे थे. इस फिल्म से पहली बार जूही और शूजीत सरकार की जोड़ी कामयाब हुई और उस वक्त से यह दौर चलता रहा. फिर दोनों ने साथ साथ फिल्म मद्रास कैफे जैसे महत्वपूर्ण व गंभीर मुद्दों पर आधारित फिल्म दर्शकों को दी. और इसके बाद दर्शकों को तोहफे में इस वर्ष इतनी बेहतरीन फिल्म पीकू के रूप में दी कि दर्शक फिल्म को देख कर हैरान रह गये. फिल्म की कहानी पिता और बेटी के रिश्ते पर है. मगर सिर्फ पिता और बेटी के रिश्ते पर ही नहीं है. जूही और शूजीत ने कांस्टीपेशन के मुद्दे को डर्टी कॉमेडी या पॉटी जोक्स के रूप में नहीं बल्कि एक बैकड्रॉप के रूप में चुना, फिल्म का कैचलाइन है मोशन से इमोशन...इन चंद शब्दों में जूही बहुत कुछ कह जाती हैं. फिल्म के अंतिम दृश्य में अमिताभ जब परहेज छोड़ कर अपने मन की चीजें खाते हैं तो उन्हें सुकून आता है और वे चैन की मौत मरते हैं. यहां लेखक ने दर्शकों को यह बात समझाने की कोशिश की है कि आप सुकून तभी हासिल करेंगे जब जिंदगी में सबकुछ करेंगे बिना परहेज के. यह फिल्म एक बेटी के समर्पण कीकहानी है. एक पिता के अपने बेटी को अलग नजरिये से देखने की कहानी है. औरतों के हक में बोलने वाले एक व्यक्ति की कहानी है. एक साथ यह फिल्म काफी कुछ कह जाती है. और इसे जिस खूबसूरती से पेश किया गया है. वह लेखक और निर्देशक का ही कमाल है. जूही व शूजीत से अब और अधिक अपेक्षाएं बढ़ गयी हैं. वे आगे भी यूं ही हमें चौंकाते रहें. हम उम्मीद करते हैं. जूही की यह खूबी है कि वे ऐसे विषयों का चुनाव करती हैं जो हमारी जिंदगी में शामिल हैं, लेकिन हम उनके बारे में बातचीत नहीं करते. आम जिंदगी की खास कहानी कहना जूही की खूबी है. खास
शरत कटारिया( दम लगाके हईसा)
इस वर्ष जिस फिल्म को सबसे कम प्रोमोट किया गया वह थी दम लगाके हईसा. लेकिन यह फिल्म बिना किसी प्रोमोशन के भी बहुत कामयाब हुई और इसकी वजह यही थी कि फिल्म की कहानी बेहतरीन थी. लीक से वाकई हट कर थी. इस फिल्म की सबसे बड़ी खासियत यह थी कि इस फिल्म की नायिका इस बात  से खुद में शर्म महसूस नहीं करती थी कि वह मोटी है और न ही अपने पति और ससुराल वालों के ताने सुन कर वह अपना मोटापा कम करने की कोशिश करती थी. वह पढ़ी लिखी थी और मेटाबॉलिज्म की बातें करती हैं. वह अपने अनपढ़ पति से प्यार करती है. लेकिन अन्याय सिर्फ इसलिए सहने को तैयार नहीं होती कि वह एक लड़की है. इस फिल्म की खासियत फिल्म के सह कलाकार थे. फिल्म हरिद्वार की पृष्ठभूमि थी. फिल्म की मुख्य नायिका भूमि जो कि एक मुंबईकर हैं और पहली बार अभिनय कर रही थीं. लेकिन उन्होंने खुद को बिल्कुल वहां की लड़की के तौर तरीकों रहन सहन में ढाल दिया था. फिल्म के संवाद, कहानी सब दिल को छूते हैं. इस वर्ष की बेहतरीन फिल्मों में से एक है दम लगाके हईसा. निश्चित तौर पर इस वर्ष शरत कटारिया कई अवार्ड के हकदार हैं.
चैतन्य तमाने( कोर्ट)
चैतन्य तमाने की फिल्म कोर्ट इस वर्ष की अदभुत फिल्मों में से एक है. एक कोर्ट पर इससे वास्तविक फिल्म और कोई भी नहीं बन सकती थी. किस तरह एक क्रांतिकारी लेखक और कवि बेवजह कोर्ट के झमेलों में फंसता जाता है और किस तरह भारत की न्याय प्रणाली काम करती थी. इस पर एक उम्दा और वास्तविक फिल्म है कोर्ट. इस फिल्म में बिना किसी लाग लपेट और ग्लैमर के स्थिति, हालात को एक साथ प्रस्तुत किया गया है. यह इस फिल्म की खासियत है. इस फिल्म को कई अंतरराष्टÑीय समारोह में पुरस्कृत और सम्मानित किया गया है.
नीरज गायेवान (मसान)
नीरज द्वारा लिखी और निर्देशित फिल्म मसान का चयन इस वर्ष कान फिल्मोत्सव की प्रतियोगी सेक् शन में किया गया. यह भारतीय सिनेमा के लिए गर्व की बात है. इस फिल्म में बनारस व छोटे शहरों की कहानी को अलग तरीके से प्रस्तुत किया गया है.
किला( अविनाश अरुण)
अविनाश अरुण की फिल्म किला भी एक बेहतरीन कहानी भी फिल्म है. हालांकि फिल्म अब तक रिलीज नहीं हुई है. लेकिन इस वर्ष फिल्म के रिलीज होने की संभावना है. फिल्म मुंबई फिल्मोत्सव में दिखाई गयी थी और दर्शकों ने इसकी काफी सराहना की थी. 

फिल्म में फैन

शाहरुख खान की फिल्म फैन का टीजर जारी हो गया है. इस फिल्म में शाहरुख खुद सुपरस्टार व फैन दोनों की ही भूमिका में हैं. दरअसल, हकीकत यह है कि फिल्म इंडस्ट्री में भी ऐसे कई स्टार्स व निर्देशक हैं जो एक दूसरे के फैन रहे हैं. लेकिन अब तक दोनों ने साथ काम नहीं किया है. आमतौर पर निर्देशक जिन कलाकारों के फैन रहे हैं वे उनके साथ फिल्में बनाते हैं. 

