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20151130

एक महत्वपूर्ण विषय पर बनी हैं एयरलिफ्ट : अक्षय कुमार


 अक्षय कुमार फिल्म एयरलिफ्ट से एक अलग तरह की कहानी कहने दर्शकों के सामने आ रहे हैं. हाल ही में मुंबई के फिल्मीस्तान स्टूडियो में स्थित सेट पर अक्षय कुमार से  बातचीत हुई. उन्होंने फिल्म के विषय व कई पहलुओं पर खास बातचीत की.

 अक्षय, एयरलिफ्ट की कहानी का विषय बिल्कुल अनसुना सा है. जबकि यह उस दौर की बड़ी खबरों में से एक रही होगी?
जी हां, यह उस दौर की बड़ी खबरों में से एक थी. लेकिन आश्चर्यजनक बात यह है कि इस घटना की चर्चा उस दौर में भी न तो किसी अखबार में थी. न ही किसी चैनल पर दिखाई गयी थी. इसके पीछे वजह यही थी कि इस घटना से संबंधित राजनैतिक इश्यू बहुत थे. उस दौर में हम सद्दाम हुसैन के नजदीक थे. तो यह खबर दबा दी गयी थी.वरना, उस दौर में आम सिविलियन   1लाख 70 हजार से अधिक लोगों को बचा कर ले आते हैं. वह भी 59 दिन में और इतनी बड़ी खबर लोगों को पता ही नहीं. हाल ही में यमन की खबर के बारे में सभी जानते हैं. लेकिन इस खबर के बारे में किसी को जानकारी नहीं. तो मुझे लगा कि यह कहानी दर्शकों के सामने तो आनी ही चाहिए.
अगर अधिक दस्तावेज मौजूद नहीं हैं तो रिसर्च करने में परेशानी तो आयी होगी?
खास बात यह है कि हमारे निर्देशक के कई रिलेटिव्स उस दौर में इस घटना में फंसे थे. वे लोग केरल से हैं और उन्होंने इसके बारे में सारी जानकारी दी तो हम सच्चाई के बहुत करीब इसी वजह से पहुंच पाये हैं.
फिल्म में हमने सुना है गाने भी हैं.ऐसी गंभीर फिल्म में गानों की गुंजाईश बनती है?
यह फिल्म गंभीर होने के साथ साथ इमोशनल फिल्म भी है. और इमोशन को दिखाने के  िलए गानों की जरूरत होती ही है. टीसीरिज के भूषण ने चार गाने दिये हैं और बेहतरीन गाने हैं. इमोशनल गाने हैं. दर्शकों को पसंद आयेंगे.
आपने कहा कि उस दौर में पॉलिटिकल इश्यू की वजह से यह खबर दब गयी थी. तो अब जबकि यह फिल्म आ रही है तो कहीं न कहीं उन्हें परेशानी नहीं होगी?
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता तो हर किसी के पास है. आप लोगों को भी मनाही के बावजूद आप वही लिखते हैं. जो आप लिखना चाहते हैं. तो फिर उस वक्त भी तो कोई कुछ कर नहीं पाता. स्पष्ट है कि हम हकीकत पर आधारित रियल स्टोरी दिखा रहे हैं. जाहिर है, हम झूठ का सहारा नहीं ले रहे और न ही किसी पब्लिसिटी के लिए कुछ करने की कोशिश कर रहे हैं तो मुझे नहीं लगता कि कोई परेशानी होनी चाहिए. यह एक देशभक्ति की फिल्म है कि किस तरह तीन आम लोगों ने मिल कर जो कि एक बिजनेसमैन थे लेकिन ेदश के लिए इतना बड़ा कदम उन्होंने उठाया. और उसे सफल करके दिखाया.
फिल्म में उस दौर को क्रियेट करना कितना कठिन रहा?
यह जिम्मेदारी निर्देशक ने ही उठायी है. हां, मगर मैंने अपने लुक में और अभिनय में वैसी चीजें रखने की कोशिश की है कि वह इस दौर का नजर न आये. कई विटेंज चीजों का इस्तेमाल हुआ है.
अक्षय, आप सिंह इज ब्लिंग, हाउसफुल जैसी फिल्में भी करते हैं फिर बेबी, हॉलीडे जैसी भी करके लोगों को चौंकाते हैं. आपको खुद का कौन सा किरदार अधिक पसंद है?
मैं तो हर तरह के किरदारों को निभाने में यकीम रखता हूं. जैसे मैं सिर्फ बेबी जैसी फिल्में भी नहीं करते रह सकता. चूंकि यह फिल्में काफी गंभीर हो जाती हैं तो फिर मुझे ब्रेक की जरूरत हो जाती है. अभी मैं एयरलिफ्ट की शूटिंग खत्म करके हाउसफुल 3 की शूटिंग में लग जाऊंगा और मैं काफी खुश रहूंगा चूंकि वैसी फिल्मों में भी अलग मस्ती होती है और हम तो काफी मजे भी कर रहे हैं वहां.तो मुझे हर तरह के किरदार चाहिए.
इनटॉलरेंस को लेकर काफी चर्चाएं चल रही हैं. आपकी क्या राय है?
मैं तो बस इतना जानता हूं कि शूटिंग  कहीं भी करूं. मुझे अपने देश मुंबई लौटने में काफी खुशी मिलती है. मैं कोई हॉलीवुड की फिल्में नहीं कर रहा. न ही दिलचस्पी है . क्योंकि मुझे मेरे वतन से प्यार है. और मैं खुश हूं.
इस दौर में आकर जबकि आप सुपरस्टार हैं, सबकुछ हासिल कर लिया है. फिर भी चुनौती क्या लगती है?
मैं कुछ सालों में 50 साल का हो जाऊंगा. तो इस वक्त भी खुद को फिट रखना, अच्छा काम करना. लगातार खुद को मांझना, लगातार मेहनत करना और अपना 100 प्रतिशत देना कठिन है. अच्छा लगता है जब कोई 27 साल का व्यक्ति आकर मुझे बोले कि मैं उनसे अधिक फिट नजर आता हूं. तो यह चुनौती है कि दर्शकों की डिमांड पर मैं किस तरह खरा उतरूं. 

सेलिब्रिटीज और विवाद


आमिर खान ने हाल ही में एक बयान दिया है, जिसे लेकर देशभर में उनका विरोध हो रहा है. यह पहली बार नहीं, जब किसी सेलिब्रिटी को उनकी बयानबाजी के लिए इस तरह के विरोध का सामना करना पड़ा हो.


आमिर खान का विरोध
आमिर खान ने हाल ही में एक अवार्ड समारोह में कहा कि मेरी पत् नी किरण राव इस देश की परिस्थिति को लेकर चिंता में रहती है और जब वह मुझसे कभी यह सवाल करती है कि क्या हमें यह देश छोड़ना पड़ेगा तो मैं किरण के ऐसे सवालों को लेकर अचंभित हो जाता हूं. आमिर ने अपनी चिंता व्यक्त की और इसे लेकर देशभर में उनका विरोध हो रहा है. उन्हें टिष्ट्वटर पर तरह तरह के ताने सहने पड़ रहे हैं. खुद फिल्म इंडस्ट्री के कई लोग उनकी ऐसी बयानबाजी पर नारे लगा रहे हैं, जिनमें अनुपम खेर और परेश रावल प्रमुख  हैं. यहां तक कि ऋषि कपूर ने उनके विरोध में भाषणबाजी की है. वही रणबीर कपूर ने उन्हें सपोर्ट किया है. आमिर खान के घर के बाहर काफी विरोध हो रहा है. कई राजनैतिक पार्टियां उन्हें बार बार परेशान कर रही हैं.
एआर रहमान
कुछ महीनों पहले एआर रहमान के भी बयान पर उन्हें काफी विरोध का सामना करना पड़ा था. और एक बार फिर एआर रहमान ने आमिर को सपोर्ट किया है. उन्होंने कहा है कि वे भी आमिर की तरह ही सोचते हैं. उन्होंने भी परेशानी झेली है. उन्होंने कहा कि कोई भी आंदोलन हिंसा के साथ नहीं लड़ा जाना चाहिए. आखिर हम महात्मा गांधी के देश से हैं और उन्होंने हमें सिखाया है कि किस तरह हिंसक न बने. लेकिन आज परिस्थिति बहुत अलग है.
सलमान खान का विरोध
हाल ही में सलमान खान ने यकूब मेनन की फांसी पर कुछ बयानबाजी की थी. जिसका अभिप्राय लोगों ने यह लगा लिया कि सलमान नहीं चाहते कि यकूब को फांसी हो. उन्हें गद्दार और कई नामों से पुकारा गया. उनके देश से निकाले जाने की बात उनके ही फैन्स ने की. बाद में काफी मुश्किलों से यह विवाद शांत हुआ.
शाहरुख खान
हाल ही में शाहरुख खान ने अपने जन्मदिन के मौके पर इनटॉलरेंस को लेकर काफी बातचीत की. लेकिन शाहरुख खान की पूरी बातचीत को सुने बगैर ही उन पर काफी विवाद होने शुरू हो गये. एक पाकिस्तानी राजनेता ने जब उन्हें अपने देश आने का बुलावा भेजा तो विवाद ने और अधिक तूल पकड़ ली थी. सोशल साइट्स पर शाहरुख को काफी नाराजगी झेलनी पड़ी. लेकिन यह शाहरुख की खूबी है कि वह अपनी बात बेबाकी से रखते हैं. उन्होंने इस विषय पर अपनी राय यह रखी थी कि देश में कला को सम्मान मिलना चाहिए और इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप किस धर्म के हो या कहां से आये हो. लेकिन लोगों ने बिना पूरी बात जाने उन पर बहस शुरू कर दी थी.
तीनों खान बनते रहे हैं निशाने
यह हकीकत है कि बॉलीवुड में इन तीनों खानों को अधिकतर फोकस किया जाता रहा है. उनको निशाना बनाया जाता रहा है. इस वजह से एक विशिष्ट धर्म के लोग यह मान लेते हैं कि चूंकि वे उस धर्म से हैं इसलिए उन्हें परेशानियां होती हैं. सबसे बुरी स्थिति तब आती है, जब स्टार्स के घर पर जाकर लोग विवाद खड़ी करते हैं और उनके परिवार वालों को खरी खोटी सुनाने लगते हैं. इस बार आमिर की पत् नी किरण राव पर बहुत तरह के आरोप लगाये जा रहे हैं. उनके बच्चों के बारे में कई बातें कही जा रही हैं. जाहिर है आमिर को यह बातें बिल्कुल अच्छी नहीं लग रही होंगी. लेकिन उन्होंने अब तक इस बारे में कोई सफाई नहीं दी है. दुख की बात यह है कि इंडस्ट्री के कई लोग जिनमें अनुपम खेर, परेश रावल, राम गोपाल वर्मा जैसे नाम शामिल हैं. वे लोग आमिर के बारे में आग उगल रहे हैं. शाहरुख खान को भी काफी परेशानी झेलनी पड़ी हाल में. उनके घर के बाहर भी काफी विवाद हुआ. यह पहली बार नहीं है जब सेलिब्रिटीज निशाना बनते रहे हैं. उनकी कही कोई भी बात को आम लोग अलग तरीके से लेते हैं और काफी हंगामा बरप जाता है. सेलिब्रिटीज को तो टिष्ट्वटर पर भी छोटी सी गलती के लिए काफी ताने सुनने पड़ते हैं . यही वजह है कि सेलिब्रिटीज आम मुद्दों पर बात नहीं करते. वे सिर्फ अपनी फिल्म पर ही बातचीत करना चाहते हैं.

दिल के करीब है लाजो : अंकिता


जीटीवी पर प्रसारित हो रहे धारावाहिक लाजवंती को दर्शकों का बेहद प्यार मिला है. उपन्यास पर आधारित किसी धारावाहिक को अरसे बाद इस तरह की प्रतिक्रिया मिली है. शो में लाजवंती का लीड किरदार निभा रहीं अंकिता का यह पहला शो है और वे अपनी पहली शानदार शुरुआत से काफी खुश हैं.
अंकिता, यह आपका पहला शो है. पहला मौका कैसे मिला?
मैं चंडीगढ़ से हूं और इस बात के बारे में जानती थी कि इस तरह के किसी शो का आॅडिशन होने वाला है. चूंकि मेरी भाषा को लेकर मुझे किसी तरह की परेशानी नहीं थी. इस शो की यह डिमांड थी तो मैंने तय किया कि मैं आॅडिशन दूंगी. मैंने आॅडिशन दिया और उसके बाद भूल भी गयी थी. लेकिन बाद में मुझे प्रोडक् शन हाउस से फोन आया कि मेरा सेलेक् शन हो गया है और वह भी मुझे शो में लीड किरदार निभाने का मौका मिला है.
इस शो के किस तरह तैयारी की थी आपने?
मुझे बहुत ज्यादा दिक्कत नहीं हुई थी. क्योंकि मेरी भाषा पर अच्छी पकड़ है. और खास बात यह रही कि कास्टिंग होने के 20 दिनों के बाद हमने शूटिंग शुरू की थी. तो उन 20 दिनों में हमारा अच्छा वर्कशॉप हो गया था. सो, मेरे और मेरे को स्टार के बीच की केमेस्ट्री को अच्छा बनाने के लिए हम दोनों को एक दूसरे के साथ वक्त बिताने का मौका मिला. फिर इस शो से जुड़ी तो यह उपन्यास पढ़ी. यह एक बेहतर प्रेम कहानी के साथ साथ विभाजन के दौरान की स्थिति को खूबसूरती से दर्शाया गया है.
हमने सुना आपने अभिनय के लिए इंजीनियरिंग  छोड़ दी?
हां, क्योंकि मैं शुरू से एक्टिंग ही करना चाहती थी. और कुछ नहीं करना चाहती थी. तो मुझे इस बात का कोई अफसोस नहीं है. मैंने एक शो भी जीता था एनडीटीवी का टिकट टू बॉलीवुड. उस वक्त से मेरा आत्मविश्वास और बढ़ गया था. हां, लेकिन मेरे पापा ने कहा कि तुम्हे जो करना है करो. लेकिन पहले पढ़ाई पूरी करो, क्योंकि मेरे घर में सभी बहुत पढ़े लिखे हैं. सो, इसलिए मैंने पहले पढ़ाई पूरी की. मेरे परिवार में सभी डॉक्टर हैं.
आपने कहा कि आपको एक्टिंग में हमेशा से दिलचस्पी रही तो आपने इसके लिए क्या तैयारियां बचपन से कर रखी थीं?
मैंने अपने शरीर का ख्याल रखा है. लुक का ख्याल रखा है. साथ ही मैंने क्लासिकल डांसिंग भी सीख रखा है. नेशनल लेवल पर भी मैंने काफी अवार्ड हासिल किये हैं. मैंने एक शॉर्ट फिल्म भी बनाई थी जो टोरंटो फिल्म फेस्ट में सेलेक्ट भी हुई थी. सो, मुझे पता था कि मैं अभिनय भी कर सकती हूं.
इस शो के लेखन से राजिंदर सिंह बेदी की पोती भी जुड़ी हुई हैं तो उनका सहयोग कितना मिलता है?
काफी मिलता है, वह हमें सारी बारीकियों से वाकिफ कराती है. इस शो की सबसे बड़ी चुनौती थी कि वह दौर क्रियेट किया जाये. लेकिन हमें बहुत सपोर्ट मिला जीटीवी का भी उन्होंने कोई बंदिशें नहीं रखी हैं. सो, सेट काफी अच्छा बना है. पीरियोडिक चीजें रचना तो कठिन होता ही है. लेकिन इला बेदी दत्ता के होने से हम विषय के साथ न्याय कर पा रहे हैं. इस बात को लेकर हम बिल्कुल स्पष्ट थे. मैं खुशनसीब हूं कि मुझे पहला मौका ही इस तरह के शो से मिला है. चूंकि मैं हमेशा से इसी तरह के किरदारों को निभाना चाहती थीं.
लाजो से अंकिता कितना मेल खाती हैं?
हां, मैं लाजो जैसी ही हूं. आत्मविश्वास मेरा भी ऐसा ही रहा है. जैसा लाजो का रहा है. साथ ही मैं बातूनी भी काफी हूं.
इस इंडस्ट्री को जब नजदीक से जानने का मौका मिलेगा तो कैसा अनुभव महसूस कर रही हैं?
मुझे लगता है कि इस इंडस्ट्री का हिस्सा बनने के बाद ही आपको पता चलता है कि कितनी मेहनत करनी पड़ती है एक्टर्स को. लोग दूर से देख कर इसे सिर्फ ग्लैमर की दुनिया माने. लेकिन नजदीक जाकर ही जब अब काम कर रही तो पता चलता है कि काफी मेहनत करते हैं स्टार्स.

