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20141203

खुद को नहीं मानता दीवाली का बादशाह : शाहरुख खान


शाहरुख खान की फिल्में दीवाली पर हमेशा सफल रही हैं. रा.वन के अलावा उनकी लगभग हर फिल्म दीवाली पर ही रिलीज हुई है. हालांकि शाहरुख खुद को दीवाली का बादशाह नहीं मानते. इस बार उनकी फिल्म हैप्पी न्यू ईयर दीवाली के मौके पर ही रिलीज हो रही है.

शाहरुख, जब अन्य प्रोडक् शन की फिल्में कर रहे होते हैं और फिर अपने होम प्रोडक् शन की फिल्म कर रहे होते हैं तो क्या फर्क महसूस करते हैं?
दरअसल, ऐसा नहीं है कि बाकी की जो फिल्में करता हूं. उनसे मोहब्बत नहीं हैं. वे भी दोस्तों की ही फिल्में होती हैं. लेकिन रेड चिलीज में जो फिल्में हम बनाते हैं. हम परिवार की तरह फिल्में बनाते हैं. अब जैसे रोहित ने पहले भी फिल्में बनाई हैं. लेकिन आप उनसे पूछें चेन्नई बनाने में उन्हें कितना मजा आया. होम प्रोडक् शन होती हैं फिल्में तो ऐसी कई चीजें होती हैं, जो आप खुद का भी इनपुट दे सकते हैं. और वह मानी भी जाती है. कई बार वह फिल्म की बेहतरी के लिए ही होती है तो ऐसे में थोड़ा लगाव हो जाता है अधिक़.
लोगों का मानना है कि आप अपनी होम प्रोडक् शन की फिल्मों का प्रोमोशन ज्यादा करते हैं?
देखिए इसके बारे में मेरा स्पष्ट नजरिया है. मेरी फिल्में बड़ी और कर्मशियल फिल्में होती हैं. हम सिर्फ फिल्में किसी क्लास के लिए नहीं बनाते. हम हर तबके के लिए फिल्में बनाते हैं और मेरा मानना है कि हमें दर्शकों को बुलावा देना ही होगा. ताकि वह आयें फिल्म देखने.लेकिन यह फिल्म के विषय पर भी निर्भर करती है. जैसे उदाहरण के तौर पर अगर मैं चक दे इंडिया बनाता हूं तो उसके लिए मैं कॉमेडी नाइट्स विद कपिल के सेट पर नहीं जाऊंगा. चूंकि फिल्म का सब्जेक्ट सीरियस है. लेकिन हैप्पी न्यू ईयर मस्ती मजाक वाली फिल्म है तो इसका प्रोमोशन भी उसी अंदाज में होना चाहिए. फिल्म में डांस गुप्र की कहानी है तो इसलिए मैंने तय किया था कि हम पूरे प्रोमोशन में सभी साथ होंगे. ताकि लोगों को स्पष्ट हो जाये कि वह देखने क्या जा रहे हैं. चूंकि फिल्म की टिकट एक बार खरीदने के बाद आप उसे लौटा नहीं सकते. तो प्रोमोशन से ही दर्शकों को पता चल जाये कि वह क्या देखने जा रहें. दीवाली का अवसर है. लोग होड़ में आयेंगे देखने.तो उन्हें कहीं से यह न लगे कि वह ठगे गये हैं कि अरे प्रोमोशन में तो कुछ और दिखा रहा था. फिल्म तो कुछ और है. सो, चार पांच सालों से मैंने अपनी मार्केटिंग टीम को ये बातें स्पष्ट रखी हैं कि डांस गुप्र पर फिल्म है तो हमें डांसिंग शोज, कॉमेडी शोज में जाना ही चाहिए. इसलिए हमने जीटीवी का दिल से नाचे इंडियावाले शो भी तैयार किया. प्रोमोशन के पीछे मेरे स्पष्ट लॉजिक हैं. मैं उन प्रोडयूर्स में नहीं हूं जो कुछ छुपा कर रखूं फिल्म के बारे में.
