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20141203

शक्तिशाली महिलाओं के 9 रूप


देवी दुर्गा शक्ति की प्रतीक हैं. टेलीविजन ने हमेशा शक्तिशाली महिलाओं को सम्मान दिया है. सो, दुर्गा पूजा के बहाने उन 9 शक्तिशाली किरदारों पर एक नजर, जो देवी दुर्गा के 9 रूपों की तरह ही अपने व्यक्तित्व से दर्शकों का दिल जीत रही हैं. अनुप्रिया की रिपोर्ट

डोली अरमानों की उर्मि
जीटीवी पर प्रसारित हो रहे धारावाहिक डोली अरमानों की में उर्मि देवी दुर्गा का ही रूप नजर आ रही हैं. जिस तरह देवी दुर्गा संघर्ष और शक्ति की प्रतीक हैं. उर्मि भी कुछ इसी तरह महिला के इस स्वभाव को प्रस्तुत कर रही हैं. धारावाहिक में वे अपने पति द्वारा प्रताडित की जा रही हैं. लेकिन वह हिम्मत नहीं हार रहीं, बल्कि इसका सामना कर रहीं. वह अपने पति के आगे झूकने की बजाय, हिम्मत कर अपनी मंजिल खुद तलाश रही हैं. हिंदुस्तान की उन तमाम महिलाओं को उर्मि से यह सीख लेनी चाहिए और घरेलू हिंसा के खिलाफ आवाज उठानी चाहिए.
 ये हैं मोहब्बते की इशिता
स्टार प्लस पर प्रसारित हो रहे धारावाहिक ये हैं मोहब्बते में इशिता खुद मां नहीं बन सकती. लेकिन उसके मन में जितनी ममता है. वह एक मां में भी नहीं. वह रुही को अपनी बेटी के रूप में स्वीकारती है और प्यार व दयाभाव की नजर से हर किसी को देखती है. देवी दुर्गा भी दयालु और ममतामयी हैं. सो, इशिता देवी के इस व्यक्तित्व को दर्शकों तक पहुंचा रही हैं.
जमाई राजा की रोशनी
देवी दुर्गा हमेशा जरूरतमंदों की मदद करती हैं और  खासतौर से उनकी महिमा यही होती है कि वह गरीबों की अधिक मदद करें. जमाई राजा के रोशनी जो किरदार निभा रही हैं. वह अमीर खानदान से संबंध रखने के बावजूद स्लम में रहनेवाले बच्चों को शिक्षा दे रही हैं. उन्हें रहने के लिए घर दे रही है. यह एक महिला की दरियादिली को दर्शाता है. एक महिला बहुत दयालू होती है और खुद से पहले दूसरों के बारे में सोचती है. रोशनी इस संदर्भ में दुर्गा के रूपों की प्रतीक हैं.
हमसफर्स की आरजू नौसिन खान
सोनी टीवी पर हाल ही में प्रारंभ हुए शो हमसफर्स की आरजू भी महिलाओं की शक्तिशाली सोच की प्रतीक हैं. जिस तरह देवी दुर्गा ने अकेले  ही राक्षसों का वध कर बुराई पर अच्छाई हासिल किया. अकेले ही हर मुश्किलों का सामना कर अपनी मंजिल तक पहुंचीं. हमसफर्स की आरजू भी महिलाओं की एक नयी और  स्वछंद सोच की प्रतीक हैं. वे अपने पिता का नाम ढोने में विश्वास नहीं करतीं. अपनी काबिलियत के दम पर वह भीड़ में अपनी जगह बनाने की कामयाब कोशिशें कर रही हैं.
 एक नयी पहचान की शारदा व साक्षी
सोनी टीवी के हिट धारावाहिक एक नयी पहचान में शारदा अनपढ़ रहती हैं. लेकिन बहू साक्षी के आने के बाद वह अपनी अहमियत समझती हैं और धीरे धीरे वह पढ़ना शुरू करती हैं. इस शो ने दर्शाया है कि कैसे एक महिला अच्छी मां हो सकती हैं और उन्हें अगर प्रोत्साहन मिले तो अपनी सूझबूझ और समझ से वह व्यवसाय को भी आगे बढ़ा सकती हैं. उनमें अक्ल की कमी नहीं होती. शारदा और साक्षी का किरदार भी महिलाओं की शक्तिशाली सोच का ही प्रतीक है.
जोधा अकबर
जोधा भी देवी दुर्गा के रूप का ही प्रतीक हैं. जोधा एक शहंशाह का पत् नी हैं. लेकिन उनके मन में करुणा अपरंपार है. वह परिवार को एक धागे में पिरो कर रखना चाहती हैं. जोधा ने ही अकबर को प्रेम करना सिखाया. वह हमेशा अकबर की आंखों पर चढ़े परदे को हटाने में उनकी मदद करती हैं. और सच का साथ देने की कोशिश करती हैं. वह महारानी होकर भी अपनी अलग पहचान बनाने में कामयाब रहीं. लोग अकबर जोधा नहीं, बल्कि जोधा अकबर पुकारते हैं. इस लिहाज से सिर्फ एक बादशाह की पत् नी होने की बजाय उन्होंने अपनी एकल पहचान स्थापित की. परिवार के लोग उनके प्रति साजिशें रचें. फिर भी वह माफ करने में यकीन करती हैं.
दीया और बाती हम की संध्या