20151126

सफलता से ज़्यादा ज़रूरी असफलता है -रनबीर कपूर


अभिनेता रनबीर कपूर  की फिल्म तमाशा में जल्द ही नज़र आने वाले हैं। इस फिल्म में उनके साथ अभिनेत्री दीपिका पादुकोण भी होंगी,रनबीर इस फ़िल्म को अपने लिए खास करार देते हैं क्योंकि वह अपने पसंदीदा निर्देशकों में से इम्तियाज़ की यह फ़िल्म है,जिनकी फिल्में सही सोच से आती हैं।इस फ़िल्म में मनोरंजन के साथ साथ सन्देश भी है जिससे यह फ़िल्म और खास बन जाती है।रनबीर की इस फ़िल्म और कैरियर पर उर्मिला कोरी से हुई बातचीत
फिल्म के पोस्टर्स पर लिखा गया है वाई ऑलवेज द सेम स्टोरी ,कितनी अलग होगी तमाशा की कहानी
सबसे पहले मैं आपको यह बताना चाहूंगा कि ये बात फिल्म के संदर्भ में नहीं बल्कि हम सभी लोगों के बारे में लिखी गयी है ,कहने का मतलब है कि जिस तरह से मैं रहता हूं आप नहीं ,जिस तरह से आप सोचती हैं ,प्यार करती हैं ,ज़िन्दगी जीती हैं वैसे मैं नहीं हूं या दीपिका नहीं है या फिर आपसे जुड़े भाई बहन भी नहीं होते हैं। सबकी सोच और ज़िन्दगी जीने का तरीका अलग होता है ऐसे में हमारे पेरेंट्स हमसे ये क्यों कहते हैं कि तुम फलां की तरह बनो.उसकी तरह ये करो ,इसी बात को फिल्म में देव यानि मेरे किरदार के ज़रिए बयां किया गया है। दीपिका तारा के किरदार में देव को यही समझती है कि वह खुद की नहीं बल्कि दूसरे की ज़िन्दगी जी रहा है.वह देव के नज़रिए और सोच में बदलाव लाती है.
क्या प्यार में बदलाव ज़रूरी है
हाँ अगर प्यार आपको आपका बेस्ट वर्जन बनाता है तो उस में क्या बुराई है। प्यार का मतलब ही ईमानदारी और सच्चाई से जुड़ा है.आपकी किसी और की नक़ल बनते जा रहे हैं.आप वो नहीं है,आप वो अच्छा कर सकते हैं,जो आप नहीं कर रहे हो दूसरों की नक़ल बनने के चक्कर में. सच्चा प्यार आपको यही बताता है. कहीं न कहीं वह बदलाव लाता है जो आपकी ज़िन्दगी में अहम है 
निजी ज़िन्दगी की बात करे तो प्यार ने आप में क्या बदलाव लाया है
प्यार आपको ऑनेस्ट,ज़िम्मेदार और केयरिंग बनाता हैं। मेरी भी ज़िन्दगी में प्यार ने खुशियों के साथ साथ यही बदलाव लाया है वैसे प्यार का सीधा सम्बन्ध फीलिंग से जुड़ा है और प्यार एक अलग ही दुनिया का नाम है। फिल्मों और किताबों में प्यार की दुनिया बहुत ही ग्लॉसी दिखाई गयी है। रियल लाइफ में प्यार अलग ही एहसास है शायद जब में ७० साल का होऊंगा उस वक़्त अपनी पत्नी के साथ प्यार को सही ढंग से परिभाषित कर पाऊं, उससे जुडी हर चीज़ का जवाब बेहतर तरीके से दे पाउंगा। अभी तो समझने की शुरुवात ही हुई है। 
फिल्म में आपका किरदार क्या है और उससे क्या आप जुड़ाव महसूस करते हैं
फिल्म में मेरा किरदार वेद का है.वेद बनना कुछ और चाहता है लेकिन उसके  माता पिता  इंजीनियर या मार्केटिंग में करियर बनाने को मजबूर कर देते हैं। किस तरह से उसकी प्रोफेशनल लाइफ उसकी पर्सनल लाइफ पर भी हावी हो जाती है और वह अपनी ज़िन्दगी नहीं जी पा रहा है तभी उसकी ज़िन्दगी में तारा आती है और उसकी ज़िन्दगी बदल जाती है। यही फिल्म की कहानी है। जहाँ तक इस किरदार से जुड़ाव की बात है तो मैं किरदार से बहुत जुड़ाव महसूस करता हूँ' भले ही मेरे ऊपर कभी कोई दबाव करियर के चुनाव को लेकर नहीं रहा है लेकिन मैं आसानी से दूसरे की बातों से प्रभावित हो जाता हूँ। इस फिल्म से जुड़ना मेरे लिए लाइफ चेंज एक्सपीरियंस रहा है। मैं नहीं कहता हूं कि इस फिल्म के बाद मैं पूरी तरह से बदल गया हूं लेकिन खुद को और पहचानने में ज़रूर जुट गया हूं। मैं क्या करना चाहता हूं. किस तरह से करना चाहता हूं मैं इंटरव्यू में क्या बोलना चाहूंगा  सब पर मैं ज़्यादा ध्यान देने लगा हूं।  खुद से ज़्यादा इस फ़िल्म ने मुझे जोड़ दिया है।
दीपिका पादुकोण के साथ यह आपकी तीसरी फिल्म है ,आप दोनों ने एक समय पर ही अपने करियर की शुरुवात की थी एक एक्ट्रेस के तौर पर आप उनमें कितना बदलाव पाते हैं
दुनिया की नहीं दीपिका मेरी भी पसंदीदाअभिनेत्री है , अभिनेत्री के तौर पर कितना मैच्योर हुई है मैं नहीं जानता हूं लेकिन  मुझे शाहरुख़ , सलमान और आमिर खान से मिलने के बाद जिस औरा का एहसास होता है वही एहसास मुझे दीपिका से मिलने के बाद महसूस होता है, कई एक्टर्स टैलेंटेड होते हैं क्रिएटिव होते हैं और अनुभवी भी लेकिन औरा बहुत कम एक्टर्स में देखने को मिलता है.वह मेहनत  से मिलता है या अनुभव से या फिर आप में वह होता ही है मैं नहीं जानता लेकिन इतना ज़रूर जानता हूं दीपिका में वह है। वह और भी सफल होगी।  
आपकी और दीपिका की केमिस्ट्री पर्दे पर बहुत आकर्षक लगती है इसका श्रेय आप किसे देना चाहेंगे
हमारी दोस्ती को सबसे पहले। दीपिका और मैं अब भी बहुत अच्छे दोस्त हैं। हम हर बात एक दूसरे से अब भी डिस्कस करते हैं। दोस्ती के अलावा फिल्मों की स्क्रिप्ट और निर्देशक भी.बचना ये हसीनो के बाद दीपिका और मुझे कई फिल्में ऑफर हुई थी लेकिन हमने उन फिल्मों को न कहा क्यूंकि हम हमेशा अपने दर्शकों को पैसा वसूल मनोरंजन देना चाहते हैं। 
 फिल्म का शीर्षक तमाशा है क्या फिल्म की शूटिंग के दौरान तमाशा से जुड़ना हुआ  
जी बिलकुल तमाशा को अंग्रेजी में प्ले कहते हैं। मैंने पृथ्वी थिएटर में बहुत सारे प्लेस देखे हैं। फिल्मों में आने से पहले मैं मैं रंगमंच से जुड़ना चाहता  था। अभिनय में कदम रखने से पहले मैं कुछ सीखना चाहता था और इसके लिए मैंने रिहर्सल भी शुरू कर दी थी, लेकिन संजय लीला भंसाली ने कहा कि तुम फिल्मों में आओ और मैं तुम्हें अपने तरीके से लॉन्च करूंगा, जिस वजह से मैं रंगमंच का हिस्सा नहीं बन सका वैसे इस फिल्म की शूटिंग से पहले इम्तियाज़ हमें एम पी की तीजन बाई के  प्ले में ले गए थे। जहाँ स्टोरी टेलिंग की बारीकियों को और करीब से मैंने जाना। आँखों के हावभाव से सवांद में बदलाव सभी में ध्यान देना पड़ता है ।

एक शाम टीम दिलवाले की दुनिया में



हिंदी सिनेमा की एक रोमांटिक जोड़ी, जिसका दर्शक पिछले लंबे अरसे से इंतजार कर रहे थे. आखिरकार रोहित शेट्ठी उनके चाहनेवालो ं की यह तमन्ना पूरी कर रहे हैं. फिल्म दिलवाले से. जी हां और हम बात कर रहे हैं शाहरुख और काजोल की जोड़ी की, जो हिंदी सिनेमा की अब तक की सदाबहार जोड़ियों में से एक हैं और एक बार फिर दर्शकों के दिलों में दस्तक देने जा रहे हैं. इस फिल्म में रोहित की गाड़ियों के साथ साथ इस बार रोहित अभिनेत्रियों की साड़ियों को भी खास अंदाज में उड़ाते नजर आयेंगे. फिल्म की शूटिंग इस वक्त हैदराबाद के रामोजी फिल्म सिटी में चल रही है. खास बात यह रही कि शाहरुख ने हैदराबाद के इस सेट का जायजा लेने का मौका प्रभात खबर को भी दिया. उन्होंने फिल्म की कुछ झलकियों के साथ फिल्म के गाने भी दिखाये. काजोल व शाहरुख का रुमानी गीत निश्चित तौर पर इस फिल्म का खास आकर्षण रहेगा. हैदराबाद से लौट कर शाहरुख खान व टीम दिलवाले के साथ बिताये खास पलों का पूरा ब्योरा दे रही हैं अनुप्रिया अनंत

स्थान रामोजी राव फिल्म सिटी, हैदराबाद. दिन 22 अक्तूबर. हम शाहरुख खान व टीम दिलवाले की एक अनोखी दुनिया में प्रवेश कर चुके थे. अन्य दिनों की तूलना आज शाहरुख खान से मिलना एक अलग अनुभव था. वजह यह थी कि यहां सिर्फ मुलाकात एक एक्टर या एक सुपरस्टार शाहरुख से नहीं हो रही थी, बल्कि एक बेहतरीन मेजबान के रूप में शाहरुख ने तहे दिल से स्वागत किया. अपनी फिल्म की तर्ज पर. एक बड़े दिलवाले की तरह. शाहरुख व टीम दिलवाले से यह मुलाकात मुंबई में रोजमर्रा के होनेवाले औपचारिक इंटरव्यू और बातचीत से जुदा अंदाज में थी. वजह स्पष्ट थी. न स्टार्स किसी जल्दबाजी में थे और न ही हम. साथ ही हम पर किसी तरह के दबाव नहीं थे कि हम सिर्फ फिल्म से संबंधित बातचीत ही कर सकते हैं. किसी सुपरस्टार के साथ इस तरह की अनपौचारिक बातचीत का ही एक अलग मजा है. चूंकि इस तरह की बातचीत से आप स्टार के व्यक्तित्व के अलग पहलुओं से भी रूबरू हो पाते हैं.उनके जुड़ी कुछ अनसुनी बातें आपके सामने आती है. शायद यही वजह है कि कुछ देर के लिए ही सही हमें भी शाहरुख व टीम दिलवाले के सभी सदस्यों से रूबरू होने का मौका मिला. शाहरुख अपनी मेजबानी के साथ साथ इस बात के लिए भी मशहूर हैं कि उनके चेहरे पर हेक्टीक शेडयूल के बावजूद सिकन नजर नहीं आती. यह हकीकत है. चूंकि शायद आप विश्वास न करें, लेकिन शाहरुख से हमारी यह मुलाकात सुबह  के 3.30 बजे समाप्त हुई थी. लेकिन शाहरुख बिल्कुल थके नजर नहीं आ रहे थे. वे उतने ही जोश से सभी से बातचीत कर रहे थे और शायद यही वजह थी कि उनकी ऊर्जा को देख कर हमें भी वक्त का पता न चला. मुलाकात के बाद सिलसिला आगे बढ़ा और शाहरुख हमें फिल्म के गीतों व फिल्म की कुछ झलकियों से रूबरू कराने ले गये. फिल्म में शाहरुख और काजोल की उपस्थिति हो और उस माहौल को रुमानी रूप न दिया जाये. यह कैसे हो सकता है. यकीनन रोहित शेट्ठी भी इस बात से वाकिफ हैं और उन्होंने एक बार फिर इस फिल्म में शाहरुख काजोल को समर्पित करते हुए एक बेहतरीन गीत का निर्माण किया है.
शाहरुख काजोल व आइसलैंड
कुछ कुछ होता है, कभी खुशी कभी गम और दिलवाले दुल्हनिया ले जायेंगे जैसी फिल्मों के सिने प्रेमियों के लिए यह गीत भी एक सौगात है. रोहित ने इस बात का खास ख्याल रखा है कि दोनों की सदाबहार रोमाटिंक जोड़ी को किस खास अंदाज में दर्शकों तक पहुंचाया जाये. उन्होंने इस गाने की शूटिंग के खास लम्हों के बारे में बातचीत करते हुए कहा कि यह गीत आउसलैंड में शूट की गयी है. आइसलैंड दुनिया के ठंड इलाकों में से एक इलाका है. रोहित ने इस जगह की तलाश इसलिए की क्योंकि वे इस बात से वाकिफ थे कि वे शाहरुख और काजोल को एक फ्रेम में कैद कर रहे हैं. गौरतलब है कि हिंदी सिनेमा में यह पहली बार होगा, जब किसी गाने की शूटिंग आइसलैंड जैसे स्थान में की जा रही है. खास बात यह भी है कि इस गाने में जो हवाई जहाज आपको नजर आयेगा. वह फिल्म का प्रॉप नहीं है, बल्कि एक दौर में जब वहां एक युद्ध के बाद वह हवाई जहाज लैंड कराया गया था कि सारे लोगों की जान बच गयी थी.इस वजह से इस जहाज को वहां का गुड लक माना जाता है. यकीनन, किसी ऐसे सकारात्मक छवि से बेहतरीन प्रॉप शाहरुख काजोल फिल्म के लिए क्या हो सकती थी.
जॉनी शाहरुख की जोड़ी
इस गाने की मेकिंग के बाद ही शाहरुख ने एक खास बात शेयर की कि वर्षों बाद वे मशहूर अभिनेता जॉनी लिवर के साथ काम कर रहे हैं. लेकिन अब भी उन्हें जॉनी लिवर से सीखने का काफी मौका मिलता है. शाहरुख ने यह भी बात सांझा किया कि दर्शकों को लगता है कि मैंने और काजोल ने सबसे ज्यादा साथ में फिल्में की हैं, जबकि हकीकत यह है कि काजोल से भी ज्यादा मैंने जॉनी लिवर के साथ काम किया है. जॉनी लिवर और शाहरुख की जोड़ी शाहरुख की शुरुआती दौर की फिल्म बाजीगर से ही काफी लोकप्रिय है और उस वक्त से दोनों कई फिल्मों में साथ नजर आये हैं, जिनमें बादशाह, कुछ कुछ होता है, कभी खुशी कभी गम जैसी फिल्में लोकप्रिय हैं. जॉनी लिवर ने शाहरुख के साथ अपने इस अटूट बंधन के बारे में बताया कि शाहरुख को मैंने शुरुआती दौर से देखा है और मुझे खुशी होती है कि अपनी मेहनत के दम पर शाहरुख कहां से कहां पहुंचा है. बकौल जॉनी लिवर मेरी कोशिश होती है कि मैं शाहरुख के साथ हर दृश्य बेस्ट करूं. मन में यह बात होती है कि कहीं मेरी वजह से उसके दृश्य खराब न हो. आखिर वह सुपरस्टार हैं. लेकिन शाहरुख ऐसा कभी भी नहीं दर्शाते कि वे कहां हैं. हम कहां हैं. यह इस इंसान की खूबी है इसलिए आज वह बादशाह है.
वरुण को देख कर क्यों हंसती हैं काजोल
वरुण धवन इस फिल्म में शाहरुख खान के भाई की भूमिका में हैं. बकौल वरुण यह मेरे लिए खास लम्हा है कि मैं इस फिल्म का हिस्सा हूं क्योंकि मैंने माइ नेम इज खान से शुुरुआत की थी, जहां काजोल मैम और शाहरुख सर काम कर रहे थे और मैं अस्टिेंट था. आज उनके साथ काम कर रहा. शायद यही वजह है कि मैं तो डरा सहमा सा था शुरू में. लेकिन काजोल मैम मुझे हमेशा देख कर हंसती रहती हैं. मुझे पता नहीं क्यों. लेकिन अब मैं उनसे थोड़ा फ्रेंडली हो पाया हूं. वरुण बताते हैं कि कैमरा रोल होते ही शाहरुख कैसे किसी और दुनिया के व्यक्ति हो जाते हैं.एक दृश्य में उन्होंने महसूस किया था कि उन्होंने सीन खराब कर दिया है. बाद में शाहरुख से सॉरी कहने गये तो शाहरुख ने मजाकिया अंदाज में कहा कि नहीं जी कोई नहीं...अच्छा शॉट दिया तुने. वरुण मानते हैं कि उन्हें शुरुआती दौर में यह मौका मिला है तो वे शाहरुख से उनकी मेहनत, उनके जोश से कुछ सीखने की कोशिश कर रहे हैं.
शाहरुख रखते हैंं सबका ख्याल : बोमन ईरानी
बोमन ईरानी शाहरुख खान के साथ डॉन, डॉन 2, हैप्पी न्यू ईयर जैसी फिल्मों में काम कर चुके हैं और अब इस फिल्म में भी साथ काम कर रहे हैं. बोमन बताते हैं कि शाहरुख का यह व्यवहार है कि वे अपनी टीम के हर सदस्य का पूरा ख्याल रखते हैं. उनकी जरूरतों को बिना कहे पूरा कर देते हैं और बाद में जब उन्हें थैंक्यू बोलो तो वे कहते...नहीं नहीं मुझे तो पता ही नहीं था इस बारे में. बोमन मानते हैं कि शाहरुख एक अच्छे अभिनेता ही नहीं अच्छे प्रोडयूसर भी हैं. अन्य फिल्मों की तूलना में उन्होंने जब जब शाहरुख के प्रोडक् शन हाउस में काम किया है. शाहरुख टीम की तरह काम करते. वे सभी शूट खत्म होने पर रोजाना रात में एक बार जरूर मिलते हैं. आपस में बातचीत करते हैं और फिर कमरे में जाते हैं. वर्तमान दौर में जहां फिल्मों में अब सिर्फ प्रोफेशनलिज्म हावी है. किसी सुपरस्टार का यह आत्मीय व्यवहार प्रभावित करता है.