 दिबाकर हैं तब्बू के फैन
दिबाकर बनर्जी अच्छे फिल्मकारों में से एक माने जाते हैं. वे लीक से अलग हट कर फिल्म बनाने के लिए जाने जाते हैं और शायद यही वजह है कि वे अभिनेत्रियों में भी लीक से हट कर काम करनेवाली अभिनेत्री के फैन हैं. जी हां, यह सुन कर आपको आश्चर्य हो सकता है. लेकिन यही हकीकत है कि दिबाकर बनर्जी तब्बू के फैन हैं. वे तब्बू की सबसे अच्छी अभिनेत्री मानते हैं. वे मानते हैं कि तब्बू हर तरह के किरदार निभा सकती हैं. वे कॉमेडी भी कर सकती हैं और गंभीर किरदार भी आसानी से निभा सकती हैं और यही वजह है कि तब्बू दिबाकर बनर्जी की पसंदीदा अभिनेत्रियों में से एक हैं. लेकिन अब तक उन्होंने कभी तब्बू के साथ किसी फिल्म में काम नहीं किया है.
रोहित के फैन हैं गोंविदा
रोहित शेट्ठी किसी दौर मे गोंविदा के बड़े फैन थे. वे चाहते थे कि वे गोंविदा के साथ फिल्में बनायें. भले ही लोकप्रियता व सफलता हासिल करने के बाद रोहित शेट्ठी की सोच बदल गयी हो. लेकिन शुरुआती दौर में जब रोहित ने फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखा था उस वक्त वे गोंविदा के साथ फिल्म बनाना चाहते थे. लेकिन कभी संयोग ही नहीं बना और शायद अब रोहित की पसंद बदल गयी है.
करीना की पसंद है संजय लीला
जी हां, करीना कपूर को संजय लीला भंसाली का काम बेहद पसंद है. वे हमेशा से उनके साथ काम करना चाहती हैं. वे हमेशा भंसाली की फिल्मों की तारीफ करती रही हैं. लेकिन दिलचस्प बात यह है कि अब तक दोनों के साथ काम करने के संयोग नहीं बन पा रहे हैं. संजय लीला की फिल्म रामलीला, ब्लैक उन्हें आॅफर हुई थी. लेकिन करीना ने उस वक्त इन फिल्मों को ठुकरा दिया. इसकी वजह वह कुछ भी नहीं देतीं. करीना को जोया का काम भी बहुत पसंद है. लेकिन उन्होंने भी जब करीना को फिल्म आॅफर की थी तो उन्होंने ठुकरा दी थी.
दीपिका सलमान की नहीं बनी है जोड़ी
दीपिका पादुकोण कई जगहों पर यह बातें दोहराती रही हैं कि उन्हें सलमान खान के साथ फिल्म करने की बहुत इच्छा है. लेकिन जब भी उन्हें सलमान के साथ कोई फिल्म आॅफर होती है. वह फिल्म से दूरी बना लेती हैं या किसी कारणवश जोड़ी नहीं बन पाती है. दीपिका को सलमान के साथ फिल्म सुल्तान भी आॅफर हुई थी. खबर लिखने तक अब तक उनके साथ काम करने की घोषणा नहीं हुई है.
करन का भी है दिल टूटा
करन जौहर की बेहद इच्छा है कि वे आमिर खान और सलमान खान के साथ काम करें. आमिर खान को करन जौहर ने कई फिल्में आॅफर की हैं. लेकिन आमिर ने अब तक करन की कोई फिल्म नहीं की है. करन की इच्छा थी कि सलमान खान उनकी फिल्म शुद्धि में काम करें. सलमान तैयार भी हो गये थे. लेकिन सलमान ने फिल्म दूरी बना ली. चूंकि सलमान चाहते थे कि यह फिल्म कुछ दिनों के बाद बने. लेकिन करन इसके लिए तैयार नहीं थे. जबकि आमतौर पर करन घोषणा करते आये हैं कि वे करन के फैन रहे हैं. लेकिन जब मौका आया तो उन्होंने सलमान की बात नहीं मानी. सो, सलमान ने खुद ही इस फिल्म से दूरी बना ली. करन की वर्षों की ख्वाहिश कि उन्हें ऐश्वर्य राय बच्चन के साथ काम करने का मौका मिले. वे ऐश के फ्रेंड ही नहीं फैन भी रहे हैं. आखिरकार उनकी यह ख्वाहिश अब जाकर पूरी हो रही है. ऐश करन की फिल्म ऐ दिल है मुश्किल का हिस्सा बन रही हैं.
श्रीदेवी के दीवाने रामू
यह बात जगजाहिर है कि राम गोपाल वर्मा श्रीदेवी के बहुत बड़े दीवाने हैं और यही वजह थी कि उन्होंने श्रीदेवी को ध्यान में रख कर फिल्म मस्त बनाई थी. लेकिन उनकी यह इच्छा अब तक पूरी नहीं हो पायी है कि वे अपनी किसी फिल्म का हिस्सा श्रीदेवी को बना पायें.
शाहरुख को पसंद करते हैं आनंद
आनंद एल राय तीन फिल्मों की सफलता की हैट्रिक दे चुके हैं और उनकी हमेशा से ख्वाहिश है कि वह एक रोमांटिक फिल्म शाहरुख खान के साथ बनायें. अब तक यह जोड़ी नहीं बनी है. लेकिन उम्मीदन आनेवाले समय में यह जोड़ी बन सकती है.


किसी दौर में माधुरी दीक्षित के फैन रहे एमएफ हुसैन ने सिर्फ माधुरी को ध्यान में रख कर गजगामिनी का निर्माण कर दिया था. आर बाल्की अमिताभ के फैन हैं और इसलिए उनकी ज्यादातर फिल्मों में अमिताभ रहे हैं. फिल्म अय्या के निर्देशक सचिन कुंदलकर रानी मुखर्जी के फैन रहे थे और इसलिए उन्होंने फिल्म अय्या में रानी को लीड किरदार दिया.

स्टार्स का साडा अड्डा


इन दिनों स्टार किड्स अपने स्पेस की तलाश में नया आशियाना न केवल तलाश रहे. बल्कि कई कलाकारों ने अपने माता पिता का घर छोड़ कर नये घर में शिफ्ट होने का फैसला भी ले लिया है. हालांकि ये स्टार किड अभी भी अपने माता पिता से दूर नहीं होना चाहते. लेकिन इनका मानना है कि उनके काम की वजह से वे परिवार के सदस्यों को परेशान नहीं करना चाहते. इसलिए वे ऐसा निर्णय ले रहे हैं. 

 श्रद्धा कपूर
श्रद्ध ाकपूर अपने माता पिता से बेहद प्यार करती हैं. लेकिन न चाहते हुए भी वे अपने काम को ध्यान में रखते हुए एक नये घर की तलाश में हैं. हालांकि उनकी इच्छा थी कि उन्हें उनके माता पिता के घर के पास ही कोई घर मिल जाये.लेकिन यह संभव नहीं हो पा रहा है. इस बात से श्रद्धा दुखी भी हैं. श्रद्धा कहती हैं कि उनके घर में उनके इतने जूते हो गये हैं कि उनकी मां उन्हें संभालते संभालते थक जाती हैं. और नाराज भी होती हैं. साथ ही श्रद्धा को लगता है कि वे जितनी भी मीटिंग करती हैं अपने घर पर ही करती हैं और इससे उनके माता पिता को परेशानी होती है. ऐसा उन्हें लगता है. तो वह चाहती हैं कि वे अपने परिवार वालों को तंग न करें और इस वजह से वे नये घर की तलाश में हैं. लेकिन श्रद्धा ने साफ कहा है कि सिर्फ काम के दृष्टिकोण से ही वह नये घर की तलाश कर रही हैं. वरना, वे अपने परिवार के बिना नहीं रह सकतीं.
परिणीति चोपड़ा
परिणीति चोपड़ा ने हाल ही में खार में अपना फोर बीएचके फ्लैट खरीदा है. परिणीति ने भी यह निर्णय इसलिए लिया ताकि वे अपने काम की वजह से अपने परिवार वालों को परेशान न करें. परिणीति खुश हैं कि उन्होंने अपना यह सपना पूरा कर लिया है. परिणीति जल्द ही अपने घर का इंटीरियर करवाने वाली हैं और इसके बाद वे नये घर से ही अपने सारे काम देखेंगी.
आलिया भट्ट
आलिया भट्ट पिछले काफी समय से एक अलग जगह की तलाश कर रही थीं. इसकी वजह यह नहीं है कि वे अपने पेरेंट्स से अलग हुई हैं. उनकी मां सोनी राजदान ने यह भी कहा है कि वे आलिया को कभी अकेली नहीं छोड़ेंगी. लेकिन हां अब अपनी सारी मीटिंग और काम आलिया अपने नये घर से ही करेंगी. आलिया ने भी यह निर्णय इसलिए लिया चूंकि कई बार उन्हें देर रात तक मीटिंग्स करनी पड़ती है. ऐसे में उन्हे घर वालों को परेशान करना अच्छा नहीं लगता.
सोनम कपूर
सोनम कपूर जल्द ही अपने नये घर में शिफ्ट हो रही हैं. लेकिन वे इस बात से बहुत दुखी हैं, चूंकि उन्हें अपनी मां सुनीता की आदत है. सुनीता अपने बच्चों के बिना नहीं रह सकतीं और न ही सोनम कपूर अपनी मां के बिना.  सोनम ने बांद्रा कुर्ला कॉम्पलेक्स में डुप्लेक्स अपार्टमेंट खरीद लिया है. यह अपार्टमेंट थर्ड और फोथङ फ्लोर को कवर करता है. उन्होंने यह अपार्टमेंट 30 करोड़ में खरीदा है. खास बात यह है कि सोनम ने इस जगह का चुनाव इसलिए किया है, क्योंकि यहां बिल्ंिडग के अंदर एक मिनी थियेटर भी है, जहां सोनम अपनी फिल्मों की स्क्रीनिंग रख सकती हैं. उनकी मौसी कविता सिंह इसके इंटीरियर का काम देख रही हैं.
ेसलमान खान
सलमान खान ने कई महीनों पहले ही एक बड़ा अपार्टमेंट लिया है. लेकिन इसके बावजूद वे वहां शिफ्ट नहीं हो रहे.वे अपनी मां का साथ छोड़ कर वहां रहने के लिए तैयार ही नहीं हैं. सलमान का यह घर अब तक खाली ही है.
प्रियंका चोपड़ा
प्रियंका चोपड़ा हाल  ही में अपने नये घर में शिफ्ट हुई हैं, जहां वे अपना पूरा काम देखती हैं. प्रियंका ने एक नया घर लेने का फैसला इसलिए किया है चूंकि जल्द ही वह अपना प्रोडक् शन हाउस शुरू करने जा रही हैं और इसके लिए उन्हें काफी जगह की जरूरत होगी.

