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20111111

युवाओं के रॉकस्टार निर्देशक इम्तियाज


वर्ष 2005 में अभय देओल और आशिया टाकिया अभिनीत एक फिल्म आयी थी, सोचा ना था. फिल्म की कहानी एक लड़के और लड़की की प्रेम कहानी पर आधारित थी. इस प्रेम कहानी के रास्ते में कोई भी बाधा नहीं थी. मसलन मिया बीवी को छोड़कर पूरी दुनिया इस शादी के लिए राजी थी. लेकिन हालात कुछ ऐसे दिलचस्प मोड़ लेते हैं. कल तक जो शादी नहीं करना चाहते थे. अचानक उन दोनों में प्यार हो जाता है. लेकिन अब उनका परिवार इस पक्ष में नहीं. वे प्रेमी युगल बेफिक्र होकर भाग जाते हैं. और सामान्य सी दिखनेवाली यह प्रेम कहानी दर्शकों को बेहद खास लगने लगती है. वजह फिल्म के नायक-नायिका से आम प्रेमी युगल को जोड़ लेते हैं. इसी क्रम में अगली कड़ी हमें आदित्य और गीत के रूप में फिल्म जब वी मेट में देखने को मिलती है. फिर एक प्रेम कहानी की शुरुआत होती है. इसमें भी नायक-नायिका को बहुत बाद में एहसास होता है कि दोनों में प्यार है. गीत जैसे किरदार से लगभग उस दौर की हर युवा लड़की ने खुद को जुड़ा पाया. यही सफर आगे बढ़ता है और आकर रुकता है लव आज कल के मीरा जय वर्ध्दन सिंह की प्रेम कहानी पर. फिल्म में दो जेनरेशन के बीच पनपते प्रेम की कहानी दर्शाई जाती है. यहां भी जय और मीरा को काफी बाद में एहसास होता है कि दरअसल, दोनों के बीच दोस्ती से अधिक कुछ और भी है. अब इस सफर में फिर से एक और कड़ी जुड़ी है. रॉकस्टार के रूप में, जिसमें नायक को रॉकस्टार बनना है. इसलिए अपने संगीत में दर्द लाने के लिए वह एक लड़की से प्यार करता है. दिखावे की तरह. लेकिन जब वह उससे दूर जाती है वाकई उसे एहसास होता है कि उसे प्यार था. इस पूरे सफर में भले ही किरदार बदले हैं. कहानी बदली है. हालात बदले हैं. लेकिन उन सभी के बीच पनपती प्रेम कहानियां नहीं बदलती. दरअसल , निर्देशक इम्तियाज अली अपनी सोच से प्रेम कहानियों को बिल्कुल अदभुत तरीके से परदे पर उतारने के माहिर खिलाड़ी हैं. किरदारों के हालात में उलट फेर कर वे भलिभांति दर्शकों को फिल्म से जोड़ने में कामयाब हो जाते हैं. यही उनकी यूएसपी ( खासियत) भी है और यही उन्हें अन्य निर्देशकों से अलग भी करती है. और शायद यही वजह है कि उनकी फिल्मों का सीधा जुड़ाव दर्शकों से हो जाता है. खासतौर से युवा दर्शकों से. सोचा ना था से लेकर रॉकस्टार तक के सफर में इम्तियाज इस बात को भलिभांति समझ चुके हैं कि उनके दर्शकों को क्या चाहिए. उनकी फिल्मों के किरदार कभी अटपटे से या एकल नहीं होते. निश्चित तौर पर दो किरदारों के बीच घटती या पनपती भावानात्मक वातावरण ही उनकी कहानी के लिए संजीवनी है. फिल्मों के गीत, दृश्य, किरदारों के नाम, उनका पहनावा सबकुछ बिल्कुल आम युवा दर्शकों से मेल खाता सा है. शायद इसकी वजह भी रही है कि इम्तियाज ने झारखंड के जमशेदपुर जैसे शहर के बाद दिल्ली में अपने जीवन के कुछ महत्वपूर्ण पल बिताये हैं. यही वजह है कि वे झारखंड के युवा के साथ साथ दिल्ली दे मुंडे की नब्ज को भी भलिभांति भाप पाये हैं. अपनी फिल्मों में वे अपने इन्हीं अनुभवों को जोड़ते हैं. और देखते ही देखते युवा उस सोच के कायल हो जाते हैं. फिर चाहे वह पंजाबी परिवेश का हो झारखंड या किसी अन्य राज्य का. अपनी सोच से ही उन्होंने युवाओं में एक युवा निदर्ेशक के रूप में क्रेज स्थापित किया है. वे पंजाबी पृष्ठभूमि और किरदारों के साथ फिल्में गढ़ते हैं. लेकिन सोच को उन्होंने हमेशा स्वतंत्र रखा है. ताकि फिल्म की कहानी से कहीं भी बैठा युवा खुद को कनेक्ट कर सके. इम्तियाज के नजरिये की एक और खास बात रही है. उन्होंने अन्य निदर्ेशकों की बनिस्पत अपनी नायिकाओं ko केवल गुड़िया के रूप में नहीं दर्शाया. उन्होंने अपनी महिला किरदारों पर भी विशेष काम किया है. इम्तियाज की फिल्मों की महिला सिर्फ गाती नहीं है, सिर्फ डांस नहीं करती. वह संवाद भी बोलती है और अपने अभिनय से नायक पर हावी भी हो जाती है. यह इम्तियाज की ही सोच का नतीजा था, जिसने गीत के रूप में करीना कपूर से उनके करियर का अब तक का सर्वश्रेष्ठ किरदार निभवाया. मीरा के रूप में दीपिका पादुकोण स्वतंत्र, स्वछंद महिला के रूप में स्थापित हुईं. जो शादी के बाद भी अपने पति को छोड़ने का दम रखती है. और अब बारी रॉकस्टार की है, जिसमें भले ही फिल्म का नाम नायक की जिंदगी पर आधारित है.लेकिन फिल्म में महिला किरदार की सबसे अहम भूमिका है. दरअसल, इम्तियाज के निदर्ेशन की यही खासियत है कि उन्होंने अब तक उन धागों को खूबसूरती से जकड़ा और थामा है, जिन बारीकियों पर किसी और निदर्ेशक की नजर नहीं पहुंचती. फिल्म रॉकस्टार उनके निदर्ेशन की बारीकी का ही एक और नायाब नमूना साबित होगा. ऐसी उम्मीद फिलवक्त भारत से जुड़े हर युवा दर्शक ने लगा रखी है. और निस्संदेह इस बात से झारखंड के जमशेदपुर के इस युवा मसलन इम्तियाज वाकिफ होंगे ही. तभी वह रॉकस्टार जैसी फिल्म बना पाने में सक्रिय हैं और इतने लंबे समय के करियर के बावजूद केवल फिल्में देकर भी संतुष्ट हैं.