पिता के स्टारडम से इतर


जावेद अख्तर इस बात को हमेशा दोहराते नजर आते हैं कि उन्हें खुशी है कि उनके दोनों बच्चों की सोच उनसे बिल्कुल मेल नहीं खाती।दोनों अपनी सोच से आगे बढ़ना चाहते हैं और उन्होंने अबतक अपनी पहचान स्थापित की भी है।उनके पिता ने उन्हें जादू नाम अपनी कविता की ही एक पंक्ति लम्हा लम्हा किसी जादू का फ़साना होगा की तर्ज़ पर रखा था।जावेद को अपना यह नाम इसलिए भी अज़ीज़ है, क्योंकि उनका मानना है कि चूंकि उनके पिता के लिए ये शब्द अनमोल थे और उन्हें इसी वजह से कविताएं लिखने में दिलचस्पी बढ़ी। लेकिन साथ ही वह इस बात को लेकर भी स्पष्ट रहे कि उनके पिता से उनकी राजनीति को लेकर जो बातें होती थी, उनमें काफी मतभेद था और इस वजह से उन्होंने जो समझ बनायी वह उनके ज्ञान के आधार पर बनाई और यही वजह है कि उन्होंने अपने बच्चे को भी सोचने और समझने की आज़ादी दी। शायद यही वजह है कि उनके बच्चों ने इस आवधारणा को निराधार साबित कर दिया कि एक लोकप्रिय पिता के बच्चे को वह मुकाम हासिल नहीं कर सकते जो उनके पिता को हासिल है। लेकिन गौर करें तो उनके बच्चे फरहान अख्तर और जोया अख्तर ने कभी भी यह कोशिश नहीं की कि उन्होंने पिता के नक्शे कदम पर चलते हुए उनकी तरह कवि बनने के बारे में सोचा।वरना ऐसे कई बॉलीवुड की हस्तियां हैं कई साहित्यकार के बच्चे हैं जो अब भी अपने पिता की विरासत की कमाई का ही निर्वाहन कर रहे हैं। ऐसे कई धुरंधर हैं जो अबतक पिता की छवि और उनके द्वारा सृजन किये गए स्टारडम से ही बाहर नहीं आ पाये हैं। कई निर्माता अपने बेटे बेटियों को इसी आस में फिल्मों में लॉन्च होने के मौके देते हैं। लेकिन चूंकि वे अपनी अलग दिशा बनाने के लिए कोई ऊर्जा नहीं लगाते। वे कामयाब नहीं हो पाते। फरहान आज न केवल कुशल अभिनेता हैं बल्कि वे एक बड़े प्रोडक्शन कंपनी के मालिक भी हैं और यह इसलिए सम्भव हो पाया चूंकि उन्होंने अपने पिता से इतर एक अलग राह चुनी। सो यह बेहद जरूरी है कि  अपनी पहचान अपने दम खम पर और मेहनत से बनाई जाये।

स्टार और बच्चों की चाहत


शाहरुख खान और काजोल की जोड़ी हमेशा सुर्खियों में रहे हैं।लेकिन शाहरुख खान ने यह बात स्वीकारी है कि उनके बेटे अबराम को उनकी जोड़ी पसंद नहीं क्योंकि एक सीन में काजोल के साथ जब शाहरुख सीन फिल्मा रहे थे तो उन्हें चोट आ गई थी तो अबराम काफी दुखी हो गए थे। काजोल की बेटी निशा भी नहीं चाहती थी कि काजोल अपनी पुरानी रोने धोने वाली फिल्में करें क्योंकि अपनी मां को परदे पर रोते देखना उन्हें पसंद नहीं है।नवाजुद्दीन की बेटी इस बात से नाराज होती हैं कि उनके पिता जब परदे पर पिटाई खाते नजर आते हैं। दरअसल यह सिनेमा का ही तिलिस्म है जो हकीकत न होते हुए भी हकीकत के बेहद करीब होते हैं। जो किरदारों के वास्तविक न होने के बावजूद जिंदगी की हकीकत से मेल खाते हैं।यह सिनेमा का ही तिलिस्म है ,जिसकी वजह से शक्ति कपूर की बेटी श्रद्धा कपूर को कई अरसे तक अपनी दोस्तों के सामने जिल्लत सहनी पड़ी कि उनके पिता एक बलात्कारी हैं क्योंकि वे ज्यादातर नकारात्मक किरदार निभाते थे । अक्षय कुमार के बेटे को अपने पिता को स्टंट करते देखना पसंद है क्योंकि वे खुद भी मार्शल आर्ट में दक्ष हैं। ऋतिक रोशन के  बेटे उन्हें कृष  के रूप में देखना बेहद पसंद करते हैं। शाहरुख खान ने रा वन भी अपने बेटे के लिए ही बनाई थी। हालांकि शाहरुख यह बात हमेशा दोहराते रहे हैं कि वे अपने बच्चे के कभी भी अपना सक्सेस मंत्रा नहीं बताएंगे।क्योंकि उन्हें लगता है कि उन्हें खुद अपनी पहचान  बनानी चाहिए। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि वे अब अबराम की तस्वीर अधिक सोशल साईट पर शेयर नहीं करेंगे। क्योंकि इनदिनों उनसे अधिक लोकप्रियता उनके बेटे को मिल रही है। दरअसल हकीकत यही है कि आम लोग स्टार्स के साथ साथ उनके बच्चों के बारे में जानने में अधिक दिलचस्पी लेते हैं चूंकि इसी बहाने उन्हें अपने पसंदीदा स्टार्स की झलक देखने का मौका मिल जाता है। वे उसी ललक में उनके बच्चे को देखना पसंद करते हैं। यही  वजह है कि उनकी ख़बरें हमेशा सुर्खियों में रहती है।

शो में सीता आम लड़की की तरह होगी-मदिराक्षी


 मायथोलॉजिकल सीरियल के इस दौर में स्टार प्लस सिया के राम के ज़रिए रामायण की कहानी कहने जा रहा है।खास बात यह है कि यहाँ रामायण की कहानी राम के ज़रिए नहीं बल्कि सीता को केंद्र बिंदु में रखकर कही जाने वाली है. उनके नज़रिए से ही रामायण की कथा स्क्रीन पर परिभाषित होगी।
 अपने बैकग्राउंड के बारे में बताइए
  मैं साउथ की फिल्मों का हिस्सा हूँ।यह मेरा पहला टेलीविज़न प्रोजेक्ट है।अर्टिकेट फैमिली से हूं।मैं भी वही पढाई कर रही थी। एक प्रोजेक्ट कर रही थी बस उसी दौरान मुझे फिल्मों का ऑफर मिला और मैं उनका हिस्सा बन गयी। मैं किस्मत में बहुत यकीं रखती हूँ।
 इस शो से किस तरह से जुड़ना हुआ
 निखिल सर और सुहाना जी की टीम से  पंकज जी ने मुझे छह से सात महीने पहले ही अप्प्रोच किया था। अपने करंट प्रोजेक्ट में मैं बिजी थी ,मैं टेलीविज़न करने  लिए तैयार नहीं थी। उन्होंने बताया नहीं था कि इतना बड़ा शो है।हां हां करके नहीं गयी। उन्होंने कहा कि आप डी वी डी भेज दे। कमाल की बात ये है कि अब तक वह डीवीडी आज तक नहीं पहुंचा और मैं सीता बन भी गयी।
 फिर किस तरह से इस शो का हिस्सा बनी
 लुक टेस्ट के लिए लगातार अप्प्रोच कर  रहे थे।शायद पंकज जी को समझ आ गया कि मैं टेलीविज़न होने की वजह से इस शो से नहीं जुड़ रही हूँ।तब उन्होंने मुझे बताया ।स्टारप्लस और इस सीरियल के प्रोडक्शन हाउस और शो से जुडी सोच को।वाकई इससे अच्छा टेलीविज़न पर क्या लांच हो सकता है।मेरे पिता मॉयथोलोजिकल शो के फैन हैं। वह रिकॉर्ड करके  शो को बार बार देखते हैं।उनको जब से मालूम हुआ कि मैं सीता बनने वाली हूँ।वह खुद को आईएस ऑफिसर समझने लगे हैं।
 सीता के किरदार के लिए आपने कितना होमवर्क किया।
  जब लुक टेस्ट हुआ और  फाइनल काल आया  उसके बीच में एक महीने  गैप आया था। मैंने उसी में शो से जुडी ज़्यादातर तैयारी कर ली थी।लुक टेस्ट के दिन मुझे बहुत ही पॉजिटिव रिस्पांस मिला था। दिलीप ताहिर जी ने मेरी  बहुत तारीफ की थी कि हमने उनकी फिल्म देखकर बड़े हुए हैं। उन्हें लगा कि मुझसे बेहतर इस किरदार के लिए और कोई नहीं हो सकता है।यह मेरे लिए सम्मान की बात है।तैयारी की बात करूँ तो  दो सीता पर लिखी किताबें पढ़ ली।पूरी रामायण देखी।जिससे रामायण के सभी पात्र और सीता से जुड़े उनके रिश्ते समझ आ सके।दीपिकाजी ने बहुत ही खूबसूरती से सीता का किरदार जिया है।उनकी तरह चेहरे पर मासूमियत और सहजता रखने की मेरी कोशिश होगी। इन दिनों  देवदत्त पटनायक  भी मुझे गाइड कर रहे हैं। हमारे सीरियल  मेंटर हैं। हमारे देश में मॉयथोलॉजिकल में वह एक्सपर्ट हैं। अनिरुद्ध पाठक सर भी अपने इनपुट्स दे रहे हैं।हमें पता है कि हम इस शो से जुड़े  किरदारों में गलती नहीं  कर सकते हैं क्यूंकि आम आदमी की भावनाएं उससे जुडी है।
 सिया के राम शो में कहानी सीता के नज़रिए से कहने के अलावा और क्या अलग होगा?
 रामायण की कहानी पुरानी है लेकिन यह २१ वी सदी के नज़रिए से कही जायेगी।यहाँ सीता या दूसरे पात्र भगवान् की तरह नहीं दर्शाए जायेंगे।उनके सर के पीछे चक्री नहीं घूमेगी।यह किरदार आम लोगों की तरह होंगे।जिससे लोग उसे देखकर हाथ न जोड़े बल्कि खुद से जुड़ाव महसूस करे।मुझे हर लड़की में सीता के गुण नज़र आते हैं।बच्ची में मासूमियत के रूप में बड़े होने पर ज़िम्मेदार रूप में। ज़िन्दगी के कई मोड़ पर हम लडकियां सीता की तरह ही मजबूत और आत्मनिर्भर नज़र आते हैं।
 सीता के व्यक्तित्व से आप कितना जुड़ाव महसूस करती हैं
रियल लाइफ में मैं भी बहुत शांत हूँ।मुझे जल्दी गुस्सा नहीं आता है। परिपक्व हूँ। सीता जी की तरह आत्मनिर्भर हूँ। कई बातें एक सी हैं लेकिन फिर भी सीताजी का किरदार निभाने में मुश्किल तो होता ही है। लोगों की भक्ति भावना जुडी रहती है।

एक औरत के संघर्ष की कहानी है द्रोपदी : मिताली नाग


अफसर बिटिया की लोकप्रिय अभिनेत्री मिताली नाग इन दिनों धारावाहिक द्रोपदी में लीड किरदार निभा रही हैं. उनका मानना है कि इस शो के माध्यम से वे द्रोपदी की जिंदगी के कुछ अनछुए पहलुओं को दर्शकों के सामने लाने की कोशिश कर रही हैं. =

 मिताली, अफसर बिटिया की कामयाबी के बाद द्रोपदी चुनने का निर्णय कें लिया?
अफसर बिटिया के बाद मेरे पास कई और भी आॅफर आये थे. लेकिन मैं कुछ ऐसा करना चाहती थी जिससे मुझे अफसर बिटिया के एक कदम आगे बढ़ने का मौका मिले. मैं अपने आपको किसी अच्छे किरदार से ही रिलांच करना चाहती थी. और जब राकेश पासवान( शो के निर्माता) ने मुझे वापस बुलाया और द्रोपदी एक औरत के सफर की कहानी बतायी तो मैंने तुरंत हां कह दिया. हकीकत यह है कि इस शो के माध्यम से हम ऐसे पहलुओं को दर्शकों के सामने ला रहे हैं, जैसा उन्होंने पहले नहीं देखा होगा. द्रोपदी की जिंदगी में चीरहरण के अलावा भी काफी कुछ घटित हुआ था. उनके व्यक्तित्व के कई पहलू सामने तो आने ही चाहिए.
आपने इतना लंबा ब्रेक क्यों लिया?
मैं कोई भी किरदार नहीं करना चाहती थी. मैं चैलेंजिंग किरदार का ही इंतजार कर रही थी. अफसर बिटिया एक ब्रांड बन गया था तो मैं कुछ वैसा ही किरदार ढूंढ रही थी, जिसे फिर से दर्शकों का प्यार मिले. इस दौरान मैंने काफी कुछ नयी चीजें सीखी. अपने मन की चीजें कीं. और मैं खुश हूं कि मैंने ब्रेक लिया. ब्रेक भी जरूरी है.
अफसर बिटिया में आपने महिलाओं के विकास की बात की है, और फिर द्रोपदी जैसा शो चुनना. क्या दोनों एक दूसरे बिल्कुल विपरीत सोच वाले शो नहीं हैं?
नहीं बिल्कुल नहीं. मुझे लगता है कि अफसर बिटिया में एक लड़की की शिक्षा की लड़ाई दिखाई गयी है कि किस तरह वह समाज से लड़ कर एक स्थान हासिल करती है. और द्रोपदी में मैं एक औरत के द्वंद और अस्तित्व की कहानी वाला किरदार िनभा रही हूं.
यह शो आज के दौर में प्रासंगिक कैसे है?
मुझे लगता है कि यह शो आज भी प्रासंंगिक है, क्योंकि कई जगहों पर, कई परिवारों में आज भी लड़के लड़की की राय के बगैर ही शादी थोप दी जाती है. उन पर निर्णय थोप दिया जाता है. जैसे द्रोपदी पर पांच पतियों की शादी निभाने का निर्णय थोपा गया था. वक्त भले  ही बदला हो, पर जब औरत के अस्तित्व की बात आती है तो आज भी यह समस्या है.
आप सेंसर बोर्ड की भी टीम हैं और टीवी में एक्टिंग भी कर रही हैं? तो दोनों जिम्मेदारी किस तरह निभा रही हैं?
मुझे लगता है कि एक महिला अच्छी मैनेजर होती है. आप घर में ही देखें आपकी मां सबकुछ मैंनेज कर लेती हैं. सीमित संसाधन में भी. मल्टीटास्किंग होती है. तो मुझे भी यह सब मुश्किल नहीं लगता. इसकी वजह यह भी है कि मैं अपने काम को काफी एंजॉय करती हंू.
आपकी शादीशुदा जिंदगी कैसी चल रही है?
मैं काफी खुशनसीब हूं कि मुझे सपोर्र्टिंव पति मिले हैं. शायद यही वजह है कि मेरी राह आसान है. मैंने अपनी राय से शादी की थी और शायद इसलिए मुझे मेरी शादी थोपी हुई नहीं लगती है. मैं बहुत  खुश हूं और मैं सबको सलाह दूंगी कि शादी तो करनी ही चाहिए, रिश्तों को जानने समझने का इससे अच्छा जरिया कुछ नहीं हो सकता.
आप शॉर्ट फिल्में भी कर रही हैं?
हां, मुझे शॉर्ट फिल्में करने में काफी मजा आ रहा है. हाल ही में पानी बचाओ अभियान के लिए एक शॉर्ट फिल्म की थी और दर्शकों को काफी पसंद आयी है वह फिल्म. आगे भी अच्छे प्रोजेक्ट्स होंगे तो मैं करूंगी.
अपने अब तक के सफर को किस तरह देखती हैं आप?
मुझे अपना करियर काफी रोमांचक लगता है. मैं एक छोटे से शहर से मुंबई मायानगरी आयी और अपना मुकाम बनाया तो सफर काफी रोमांचक रहा है. जिंदगी को करीब से देखने और समझने का मौका मिला है. मुझे अच्छे लोगों के साथ काम करने का मौका मिला है.
अपने मेंटर के बारे में कुछ बताएं?
मैं अपना मेंटर तो राकेश पासवान जी को ही मानती हूं. उन्होंने ही मुझे पहला मौका दिया. उन्होंने अफसर बिटिया से मुझे लांच किया और फिर दोबारा मुझे द्रोपदी जैसा चैलेंजिंग किरदार दिया. वे हमेशा मुझे गाइड करते रहते. यही मेरे लिए बड़ी बात है.