फिल्म इंडस्ट्री व गॉडफादर

कंगना ने अपनी बातचीत में इस बात का इजहार किया कि उन्हें खुशी है कि उन्होंने अपनी जिंदगी में कभी किसी की सलाह नहीं ली. किसी को गॉडफादर नहीं बनाया, किसी की वजह से अपने मुकाम तक नहीं पहुंची. फिर वह चाहे उनके माता पिता ही क्यों न हो. किसी ने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचने में मदद नहीं की. उन्होंने साफ शब्दों में इस बाद का इजहार किया कि उन्होंने शुरुआती दौर में कुछ बड़ी गलतियां की हैं. वे कुछ ऐसे लोगों के चंगुल में फंस गयी थीं, जिन्होंने उन्हें बर्बाद करने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी. उस दौर में कंगना बिल्कुल युवा थी और युवा दौर में लोग कई गलतियां कर जाते हैं. लेकिन कंगना को इस बात की खुशी है कि वे उन परेशानियों से खुद जूझीं और उन्होंने खुद एक मुकाम बनाया. और यही वजह है कि आज वे आजाद पंक्षी हैं. वे किसी की बातों की फिक्र नहीं करतीं. सिर्फ अपना काम करती हैं.दरअसल, हकीकत भी यही है कि  जब आप किसी को गुरु मान बैठते हैं या किसी के एहसान तले दब जाते हैं तो ताउम्र न चाहते हुए भी दबाव बना रहता है और आप स्वतंत्र ख्वाब नहीं देख पाते.फिल्म इंडस्ट्री में यह रीत पुरानी रही है कि जिन्हें गॉडफादर मिले हैं. उन्हें बड़े मौके मिले हैं. हालांकि कई कलाकार जैसे नवाजुद्दीन सिद्दिकी व उनके जैसे प्रतिभाशाली कलाकारों को अनुराग कश्यप जैसे पारदर्शी निर्देशक की जरूरत जरूर होती है. यह व्यक्ति व्यक्ति पर भी निर्भर करता है कि वह अपने गॉडफादर को किस श्रेणी में रखते हैं और किस तरह उन्हें तवज्जो देते हैं. सलमान मानते हैं कि आपको जो पहला मौका दे, उन्हें कभी नहीं भूलना चाहिए. यह गॉडफादर पर भी निर्भर करता है कि वह किस नि: स्वार्थ भाव से किसी को प्रकाश की ओर ले जा रहा है. हकीकत यही है कि गुरु वही है जो अंधकार से उजाले की तरफ ले जाये. लेकिन निश्चल भाव से.

बिजली व कटियाबाज

 कुछ दिनों पहले कानपुर के कुछ इलाकों में हो रही बिजली की परेशानी को लेकर कटियाबाज नामक एक बेहतरीन डॉक्यूमेंट्री बनी थी. इस फिल्म में एक ऐसे व्यक्ति की जिंदगी की कहानी बयां की गयी थी, जो जुगाड़ से लोगों तक बिजली पहुंचाने की कोशिश करता है और लोग उन्हें कटियाबाज के नाम से ही जानते हैं. वहां के बिजली विभाग से भी जो परेशानी दूर नहीं हो पाती है, वह व्यक्ति कर देता है. बिजली की समस्या को लेकर बिहार में भी एक बेहतरीन डॉक्यूमेंट्री बनी है, जहां एक व्यक्ति ने अपनी सूझबूझ से अपने गांव में जहां बिजली की बेहद परेशानी थी. वहां सौर्य ऊर्जा के माध्यम से रोशनी पहुंचाने की कोशिश की है.सोलर बिहार नामक इस अभियान में बिहार के कई सेलिब्रिटीज ने अपना सहयोग दिया है. दरअसल, बिजली की समस्या को लेकर ऐसी मुहिमों की बहुत अधिक आवश्यकता है. और साथ ही आवश्यकता है कि इस मुहिम में बिहार के सेलिब्रिटीज आगे आयें. इन दिनों स्टार प्लस पर भी एक शो प्रसारित हो रहा है. मोही. इस शो में लड़की का सपना है कि वह डॉक्टर बने. लेकिन उसके गांव में बिजली नहीं है. वहां तो सूरज भी कंजूसी से निकलता है. यह भले ही काल्पनिक कहानी हो. लेकिन हकीकत यही है कि अब भी बिहार, उत्तर प्रदेश व भारत के कई ऐसे कोने हैं, जहां सूरज अब भी कंजूसी से निकलता है और जहां बिजली की अत्यधिक परेशानी है. लेकिन इसके बावजूद वहां के लोग इस परेशानी से जूझने के तरीके सुझा रहे हैं. फिलवक्त बिहार चुनाव का माहौल है. और बिजली एक अहम मुद्दा है. केवल अपने इस्तिहारों में नहीं बल्कि वाकई बिजली को एक गंभीर मुद्दे के रूप में लिया जाना चाहिए. साथ ही वैसे लोग जो अपने गांव को अपनी सूझ बूझ से मदद कर रहे हैं. ऐसे स्थानों को कई कटियाबाजों की जरूरत है और उनका सम्मान होना ही चाहिए.

स्टार व उनके हमशक्ल

शाहरुख खान के डुप्लीकेट राजू राहिकवार ने एक डॉक्यूमेंट्री बनाई है. द लिविंग आॅफ किंग खान शैडो. और उनकी हार्दिक इच्छा है कि उनकी डॉक्यूमेंट्री में शाहरुख खान छोटी सी ही झलक के रूप में सही लेकिन शामिल हों.हालांकि उन्हें अब तक शाहरुख खान की स्वीकृति नहीं मिली है. लेकिन उन्होंने भी तय कर रखा है कि जब तक शाहरुख फिल्म के लिए स्वीकृति नहीं देते. वे फिल्म रिलीज नहीं करेंगे. खास बात यह हुई कि हाल ही में सलमान खान से मिलने गये तो सलमान खान ने उन्हें शाहरुख की नकल करने को कहा. उन्होंने करके दिखाया भी. सलमान ने एक बेहतरीन बात कही कि आप भी अपने शाहरुख साहब की तरह ही बहुत प्रतिभाशाली हैं. राजू ने जब सलमान खान के साथ तसवीर खिंचवानी चाही. तो पहले उन्होंने सलमान की कमर में हाथ डालने के लिए पहले उनसे इजाजत मांगी. यह दर्शाता है कि राजू एक कलाकार की कितनी इज्जत करते हंै. वे इस बात से वाकिफ हैं कि उनकी रोजी रोटी शाहरुख की वजह से ही चल रही है. इस वजह से नहीं कि शाहरुख ने उन्हें नौकरी पर रखा है. बल्कि इसलिए क्योंकि उनकी वजह से ही उन्हें फिल्मी दुनिया में उन्हें एक पहचान मिली. और उनकी रोजी रोटी उनकी वजह से ही चल रही है. दरअसल, हकीकत यही है कि बॉलीवुड के कई हमशक्लों की जिंदगी स्टार्स की वजह से ही चल रही है. लेकिन यह भी हकीकत है कि ये हमशक्ल भी अपनी मेहनत में कोई कमी नहीं करते. खासतौर से शाहरुख के हमशक्ल सबसे व्यस्त डुप्लीकेट्स में से एक हैं, चूंकि उन्हें लगातार मौके मिलते हैं. शाहरुख कई फिल्में करते हैं और वे हद से अधिक एक् शन सीन नहीं कर सकते. स्टंट नहीं कर सकते. जाहिर है ऐसे में डुप्लीकेट्स का ही सहारा लेना होता है. सो, एक नजरिये से देखें तो दोनों एक दूसरे के पूरक हैं. 