दीवाली में अब तक आपकी जितनी फिल्में रिलीज हुई हैं. कामयाब रही हैं. तो क्या दीवाली पर फिल्में रिलीज करने का निर्णय आप सोच समझ कर करते हैं?
नहीं, बिल्कुल नहीं मैं खुद को दीवाली का बादशाह नहीं मानता. लोगों ने मान लिया है, क्योंकि मेरी ज्यादातर फिल्में रिलीज हुई हैं दीवाली में और हिट भी रही हैं. लगभग 11 फिल्में सफल रही हैं तो लोग ऐसी अवधारणा मान लेते हैं. लेकिन मैं अपनी फिल्मों की रिलीज तारीख तब तक घोषित नहीं कर सकता. फराह तो चाहती थी कि फिल्म ईद पर रिलीज करे. लेकिन मैंने उसे समझाया कि हड़बड़ी मत करो. जब तक शूटिंग खत्म न हो जाये. जब और फिल्म पोस्ट प्रोडक् शन में न चली जाये. मैं घोषणा कर दूं और पता चले कि फिल्म बनी ही नहीं है तो मुसीबत हमें ही होगी. हां, यह जरूर है कि दीवाली पर रिलीज होने वाली फिल्में दर्शक देखना पसंद करते हैं, क्योंकि परिवार के लोग साथ होते हैं तो मस्ती का माहौल होता है.
आप पिछले कुछ सालों से एक साल में एक ही फिल्म कर रहे हैं. तो अचानक ऐसा निर्णय क्यों लिया?
यह कोई सोचा समझा निर्णय नहीं हैं. मैंने ऐसा नहीं कहा है कि मैं एक साल में एक फिल्म करूंगा. मैंने कहा है कि एक वक्त पर एक फिल्म करूंगा. जो सभी करूंगा, क्योंकि एक साथ दो फिल्में करना बहुत टाइरिंग होता है.यह फिल्म पर डिपेंड करता है. अब जैसे फैन के लिए 170 दिनों की शूटिंग करनी है तो ऐसे में रईस की शूटिंग मुश्किल होती. मुझे लगा कि अभी पहले इसकी पूरी कर लूं तो इसलिए रईस की डेट्स को थोड़ा आगे बढ़ाया है. फिर शूटिंग, डबिंग और सारे प्रोसेस होते होते एक साल निकल ही जाते हैं. इसलिए लोगों को लगता है कि मैंने ऐसा कुछ सोच कर किया है. लेकिन यह हकीकत नहीं है. फैन लंबी फिल्म है. उसमें मैं दोहरी भूमिका निभा रहा हूं तो उसमें वक्त लगेगा.
आप अपने होम प्रोडक् शन में किन आधार पर फिल्मों को प्रोडयूस करना पसंद करते हैं?
मैं उन फिल्मों को प्रोडयूस करने में दिलचस्पी लेता हूं, जो फिल्में वाकई प्रोडयूस करने में टफ होती हैं. जैसे अशोका आॅफबीट फिल्में थी,बिल्लू, पहेली सारी आॅफबीट फिल्में थीं और मैंने इन्हें प्रोडयूस किया. अगर मुझे 200 करोड़ की लालसा होती तो मैं ऐसी फिल्मों को प्रोडयूस नहीं करता, जहां कहानी है. बॉक्स आॅफिस कलेक् शन नहीं.हां, मगर कोशिश यह भी होती है कि इसके साथ ही साथ ऐसी फिल्में भी बनाऊं जो कर्मशियल वाइवल हो क्योंकि हमें मेरी कंपनी में काम कर रहे 280 लोगों की जीविका को भी ध्यान में रखना है.कोशिश होती है कि हर तरह की फिल्मों में बैलेंस बना रहे. साथ ही इस बात का ख्याल रखता हूं कि अब जैसे हैप्पी न्यू ईयर जैसी लंबी फिल्म के लिए काम किया है तो अगली जो फिल्म करूं थोड़ी कोजी वाली फिल्म हो. जिसमें थोड़ा रिलेक्स हो सकूं. सो, इस आधार पर फिल्मों का चुनाव करता हूं.

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