राकेश पासवान , निर्माता 
हमने इस बार द्रोपदी के पौराणिक किरदार के बारे में अधिक नहीं दर्शाया है. यह महाभारत से अलग है. हम द्रोपदी के किरदार के माध्यम से महिला सशक्तिकरण दिखाने की कोशिश कर रहे हैं. मुझे द्रोपदी का व्यक्तित्व हमेशा से आकर्षित करता है. मेरे अनुसार द्रोपदी जैसा सशक्त नारी चरित्र दूसरा और कोई नहीं है. मैं इस शो के लिए उड़िया साहित्य की प्रसिद्ध साहित्यकार डॉ प्रतिभा राय का भी आभार प्रकट करता हूं. उन्होंने मुझे काफी मार्गदर्शन दिया है. मैंने मिताली को लीड के रूप में इसलिए लिया क्योंकि मैं जानता हूं वह बेहतरीन अभिनेत्री हैं और चुनौतीपूर्ण किरदार करना उन्हें पसंद आता है. साथ ही अफसर बिटिया से हम दोनों के बीच एक कंफर्ट जोन भी आ जाता है 

हिंदी की दुर्गति


एक कॉफी ने अपने विज्ञापन की पंचलाइन रखी है कि कॉफी लगाओ और लग जाओ... फिल्म बैंगिस्तान के निर्देशक करन अंशुमन से एक सवाल, ऊंट का बहूवचन ऊंटियां कब से होने लगा. छोटे परदे पर प्रसारित होनेवाले धारावाहिकों के लिए तो किसी नये घर में प्रवेश या नयी नवेली दुल्हन के घर में प्रवेश होने पर गृह प्रवेश नहीं. ग्रह प्रवेश कराया जाता है. ग्रह प्रवेश अब एक प्रचलित शब्द है. एंड टीवी के धारावाहिक एजेंट राघव में भी ऐसी ही कुछ अटपटी सी पंक्तियां हैं. दरअसल, हकीकत यही है कि हिंदी को लेकर जिस तरह से नजरअंदाजी हो रही है, बस शब्दों को फिट करने का चलन है. जो शब्द तुकबंदी में फिट बैठ जायें. वही शब्द फिल्मों व धारावाहिकों की आवाज बन जा रहे हैं. नतीजन अशुद्ध हिंदी सुनी और बोली जा रही है. खास बात यह है कि दर्शक बेपरवाह हैं और उन्हें इस बात से कोई फर्क भी नहीं पड़ रहा. वे कभी इस बात की शिकायत नहीं करते. और निर्माताओं के साथ साथ वे भी कॉफी लगाते रहते हैं.इसकी खास वजह यह भी है कि हमें आदत बन चुकी है कि हम फॉलोअर्स बनें. हमें जो दिखाया जा रहा है, सुनाया जा रहा है. हम उस पर आंख मूंध कर विश्वास कर लेते हैं. जाहिर है ऐसे में हम कभी सही गलत का फैसला कर पाने में कामयाब नहीं हो पायेंगे. यही वजह है कि लेखक व निर्माता हिंदी को लेकर उतनी गंभीरता नहीं दिखाते. पूरी फिल्म इंडस्ट्री में ही नहीं, फिल्म बिरादरी में ही हिंदी को एक क्षेत्रीय भाषा माना जाता है. यहां फिल्मों व सितारों के पीआर हिंदी भाषी पत्रकारों को रिजनल भाषी मानते हैं और उनके साथ सौतेला व्यवहार ही करते हैं. हाल ही में मनोज बाजपेयी व रवीना पर आधारित एक शॉर्ट फिल्म में हिंदी के महत्व को बखूबी दर्शाया गया है कि आज हिंदी की दुर्गति किस कगार पर पहुंच चुकी है. लेकिन हम मूक बन कर अंगरेजी को सलामी ठोक रहे हैं.

छोटे परदे पर बदलाव


भारत में टेलीविजन की दुनिया ने एक नया रुख किया है. कई उपन्यासों को टेलीविजन का रूप दिया जा रहा है.लेकिन उन उपन्यासों के साथ न्याय तभी होगा, जब इन सारे उपन्यासों का रूपांतर सही तरीके से प्रस्तुत किया जाये. जीटीवी पर लाजवंती धारावाहिक की शुरुआत होनेवाली है तो स्टार प्लस पर गुनाहों का देवता की.  यह मुमकिन है कि भारतीय टेलीविजन के निर्माताओं को कहीं न कहीं जिंदगी चैनल की लोकप्रियता का इल्म तो हो ही गया है. साथ ही साथ वे यह बात भी समझ गये हैं कि आनेवाले समय में जिंदगी पर प्रसारित होनेवाले धारावाहिक उनके लिए प्रतियोगी बन कर खड़े रहेंगे. उन्होंने कोशिशें तो शुरू की है. लेकिन यह मुक्कमल तभी हो सकती हैं, जब उपन्यासों के रूपांतर में भारतीय टेलीविजन के सोप ओपरा की तरह दिखावटीपन या बनावटीपन न हो. किसी दौर में जब गुलजार साहब, व कई वरिष्ठ कलाकारों ने टेलीविजन पर काम किया था. जिस तरह के गुणवता वाले शो हमें देखने को मिले थे. वैसे हमें फिर से मिलें. उन्हें जबरदस्ती वर्तमान दौर में दिखाये जाने वाले रंग में न रंगा जाये. कल्पना कीजिए उपन्यास के वे किरदार रंगे पोते से अगर छोटे परदे पर प्रस्तुत होंगे तो कैसा दृश्य होगा. अनुराग बसु ने कई हद तक अपने धारावाहिक सीरिज रवींद्रनाथ टैगोर की कहानियां में उपन्यास का टच रखा है. किरदारों की बातचीत के लहजे से लेकर परिवेश और पोशाक में  भी. अगर हिंदी टेलीविजन के निर्माता भी वही ढांचा अपनाये तो बेहतर होगा. वरना, यह केवल औपचारिकता की ही शुरुआत मात्र मानी जायेगी. जिंदगी चैनल पर प्रसारित होने वाले धारावाहिकों की जुबान पर खासतौर से हिंदी धारावाहिकों के लेखकों को ध्यान देना चाहिए. वे कितनी समृद्ध भाषा में अपनी भावनाओं को बयां करते हैं. उपन्यास पर आधारित धारावाहिकों से ऐसी ही उम्मीदें हैं. 

ूविद्या और गीता बाली



विद्या बालन भगवान दादा पर बन रही एक  बायोपिक फिल्म का हिस्सा बनने जा रही हैं. इस फिल्म में वह गीता बाली व भगवान दादा के लोकप्रिय गीत शोला जो भड़के गीत पर परफॉर्म करने वाली हैं और उन्होंने इसकी तैयारी भी शुरू कर दी है. फिल्म का नाम एक अलबेला रखा गया है. विद्या बालन की पिछली कुछ फिल्में भले ही नाकामयाब हुई हों. लेकिन उनकी प्रतिभा पर सवाल नहीं उठाये जा सकते. चूंकि उन्होंने अपनी दो फिल्मों से ही लोगों को चौंका दिया था और विद्या ने खुद को स्थापित कर लिया था. विद्या की फिल्में नाकामयाब रही हैं. लेकिन शायद शुरुआती दौर में ही उन्होंने जिन परेशानियों से अपनी जगह बनायी थी. जितनी नाकामयाबियों का साथ उन्हें मिला. इसके बाद वर्तमान दौर की असफलता उनके लिए बड़ी असफलता नहीं है. उन्होंने इस दौरान कई अन्य गतिविधियों में खुद को शामिल किया है. हाल ही में चाली ैचैप्लीन पर उन्होंने अलग तरह की प्रदर्शनी की अगुवाही की और अब वह गीता बाली बनने के लिए एक मराठी फिल्म का भी हिस्सा बन रही हैं. विद्या बालन का इस फिल्म में शामिल होना इस बात का प्रमाण है कि उन्हें अब भी अच्छे काम की तलाश है. गीता बाली सा किरदार अन्य अभिनेत्री शायद ही सही तरीके से निभा भी पातीं. चूंकि कद काठी और हाव भाव में विद्या में कई पुरानी अभिनेत्री की झलक नजर आती है. विद्या पुराने दौर की किसी भी अभिनेत्री पर बनने वाले बायोपिक का हिस्सा हो सकती हैं. और फिलवक्त उन्हें ऐसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स करने की सख्त आवश्यकता भी है. विद्या ने अन्य अभिनेत्रियों की तरह खुद को कभी बांधा नहीं है. वे पहेल भी विधु विनोद चोपड़ा की फिल्म में मराठी आइटम नंबर कर चुकी हैं. इससे यह भी प्रतीत होता है कि वे अन्य भाषाओं को भी गंभीरता से लेती हैं. वे बांग्ला और कन्नड़ भाषाओं में तो मंझी हुई हैं ही. अब मराठी सिनेमा को लेकर भी उनका रुझान साफ नजर आ रहा है. 

मिसेज फनी बोन्स के चर्चे



 टिष्ट्वकंल खन्ना इन दिनों काफी चर्चे में हैं. उनकी किताब मिसेज फन्नीबोन्स काफी पसंद की जा रही है. इस किताब में उन्होंने हल्के मिजाज में हिंदी फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े कई सच को सामने रखा है. उन्होंने बॉलीवुड में मेकअप व सेलिब्रिटी पर एक बेहतरीन पीस लिखा है, जिसमें उन्होंने जाहिर किया है कि किस तरह जब सेलिब्रिटीज बिना मेकअप के बाहर जाते हैं तो शट्टरबक्स की अधिक दिलचस्पी होती है...टिष्ट्वंकल ने अपनी शुरुआत फिल्म बरसात से की थी. लेकिन वे खास कामयाब नहीं हो पायी थीं. फिर उन्होंने शादी कर ली और तय कर लिया कि वे फिल्मों का हिस्सा नहीं बनेंगी. उन्होंने अपने कैंडल के बिजनेस को आगे बढ़ाया.अपनी मां की मदद की.अचानक एक अखबार के न्योते पर उन्होंने एक कॉलम लिखना शुरू किया, जिसमें उन्होंने अपने साथ बीती दिनचर्या की बातें कहनी शुरू की. लोगों ने उसे इस कदर प्यार दिया कि वही कॉलम अब किताब के रूप में लोगों के सामने आ गयी. इन दिनों ट्विकल को बड़बोली के खिताब से नवाजा जा रहा है. लेकिन वे इसका जवाब भी अपने हंसमुख अंदाज में ही प्रस्तुत कर रही हैं. उन्होंने स्वीकारा है कि उन्हें इस बात से तकलीफ होती है, जब उन्हें महज एक सेलिब्रिटी की पत् नी के रूप में देखा जाये तो. वे मानती हैं कि किसी भी औरत के लिए सिर्फ अपने पति के नाम से जाना जाना निर्भरता का एहसास कराता है. दरअसल, यह हकीकत है कि बॉलीवुड का हिस्सा बनने के बाद लोग सिर्फ कामयाब या नामकयाब एक्टर या एक्ट्रेस के रूप में ही याद करना चाहते हंैं. वे मान बैठते हैं कि ये तो फ्लॉप अभिनेत्री है. जबकि ट्विंकल के करियर ग्राफ को देखा जाये तो यह स्पष्ट है कि वह एक एंथ्रेप्रेन्योर तो हैं ही. एक कामयाब लेखक भी बन चुकी हैं. लोगों को इस सोच को बदलने की सख्त जरूरत है. 

छोटे छोटे शहर के बड़े होनहार


 बड़े और छोटे परदे पर इन दिनों छोटे शहर ने कब्जा जमा लिया है. किसी न किसी रूप में छोटे शहर इन दिनों काफी चर्चे में हैं. अनुप्रिया अनंत की रिपोर्ट
 जीशान कादरी
अनुराग कश्यप की फिल्म गैंग्स आॅफ वासेपुर की कामयाबी में जीशान कादरी की अहम भूमिका रही थी. वजह यह थी कि उन्होंने ही यह कहानी लिखी थी. जीशान खुद धनबाद के वासेपुर इलाके से ही ताल्लुक रखते हैं और उन्होंने ही इस फिल्म की कहानी जब अनुराग को सुनायी तो उन्होंने निर्णय लिया कि वे इस पर फिल्म बनायेंगे. फिल्म बनी भी और काफी कामयाब भी हुई. जीशान ने इस फिल्म में अभिनय भी किया. बाद में वे रिवॉल्वर रानी में भी छोटे से किरदार में नजर आये. लेकिन जीशान की मंजिल यही नहीं थमी थी. उन्होंने तय कर रखा था कि उन्हें अपनी खुद भी पहचान बनानी ही है. सो, उन्होंने फिल्म बनाने का निर्णय लिया. उनकी फिल्म मीरुठिया गैंगस्टर्स इसी हफ्ते रिलीज हो रही है. इस फिल्म की खासियत यह है कि इस फिल्म के कलाकारों को उन्होंने अपनी पिछली फिल्मों के परफॉरमेंस के आधार पर चयनित किया है जिनमें आकाश आरके दहिया, जयदीप जैसे बेहतरीन कलाकारों को शामिल किया गया है. यह फिल्म क्राइम कॉमेडी है. जीशान न सिर्फ इस फिल्म के निर्देशक हैं, बल्कि वे इस फिल्म के निर्माता भी हैं. उन्होंने ही फिल्म की कहानी भी लिखी है. जल्द ही वह सरबजीत पर भी फिल्म बनाने जा रहे हैं. साथ ही टेलीविजन के लिए वे भी कुछ शोज का निर्माण कर रहे हैं.खबर यह भी है कि अनुराग कश्यप ने जीशान को गैंग्स आॅफ वासेपुर 3 लिखने की भी जिम्मेदारी दी है. जीशान खुश और संतुष्ट हैं कि कम समय में उन्होंने बॉलीवुड में अच्छी जगह बना ली है. वे इस बात से भी संतुष्ट हैं कि उन्हें अच्छे लोगों के साथ काम करने का मौका मिल रहा है. वे अपना मेंटर अनुराग कश्यप को मानते हैं.जीशान को भी कई लोगों ने हतोत्साहित करने की कोशिश की थी कि वे खुद की एक अलग पहचान नहीं बना पायेंगे. लेकिन छोटे शहर से आने के बावजूद उन्होंने अपनी सूझबूझ से इंडस्ट्री को अपना बना लिया है. जीशान कहते हैं कि मैं फिल्मों से बेहद प्यार करता हूं और जो भी करूंगा इसी दुनिया के लिए करूंगा. मैं मेहनती हूं और मैं जानता हूं कि यह इंडस्ट्री ऐसे लोगों की कद्र करती है.
स्वाति शर्मा- सिद्धांत माधव
हाल ही में रिलीज हुई फिल्म वेलकम बैक में सिद्धांत माधव के गीत को काफी लोकप्रियता मिली. सिद्धांत बिहार के मुजफ्फपुर इलाके से ताल्लुक रखते हैं. वे खुश हैं कि उन्हें काफी मेहनत के बाद एक पहचान मिली है. उन्होंने इससे पहले भी कुछ फिल्मों में संगीत दिया था. लेकिन हाल ही में उन्हें वेलकम बैक से पहचान मिली. मीरुठिया गैंग्स्टर में भी उन्होंने संगीत दिया है. वही दूसरी तरफ स्वाति शर्मा भी मुजफ्फपुर से ही ताल्लुक रखती हैं और उनके गाये गीत ने इस साल धूम मचायी. फिल्म तनु वेड्स मनु का गीत बन्नो तेरा स्वागर काफी लोकप्रिय हुआ. धीरे धीरे वह भी पहचान बना रही हैं.
छोटे परदे पर जमशेदपुर
जल्द ही एकता कपूर के शो कुछ तो है तेरे मेरे दरमियां में जमशेदपुर की कहानी बयां की जा रही है. हालांकि शो की शूटिंग जमशेदपुर में नहीं की गयी है. लेकिन इस शहर को बैकड्रॉप के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है. इस शो में लीड किरदार निभा रहीं श्रीतिमा मुखर्जी कोटा शहर से हैं और खुश हैं कि उन्हें एक छोटे शहर की लड़की का किरदार निभाने का मौका मिल रहा है.
मेरे अंगने में मुगलसराय
स्टार प्लस पर प्रसारित हो रहे धारावाहिक मेरे अंगने में उत्तर प्रदेश के मुगलसराय इलाके की कहानी दिखाई जा रही है. इस शो में माथुर और श्रीवास्तव परिवार की कहानी है. शो में सास बहू व ननद के रिश्ते को अलग अंदाज में प्रस्तुत किया जा रहा है, जैसा कि आमतौर पर छोटे शहरों के परिवारों में होता है. इसलिए इस शो से दर्शक काफी कनेक्ट कर पा रहे हैं.
सरोजनी
जीटीवी पर प्रसारित होने वाले धारावाहिक सरोजनी में भी छोटे शहर की कहानी दिखाई जा रही है. इस शो में सास बहू की नहीं बल्कि ससूर और बहू के बीच के रिश्ते की कहानी दिखाई जा रही है.
आगरा, मथुरा
इन दिनों टेलीविजन पर आगरा व मथुरा पर आधारित भी काफी शो दिखाये जा रहे हैं, जिनमें तू मेरा हीरो, तुम ही बंधू सखा तुम्हीं, बड़ी देवरानी जैसे शो लोकप्रिय हैं.
भाभीजी घर पर हैं
एंड टीवी के सुपरहिट शो भाभाजी घर पर हैं का बैकड्रॉप कानपुर रखा गया है. कानपुर के लहजे में इस शो की साज सज्जा की गयी है. दर्शकों को यह शो काफी पसंद आ रहा है. खासतौर से भाभीजी का किरदार निभा रहीं अंगूरी देवी को दर्शकों का बेइतहां प्यार मिल रहा है. 