जिंदगी व बकेट लिस्ट

शाहरुख खान ने हाल ही में टिष्ट्वटर पर अपनी बकेट लिस्ट डाली है. बकेट लिस्ट एक ऐसी सूची होती है, जिसमें आप अपनी जिंदगी की कुछ ऐसी हसरतों को पूरा करने की सूची तैयार करते हैं, जिसमें आप चाहते हैं कि मरने से पहले वे सारे काम आप पूरे कर लें. एक बेहतरीन अंगरेजी फिल्म बकेट लिस्ट इस विषय पर बन चुकी है. इस फिल्म में दो मरीज एक ही कमरे में भर्ती होते हैं. उनमें से एक उस होटल का मालिक है, लेकिन वह बीमार है, इसलिए वहां है. दूसरा जिंदादिल इंसान है. और दुनिया को सकारात्मक तरीक े से जीता है. दोनों आपस में अच्छे दोस्त बनते हैं और तय करते हैं कि वे मरने से पहले उन सारी इच्छाओं को पूरा करेंगे. कई इच्छाओं को पूरा करने में वे कामयाब भी हो जाते हैं. लेकिन अंतिम इच्छा पूरी करने से पहले ही उनमें से एक की मौत हो जाती है. लेकिन वह अधूरी इच्छा दूसरा पार्टनर पूरी करता है. इस फिल्म में दो किरदारों के जरिये दुनिया के नजरिये को बेहतरीन तरीके से दर्शाया गया है. जिन्हें जिंदगी में दार्शनिक बातें अच्छी लगती होंगी. उन्हें यह फिल्म बेहद पसंद आयेगी. बहरहाल, शाहरुख की इच्छा है कि वे कई सालों से अपनी किताब पर काम कर रहे हैं. और अब तक वह पूरी नहीं हुई है. वे चाहते हैं.वे जल्द से जल्द इसे पूरी कर लें. जाहिर है शाहरुख की बकेट लिस्ट किसी देश का भ्रमण नहीं होगा. चूंकि सितारा हैसियत रखते हुए उन्होंने विश्व के हर कोनों की सैर की है. एक कहावत है. जितनी चादर हो. उतना ही पैर फैलाएं. बकेट लिस्ट तय करते वक्त भी यही हकीकत सामने आती है कि बकेट (जिसका हिंदी में अर्थ बाल्टी है... ) उतना ही पानी भरो, जितने में बाल्टी ओवर फ्लो न हो जाये. लेकिन बकेट लिस्ट बनाते वक्त व्यक्ति ओवर फ्लो हो जाने ही देना चाहता. चूंकि चाहतों की तो सीमा नहीं होती और न ही उन्हें पूरा करने की उम्मीदों की.

स्टार के वास्तविक जीवन की झलकी

अक्षय कुमार ने हाल ही में टिष्ट्वटर पर रक्षाबंधन के मौके पर एक वीडियो शेयर किया था. उस वीडियो में वह अपनी बहन अल्का के साथ मस्ती करते नजर आये. अक्षय कुमार  सुपरसितारा हैसियत रखते हैं. और वे अपनी मसाला और गंभीर फिल्मों में हमेशा सामंजस्य बना कर चलते हैं. जाहिर है, साल में अगर उनकी सबसे ज्यादा फिल्में रिलीज होती हंै और अधिकतर फिल्में हिट होती है. इससे स्पष्ट है कि उनकी फैन फॉलोइंग काफी अच्छी है. ऐसे में उन्होंने रक्षाबंधन के मौके पर इस मस्ती करने वाले वीडियो को शेयर किया है तो उनके प्रशंसक उनसे बेहद खुश हैं. चूंकि आमतौर पर फिल्मी सितारे अपने व अपने परिवार वालों को लाइमलाइट से दूर रखना चाहते हैं. शाहरुख खान ने अपने पूरे परिवार के साथ मीडिया को दो सालों पहले ईद के मौके पर मुखातिब कराया था. उस वक्त उनकी फिल्म चेन्नई एक्सप्रेस रिलीज होने वाली थी. इसके अलावा अपनी बहन व परिवार को वह मीडिया से दूर रखना चाहते हैं. लेकिन आम लोगों के दिलों में अपने सितारों के घरों में झांकने की चाहत हमेशा ही होती है. सो, अगर एक झलक भी मिल जाये तो वे संतुष्ट हो जाते हैं. अमिताभ बच्चन व उनके परिवार में भी मीडिया को हमेशा दिलचस्पी रहती है. लेकिन अमिताभ बच्चन की कोशिश होती है कि वे मीडिया से उन्हें दूर रखें. जया बच्चन तो हरगिज यह बर्दाश्त नहीं करतीं कि कोई मीडिया उनसे उनके परिवार वालों के बारे में कोई भी सवाल पूछें. वे हमेशा गलत तरीके से ही पेश आती हैं.कपूर खानदान हाल ही में शशि कपूर के लिए एकत्रित हुआ. जब उन्हें खास पुरस्कार से सम्मानित किया जा रहा था. लेकिन वहां भी मीडिया को पूरी तरह से आजादी नहीं मिली कि वे अपनी मनचाही तसवीरें उतार सकें. जाहिर है ऐसे में सुपरसितारा हैसियत भूल कर अक्षय ऐसी झलकियां दिखाते हैं तो दर्शकों को संतुष्टि ही मिलती होगी.

कमबैक और सक्षम होने का प्रमाण

 ऐश्वर्य राय की नयी फिल्म जज्बा का हाल ही में ट्रेलर लांच हुआ है. इस फिल्म से लंबे अरसे के बाद ऐश्वर्य बड़े परदे पर वापसी कर रही हैं. फिल्म में वह केंद्रीय भूमिका में हैं. वह स्पष्ट नजर आ रहा है. फिल्म में वह एक वकील की भूमिका में हैं. खबर है कि वे फिल्म में एक गीत भी गा रही हैं. इन दिनों यों भी बॉलीवुड में लगभग हर अभिनेता व अभिनेत्री प्लेबैक सिंगिंग में हाथ आजमा रहे हैं. अगर पूरे ट्रेलर पर गौर किया जाये तो यह स्पष्ट है कि निर्देशक ऐश्वर्य राय के इस कमबैक को खास बनाना चाहते हैं. ऐश्वर्य हमेशा सुर्खियों में रही हैं. जब वे फिल्में कर रही थीं या फिर जब उन्होंने फिल्मों से ब्रेक लिया. वे हमेशा खबरों में बनी रही हैं. शायद इन्हीं बातों को निर्देशक से जेहन में पूरी तरह रखा है. लेकिन अब तक का इतिहास देखें तो श्रीदेवी व कुछ अभिनेत्रियों के अलावा कमबैक फिल्मों में अभिनेत्रियों ने खास कमाल नहीं दिखाया है. इसकी एक बड़ी वजह यह भी हो जाती है कि कमबैक करते समय अभिनेत्रियों के दिमाग में यह बात होती है कि वे एक  ही फिल्म में वे सारे कारनामे कर लें जो उन्होंने अब से पहले नहीं किये हैं. वे खुद को दोबारा साबित करने के लिए हर संभव प्रयास में जुटी रहती हैं. रानी मुखर्जी की फिल्म अय्या में हालांकि रानी मुखर्जी ने खुद को एक नये रूप में प्रस्तुत किया था. इस फिल्म में उनका बेली डांस काफी लोकप्रिय हुआ. निस्संदेह ऐसे प्रयासों में अभिनेत्रियां खुद में भी कुछ अलग तलाश की कोशिश में होती हैं और कई बार उन्हें आकार भी मिलता है. लेकिन कई बार इस नयी छवि को गढ़ने में वे कामयाब नहीं हो पाती. दरअसल, अभिनेत्रियों पर अभिनेताओं से अधिक दबाव हमेशा ही बना होता है. सो, अभिनेत्रियां इस स्थान पर आकर यही कोशिश करती हैं कि वे खुद को सर्वश्रेष्ठ और सक्षम प्रस्तुत कर सकें और इसी कवायद में वे सारे नुस्खे आजमा लेती हैं. 

