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20130930

फिल्मी बच्चे व स्वतंत्रता


 सोहा अली खान जब फिल्मों में आयी थीं.उस वक्त उन्हें फिल्मों में आने की इजाजत नहीं थी. उनके परिवार वाले नहीं चाहते थे कि वह फिल्मों में आयें. और अब आलम यह है कि उन्हें न सिर्फ फिल्मों में आने की छूट मिली है. बल्कि वह अपने ब्वॉयफ्रेंड कुणाल खेमू के साथ मुंबई में लीव इन रिलेशनशीप में रह रही हैं. सैफ अली खान और करीना कपूर भी लंबे अरसे तक लीव इन में रहे. उसके बाद दोनों ने शादी की. करीना अब मानती हैं कि यह निर्णय उनका बिल्कुल सही था कि उन्होंने और सैफ ने साथ में रह कर एक दूसरे को जानने की कोशिश की और फिर उन्होंने अपनी जिंदगी आगे बढ़ायी. करीना को भी पहले फिल्मों में आने की आजादी नहीं थी. वजय यह थी कि कपूर खानदान की बेटियां फिल्मों में जायें. राज कपूर ऐसा नहीं चाहते थे. लेकिन करीना ने तो नहीं, करिश्मा ने बगावत की और वह आगे बढ़ी. ठीक उसी तरह सोहा ने भी अपने घर के निर्णय के विरुद्ध कदम बढ़ाया. दरअसल, हिंदी सिनेमा में यह परंपरा रही है कि जिस परिवार के लड़कों को इसकी आजादी है कि वह अपने अनुसार फिल्मों का या करियर का चुनाव करें. उस लिहाज से बेटियों को मौके नहीं मिले. इस संदर्भ में देखा जाये तो मुंबई के बाहर से आयी लड़कियों को उनके माता पिता का अधिक सपोर्ट मिला है. फिर चाहे वह प्रियंका चोपड़ा हों या दीपिका पादुकोण या अनुष्का शर्मा. आमतौर पर यह अवधारणा है कि मुंबई के बाहर रहनेवाले लोगों की मानसिकता संकीर्ण है. लेकिन अगर हिंदी फिल्मी परिवार को देखा जाये तो शायद वहां रुढ़िवादी सोच अधिक नजर आती है. शत्रुघ्न ने आज भी सोनाक्षी को बहुत आजादी नहीं दी. सोनम भी पिता के बंदिशों के बीच ही अपने काम पूरे करते हैं. स्पष्ट है कि फिल्मी परिवार के माता पिता अपने बच्चों को लेकर ओवर प्रोटेक्टीव हैं.

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