शहर ए जात व अंर्तद्वंद


जिंदगी चैनल पर एक नये शो की शुरुआत हुई है. शहर ए जात. इस शो की अभिनेत्री को अपनी ही बनाई एक मूर्ति से प्रेम हो जाता है. वह उस मूर्ति के रूप वाले लड़के को अपनी असल जिंदगी में तलाश करने लगती है. उस रूप में उसे एक लड़का मिल भी जाता है. सलमान.दोनों की शादी होती है और वह जिस तरह अपने मायके में काफी शान-ओ-शौकत से रही है. वह जिंदगी उसे यहां भी मिलती है. लेकिन सलमान का प्रेम उसे नहीं मिलता. उस वक्त वह खुद में घुटने लगती है. और उस वक्त वह अपने अंर्तद्वंद से लड़ाई शुरू करती है. उसे जब यह मालूम होता है कि सलमान किसी और से सिर्फ इसलिए प्यार करता है, क्योंकि दूसरी औरत को अल्लाह में यकीन है. जबकि उसने तो अल्लाह के बारे में कभी सुना ही नहीं. फिर वह अल्लाह व सुकून की तलाश में निकल पड़ती है.  खुद की तलाश के मुद्दे पर बनी एक अत्यंत और रोचक कहानी है. यकीन नहीं होता कि हम किसी छोटे परदे पर ऐसी कहानियां देख रहे हैं. दरअसल,  हिंदी टेलीविजन के निर्माताओं को शहर ए जात यानी सेल्फ डिस्कवरी की जरूरत है कि वे छोटे परदे को किस ओर लिये जा रहे हैं. गौर करें, तो पिछले कुछ महीनों में लगातार कई शोज बंद हुए हैं. बंद अगर इस लिहाज से हुए होते कि उनकी सीरिज ही सीमित थी. तो बात समझ आती. लेकिन मनमर्जिया जिसकी कहानी विज्ञापन जगत में काम करने वाले दोस्तों की कहानी थी. युवाओं के लिए यह नये तरीके का शो था. लेकिन शो को टीआरपी नहीं मिल पायी. और कुछ महीनों में ही शो को बंद कर दिया गया. जिस छोटे परदे पर साथ निभाना साथिया, ससुराल सिमर का जैसे शो की टीआरपी बढ़ रही है. यह शोध का विषय है कि आखिरकार वे कौन से दर्शक हैं, जो इस तरह के शोज को पसंद कर रहे हैं और चैनल दावे से ऐसे शोज को ही असल मनोरंजन मान रहे हैं.

विज्ञापन में स्टार


अमिताभ बच्चन और कंगना रनौत इन दिनों  विज्ञापन में नजर आ रहे हैं।  इसमें कंगना अमिताभ को उनके चुनिंदा संवाद दोहराने को बोलती है।  अमिताभ अपनी फिल्म का संवाद तो दोहराते ही हैं।  साथ ही कंगना उन्हें कहती है कि वह बाकी सुपरस्टार्स के संवाद दोहराएं।  अमिताभ कहते भी हैं कि वे संवाद उनके नहीं हैं।  लेकिन कंगना जिद करती हैं।  दरअसल इन दिनों विज्ञापनों में स्टार्स अपनी वास्तविक दुनिया को खुद जाहिर कर रहे हैं।  वे अपने ब्रांड का इस्तेमाल अपनी व्यकितिगत जिंदगी से जुड़े पहलुओं से कर रहे हैं।  एक विज्ञापन में अमिताभ कहते नजर आते हैं कि उन्हें उस अगरबत्ती की खुशबू से अपनी माँ की याद आती है।  जाहिर है उस अगरबत्ती का न तो उस वक़्त ईजाद हुआ होगा और न ही ये आम सी मोमबत्तियां सुपर स्टार्स इस्तेमाल करते होंगे।  लेकिन उनके एक मात्र ऐसा कह देने से उस अगरबत्ती की ब्रांड वैल्यू बढ़ गई. और यही किसी भी ब्रांड की कोशिश भी होती है।  एक नए विज्ञापन में आमिर खान इनदिनों अपने कपड़े छोटे होने की बात कर रहे हैं।  आमिर इन दिनों फिल्म दंगल की शूटिंग की तयारी में मग्न हैं। दो दिनों पहले ही शूटिंग शुरू भी हुई है।  ऐसे में वे जिस ब्रांड के चेहरे हैं वहां उन्हें किसी और रूप में शूटिंग करने में दिक्क्तें आ रही होंगी।  लेकिन आमिर का चेहरा ही उस ब्रांड के लिए इस कदर आवश्यक है कि उस ब्रांड ने आमिर के मौजूदा रूप को लेकर ही पूरा कांसेप्ट गढ़ दिया है।  लेकिन यहाँ भी दोहरा बर्ताव ही नजर आता. आमिर को उस ब्रांड के लिए वजन घटने के लिए कहने के लिए उस ब्रांड ने चेष्टा भी नहीं की होगी।  लेकिन करीना ने एक ब्रांड के लिए हाल में अपना वजन घटाया है।  कटरीना भी कई बार सिर्फ विगयपन के लिए वजन घटा चुकी हैं।  विज्ञापनों की मेकिंग के आधार पर भी इस बात का अनुमान लगाया जा सकता है कि कौन सा सितारा ब्रांड की दुनिया में क्या हैसियत रखता है।  और उसी मुताबिक यहाँ भी उन्हें मेहनताना मिलता है।  लड़कियां यहाँ भी वजन घटाई और बढाती हैं।  लेकिन पुरुष कलाकारों की इमेज से या अवतार से कोई खेल नही किया जाता। 

इम्तियाज का तमाशा


इम्तियाज अली की नयी फिल्म तमाशा के पोस्टर ने पहले ही लोगों को चौंकाया है. इम्तियाज अली हिंदी सिनेमा जगत के उन चुनिंदा निर्देशकों में से एक हैं, जिनकी फिल्में देखना दर्शकों को हमेशा दूसरी दुनिया में लेकर जाता है. वे कभी रियलिस्टिक सिनेमा बनाने का दावा नहीं करते. लेकिन फिर भी उनकी कहानी हकीकत से बहुत नजदीक होती है. वे प्रेम कहानियां और दर्द भरी प्रेम कहानियां दिखाने में नहीं हिचकते. वे दर्शकों को प्रेम की अधूरी कहानी के हाइवे पर छोड़ देते हैं, लेकिन फिर वह रॉकस्टार हैं. शायद इसलिए चूंकि वे इस हकीकत से वास्ता रखते हैं कि प्रेम है तो दर्द भी होगा. बहरहाल, उनकी नयी फिल्म तमाशा है. फिल्म के पोस्टर में उन्होंने सवाल किया है कि हर बार एक ही प्रेम कहानी क्यों? उनके पोस्टर में कई तरह के चेहरे नजर आ रहे हैं, जिनके बीच उनके किरदार हैं. जाहिर है, इम्तियाज का यह खुद से भी सवाल होगा. चूंकि उनकी फिल्मों में यात्राएं हमेशा प्रमुखता से दिखाई गयी हैं. इस बार शायद उन्होंने भी कुछ बदलाव अवश्य किये हैं. हालांकि उनकी कहानियों के पात्र एक दूसरे से मेल भले ही खाते हों. लेकिन वह यथार्थ के बेहद करीब होते. इस फिल्म में रणबीर दीपिका की जोड़ी है. रणबीर और दीपिका की जोड़ी ने फिल्म ये जवानी है दीवानी से कामयाबी हासिल की थी.इसके बाद लगातार रणबीर की फिल्में नाकामयाब रही हैं. वही दूसरी तरफ दीपिका को कामयाबी मिलती रही है. जाहिर है, रणबीर और दीपिका जब फिर साथ आ रहे, तो इस बात की चर्चा अवश्य होगी. इम्तियाज ने रणबीर को रॉकस्टार से ख्याति दिलायी. और उन्हें एक अलग एक्टर की श्रेणी में पहचान दिलायी. जाहिर है रणबीर की भी पूरी कोशिश होगी कि इस फिल्म को कामयाबी मिले. इम्तियाज ने ही दीपिका को वेरोनिका का किरदार करने के लिए कहा था. उसके बाद दीपिका का करियर संभला. तीनों साथ आ रहे हैं तो एक मनोरंजन तमाशे की उम्मीद तो जरूरी है 

छोटे परदे से ही खुश और संतुष्ट हूं : वैष्णवी


जीटीवी के शो टशनएइश्क में वैष्णवी मेकडोनल्ड इन दिनों लीला तनेजा  का किरदार निभा रही हैं. अपने अब तक के करियर में वैष्णवी ने बिल्कुल अपनी छवि के विपरीत किरदार को चुना है और दर्शक उन्हें पसंद भी कर रहे हैं. 

टशनएइश्क में जितनी चर्चा शो के लीड किरदारों को लेकर हो रही है. आपके किरदार को भी दर्शक काफी पसंद कर रहे हैं?
हां, मुझे खुशी है कि मैंने जो छवि तोड़ी है. लोगों को मेरा किरदार पसंद आ रहा है. मैं खुद चाहती थी कि अब तक मैंने जिस तरह के किरदार निभाये हंैं. दर्शकों के सामने उससे कुछ अलग करूं. इसलिए मैं खुश हूं कि मेरे पास यह किरदार आया और सही समय पर आया. जब मैं खुद कुछ अलग करने की कोशिश में जुटी थी. मैं खुद टिपिकल मां वाले किरदार निभा कर बोर हो चुकी थी. इसलिए यह मजेदार किरदार मुझे रास आया.
आॅन स्क्रीन तो ईवा ग्रोवर के साथ आपके टशन रहते हैं. लेकिन आॅफ स्क्रीन आपदोनों में कैसी केमेस्ट्री है.
मैं ईवा को काफी सालों से जानती हूं. इतने सालों से जब टेलीविजन का परदा उतना बड़ा भी नहीं हुआ था. हम दोनों ने लगभग एक साथ ही शुरुआत की थी. इसलिए हम दोनों ने ही वही माहौल देखा है. टेलीविजन के बदलते दौर को देखा है. यही वजह है कि हम दोनों की आपस में खूब बनती है. आॅफ स्क्रीन हम खूब गप्पे मारा करते हैं.
आप हमेशा से ही एक्टर ही बनना चाहती थीं?
हां, सच कहूं तो एक्टिंग में दाखिला तो मैंने बचपन में ही ले लिया था. उस वक्त मैं 6 साल की थी जब मैंने एक फिल्म जिसका नाम वीराना था. उसमें काम किया था. मुझे उस वक्त ही यह बात समझ आ गयी थी कि मंै कैमरे से अच्छी दोस्ती कर सकती हूं. क्योंकि मुझे याद है, मैं तुरंत कैमरा फ्रेंडली हो गयी थी. शायद यही वजह है कि मैं नैचुरल एक्टिंग कर पाती हूं. हालांकि उस वक्त काफी पहले शुरुआत हो जाती और मैं ऐसा नहीं चाहती थी. मैंने तय किया कि मैं पढ़ाई पूरी करूंगी. उस दौरान मैंने कुछ फिल्में की. लेकिन मुझे एहसास हुआ कि फिल्मों की दुनिया मुझसे थोड़ी अलग है. तो मैंने तय किया कि मैं फिल्में नहीं करूंगी. टीवी शो करूंगी. इसके बाद मुझे टीवी शो में लीड रोल आॅफर हुए. इसके बाद मैंने इस इंडस्ट्री से दोस्ती कर ली और आज तक ये इश्क कायम है.मुझे लगता है कि टेलीविजन कलाकारों को बड़े मौके देता है. आप इसमें सुरक्षित रहते हैं.इसी माध्यम ने मुझे पहचान दी है. सो, मैं छोटे परदे से बहुत प्यार करती हूं.
कभी किसी किरदार को न कर पाने का दुख हुआ आपको?
हां, मुझे अस्तित्व एक प्रेम कथा करने का आॅफर मिला था और मेरी दिली ख्वाहिश् थी कि मैं यह किरदार जरूर निभाऊं. लेकिन उस समय मैं गर्भवती थी. और यही वजह है कि मैं इस शो का हिस्सा नहीं बन पायी. वरना, मैंने शो की शूटिंग भी शुरू कर दी थी.
अपने अब तक के सफर को किस तरह देखती हैं आप?
मेरा सफर वाकई काफी अच्छा रहा. मैंने हमेशा जो भी किरदार निभाये. सशक्त किरदार निभाये. मां की भूमिकाओं में भी मैं अहम किरदारों में रही. कहानी का हिस्सा मैं तभी बनती हूं जब मेरी भूमिका को खास महत्व दिया जाये. मैं जिस तरह के किरदार करना चाहती थी. मैंने किये हैं और इसलिए मैं अपने काम से बिल्कुल खुश और संतुष्ट हूं. 
कभी किरदारों में टाइपकास्ट होने का डर लगता है?
नहीं मुझे नहीं लगता. मैं हर किरदार के साथ खुद को ग्रो करती हूं. मैं पंजाबी नहीं हूं. लेकिन इस शो में मैं पंजाबी बोल रही हूं. मुझे पहले दिन ही शूटिंग के बाद निर्देशक से तारीफ मिली. उन्होंने कहा कि मैं भाषा को अच्छे से पकड़ पा रही हूं. इससे स्पष्ट  होता है कि आपका काम अच्छा हो रहा है. तो मैं अपनी तरफ से इनपुट्स देने की कोशिशें करती रहती हूं और मुझे कामयाबी भी मिलती है. सो, मुझे लगता है कि दर्शक मेरे काम से बोर नहीं हुए हैं. 
आपने जब शुरुआत की थी और अब के दौर में कितना फर्क देखती हैं, टेलीविजन की दुनिया में?
टेलीविजन अब पहले से कहीं ज्यादा विकसित हो गया है. अब तकनीकी रूप से भी छोटा परदा छोटा नहीं रहा है. यह अब ज्यादा व्यावसायिक हो गया है. लेकिन इसकी सादगी और मासूमियत कहीं खो गयी है. उस मासूमियत को मैं मिस करती हूं. जो आज से करीब 15 साल पहले हुआ करते थे. हम उस वक्त किसी भी धारावाहिक के एक भी एपिसोड मिस नहीं करना चाहते थे. आज ऐसा नहीं है. 

कुछ खास है...कुछ बात है इन सभी में


बॉलीवुड की ऐसी कई हस्तियां हैं, जो अपनी पोषाक को लेकर बहुत विशिष्ट हैं और वे उनके बिना नहीं रह सकते, तो  कुछ हस्तियां ऐसी भी  हैं, जो कुछ लोगों को और खुद से जुड़ी कुछ चीजों को अपनी जिंदगी में बहुत अधिक महत्व देते हैं. वे उनके बिना कहीं भी नहीं जाते. पेश है ऐसी कुछ हस्तियां और उनसे जुड़े कुछ ऐसे लोग, उनके स्टाइल स्टेटमेंट व उनसे जुड़ी कुछ खास चीजों पर  अनुप्रिया की रिपोर्ट

 महेश भट्ट
महेश भट्ट हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के बड़े व नामचीन निर्देशकों में से एक हैं, जिन्होंने अपनी एक अलग पहचान बनायी.  वर्तमान दौर में उनकी फिल्मों में भले ही ग्लैमर का तड़का नजर आता रहे. लेकिन हकीकत यही है कि निजी जिंदगी में महेश भट्ट अपने पैसे किताबों व फिल्मों में खर्च करते हैं. वे खुद सामान्य सा लुक रखने में ही विश्वास रखते हैं. भले  ही उनकी फिल्मों की पार्टियां हों या फिर वे किसी दूसरे के घर निमंत्रण पर जायें. वे अपनी हवाई चप्पलों में ही नजर आते हैं. वे कभी भी जूते या भारी भरकम बूटस में नजर नहीं आते. उनकी बेटी आलिया को अपने पिता का यह बिंदास स्टाइल बेहद पसंद है और वह कहती हैं कि उनके पिता इस स्टाइल में भी काफी हैंडसम नजर आते हैं और उन्हें इस बात से कोई परेशानी नहीं है. हालांकि आलिया ने अपनी पहली सैलरी से महेश भट्ट को एक खूबसूरत जूतों की जोड़ियां गिफ्ट की थी और वे चाहती हैं कि उनके पिता इसे पहने. लेकिन अब तक उनकी यह इच्छा पूरी नहीं हुई है. महेश भट्ट जूते क्यों नहीं पहनते. इसके पीछे क्या राज है. यह आज तक उन्होंने कभी किसी से शेयर नहीं किया है.
अब्बास मस्तान
अब्बास मस्तान हमेशा सफेद कपड़ों में ही नजर आते हैं. अब्बास मस्तान बताते हैं कि वे स्कूल के दिनों में स्कूल यूनिफॉर्म के रूप में सफेद कपड़े पहनते थे. उसके बाद से उन्होंने कभी यह महसूस ही नहीं किया कि उन्हें इस रंग को बदलने की जरूरत है. वे बताते हैं कि उनके घर का रंग भी हमेशा सफेद रहा है. लेकिन उनकी फिल्में ग्लॉसी होती हैं. इसलिए वे पहनावे में सादगी रखना चाहते हैं. उन्हें जिंदगी में भी शांति और सादगी रखना पसंद है. फिल्म बाजीगर के प्रीमियर के दौरान उन्होंने सूट पहनने की कोशिश भी की थी. लेकिन फिर उनमें वे असहज महसूस करने लगे तो उन्होंने कहा कि अब वे कभी भी कोई और कपड़े नहीं पहनेंगे.
गुलजार
गुलजार साहब भी हमेशा सफेद कुर्ते पायजामे में ही नजर आते हैं. इसके पीछे क्या वजह है, यह उन्होंने आज तक स्पष्ट नहीं किया. लेकिन वे बस इतना ही कहते हैं कि उन्हें कॉलेज के जमाने से ही इस रंग से प्यार हो गया था. खास बात यह है कि वे कुर्ते के साथ कभी पायजामा नहीं सफेद ट्राउजर पहनते हैं.
विद्या बालन
विद्या बालन की कलाई पर गौर करें तो आपको हमेशा एक नजर कवच नजर आयेगा. यह नजर कवच वह खुद से कभी भी दूर नहीं करतीं. फिर चाहें उन्हें किसी भी समारोह का हिस्सा क्यों न बनना हो. वे मानती हैं कि यह ब्रासलेट उन्हें बुरी नजरों से बचाता है.और उन्हें इसे पहनने में कोई बुराई नजर नहीं आती.  साथ ही विद्या बालन एक खास तरह का काजल लगाती हैं. वह पाकिस्तानी ब्रांड हासमी लगाती हैं. वे इसे भी अपना लकी चार्म मानती हैं.
शाहिद कपूर
शाहिद कपूर के बारे में कम ही लोगों को यह जानकारी होगी कि शाहिद कपूर एक ऐसे व्यक्ति से बेहद करीब हैं, जिनसे उनका खून का रिश्ता नहीं है. लेकिन फिर भी अहम रिश्ता है. वे उन्हें मामू बुलाते हैं. मामू शाहिद का उस वक्त से ख्याल रख रहे हैं, जब वह बेहद छोटे थे. वे कपूर परिवार के अहम लोगों में से एक हैं. इसके अलावा शाहिद कभी भी खाते हुए तसवीरें नहीं लेते. वे इसे भी अनलकी मानते हैं इसलिए.
श्रद्धा कपूर
श्रद्धा कपूर को अपने  खास जूतों से बेहद प्यार है. वे उसे हमेशा अपने डांस रिहर्सल में पहनती हैं. फिल्म एबीसीडी 2 के दौरान भी उन्होंने उन जूतों को पहन कर ही रिहर्सल किया था. श्रद्धा उसे काफी लकी मानती हैं और जब भी डांस करती हैं तो वही जूतें पहन कर करती हैं.