अभिनेत्री की डिमांड

खबर है कि कंगना रनौट ने फिल्म झांसी की रानी के मेकर्स से 11 करोड़ रुपये की मेहनताना फीस की मांग की है और इस पर अब तक निर्माता ने हामी नहीं भरी है, क्योंकि वह जानते हैं कि अगर कंगना की फीस पर हामी भरी गयी तो उन्हें भविष्य में भी बाकी अभिनेत्रियों की फीस बढ़ानी होगी. गौरतलब है कि फिल्म हीरोइन के लिए करीना कपूर ने सात करोड़ की फीस ली थी और उस वक्त वह सबसे ज्यादा मेहनताना लेने वाली अभिनेत्रियों में से एक थी. फिलवक्त कंगना और दीपिका पादुकोण सबसे महंगी फीस लेने वाली अभिनेत्रियां हैं. उनके बाद प्रियंका का नंबर आता है. दरअसल, अभिनेत्रियों की फीस को लेकर लंबे समय से विवाद है और 100 सालों के हिंदी सिनेमा के इतिहास के बावजूद अब तक यह खाई कम नहीं हुई है. जहां अभिनेता 50 करोड़ से भी अधिक फीस की मांग करते हैं और उनकी मांग पूरी भी होती है. कंगना की फीस को लेकर अब भी कुछ निर्णय नहीं लिया गया है. वजह स्पष्ट है कि निर्माता इस बात से वाकिफ हैं कि अगर उन्हें किसी एक फिल्म में अभिनेत्री की डिमांड माननी पड़ी तो आगे भी वही स्तर तय हो जायेगा और आनेवाले दौर में अभिनेता फिर अपनी फीस और अधिक बढ़ायेंगे. इससे निर्माताओं के लिए परेशानी खड़ी होगी. सो, वे इस बात को लेकर स्पष्ट हैं कि वे फिलवक्त फीस नहीं बढ़ायेंगे. दीपिका पादुकोण, कंगना रनौट, प्रियंका इन बातों को स्वीकारती आयी हैं कि उन्हें इस बात की तकलीफ होती है कि अब भी अभिनेताओं से उनकी फीस काफी कम है. जबकि वे भी मेहनत करती हैं. गौर करें तो बाजीराव मस्तानी के लिए दीपिका ने भी शारीरिक रूप से खुद को तैयार किया है. उन्होंने कई तरह के प्रशिक्षण लिये हैं. ऐश्वर्य राय ने जज्बा में खतरनाक स्टंट किये हैं. लेकिन इसके बावजूद अब भी उनके इन कारनामों की अनदेखी ही हो रही है. 

बायोपिक व वृतचित्

नवाजुद्दीन सिद्दिकी की नयी फिल्म दशरश मांझी पर बनी मांझी द माउनटेन मैन को लेकर विवाद जारी है.कई लोगों का मानना है कि फिल्म में वास्तविक घटनाओं को फिल्मी तरीके से पेश किया गया है. जबकि अगर फिल्म बायोपिक बन रही थी तो फिल्म में हकीकत को सामने रखना चाहिए था. हिंदी सिनेमा के इतिहास में जब जब बायोपिक फिल्में बनी हैं. यह सवाल खड़े होते रहे हैं. भाग मिल्खा भाग फिल्म को लेकर भी काफी विवाद छिड़े थे. लोगों ने राकेश ओमप्रकाश मेहरा के कई दृश्यों को काल्पनिक और मनगढंत माना था. यह हकीकत है कि बायोपिक फिल्में बनाते वक्त निश्चित तौर पर निर्देशकों पर यह दबाव रहता है कि वे परिस्थितियों को ज्यों का त्यो प्रस्तुत करें. लेकिन यह बात हमें भी समझनी होगी कि फीचर फिल्म का मतलब ही फीचर है, वह वृतचित्र की तरह कभी भी हकीकत को ज्यों का त्यों नहीं प्रस्तुत कर सकता. इन दिनों संजय लीला भंसाली बाजीराव मस्तानी पर काम कर रहे हैं. उनके फिल्म का  संवाद है बाजीराव ने मोहब्बत की है, अय्याशी नहीं. जाहिर है कि बाजीराव ने कभी भी वास्तविक जिंदगी में ऐसे बोल नहीं बोले होंगे. लेकिन दर्शकों को बांधे रखने के लिए निर्देशक सिनेमेटिक लिबर्टी लेता है. जब फिल्म का फिल्मांकन हो रहा होता है तो ये बातें मायने रखती हैं कि दृश्यों को किस तरह रोचक बनाया जाये. हां, इतिहास से खेलना या उसके साथ खिलवाड़ करना अनुचित है. अपराध है. मगर अपने दृश्यों को रोचक बनाने के लिए दृश्य गढ़ना एक निर्देशक की जरूरत है और दर्शकों को व समीक्षकों को भी यह बात समझनी होगी. फिल्म एक विजुअल मीडियम है और दृश्यों के सहारे ही तीन घंटों तक दर्शकों को बांधे रखा जा सकता है. सो, दृश्यों को लेकर हाय तौबा मचाते वक्त और अपनी भावना को ठेस पहुंचाने से पहले इन बिंदुओं पर भी गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए

नाना और विदर्भ के किसान

नाना पाटेकर उन अभिनेताओं में से एक हैं, जो बातचीत के वक्त सिर्फ अपनी फिल्म के प्रोमोशन पर ध्यान नहीं देते. वे एक महत्वपूर्ण मुद्दे पर विस्तार से बातचीत करते हैं और सिर्फ चिंतन नहीं करते, बल्कि हल निकालने की भी कोशिश करते हंै. हाल ही में अपनी फिल्म वेलकम बैक के प्रोमोशन के दौरान नाना ने अपनी बात रखी है कि वे विदर्भ में हो रही किसानों की आत्महत्या से परेशान हैं. उन्होंने किसानों से अपील भी की है कि वे आत्महत्या न करें. नाना को फोन करें. नाना  ने अपनी तरफ से काफी लोगों की मदद भी की है और कई एनजीओ के माध्यम से वे अधिकतर किसानों की मदद करने की कोशिश कर रहे हैं. नाना मानते हैं कि वह कोई उपकार नहीं कर रहे. वे खुद किसान हैं, इसलिए किसानों का दर्द समझ सकते हैं. निस्संदेह नाना उन सेलिब्रिटी किसानों की तरह नहीं हैं, जिनके आलिशान बंगलो की तरह फार्म हाउस हैं और वे शौक से बागवानी करते हैं. लेकिन विदर्भ को लेकर वे बातचीत भी नहीं करना चाहते. गौरतलब है कि इस बार महाराष्टÑ में पर्याप्त बारिश न हो पाने की वजह से किसान परेशान हैं. और आत्महत्या की खबरें लगातार आ रही हैं. नाना सेलिब्रिटी होने के साथ साथ एक महत्वपूर्ण कार्य भी कर रहे हैं. उनके बेटे मल्हार इस बारे में कई बार चर्चा भी कर चुके हैं कि नाना साहेब जब घर पर भी होते हैं तो वे एकांत पसंद करते हैं और वहां भी वे जरूरतमंदों की सेवा करते हैं.उनके घर में महंगे फर्निचर नहीं हैं. बस जरूरत का सामान है. जिस मुकाम पर नाना हैं, वहां आम रह पाना कठिन है. खासतौर से जब वह वेलकम बैक जैसी ग्लैमरस फिल्म का हिस्सा बनते हैं तो उनकी आॅन स्क्रीन छवि को देख कर शायद लोग धोखा खा जायें, लेकिन हकीकत यही है कि नाना आम लोगों की तरह जीने में ही विश्वास करते हैं और दूसरों की मदद करना उन्हें पसंद हैं.