दीया और बाती हम में संध्या बुराईयों को मिटा कर अपनी सोच, समझ से खुद को शक्तिशाली महिला के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रही हैं. वह दुनिया को बताना चाहती हैं कि वे पुरुषों से कंधें से कंधा मिला कर चलना जानती हैं. वह एक पुलिस आॅफिसर हैं. लेकिन वह सिर्फ छोटे मोटे नहीं, बल्कि जोखिम वाले केसेज भी सुलझा सकती हैं. वह मर्दानी हैं और हार नहीं मानना जानतीं. एक शक्तिशाली महिला के रूप में संध्या से आज की आधुनिक लड़कियों को सीख लेनी ही चाहिए.
एयरलाइन्स की अन्नया
स्टार प्लस पर प्रसारित हो रहे धारावाहिक एयरलाइंस के माध्यम से भी अन्नया के रूप में उन लड़कियों की कहानी कहने की कोशिश की जा रही हैं, जो लड़कियां यह सोच कर बैठती हैं कि ये लड़कों का काम है. हम ये नहीं कर सकतीं. आमतौर पर पायलेट के रूप लड़कियों की संख्या लड़कों के मुकाबले कम हैं. इस धारावाहिक में भी दिखाया जा रहा है कि किस तरह एक महिला पायलट पर फब्तियां कसी जाती हैं. कैसे उन्हें पुरुषों से कम आंका जाता है. कैसे उनकी काबिलियत पर शक किया जाता है. कैसे उन्हें हमेशा पुरुष साथी से मदद लेने की सीख दी जाती है. लेकिन तमाम बातों के बावजूद कैसे अन्नया अपनी जगह बनाने में कामयाब होती है.
बालिका वधू की आनंदी
कलर्स के धारावाहिक बालिका वधू की आनंदी भी शक्ति का ही एक रूप है. वह लगातार जरूरतमंदों की मदद करती हैं. एक अपाहिज बच्चे को वह गोद लेती है. महिला शिक्षा पर जोर दे रही है. परिवार को एक सूत्र में बांध कर रखने की कोशिश कर रही हैं.
सेकेंड स्टोरी
सेलिबे्रशन का होता है मौका
यादगार दुर्गा पूजा
ेॅेटेलीविजन की बंगाली बाला दुर्गा पूजा को खास तरीके से सेलिब्रेट करना कभी नहीं भूलतीं. फिर भले ही वह अपने अपने होम टाउन में रहें या न रहें.
परिवार की खुशियों का मौका
शांतनु (शान) मुखर्जी : मेरी पत् नी गुजरात से हैं तो हमारी पूरी कोशिश होती है कि मैं नवरात्रि के दौरान डांडिया जरूर खेलूं. तो पूजा के साथ साथ मस्ती भी होती है. मेरी मां माता रानी के लिए भोग बनाती हैं और हम फिर उसे मां को चढ़ाते हैं. मैं फास्ट नहीं रखता इस दौरान. मैं इस दौरान कभी कोलकाता नहीं गया. हां, मगर कोलकाता के दुर्गा पूजा की खासियत को हमेशा सुनते आया हूं. कभी मौका मिला तो जरूर जाऊंगा. मेरे लिए पूजा का महत्व इस वजह से है, क्योंकि इस दौरान मेरा पूरा परिवार साथ में यह सेलिब्रेट करता है और उनकी खुशी में ही मेरी खुशी है.
सयानतनी घोष : वेज खाना पसंद करती हूं
मेरे लिए नवरात्र का खास महत्व है. मैं इस दिन का बेसब्री से इंतजार करती हूं. मुझे अष्टमी के दिन लोखंडवाला के पंडाल में जाना बेहद पसंद है. मेरी कोशिश होती है कि मैं यह पर्व अपने परिवार के साथ  ही मनाऊं. बचपन में यह त्योहार हम सभी के लिए रियूनियन होता था. हम लोग सभी बच्चे मिल कर एकत्रित होते थे और फिर जगह जगह का पंडाल घूमना, गोलगप्पे खाना, गुब्बारे खरीदना यं सब बहुत करते थे. मैं इस दौरान वेजीटेरियन खाना खाना ही पसंद करती हूं.
देवी दुर्गा की मूर्तियां करती थीं आकर्षित
देबिना बनर्जी : कोलकाता में मैं कुमारटुली में रहती हूं. जहां, पूजा बहुत धूमधाम से मनाई जाती है. फिलहाल मुंबई रहने लगी हूं तो हर बार पूजा में जाना संभव नहीं हो पाता. लेकिन मुझे इस दौरान पंडाल घूमने. मिस्टी दोई खाने में बहुत मजा आता है. यही एक वक्त होता था. जब घर का खाना खाना मुझे बिल्कुल अच्छा नहीं लगता था. मुझे कोलकाता में जिस तरह की मूर्तियां बनती हैं. वह मुझे बहुत आकर्षित करती थीं और मैं बचपन में जहां ये बनाये जाते थे. वहां जरूर जाती थी.
मां का भोग खाना सबसे अधिक पसंद
सुमोना चक्रवर्ती : मैं यह दिन अपने परिवार के साथ मनाना पसंद करती हूं. मुझे बांग्ला के पारंपरिक पोषाक, उस अंदाज  की साड़ी पहनना और मां की स्तूति करना अच्छा लगता है. मैं इस दौरान मुंबई के सभी पंडालों में जाती हूं. मां के भोग में अलग ही स्वाद होता है, मुझे सबसे अधिक भोग खाना ही पसंद आता है.

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