एक बेटे की श्रद्धांजलि


गुलशन कुमार के बेटे भूषण कुमार ने अपने पिता की विरासत को जिस तरह फलित किया है. यह हर पिता की ख्वाहिश होती है कि उनके बच्चे उनकी परंपरा को सही रूप दें और उनकी विरासत को आगे बढ़ाएं. यह बात जगजाहिर  है कि गुलशन कुमार किसी दौर में जूस की दुकान चलाया करते थे. लेकिन फिल्मी गीतों में दिलचस्पी की वजह से उन्होंने एक प्रयोग किया और आगे चल कर टी सीरिज के रूप में उसे एक ब्रांड बनाया. हाल ही में उनके बेटे भूषण कुमार ने अपने पिता को एक अनोखे अंदाज में श्रद्धांजलि दी. उन्होंने एक खास कांसर्ट का आयोजन किया, जिसमें उन्होंने उन तमाम कलाकारों को शामिल किया, जो गुलशन कुमार की कंपनी की ही खोज रहे. इस समारोह में सभी यह देख कर चौके कि वहां अनुराधा पोडवाल ने भी अपना सोलो गीत गाया. अनुराधा व गुलशन परिवार के रिश्तों के बारे में भी कई अफवाहें हैं. लेकिन भूषण कुमार ने तमाम बातों को परे रख कर एक सम्मानित रुख अपनाया. उन्होंने कोई मतभेद न रख कर सभी कलाकारों को न्योता दिया. जो कि वर्तमान दौर में इस इंडस्ट्री का चलन नहीं रहा. लोग छोटी छोटी बातों को तवज्जो देने में इस तरह मशगूल हो चुके हैं कि अगर छोटी बातों को लेकर भी नाराजगी है तो वे उन्हें अपने कार्यक्रम में शामिल नहीं करते. अमिताभ बच्चन और दीपिका पादुकोण का पार्टी प्रकरण पिछले दिनों काफी चर्चे में भी रहा.फिल्म ब्रदर्स का वह संवाद कि हर बेटा बाप नहीं होता...भूषण कुमार जैसे बेटे के लिए नहीं लिखी गयी है. चूंकि भूषण कुमार ने अपनी सूझबूझ से टी सीरिज के स्तंभ को और मजबूत किया है. साथ ही भूषण की खासियत है कि वे अपने पिता को आज भी इतना सम्मान दे रहे हैं. गुलशन कुमार की तसवीरें टी सीरिज के आॅफिस में सिर्फ तसवीरें नहीं हैं. भूषण उन्हें पूरे आदर सम्मान से पूजते हैं. 

कहाँ हैं हनी सिंह


हृदयेश सिंह उर्फ हनी सिंह ने जब युवाओं के दिलों में दस्तक दी. तो हर युवा उनकी पंजाबी बिट्स से लेकर देसी बिट्स पर थिरकने को तैयार हुआ. अचानक रैप का गुम हो चुका दौर फिर से चलन में आता है और युवा उसे यो यो का नाम देते हैं...यो यो फिर सिर्फ न नाम न बन कर एक पहचान बन जाता है. पूरी दुनिया उनके साथ पार्टी करने को तैयार हो जाती है. भले  ही कानूनन बच्चों को शराब पीने का अधिकार न हो. लेकिन चार बोतल वोडका...गीत का चस्का बच्चों की जुबां पर चढ़ने से कोई भी नहीं रोक पाया. और यूं ही युवाओं के  इंस्टैंट आइकॉन बने हनी सिंह के पैर अचानक थिरकते थिरकाते ठहर जाते हैं.  अचानक वे गुम हो जाते हैं. खुद को कूल डूड कहनेवाले, युवाओं को आॅल नाइट पार्टी करने की सलाह देने वाले हनी सिंह की निजी जिंदगी ेभी क्या वैसी ही कूल है. जैसा वह जताने की कोशिश करते हैं. इसमें कोई शक नहीं कि हनी सिंह को ग्लैमर इंडस्ट्री में वाकई शहद सी ही दुनिया देखने को मिली. फिर आखिर क्या वजह हैं कि वे इस नशे की गिरफ्त में शामिल हुए. उनके गाने को बोल में दारु, वोडका, शराब की बातें आम हैं. क्या है मुमकिन है कि हनी सिंह अपनी जिंदगी में अपने गीतों की तरह ही नशे व शराब को यो यो यानी युवाओं का जोश मानते रहे हैं और इसलिए वे इसकी गिरफ्त में आकर खुश रहे. क्या इन वजहों से उनके गीतों में नशे का जिक्र बार बार आता रहा है. तमाम सवालों के निश्चित जवाब नहीं हैं या यूं कह लें वे इस पर खुल कर बात करने से कतरा रहे हैं. 



हनी सिंह खुद को मिसअंडरस्टूड स्टार मानते हैं, चूंकि लोगों को उनके बारे में कई गलतफहमियां हैं. ऐसा उन्हें लगता है. उन्हें लगता है कि लोग जबरन उनको विवादों में खिंचते हैं. लेकिन वे हमेशा यह कोशिश करते रहे कि वे किसी के बारे में भी अपनी दो टूक बातें न कहें. हनी सिंह की उम्र जितनी नहीं. उससे कहीं अधिक उनकी फेहरिस्त में विवाद जुड़ चुके हैं. कुछ सालों पहले उन पर यह इल्जाम तक लगाये गये कि उनके गीतों की वजह से ही भारत में बलात्कार हो रहे हैं. उनके एक रैप गाने को दरअसल रेप का गीत समझ लिया गया था. इस विवाद ने काफी तूल पकड़ी थी. लेकिन हनी सिंह ने काफी महीनों पर इस मुद्दे पर अपनी चुप्पी तोड़ी और यह स्पष्ट किया कि उन्होंने यह गाने नहीं लिखे हैं और जो लोग उन्हें यह कहते हैं कि उनकी वजह से युवा बर्बाद हो रहे हैं तो उनसे हनी सिंह का सवाल था कि क्या उनसे पहले कभी किसी ने इस तरह के गाने नहीं बनाये. यह भी हकीकत है कि भले ही हनी सिंह विवादों से घिरे रहे. लेकिन उन्हें आॅफरों की कमी नहीं हुई. उन्हें बॉलीवुड के कई बड़े आॅफर मिले. उन्होंने अमिताभ बच्चन, सलमान खान, शाहरुख खान, अक्षय कुमार जैसे तमाम सुपरस्टार्स के लिए गाने बनाये.  लेकिन सबसे बड़ा विवाद उस वक्त खड़ा हुआ. जब वे अचानक लाइमलाइट से कोसों दूर हो गये. उन्होंने स्टार प्लस के सुपरहिट शो इंडियाज रॉस्टार, जिसकी वे खुद अगुवाई कर रहे थे. उस बीच में ही छोड़ दिया. अपने गीतों के बोल में...शुरू किया मैंने एज म्यूजिक डायरेक्टर, आज मेरे दोस्त यार बड़े बड़े एक्टर जैसे शब्दों का इस्तेमाल करने वाले हनी सिंह को लेकर अफवाह उड़ने लगी कि शाहरुख खान से उनकी अनबन हो गयी है. एक टुर के दौरान. और शाहरुख ने उन्हें थप्पड़ जड़ दिया है. जिस वजह से वे बीमार हो गये हैं. बाद में यह भी खबर आने लगी कि वे दुर्घटना ग्रस्त हो गये थे और उन्हें आराम करने की सलाह दी गयी है. लेकिन अचानक एक खबर फिर से लोगों के सामने आयी और वह यह थी कि हनी सिंह किसी दुर्घटना के नहीं, बल्कि रिहैबिटेशन सेंटर में इन दिनों अपना इलाज करवा रहे हैं. चूंकि वे अत्यधिक ड्रग व नशीले पदार्थ के आदि हो चुके थे. और इज वजह से उन्होंने खुद को पूरी तरह से लाइमलाइट से दूर कर लिया है. उन्होंने एक बार एक इंटरव्यू के दौरान यह बात कही थी कि भारत को किसी देवदास की जरूरत नहीं है. इसलिए वे अपने गीतों में प्यार में धोखे खाने वाले लड़कों को देवदास बनने की नहीं बल्कि जिंदगी में आगे बढ़ने की सलाह देते हैं. तो फिर ऐसी क्या वजहें रहीं, जिसने उन्हें देवदास बनने पर मजबूर कर दिया. वह भी एक ऐसे दौर में जब हनी सिंह सफलता की चरम सीमा पर थे. यकीनन इस सवाल के ठोस जवाब किसी के पास नहीं हैं. और खुद हनी सिंह व उनके दोस्त यार इस विषय पर बात करने से कतरा रहे हैं. हाल ही में टीसीरिज ने ऋतिक रोशन व सोनम कपूर पर फिल्माये गये गीत धीरे धीरे से मेरी जिंदगी... का रीमिक्स वर्जन लांच किया तो सबकी आंखें इस गीत के लेखक व संगीत निर्देशक हनी सिंह को तलाश रही थी. मीडिया को पूरी उम्मीद थी कि शायद आज हनी मीडिया के सामने आयेंगे. मगर मीडिया को निराशा ही हाथ लगी.  इंडियाज रॉकस्टार की लांचिंग के दौरान ही वह आखिरी बार मीडिया से खुल कर रूबरू हुए थे और उन्होंने अपने जोश, जुनून और गीतों से सबका मनोरंजन किया था, लेकिन अचानक जब वे शो से गायब हुए तो सबके दिमाग में सवाल यही थे कि कहां गये हनी सिंह? 
 नशे की धुत में जिंदगी तबाह करते सितारे
यह पहली बार नहीं है, जब किसी सितारे के बारे में ऐसी खबरें आ रही हैं. हां, मगर यह हकीकत है कि कई सितारें डिप्रेशन में आकर ड्रग का सहारा लेते हैं. वे जिस लोकप्रियता और शोहरत की तलाश में यहां आते हैं, वह उन्हें नहीं मिलती. लेकिन हनी सिंह को तो लोकप्रियता भी मिली और पैसे शोहरत भी. फिर भी वे क्यों नशे के शिकार हुए. बहरहाल, इस सवाल का जवाब किसी के पास नहीं है. सफलता एक नशे की तरह है. जो सिर चढ़कर बोलता है तो आदमी नशे की 
चक्र व्यूह में फंस ही जाता है. हनी सिंह ही नहीं बॉलीवुड और ग्लैमर जगत की कई ऐसी हिस्तयां हैं जो इस नशे की लत की शिकार हुई हैं 
-अभिनेता संजय दत्त ने बहुत छोटी उम्र में फिल्म रॉकी से सफलता हासिल कर ली थी,लेकिन उन्हें भी ड्रग की लत लग गयी थी. संजय दत्त ने यह बात मानी भी है कि उन्हें नौ साल तक लगातार ड्रग का सेवन किया था. जिसके इलाज के लिए उन्हें अमेरिका के टेक्सस पुर्नसुधार गृह में जाना पड़ गया था. जहां उन्हें कई महीने बिताने पड़े थे. इसके बाद उनकी स्थिति में सुधार हो पायी थी.
-अभिनेता फरदीन खान भी नशे की लत की वजह सी न सिर्फ पुलिस कस्टडी में जा चुके हैं बल्कि उन्हें भी कुछ हफ्ते पुर्नसुधारगृह में जाना पड़ गया था. 
-9०के दशक की मशहूर मॉडल रह चुकी गीताजंलि नागपाल ड्रग की लत की वजह से सड़क पर रहने लगी थी. दूसरे घरों में वह नौकरानी का काम करती थी. खबरें तो यहां तक भी है कि उन्होंने ड्रग के पैसे इकट्ठा करने के लिए जिस्मफरोशी के व्यापार का भी हिस्सा बन गयी थी. 
हृदयेश का हृदय बदला और बना हनी सिंह
 जी हां, युवाओं के इंस्टैंट आइकॉन यो यो हनी सिंह पहले हृदयेश थे. उन्हें संगीत में बचपन से ही दिलचस्पी हो गयी थी. चार साल की उम्र से उन्होंने तबला बजाना शुरू कर दिया था. लेकिन उनके परिवार वालों को उनका तबला बजाना पसंद नहीं था.  वह चाहते थे कि  बाकी अच्छे परिवारों की तरह हनी भी इंजीनियर बनें या फिर उनका बिजनेस संभालें. लेकिन उन्होंने यह बात नहीं मानी,  जिसके बाद उन्हें घर से निकाला दे दिया गया था. संभवत: उन्हें बचपन में परिवार का वह प्यार हासिल नहीं हुआ, जिसकी उन्हें उम्मीद और आरजू थी. यह भी एक बड़ी वजह हो सकती है कि वे नशे की चपेट में कम उम्र में ही आ गये हो. हालांकि हनी ने अपनी बातचीत में कई बार इस बात का जिक्र किया है कि पिता का घर छोड़ने के बाद वे फौरन लंदन चले गये थे, जहां उन्होंने संगीत की पढ़ाई की थी. यह भी मुमकिन है कि वहां विलायती संगत में उन्हें नशा करना एक आम बात लगी हो और कुछ हद तक शुरुआती और युवा दौर में वे अपने परिवार से मिले दर्द को भूल पाने में इंस्टैंट राहत हासिल कर पा रहे हों. हनी सिंह ने सेशन और रिकॉर्डिंग आर्टिस्ट के तौर पर अपनी  शुरुआत की थी. सन 2004 में हनी अपनी किस्मत आज़माने के लिए पहली बार मुंबई आये थ, े लेकिन उन्हें नाकामयाबी ही हाथ लगी. 8 महीने के स्ट्रगल के बाद वह इंग्लैंड वापस चले गए और भंगड़ा आर्टिस्ट के तौर पर काम करने लगे. 2006 में वे फिर भारत वापस आये और अशोक मस्ती के साथ मिलकर सुपरिहट गीत खड़के गीलासी का निर्माण किया और उसके  बाद वह पंजाब में रहने लगे. हनी के लक 28 और चस्का गीत की वजह से उनकी लोकप्रियता दिल्ली और मुंबई  पहुंच चुकी थी. लेकिन इसी बीच हनी को किसी ने कहा कि उनके गीतों को लोग जानते हैं,लेकिन उन्हें कोई नहीं पहचानता, जिसके बाद हनी ने इंटरनेशनल विल्लेजर्स नाम का एक एल्बम बनाने का निर्णय लिया और छह सालों तक हनी ने जो कुछ भी कमाया था सब कुछ उस में लगा दिया था. उस एल्बम ने हनी सिंह को रातों रात स्टार बना दिया. कल तक जिस हनी को कोई जानता नहीं था उसे सैफ अली खान के मुंबई आॅफिस से फोन आया और इंटरनेशनल विलेजर्स का गीत मैं शराबी को सात मिलियन डॉलर्स में अपनी फिल्म कॉकटेल के लिए खरीदा. उसके बाद हर दूसरी बॉलीवुड फिल्म का आॅफर हनी सिंह को मिलने लगा और हनी शोहरत की उस बुलंदी पर पहुंच गए जहां अब तक कोई पॉपस्टार नहीं पहुंच पाया था।फल्मि में हनी सिंह का गाना मतलब सफलता की गारंटी माना जाने लगा. दरअसल, हकीकत यह है कि हनी सिंह ने उस रिक्त स्थान को भरा, जहां बाबा सहगल ने विराम लगाया था. बाबा का दौर अब बदल चुका था. चूंकि हनी लंदन से सीख कर आये थे.  उनका हृदय परिवर्तन हो चुका था और वे यो यो संस्कृति के ही संगत में रहे. सो वे पूरी तरह यो यो में ढल गये और उनके साथ जमाना भी साथ चलने लगा. 
जय वीरु से नहीं बने दोस्त...
हनी सिंह ने पिछले कुछ सालों में रैप संगीत में एकाधिकार राज किया है, शायद यही वजह है कि जैसे जैसे उन्होंने ऊंचाईयों को छुआ. वे अपने उन दोस्तों से दूर होते गये. जिन्होंने शुरुआती दौर में उनका काफी साथ दिया था. इन दोस्तों में गिप्पी गरेवाल का नाम सबसे पहले आता है. हालांकि गिप्पी हनी सिंह के बारे में अपनी राय को स्पष्ट नहीं करते. वे अपनी नाराजगी साफ लफ्जों में नहीं दर्ज करते. लेकिन उनकी बातों से यह महसूस होता है कि उन्हें इस बात की तकलीफ जरूर है कि उन्हें हनी सिंह से जितनी उम्मीद थी. उन्हें उनका साथ उतना नहीं मिला. शायद यह भी वजह है कि हनी सिंह की जिंदगी में कोई वीरू नहीं आया या यूं कहें उन्होंने न तो वीरू को साथ लेकर चले और न ही जय बन कर फर्ज निभाया.  मालूम हो कि शराबी गीत मूलत: गिप्पी के गीत थे. बकौल गिप्पी मुझे हनी पाजी से कोई शिकायत नहीं है. हम दोनों ने साथ साथ बहुत काम किया है. हमारी मेसेज से अभी कुछ दिनों पहले तक भी बातें होती रहती थीं. उन्होंने मुझसे शराबी गीत मांगा था तो मैंने उन्हें खुशी खुशी सपोर्ट किया और मैं खुश हूं कि वह गीत इतना लोकप्रिय हुआ. हां, मैंने उन्हें कई बार मेसेज किये फोन किये कि वे मुझसे मिलें. लेकिन हर बार उनके मैनेजर आये तो यह बात मुझे अखरी. फिर मैंने उन्हें अपने बॉलीवुड डेब्यूट फिल्म के बारे में भी बताया था. तब मुझे उनकी तरफ से कोई उत्तर नहीं मिला. लेकिन मैं उन्हें सारी शुभकामनाएं देता हूं और लोगों से सुना है कि वे बीमार हैं. अगर ऐसा है तो वह जल्दी ठीक हो जायें. मैं यही उम्मीद करता हूं. 
कयासों का सिलसिला जारी 
रैपर यो यो हनी सिंह के  लापता  होने को लेकर तमाम तरह के कयास महीनों से लग रहे हैं, लेकिन यह अब तक पता नहीं चल पा रहा कि वह आखिर हैं कहां. दरअसल, मीडिया रिपोर्टों  के अनुसार  पंजाबी गायक जसबीर जस्सी ने हनी सिंह से जुड़ा एक बड़ा खुलासा किया है और कहा है कि वह हनी सिंह से एक रिहैबिलिटेशन सेंटर में मिले थे.वे बिल्कुल दुबले पतले से नजर आ रहे थे. जैसे वे आमतौर पर दिखते हैं. उससे बिल्कुल अलग. अपने गानों में नशे को इतनी तवज्जो देने वाले हनी सिंह दरअसल अपने जीवन में भी उसे इतना ही ज़रूरी मानते हैं और यही नशा उन पर भारी पड़ गया. हनी सिंह शराब की लत से परेशान थे और इसे छोड़ना चाह रहे थ,े जिसके बाद उन्होंने रिहैब सेंटर जाने का फैसला किया था. एक कहानी यह भी है कि  विदेश में एक शो परफॉर्म करने के लिए लगातार उन्हें कॉल्स आ रहे थे. बार-बार आने वाले कॉल्स से परेशान हनी सिंह ने गुस्से में अपने सिर पर ही बोतल दे मारी थी. उनके सिर से काफी ब्लीडिंग होने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती किया गया था.बाद में अपने गुस्से और बुरी आदतों पर कंट्रोल के लिए हनी सिंह रिहैब सेंटर चले गए थे। सिर्फ चर्चाएं यही तक सीमित नहीं थी ऐसी अफवाहें भी  उड़ी थीं कि एक पार्टी में शाहरुख खान ने उनको ज़ोर का थप्पड़ मारा था जिसके बाद वो डिप्रेशन में चले गए थे और उनकी कोई खोज खबर नहीं ली. इन सब चर्चाओं के बीच  न्यू ईयर के मौके पर हनी सिंह ने अपनी एक तसवीर अपलोड की थी जो कि  कुछ बच्चों के साथ पोस्ट किया था कि वो बिल्कुल ठीक हैं. खबरें यह भी हैं कि हनी सिंह किसी कांसर्ट में जा रहे थे और अचानक उनकी गाड़ी दुर्घटना ग्रस्त हो गयी थी.