पारिवारिक चक्र का पूरा होना


आर बाल्की की फिल्म की और का में 14 साल के बाद बड़े परदे पर साथ नजर आयेंगे अमिताभ और जया. हालांकि वे सिर्फ मेहमान भूमिका में हैं. लेकिन शूटिंग की जो तसवीरें जारी हुई हैं, उनसे यह बात स्पष्ट हो रही है कि छोटी ही भूमिका में सही जया और अमिताभ एक महत्वपूर्ण बात कह रहे हैं फिल्म में. बाल्की की फिल्में अमिताभ के बिना पूरी नहीं होतीं. उनकी किसी भी फिल्म में अमिताभ या अमिताभ का जिक्र न हो. अब तक ऐसा नहीं हुआ है. यह संयोग है कि अमिताभ और जया ने 14 साल के बाद किसी हिंदी फिल्म की शूटिंग साथ की है. वही दूसरी तरफ फिल्म शोले के 40 साल भी हाल ही में पूरे हुए हैं. अमिताभ बताते हैं कि फिल्म शोले के एक दृश्य में जहां वे जया को चाभी देने जाते हैं. उस दृश्य में जया जी गर्भवती रहती हैं. सो, अमिताभ का मानना है कि इस फिल्म में उनकी बेटी श्वेता ने भी काम किया है. चूंकि उस वक्त वे जया जी के गर्भ में थीं. हालांकि यह भी एक विचित्र बात है कि लोग कहते हैं कि अभिमन्यु ने अपनी मां के पेट से ही चक्रव्यू की पूरी बात सुन ली थी. और उन्हें याद भी रहा. लेकिन श्वेता बच्चन मां के गर्भ में रहते हुए भले ही फिल्मों का हिस्सा बनी. लेकिन वास्तविक जिंदगी में उन्होंने कभी भी फिल्मों में कदम नहीं रखा और अमिताभ बताते हैं कि उन्होंने कभी इच्छा जाहिर भी नहीं की. गौरतलब है कि ऐश्वर्य और अभिषेक की बेटी आराध्या भी ऐश के गर्भ में थीं, जब फिल्म हीरोइन की घोषणा हुई थी. हालांकि ऐश ने यह बात छुपाई थी. बाद में इसका खुलासा हुआ और उन्होंने फिल्म से दरकिनार कर लिया. यह कल्पना मात्र ही है कि भविष्य में कभी जब आराध्या फिल्मों में आये, तो इस बात की जिक्र होगी और खुद आराध्या भी इस रोमांचक तथ्य को जानने में उत्सुकता दिखाये. यह देखना आनेवाले दौर में रोचक होगा. 

बाल्की के शीर्षक

आर बाल्की की फिल्म की और का में 14 साल के बाद बड़े परदे पर साथ नजर आयेंगे अमिताभ और जया. हालांकि वे सिर्फ मेहमान भूमिका में हैं. लेकिन शूटिंग की जो तसवीरें जारी हुई हैं, उनसे यह बात स्पष्ट हो रही है कि छोटी ही भूमिका में सही जया और अमिताभ एक महत्वपूर्ण बात कह रहे हैं फिल्म में. बाल्की की फिल्में अमिताभ के बिना पूरी नहीं होतीं. उनकी किसी भी फिल्म में अमिताभ या अमिताभ का जिक्र न हो. अब तक ऐसा नहीं हुआ है. यह संयोग है कि अमिताभ और जया ने 14 साल के बाद किसी हिंदी फिल्म की शूटिंग साथ की है. वही दूसरी तरफ फिल्म शोले के 40 साल भी हाल ही में पूरे हुए हैं. अमिताभ बताते हैं कि फिल्म शोले के एक दृश्य में जहां वे जया को चाभी देने जाते हैं. उस दृश्य में जया जी गर्भवती रहती हैं. सो, अमिताभ का मानना है कि इस फिल्म में उनकी बेटी श्वेता ने भी काम किया है. चूंकि उस वक्त वे जया जी के गर्भ में थीं. हालांकि यह भी एक विचित्र बात है कि लोग कहते हैं कि अभिमन्यु ने अपनी मां के पेट से ही चक्रव्यू की पूरी बात सुन ली थी. और उन्हें याद भी रहा. लेकिन श्वेता बच्चन मां के गर्भ में रहते हुए भले ही फिल्मों का हिस्सा बनी. लेकिन वास्तविक जिंदगी में उन्होंने कभी भी फिल्मों में कदम नहीं रखा और अमिताभ बताते हैं कि उन्होंने कभी इच्छा जाहिर भी नहीं की. गौरतलब है कि ऐश्वर्य और अभिषेक की बेटी आराध्या भी ऐश के गर्भ में थीं, जब फिल्म हीरोइन की घोषणा हुई थी. हालांकि ऐश ने यह बात छुपाई थी. बाद में इसका खुलासा हुआ और उन्होंने फिल्म से दरकिनार कर लिया. यह कल्पना मात्र ही है कि भविष्य में कभी जब आराध्या फिल्मों में आये, तो इस बात की जिक्र होगी और खुद आराध्या भी इस रोमांचक तथ्य को जानने में उत्सुकता दिखाये. यह देखना आनेवाले दौर में रोचक होगा. 

अभिनेत्री और कैमरा

रानी मुखर्जी ने हाल ही में अपने पति आदित्य चोपड़ा के साथ एक खास पोट्रे बनवाया है. आदित्य ने अपनी शादी को गोपनीय रखा था और यही वजह थी कि रानी और आदित्य की शादी में कई लोग शामिल नहीं हुए थे.जाहिर है रानी की कई आशाएं उम्मीदें रही होंगी. रानी तो यों भी अभिनेत्री रही हैं और परियों वाली कहानियों का हिस्सा रही हैं. सो, अपनी शादी को लेकर उनके जो शौक रहे होंगे, वह पूरी तरह उन्होंने शादी में पूरी नहीं की थी. वे इस बात से भी अच्छी तरह से वाकिफ हैं कि उनके पति को यह सब पसंद नहीं है. और इस वजह से भी उन्होंने कई उम्मीदों को दबाये रखा होगा. लेकिन अब जबकि शादी को काफी समय बीत चुके हैं.रानी अपनी वे सारे शौक पूरी कर रही हैं और आमतौर मीडिया या तसवीरों से परहेज करने वाले आदित्य का यह स्वरूप भी लोगों के सामने आ रहा है. अभिनेत्रियों की जिंदगी भी अजीब होती है. उन्हें एक बार कैमरे की लत लग जाये तो दौलत शोहरत सबकुछ हासिल करने के बावजूद कैमरे से लंबे अरसे तक दूर रहना उन्हें रास नहीं आता. वह चाहती हैं कि कैमरा उनका पीछा करते रहे. भले ही सार्वजनिक स्थलों पर यह दिखायें कि उन्हें मीडिया नहीं चाहिए. हकीकत यह है कि वे हमेशा मीडिया और कैमरे से अपना पीछा कराना चाहती हैं. अगर कैमरा उनका पीछा करना छोड़ दें तो वे ऐसी कई हरकतें या हथकंडे अपनाती हैं, जिससे वह सुर्खियों में बनी रहें. धारावाहिक ड्रीम गर्ल में अभी आयशा सरीन सुपरस्टार की कहानी कुछ यों ही बयां की जा रही है कि वह अपनी छवि बदलने के लिए फिल्में कर रही है. फिल्म हीरोइन भी इस दर्द को बखूबी दर्शाया गया है. हिंदी फिल्म की चंद अभिनेत्रियों ने ही कैमरों से दरकिनार कर लिया है. लेकिन कई अभिनेत्रियां फिल्में न करने के बावजूद सुर्खियों में बने रहना जानती हैं और वे इसके लिए सारे हथकंडे अपनाती नजर आती हैं

