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20130930

स्टारडम के बदलते स्वरूप


्नरणबीर कपूर ने अपनी बातचीत में कहा कि वे चाहते हैं कि जिस तरह राज कपूर साहब और नरगिस जब रशिया में फिल्म आवारा के प्रीमियर के दौरान गये थे और वहां के लोगों ने जिस तरह दोनों का अभिवादन किया. जिस तरह राज कपूर की गाड़ी को खुद सभी लोग उठा कर होटल तक लेकर गये थे. यह स्टारडम का अदभुत रूप था. रणबीर की इच्छा है कि वह ऐसा स्टारडम हासिल करें, जहां उन्हें इतना सम्मान मिले. रणबीर का मानना है कि स्टारडम का दौर अमिताभ, शाहरुख, सलमान, आमिर के दौर तक सीमित रह गया. उसके बाद स्टारडम के मायने बदल गये हैं. दरअसल, अब वह सम्मान कलाकारों को नहीं मिलता. हम बातचीत में भी कलाकारों का नाम इस तरह तुम ताम कह कर पुकारते हैं. जैसे वह हमारे दोस्त हों. हाल ही में दुर्गापुर में प्रियंका चोपड़ा गयी थीं. जहां, भीड़ इस तरह अनियंत्रित हो गयी कि सेक्योरिटी को वहां से प्रियंका को किसी तरह निकालना पड़ा. आज स्टारडम के मायने किसी फैन के लिए किसी कलाकार के साथ महज तसवीर खीच लेने भर की है. अपने मोबाइल कैमरे में उनकी छोटी सी झलक भी कैद हो जाये तो वह इससे तसल्ली कर लेते हैं. इसकी बड़ी वजह यह है कि हमें लगता है कि कलाकार कुछ है ही नहीं. हाल ही में जब लंचबॉक्स की अभिनेत्री निमरत कौर से बात हो रही थी उन्होंने इस बात का जिक्र किया कि उन्हें लगता है कि एक्टर वे लोग होते हैं, जो दुनिया से वाकई जुदा होते हंै. कुछ तो ऐसी बात होती है जो एक्टर जानते हैं. पूरी दुनिया नहीं जानती. शायद इसलिए वह अभिनेता है.लेकिन हम इस बात को मानने के लिए तैयार नहीं होते. इसकी बड़ी वजह यह है कि आज हर कोई अभिनेता बन जाता है. हर कोई गायक बन जाता है और उनका दिखावा दो पल में ही खत्म हो जाता है. सो, दर्शक उन्हें वह सम्मान नहीं दे पाते. 

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