वैवाहिक संबंध
यह हकीकत है कि हनी सिंह ने लंबे समय तक अपनी शादी की खबरें छुपा कर रखी. वे इस बारे में कहते रहे कि उनकी पत् नी को यह बात पसंद नहीं कि वह मिसेज हनी सिंह कहलायें. वह खुद को लाइमलाइट से दूर रखना चाहती हैं. इसलिए वे कभी परदे के सामने नहीं आयीं. हालांकि हनी को बचपन में उनके परिवार वालों का साथ भले ही न मिला हो. लेकिन उनके करीबी बताते हैं कि उनकी शादीशुदा जिंदगी काफी सही तरीके से चल रही थी. उनकी पत् नी ने ही कुछ दिनों पहले बयान दिया था कि हनी सिंह जल्द ही लौटेंगे. वे बिल्कुल ठीक हैं. उनके इस बयान से स्पष्ट होता है कि वे हनी सिंह के साथ हैं और उनका पूरा साथ दे रही हैं. 

हनी सिंह से जुड़ी कुछ दिलचस्प बातें

फिल्म  कॉकटेल के लिए हनी सिंह ने सात मिलियन रु पये का गाना लिखा था.यह हिंदी सिनेमा के लिए सबसे महंगे गीतों में से एक है.

हृदेश सिंह से हनी सिंह फिर यो यो हनी सिंह. यो यो हनी सिंह नाम यूं पड़ा किपढ़ाई के दौरान उनके अंगरेज़ दोस्त उन्हें इस नाम से बुलाते थ.े लेकिन उन्होंने बाद में अपना यही नाम रख लिया.हनी सिंह की माने तो यो यो हनी सिंह का मतलब योर ओन हनी सिंह है.

हनी सिंह अपने स्कूल के दिनों में अमोल पालेकर की बहुत अच्छी मिमिक्र ी करते थे.


आरजे मंत्रा, हनी सिंह के करीबी मित्रों में से एक
हनी सिंह के बारे में भले ही कितनी भी अफवाहें उड़ती रहे. मैं जानता हूं कि वह दिल के साफ बंदे हैं.हनी सिंह जब भी गायब होते हैं. वह कुछ न कुछ क्रियेट कर रहे होते हैं. तो वह धमाका फिर से करेंगे. मुझे यकीन है. हनी सिंह से मैं जिस दिन मिला था. हम दोनों लांग ड्राइव पर गये थे. उनकी एक बात मुझे हमेशा अच्छी लगती है कि वह सिर्फ अपने लैपटॉप पर काम करते हैं और किसी की कॉपी करने की कोशिश नहीं करते. वे सिर्फ खुद का क्रियेशन करना पसंद करते हैं. 
बॉक्स में
भूषण कुमार, टीसीरिज प्रमुख
हां, यह हकीकत है कि हनी सिंह को हमने भी इस लांच के दौरान मिस किया. हम चाहते थे कि उन्होंने खुद धीरे धीरे से सांग के लिए कितनी मेहनत की है तो वह मीडिया के सामने आयें. लेकिन इस बात का मुझे भी अफसोस है कि ऐसा नहीं हो पा रहा, क्योंकि हनी सिंह इन दिनों बीमार हैं, इससे ज्यादा मैं इस बारे में नहीं कह सकता. हां, लेकिन उन्होंने लांच के पहले मुझसे बात की थी और मुझे बहुत सारे विशेज भी दिये. हनी सिंह के साथ काम करना हमेशा ही उत्साहवर्धक होता है, क्योंकि मुझे लगता है कि वह उन चुंिनंदा कंपोजर और सिंगर में से हैं जिन्होंने अपनी एक अलग पहचान बनाई है और काम के प्रति वह बहुत ज्यादा कमिटेड रहते हैं. उनका अपना एक स्टाइल है. उन्होंने खुद अपनी यूएसपी बनाई है. उन्होंने अपना टच व फ्लेवर दिया है. शायद इसलिए युवा उन्हें पसंद करते हैं. व्यक्तिगत तौर पर भी वे काफी हंसमुख व्यक्ति हैं. जिंदगी को बोझ की तरह नहीं लेते. जोश जूनून के साथ काम करते देखा है मैंने हमेशा उन्हें. वे हमेशा अपनी डेडलाइन पूरी करते हैं. उनके नखरे नहीं हैं. वे जोश से काम करत ेहैं. टीसीरिज के साथ उनका रिश्ता बहुत खास है. और हमेशा रहेगा. खास बात यह है कि हनी सिंह ही वह व्यक्ति हंै, जिन्होंने मुझे बताया कि उन्होंने कभी मेरे पिता गुलशन कुमार का कोई इंटरव्यू पढ़ा था. जिसमें उन्होंने पढ़ा था कि पापा के सबसे पसंदीदा गीतों में से एक है धीरे धीरे से...और उन्होंने ही मुझे यह आइडिया दिया कि मुझे पापा के लिए इस गाने पर कुछ काम करना चाहिए और तब मुझे लगा कि क्यों न मैं इस गाने को एक अलग अवतार में दोबारा लोगों के  सामने लाऊं. तो मैं इस बात का  क्रेडिट हनी सिंह को ही दूंगा, जिन्होंने मेरा ध्यान आकर्षित कराया. उन्होंने जो पहचान बनाई है अपने बलबूते बनायी है. और वे हमेशा यूं ही आगे बढ़ते रहेंगे. हनी सिंह ने टीसीरिज के लिए जितने गाने बनाये हैं. सारे एक से बढ़ कर एक हिट रहे हैं. आगे भी यह सिलसिला जारी  रहेगा.

सेकेंड लीड से लीड बनना है बड़ी कामयाबी : श्रीतामा मुखर्जी


िकम ही कलाकार ऐसे होते हैं, जिन्हें सेकेंड लीड से उसी प्रोडक् शन हाउस के दूसरे शो में लीड किरदार निभाने का मौका मिलता है. श्रीतमाा उन दिनों चांदिवली स्टूडियो में ही जहां एकता के बाकी शोज की भी शूटिंग होती है. वही कलश की भी शूटिंग चल रही थी. जहां श्रीतामा सेकेंड लीड किरदार निभा रही थीं और उन्हें अचानक यह जानकारी मिली कि उन्हें एकता कपूर ने एक नये शो के लिए चुना है. इन दिनों स्टार प्लस के इस नये शो कुछ तो है तेरे मेरे दरमियां की काफी चर्चाएं हो रही हैं. 

श्रीतामा, एक ही प्रोडक् शन हाउस से जब आपको इतना बड़ा अवसर मिला, तो आपकी क्या प्रतिक्रिया थी?
यह मेरे लिए किसी सपने को पूरा करने जैसा ही था. एकता कपूर जी के साथ कौन काम नहीं करना चाहेगा और मैं तो दूसरे शो कलश में सेकेंड लीड में थी और अचानक मुझे खबर मिली कि एकता नये शो की तैयारी कर रही हैं और वे उसमें मुझे लीड करने का मौका दे रही हैं तो मैं बहुत ज्यादा खुश हो गयी थी. और फौरन मैंने अपने इस किरदार के लिए तैयारी शुरू कर दी थी.
एकता से इस शो के किरदार के लिए क्या क्या टिप्स मिले?
एकता मैम ने मुझे कहा कि इस शो में मैं कोयल का किरदार निभा रही हूं. और इस किरदार की यह खूबी है कि यह लड़की थोड़ी मासूम सी है. अपने परिवार वालों को प्यार करने वाली . सो, मुझे थोड़ा सा खुद का व्यवहार बदलना होगा. चूंकि मैम को लगता है कि मैं काफी कांफीडेंट दिखती भी हूं तो मुझे वह टोन थोड़ा बदलने की सीख दी गयी. साथ ही एकता मैम से मुझे इतनी ही वाहवाही मिल गयी कि उन्होंने मुझे लीड करने का मौका दिया. तो इससे बड़ी खुशखबरी मेरे लिए और कुछ नहीं हो सकती. 
शो के किरदार के बारे में बताएं? आप इससे पहले नेगेटिव किरदार निभाती आयी हैं?
हां, मुझे खुशी है कि काफी  वक्त के बाद मुझे पॉजिटिव किरदार निभाने का मौका मिला है. इससे पहले मैंने ग्रे शेड्स वाली भूमिकाएं अधिक की है. इस बार मैं बिल्कुल अलग से किरदार में हूं. हालांकि मुझे लगता है कि मैं ग्रे किरदार में अधिक फिट बैठती हूं तो यह मेरे लिए वाकई टफ था कि मैं खुद को किस तरह इस किरदार में ढाल पाऊं.
आप वास्तविक जिंदगी में कोयल से कितने करीब हैं?
मैं बिल्कुल अलग हूं कोयल से. मैं बहुत सारी बातों की परवाह नहीं करती. मस्ती में रहती हूं. शर्मिली तो बिल्कुल नहीं हूं. आत्मविश्वासी हूं और चूंकि मैं कई सालों से अपने घर से दूर रह रही हंूं. तो काफी आत्मनिर्भर भी बन चुकी हूं. मेरे पापा मुझे शेर बुलाते हैं. सो, मेरे लिए यह बिल्कुल नया अनुभव है.
आपके लिए प्यार की क्या परिभाषा है?
मैं भी मानती हूं कि जब आपको प्यार होता है, तो आप कुछ नहीं देखते.मैं भी बस ऐसे ही प्यार में विश्वास करती हूं कि दिमाग से प्यार नहीं हो सकता. दिल से ही होता है. 
आपका सपना हमेशा से एक्ट्रेस बनना ही था?
हां, मैं हमेशा से एक्ट्रेस ही बनना चाहती थी और मैंने इसकी तैयारी काफी पहले से शुरू कर दी थी. हालांकि मेरे पापा चाहते थे कि मैं पहले अपनी पढ़ाई पूरी कर लूं. लेकिन मैंने पापा को समझाया कि शायद मेरी जिंदगी में कुछ अच्छा होना लिखा है. तो पापा ने शर्त रखी थी कि काम मिलेगा तभी मैं कोटा से मुंबई जाने दूंगा. तो मैंने उस वक्त भी पापा को समझाया कि पापा यहां बैठे बैठे काम नहीं मिल पायेगा. मुझे मुंबई जाना ही होगा. मैं मुंबई आयी. यहां दूसरे जॉब कर रही थी. वहां के लोगों ने ही मुझे कहा कि मुझे एक्टिंग में कोशिश करनी चाहिए. तो मैंने वह सलाह मान ली. अच्छी बात यह है कि मुझे बहुत स्ट्रगल नहीं करना पड़ा. मुझे अच्छे काम मिलते रहे और अच्छे लोग मिलते रहे. यही वजह है कि मैं आज अपने काम से बिल्कुल संतुष्ट हूं और खुश हूं. 
विभव के साथ आपकी केमेस्ट्री कैसी है?
हम दोनों ने इससे पहले गुस्ताख दिल में साथ काम किया था. इसलिए हमलोग एक दूसरे से काफी फ्रेंडली हैं और काफी खुश हैं कि हम दोनों को फिर से बड़ा मौका मिला है. विभव काफी केयरिंग स्वभाव का है तो काफी मजा आ रहा है. साथ काम करने में

आराध्या है सबसे अहम : ऐश्वर्य

ऐश्वर्य राय बच्चन लंबे समय के बाद फिर से परदे पर वापसी कर रही हैं. फिल्म जज्बा में वे स्टंट करती हुई भी नजर आयेंगी. वे इस बात से खुश हैं कि उन्होंने अपने काम के साथ साथ अपनी बेटी की जिम्मेदारी को भी पूरा वक्त दिया है. और फिर से वे अपनी पसंदीदा दुनिया में लौट आयी हैं.