जयेदव की याद में

अल्लाह तेरो नाम...ईश्वर तेरो नाम...यह गीत आज भी कर्णप्रिय हैं.लोगों की जुबां पर भले ही यह गीत चढ़ा हो. मगर शायद ही लोगों को इस गाने के संगीतकार याद हों. लेकिन हाल ही में मुंबई की एक संस्था जो लगातार साहित्य और सिनेमा जगत की ऐसी शख्सियतों को याद कर रही हैं, चौपाल के माध्यम से जयदेव पर एक खास कार्यक्रम का आयोजन किया. खास बात यह थी कि संगीतकार जयदेव के परिवार के सदस्यों में ंशेष रह चुके उनके भांजे जो कि फिलवक्त लंदन में हैं और डेनटिष्ट हैं, वे इस खास कार्यक्रम के लिए लंदन से भारत आये है. जयदेव पर इस खास कार्यक्रम में कई नयी जानकारियां मिलीं और उन जानकारियों के आधार पर यह यकीन किया जा सकता है कि जयदेव एक बेहतरीन संगीतकार थे. लेकिन उन्हें अनेक मौके नहीं मिले. फिल्म इंडस्ट्री में होनहारों को मौके न मिलने से कई प्रतिभाओं का नुकसान हुआ है और उनमें से एक जयदेव भी थे. जयदेव उन संगीतकारों में से एक थे, जिन्होंने नये लोगों को सबसे ज्यादा मौके दिये. उस दौर में जब लता और आशा ही गायिकी में लोगों की पहली पसंद होती थी. उस दौर में जयदेव ने छाया गांगुली, माया, फय्याज जैसी गायिकाओं को मौके दिये. घरौंदा फिल्म के गीत तुम्हे हो न हो उन्हीं गीतों में से एक है.जयदेव साहब को न सिर्फ फिल्मी बल्कि गैर फिल्मी  गानों की भी अच्छी समझ थी. उन्होंने कई भजनों व गजलों को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया. एक अकेला इस शहर में...दो दीवाने शहर में...दोनों एक ही दर्ज पर बने दो गीत थे और दोनों एक होकर भी एक दूसरे से जुदा थे. हरिहरण ने स्वीकारा कि आज वह जो कुछ भी हैं जयदेव साहब की वजह से ही हैं. उनके साथी गीतकार नक्ष लायपुरी ने अपनी यादों को सांझा करते हुए बताया कि जयदेव को गपशप में गीतों की धून बनाने की आदत थी और उन्होंने कभी किसी की बुराई नहीं की.

शोले व वर्तमान सिनेमा

शोले के 40 साल हाल ही में पूरे हुए हैं. हिंदी सिनेमा के इतिहास में बनी शोले एक ऐसी फिल्म है, जिसे लेकर आज भी कई शोध, कई तर्क जारी है. नसीरुद्दीन शाह ने अपनी किताब में जाहिर किया है कि वे शोले को महान फिल्मों में से एक नहीं मानते. उन्होंने एक महत्वपूर्ण सवाल उठाया कि किसी को इस विषय पर भी शोध करना चाहिए कि क्या वजह थी कि शोले को उस दौर में एक महान फिल्म साबित किया गया. जबकि शोले कई हॉलीवुड फिल्मों की नकल थी. फिल्म में चार्ली चैप्लीन की फिल्मों के भी कई दृश्य उधार लिये गये थे. दरअसल, जिस दौर में शोले में आयी, उस दौर में इंटरनेट व आमलोगों के बीच इतने एक्सपोजर नहीं थे. मनोरंजन के ही माध्यम काफी सीमित थे. ऐसे में जब शोले आयी तो लोगों ने महसूस किया कि यही उम्दा फिल्म है. लेकिन इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता है, कि भले ही शोले ने सिनेमा ने कोई ठोस योगदान न दिया हो. लेकिन मसाला फिल्मों की कड़ी में मल्टी स्टार्स को ेलेकर बनी फिल्मों व सफलता के सूत्र को जरूर उजागर कर दिया था. शोले के ट्रेंड पर अब भी फिल्में बनती आ रही हैं. सिर्फ पृष्ठभूमि बदली है. लेकिन कई चीजें ज्यों की त्यों ही हैं. आज शायद शोले रिलीज होती तो उसे अक्षय कुमार, सलमान खान की मसाला ब्रांड फिल्मों की तर्ज पर बनी फिल्मों में से एक माना जाता. अमिताभ बच्चन ने शोले की कामयाबी के  दौरान हुए एक प्रेस कांफ्रेंस में कई बातें दोहरायीं. उन्होंने बताया कि वे गब्बर का किरदार क्यों जीना चाहते थे. दरअसल, गब्बर ही शोले का एकमात्र ऐसा किरदार था, जिसने सिनेमा में एक नया किरदार का आविष्कार किया था. इससे पहले डाकुओं को फिल्म में सिर्फ लूटपाट मचाते देखा गया था. लार्जर देन लाइफ वाला खलनायक पहली बार परदे पर था. इसलिए लोगों को गब्बर आज भी याद हैं.

टूंग टूंग बाजे

संगीत निर्देशिका स्रेहा खानवालकर ने कुछ सालों पहले एम टीv  के trimp के माध्यम से एक यात्रा पर निकली थीं. जहां उन्होंने कई नयी प्रतिभाओं की खोज की. यह अन्य रियलिटी शो से जुदा रियलिटी शो था. जहां प्रतिभाओं की अलग तरीके से खोज की गयी थी. उसी दौरान नूरा सिस्टर्स स्रेहा से टकरायीं और टूंग टूंग गीत का निर्माण हुआ. यह गीत उसी दौर में बेहद लोकप्रिय हो चुका था. संगीत प्रेमियों ने इसे बेहद पसंद किया. लेकिन अब जबकि यह फिल्म सिंह इज ब्लिंग का एंथम सांग बना है तो जाहिर है, इसकी पहुंच और अधिक बढ़ेगी. अक्षय कुमार की इस नयी फिल्म में टूंग टूंग की गूंज दूर तक फैल रही है. दरअसल, हकीकत यही है कि ऐसे गीत जब फिल्मों का हिस्सा बन जाते हैं तो जनमानस तक अधिक पहुंच जाते हैं. फिर चाहे वह ससुराल गेंदा फूल हो, या राहत फतेह अली खान का गीत मैं तैनू समझावा हो...यह सारे गाने लोगों की जुबां पर उस वक्त चढ़े, जब फिल्मों का हिस्सा बने. यहां गौरतलब बात यह भी है कि जिस दौर में गीत संगीत व म्यूजिक वीडियो का दौर था. कलाकारों व प्रतिभाओं को अपनी पहचान बनाने के लिए किसी फिल्म पर निर्भर होने की जरूरत नहीं थी. चूंकि वे म्यूजिक वीडियो लोगों के घरों तक दाखिल हो रहे थे और काफी पसंद भी किया जाता था. कई लोक गायक इन्हीं म्यूजिक एलबमों की वजह से लोकप्रिय हुए. कुछ मिका सिंह जैसे भाग्यशाली रहे, जिन्हें अब फिल्मों में शोहरत मिल रही है. लेकिन कई गुमनाम हो गये.धारावाहिक बालिका वधू में जब मामे खान का चौधरी गीत बैकग्राउंड में लोगों की कानों तक पहुंचा तो लोगों ने मान लिया कि यह धारावाहिक के लिए विशेष रूप से तैयार किया गया है, जबकि यह एक लोकगीत है. यही विजुअल मीडियम की खासियत है कि वह दर्शकों के दिलों तक जल्दी दस्तक दे पाता है. शेष माध्यम देर से पहुंचते हैं