ऐश्वर्य, आप पिछले काफी समय से परदे पर नहीं रहीं. ऐसे में कैमरे को मिस किया?
नहीं, बिल्कुल मिस नहीं किया. क्योंकि ऐसा नहीं था कि मैं इस दुनिया से बिल्कुल अलग हो गयी थी. हां, बस मैं शूटिंग नहीं कर रही थी. वरना, निर्देशकों के साथ फिल्मों को लेकर चर्चाएं लगातार हो रही थीं. उन्हें वक्त देती ही थीं. बस, हां मैंने यह सोच रखा था कि जब तक आराध्या थोड़ी बड़ी नहीं हो जाती है. मैं उसको बिल्कुल अकेला नहीं छोड़ूंगी. यही वजह है कि मैं बिल्कुल उसके साथ साथ रही हूं. दरअसल, मेरे मम्मी पापा ने मुझे ऐसे ही पाला है और मैं भी अपनी बेटी के साथ पूरा वक्त देना चाहती थी और मुझे लगता है कि मां बनने से ज्यादा सुख तो किसी भ चीज में नहीं है. और मुझे समझ नहीं आ रहा कि लोग इसे मेरी कमबैक फिल्म क्यों कह रहे हैं. मैं कोई 10 सालों के बाद परदे पर नहीं लौट रही.
तो जब आप फिर से काम पर लौट आयी हैं तो आराध्या आपको मिस करती हैं?
नहीं आराध्या को अब भी पता नहीं है कि मेरा काम क्या है. और उसे कभी मिस होने का मौका इसलिए नहीं देती हूं कि कई बार शूटिंग के दौरान वह मेरे साथ ही होती थी. मैं शॉट देने के बाद फौरन उसके पास आ जाती थी. या फिर स्कूल पहुंचाने के बाद ही उसे मैं शूटिंग पर आती थी. और संजय (निर्देशक) ने मुझे काफी सपोर्ट किया. उनकी बेटियां भी अभी छोटी हैं और वह इस बात को अच्छी तरह समझ पाये कि एक छोटे बच्चे को मां की क्यों जरूरत पड़ती है.इसलिए उन्होंने सेट पर काफी अच्छा इंतजाम कर रखा था. और हर माता पिता के लिए उनके बच्चे सबसे खास होते हैं. मेरे लिए भी आराध्या खास हैं. उसकी एक मुस्कान से मेरी सारी परेशानी खत्म हो जाती है. हम आराध्या को बिल्कुल आम बच्चों की तरह ही जिंदगी दे रहे. ऐसा नहीं है कि हम उसे लैविश लाइफ दिखा रहे अभी से. इसलिए उसकी मासूमियत भी बरकरार है और हम चाहते हैं कि वह आम बच्चों की तरह ही पले बढ़े.
जज्बा में आपका अलग अवतार नजर आ रहा है?
हां, मैंने भी कोशिश की है कि दर्शकों को यह महसूस हो कि मैंने जो काम पहले कर लिये थे. वह मुझे नहीं करने थे. मुझे थोड़ा अलग करना था. यही वजह थी कि मैंने इस फिल्म को चुना. इसके बाद भी मेरे पास जो फिल्में आ रही हैं या फिर मैं जिन फिल्मों से जुड़ रही हूं. उन फिल्मों में इस बात की खूबी आप देखेंगे कि कोई भी फिल्म में मेरा किरदार एक दूसरे से मेल नहीं खाता. सभी किरदार अलग हैं. यह फिल्म सिर्फ स्टंट्स देखने के लिए नहीं हैं,बल्कि एक मां की कहानी है. मैं खुद एक मां हूं तो इस कहानी को अच्छे तरीके से समझ पायी हूं. और खुश हूं कि फिल्म को अच्छे रिस्पांस भी मिले हैं.
आज अमिताभ बच्चन का जन्मदिन भी है. इस साल आपकी क्या योजनाएं हैं, और बतौर एक परिवार के सदस्य और बतौर एक्टर वे आपको किस तरह प्रभावित करते हैं?
पा जैसी प्रसिद्धि मुझे लगता है कि आनेवाले कई दशकों तक संभव नहीं है. मैंने हमेशा उन्हें एक एक्टर के रूप में एडमायर किया है. अब भी उनसे काफी कुछ सीखने की कोशिश करती हूं. और पारिवारिक सदस्य के रूप में मैं कहूंगी कि वह हर किसी को अपनी राय रखने का मौका देते हैं. वे आजादी देते हैं. वे हम पर अपनी सोच भी नहीं थोपते. उनकी कोशिश यही होती है कि हम अपने निर्णय खुद लें. आराध्या उनकी लाड़ली हैं और वे दोनों जब साथ होते हैं तो आप उस मोमेंट को भूल नहीं सकते. दोनों में भावनात्मक जुड़ाव है. आराध्या लकी हैं कि उसे पा के रूप में दादाजी मिले हैं, जो उसे सांस्कृतिक रूप से काफी समृद्ध कर रहे हैं.
अब और किस तरह की फिल्में करने की चाहत है?
अभी तो मुझे बहुत सारे किरदार निभाने हैं.और बहुत सारे रोल मुझे आॅफर भी हो रहे हैं. मैं लगातार फिल्मों को न कह रही हूं, क्योंकि कई किरदार मुझे उत्साहित नहीं कर रहे. हां, मणि सर (मणि रत्नम) सर की फिल्म को मैंने हां, इसलिए क्योंकि उनका क्राफ्ट मुझे पसंद है. हमने पहले भी काम किया है और कमाल का काम किया है. दरअसल, मैं हमेशा से एक्सपेरिमेंट्स करने में विश्वास रखती हूं. फिर वह मेरी पहली फिल्म ही क्यों न हो. उस फिल्म को कई अदाकारा ने न कहा था. हो सकता है कि मैं भी यह सोचती कि शायद मुझे वह फिल्म नहीं करनी चाहिए. ऐसा रिस्क नहीं लेना चाहिए. लेकिन फिर भी मैंने काम किया.क्योंकि मुझे स्क्रिप्ट अच्छी लगी थी. इसलिए मैं खुश हूं कि मुझे अच्छे आॅफर मिल रहे हैं और मैं चुन कर ही फिल्में करूंगी. ऐ दिल है मुश्किल को लेकर भी मैं काफी उत्साहित हूं. खुश हूं. 

बाहुबली के वास्तविक हीरो


हाल ही में फिल्मोत्सव के दौरान श्रीनिवास मोहन ने फिल्म बाहुबली के वीएफएक्स को लेकर एक खास बातचीत की. श्रीनिवास मोहन ही इस फिल्म के वीएफएक्स सुपरवाइजर रहे. श्रीनिवास मोहन ने बताया कि किस तरह इस फिल्म में वीएफएक्स आर्टिस्ट ने अपनी सूझ बूझ से एक नयी दुनिया बनायी. इस फिल्म के शुरुआती दृश्यों की चर्चा करते हुए उन्होेंने बताया कि किस तरह वास्तविक शूटिंग सिर्फ स्वीमिंग पूल में हुई है लेकिन विचुअल इफेक्ट्स से उसे विशाल किया गया है. श्रीनिवास इस बात को स्वीकारते हैं कि अब भी भारत में विजुअल इफेक्टस की तकनीक पूरी तरह विकसित नहीं है. हमारे पास अब भी विदेशों जैसी तकनीक नहीं है. लेकिन इसके बावजूद बाहुबली में उन्होंने भारतीय स्टूडियो में ही कई चीजें गढ़ीं. उन्होंने इस बात की भी चर्चा की कि किस तरह विजुअल इफेक्ट्स की थ्योरी फिजिक्स की थ्योरी पर चलती है. लेकिन किस तरह इस फिल्म के लिए उन्होंने उन थ्योरी को भी बदले और दर्शकों को एक अलग अनुभव देने के लिए दूसरी दुनिया कायम की. दरअसल, यह हकीकत है कि आप भले ही बाहुबली देखने के पश्चात थियेटर से निकलने के बाद इस फिल्म की कहानी से खास राबतां न कर पाये हों या फिर वह आपके साथ काफी दिनों तक न रहे. लेकिन इस फिल्म में जिस तरह तकनीकों का प्रयोग किया गया है, वह आश्चर्य में डालती हैं. खासतौर से अब जबकि इस फिल्म के निर्माण की बारीकी को नजदीक से देखने और समझने का मौका मिला तो महसूस किया कि दरअसल, इस फिल्म के वास्तविक हीरो प्रभास नहीं बल्कि ये वीएफएक्स आर्टिस्ट ही हैं, जिन्होंने अपनी कलाकारी से एक अलग दुनिया बनाई है और जिस पर हम पूर्ण रूप से भरोसा करने के लिए भी मजबूर होते हैं. एक फिल्म की यही खासियत है कि वह किस तरह झूठ होकर भी दर्शकों में विश्वास जगा सके.

ूनिवर्सल फिल्में बननी हैं जरूरी : इरफान खान


इरफान खान जिस फिल्म में मौजूद होते हैं वे अपनी अदायगी और अंदाज से अन्य कलाकारों को पीछे छोड़ते चले जाते हैं. हम हर बार इरफान को देखते हैं और चौंकते हैं. वे अपने किरदारों में हमेशा नयापन लाने के लिए तत्पर रहते हैं. हाल ही में रिलीज हुई फिल्म तलवार में उन्हें सबसे सराहना मिली और इस हफ्ते रिलीज हो रही फिल्म जज्बा से भी उन्हें काफी उम्मीदें हैं. 

इरफान, आपकी हाल ही में रिलीज हुई फिल्म तलवार में आपके किरदार की काफी प्रशंसा हो रही है. आपकी क्या प्रतिक्रिया है? पीकू भी लाजवाब फिल्म रही.
मैं काफी खुश हूं. जाहिर है, जब एक कलाकार काम करता है और काम की सराहना होती है तो आप महसूस करते हंै कि आपकी मेहनत रंग लायी है और हर कलाकार इस बात से खुश होता है. मैं भी खुश हूं. मैं चाहता हूं कि मैं अनकनवेशनल काम ही करूं. वरना, आप बोर हो जायेंगे. खुद को स्थापित रखने के लिए प्रयोग करने जरूरी है.धीरे धीरे इंडस्ट्री भी बदल रही है और हां मैं जरूर कहूंगा कि यह साल मेरे लिए काफी खास है. और इस साल यह भी खास बात रही है कि अलग फिल्में हिट रही हैं. अब इसमें मेरा कितना योगदान रहा है.कितना नहीं. यह तो नहीं जानता.लेकिन एक बात महसूस करता हूं कि यह दुखदायी दौर नहीं है. यह सिनेमा इंडस्ट्री के लिए बहुत बड़ी बात है कि लोग अलग तरह की फिल्में देखना पसंद कर रहे हैं और उन्हें सराहना भी मिल रही है.अब ऐसी फिल्में बन रही हैं कि जो आपको एक्साइट भी कर रही है, एजुकेट भी कर रही है. साथ ही साथ मेसेज भी दे रही है. जैसे तलवार. तो मुझे लगता है कि यह एक गुड साइन है कि हम अच्छे दौर की तरफ जा रहे हैं.इस बात से यह एहसास हो रहा है कि अब आॅडियंस मैच्योर हुई है. दरअसल, आॅडियंस बदल रही है. और इसलिए फिल्में बदल रही हैं.फिल्ममेकर्स उनकी वजह से आ रहे हैं, क्योंकि आॅडियंस अलग फिल्मों का डिमांड कर रही हैं.
आमतौर पर बॉलीवुड के जो कलाकार हॉलीवुड का हिस्सा बनते हैं, वे सिर्फ पब्लिसिटी या छोटे से रोल में ही विलुप्त हो जाते हैं. लेकिन आप जब हॉलीवुड का हिस्सा बनते हैं तो आपको वहां भी अच्छे ही किरदार मिलते हैं. तो आपको क्या लगता है. क्या कारण हैं कि हॉलीवुड के निर्देशक भी आपके साथ काम करना चाहते हैं?
मुझे इस बारे में बिल्कुल एक्रुरेट जवाब देने में तो परेशानी होगी. मैंने कभी यह विश्लेषण किया नहीं है. मेरे लिए वैसे भी हॉलीवुड बॉलीवुड मैटर नहीं करता. अच्छा काम मैटर करता है. अच्छा विषय मैटर करता है. मैं मानता हूं कि फिल्म मेकिंग अपने आप में एक मिस्टीरियस जॉब है. किस चीज से कौन से लोग कब आकर्षित हो जायें. कौन सी बात कहां किसको कनेक्ट कर जाये. यह आप अनुमान नहीं कर सकते. लेकिन फिर भी आप तह तक नहीं जा सकते. आप तय नहीं कर सकते कि आपकी क्या बात किसको कहां कनेक्ट कर रही है. मैं मानता हूं कि हर व्यक्ति का अपना चार्म होता है, अपना आॅरा होता है.जिसे आॅडियंस देख रही है. या फिर डायरेक्टर जो एक्टर्स से मिल रहा है.जिसे देख कर उसे लगे कि आपको कुछ नया एक्सपीरियंस देगा. तो शायद यह वजह हो सकती है.जहां तक बात है कि बाकी कलाकारों का हॉलीवुड से जुड़ना तो मैं मानता हूं कि हर किसी की अपनी दुनिया है. अपनी सोच है. लोग अपने तरीके से काम करते हैं. कौन किस तरह से बढ़ना चाहता है. सबकी अपनी प्रायोरटरीज हैं. मैं इस पर कुछ कमेंट करना नहीं चाहता. ना मैं पसंद करता हूं.
आप मानते हैं कि आपको पहले हॉलीवुड में बड़ा नाम मिला फिर बॉलीवुड में ?
नहीं मुझे लगता है कि दोनों जगह साथ साथ काम चल रहा था. मुझे लगता है कि भारत में भी नाम बनने के काफी बाद मुझे हॉलीवुड में अवसर मिले.और ऐसा नहीं है कि बॉलीवुड ने मुझे कास्ट किया क्योंकि उन्होंने मेरा ग्रोथ हॉलीवुड में देखा. यहां आपको तभी कास्ट करेंगे. जब लोगों को यहां जरूरत होगी. किसी की लोकप्रियता से किसी की कास्टिंग अमूमन लीड किरदारों तक ही सीमित होती है. मैं जिस तरह का कलाकार हूं. मैं मानता हूं कि मेरे लिए किरदार को मेरी जरूरत है. तभी वो मुझे कास्ट करेंगे.
हॉलीवुड में हमारी फिल्मों को लेकर क्या नजरिया है?
मुझे लगता है कि थोड़ी सोच तो बदली है और मुझे लगता है कि यह बदल सकती है और अगर हम यूनिवर्सल कहानियां बनाएं. सिर्फ सांग गाने वाले नहीं.मुझे लगता है कि अब वह दौर शुरू हो गया है. जैसे अब हमने कुछ ऐसी फिल्में बनानी शुरू की है. फिर वह लंचबॉक्स जैसी फिल्में ही क्यों न हों. यहां से अधिक उस फिल्म को विदेशों में सराहना मिली है और धीरे धीरे यह पहचान बना सकती है. अगर थोड़े गंभीर होंगे तो.
बतौर एक्टर किसी फिल्म में क्या देखते हैं. काम करने से पहले?
मुझे लगता है कि यह पूरा पैकेज है. आपको स्टोरी एंटरटेन करनी चाहिए. एक्साइट करनी चाहिए. कंटेंट अच्छा होना चाहिए.थ्रीलर है फिल्म की कहानी तो वाकई रोलर कोस्टर राइड की तरह वह दर्शकों को थ्रील करनी चाहिए. तभी आपको फिल्में करने में मजा भी आयेगा.
एक एक्टर के रूप में हर फिल्म से आप खुद को किस तरह निखारते हैं?
अगर आपका काम आपके ग्रोथ में एड नहीं कर रहा है तो एक बहुत बड़ा बोझ होता है. मैं मानता हूं कि आप जो काम कर रहे हैं और उसके माध्यम से अगर आप ग्रो नहीं कर रहे हैं तो इसका मतलब है कि आपका काम आपको सब्सट्रैक्ट कर रहा है.आपको निराश करेगा.काम और आपके विकास का तालमेल वैसे ही होना चाहिए जो रिश्ता मियां बीवी का होता है.दोनों एक दूसरे के रक्षक ही हैं.
ऐश्वर्य राय बच्चन के साथ आपने पहली बार इस फिल्म में काम किया है. कैसा रहा अनुभव?
काफी दिल लगा कर काम करती हैं.बहुत ही सिंपल औरत हैं. अच्छा लगता है.काफी खूबसूरत हैं.
आप जिस फिल्म का भी हिस्सा होत हैं, कुछ अलग कर जाते हैं तो क्या फिल्म चुनते वक्त यह लगता है कि अरे यार स्क्रिप्ट कुछ भी हो...मैं तो इसमें कुछ अलग कर ही जाऊंगा?
नहीं बिल्कुल नहीं. काम को लेकर मेरा अप्रोच यह नहीं होता. हां, जब शुरू शुरू आया था. तो लगता था कि हां, अपनी पहचान बनानी है तो कुछ सोचा भी करता था. अब जबकि पहचान बन चुकी है तो आप उस स्क्रिप्ट में आपके किरदार में वह एक्साइटमेंट ढूंढते हैं. लोगों को लगे कि करके निकल गया कि नहीं निकला उस पर आपका बस नहीं है. आपका किरदार एक्साइट करता है कि नहीं लोगों को वह अहम है.कई बार आप सोचते हैं कि पता नहीं आपने कितना बड़ा कमाल कर दिया और लोग देख कर बोलते हैं कि यार ये तो कुछ था ही नहीं और कभी आप सिंपल चीज करते हैं और वह लोगों को पसंद आ जाती है. आप बस एंजॉय करके काम कीजिए.बाकी लोगों पर छोड़ दीजिए.
फिल्म जज्बा में ज्यादा चर्चा ऐश्वर्य की है तो कहीं इस बात का डर लगता है?
नहीं मुझे नहीं लगता कि इससे हीरो की बुनियाद कम होगी. लोगों को पता चल जाता है कि कौन कितना काम कर रहा है. किसका क्या योगदान है. वह तो लोगों के सामने आ ही जाती हैं बातें. और मैं मानता हूं कि अगर फिल्म में सिर्फ हीरोइन की ही कहानी होती तो पोस्टर में मेरा चेहरा क्यों होता. ये बातें मुझे हर्ट भी नहीं करतीं. क्योंकि कोई किसी का हिस्सा नहीं छीन सकता. किसी की वाहवाही नहीं छीन skte.