जॉन व मध्यम वर्ग

 जॉन अब भी खुद को मध्यम वर्ग का ही मानते हैं. वे इंटरव्यू के दौरान भी स्टारडम न दिखाते हुए सभी से आदर भाव से मिलते हैं. हाल में जब वे वेलकम बैक के लिए बातचीत करने आये. उन्होंने सिर में तेल लगा रखा था. पैर में चप्पल डाल रखी थी.जॉन के परदे के अवतारों को देख कर शायद ही उनके प्रशंसक इस बात पर विश्वास करें, लेकिन वर्तमान दौर में शायद ही किसी स्टार को मैंने इस हुलिये में देखा है. यही दर्शाता है कि जॉन कितने सुरक्षित हैं और उनमें कहीं से भी खो जाने का डर नहीं है. जॉन ने स्वीकारा है कि किसी दौर में उन्हें जिप्सी खरीदनी थी और उस वक्त उसकी कीमत 80 हजार रुपये थी. लेकिन उनके पास उतने पैसे ही नहीं थे. लेकिन आज जब उनके पास पैसे हुए भी तो उनकी इच्छा नहीं बदली. उन्होंने जिप्सी खरीदी और आज भी वे इसी से यात्रा करते हैं. उनके फिल्मी दोस्त उन्हें राय भी देते हैं कि वे अपनी कार बदल दें. लेकिन जॉन को इससे बेहद प्यार है.दरअसल, गौर करें तो हमारी महत्वकांक्षा को हम प्राय: अपनी आर्थिक स्थिति पर तय करते हैं. और जैसे जैसे हम आर्थिक रूप से समृद्ध होते जाते हैं. हमारी महत्वकांक्षा फौरन बदल जाती है. जबकि महत्वकांक्षा हमेशा आजाद होनी चाहिए. एक व्यक्ति जिसके पास चार पैसे खाने के लिए नहीं, फिर भी वह पंच सितारा होटल के ख्वाब देखता है तो वह भी गलत नहीं और उसे पाने की कोशिश भी करता है. लेकिन जब वह इसमें कामयाब हो जाता है तो उसकी महत्वकांक्षा पांच से बढ़ कर सात सितारा होटल की हो जाती है. चूंकि हमारी महत्वकांक्षा हमारी आर्थिक स्थिति की बेड़ियों में जकड़ी हुई है. सब कुछ हासिल करने के बावजूद उस आजादी को बरकरार रख पाना एक कठिन तपस्या ही है और शायद इस तपस्या में जॉन कामयाब हैं. और उनकी यह खासियत निस्संदेह उन्हें औरों से अलग श्रेणी में लाकर खड़ा कर देती है.

रईस का फर्स्ट लुक

स्टार प्लस पर इन दिनों डांस प्लस की शुरुआत हुई है. यह शो पूरी तरह से डांस को समर्पित है. इस शो में रेमो जज की भूमिका में हैं और तीन कैप्टन धर्मेश, शक्ति और सुमित हैं. जो अपनी अपनी टीमों को दक्ष कर रहे हैं. शो में होस्ट की भूमिका में राघव हैं. राघव भी बेहतरीन डांसर हैं. डांस प्लस के आगामी कुछ एपिसोड को देखने के बाद यह स्पष्ट रूप से नजर आ रहा कि इस शो के मेकर्स ने इस बात का खास ख्याल रखा है कि शो में शो के कांसेप्ट के मुताबिक सभी दक्ष कोरियोग्राफरों को ही जज से लेकर होस्ट तक की कुरसी दी गयी है. आमतौर पर होस्ट की भूमिका में किसी ग्लैमरस चेहरे को जगह दी जाती है. उनका डांस या सिंगिंग जैसी विधाओं से कोई लेना देना नहीं होता. निस्संदेह कुछ होस्ट इसे भलिभांति निभाते भी हंै. किसी दौर में अन्नू कपूर अंत्याक्षरी लेकर आते थे. वे प्रतिभागियों से अधिक गाने में माहिर थे. सो, वे उस शो के लिए बिल्कुल परफेक्ट नजर आते थे. उन्होंने मेरी आवाज सुनो की भी एंकरिंग की थी. सोनू निगम और शान ने सारेगामापा जैसे शोज की एंकरिंग की. इसे आगे उदित नारायण के बेटे ने बढ़ाया. हाल के सीजन में वे होस्ट बने. लेकिन पिछले कुछ सालों में जितनी तेजी से रियलिटी शो का स्वरूप बदला है. उतनी ही तेजी से शो के होस्ट के चुनाव के तरीकों में भी बदलाव आया है. डांस प्लस में अब तक  उस ग्लैमरस सोच को बदला है. और वाकई रेमो अपनी टीम के साथ मिल कर कुछ नया और बेहतर रचने की कोशिश कर रहे हैं. उम्मीद है कि आगे भी उन पर टीआरपी बढ़ाने के लिए या  बेतुकी बातें करने के लिए चैनल की तरफ से दबाव न बढ़े. अगर वाकई यह मुमकिन होता है कि तो डांस प्लस हाल के दौर में प्रसारित होने वाले रियलिटी शो में अब तक का श्रेष्ठ रियलिटी शो होगा. रेमो प्रभुदेवा के खोज हैं.शक्ति, धर्मेश रेमो के. सो, आनेवाले समय में ये भी नयी विरासत बनाये.

सूरज व मुगलएआजम

सूरज बड़जात्या ने अपनी नयी फिल्म प्रेम रतन धन पायो में मुगलएआजम फिल्म को आदरांजलि देते हुए एक भव्य सेट का निर्माण करवाया है. यह भव्य सेट मुगलएआजम में बने शीश महल की तरह ही है. गौरतलब है कि उस दौर में के आसिफ ने काफी मुश्किलों का सामना करते हुए शीश महल के सेट को अस्तित्व में ला पाने में समर्थ हो पाये थे. चूंकि तकनीक उस वक्त सीमित थी. सो, जब कैमरे पर वे शीशे चमक रहे थे तो उन्होंने उस पर कपड़े लगवाने के साथ साथ शीशों पर मोम रगड़वाया था.ताकि शीशे कैमरे पर चमके नहीं. फिर उस सेट पर जब प्यार किया तो डरना क्या...फिल्माया गया और आज वह क्लासिक गीत है. गौरतलब है कि सूरज ने यह सेट नितिन देसाई से बनाया है. सूरज ने इस बारे में कहा है कि वे हमेशा मुगलएआजम को देख कर प्रभावित होते रहे हैं. और यही वजह है कि उस दौर में जब तकनीकी सुविधाएं उपलब्ध नहीं थीं. और फिर भी के आसिफ ने इस सपने को पूरा किया. सो, सूरज के आसिफ को आदरांजलि देना चाहते हैं. दरअसल, वर्तमान दौर में अगर गौर करें तो सूरज की तरह पुराने दौर के निर्देशकों को आदरांजलि देने का यह नायाब तरीका कम लोगों ने ही अपनाया है. अब तक गीत संगीत की दुनिया व गीतों को नया रूप देकर आदरांजलि दी जाती रही है. लेकिन सूरज ने एक कठिन रास्ता चुना. हालांकि खुद सूरज ने कहा है कि फिल्म में यह सलमान खान और कहानी में अहम किरदार के रूप में होगा. सूरज पारिवारिक फिल्में बनाने में माहिर रहे हैं और व्यक्तिगत जिंदगी में भी वे विवादों से कोसों दूर रहते हैं. उन्होंने खुद को कभी साबित करने की कोशिश नहीं की है. फिल्म नवंबर में रिलीज होने वाली है और अब तक इसका कोई शोर शराबा नहीं. इससे भी यह बात स्पष्ट होती है कि अब भी सूरज ओल्ड स्कूल के मूल्यों को ही महत्व देते हैं और उन्हें पछतावा भी नहीं