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20130930

फिल्म ऐसी हो जो थियेटर से आपके साथ बाहर आये


इरफान खान जब भी परदे पर आते हैं, वे अपनी दमदार भूमिका से सबका दिल जीत लेते हैं. हिंदी सिनेमा में चंद कलाकार ही ऐसे हैं, जो अपनी आंखों से भी अभिनय करते हैं. बॉलीवुड में अपनी अलग पहचान स्थापित कर चुके इरफान इस बार एक ढलती उम्र के रोमांटिक किरदार में आप सबके लिए 'लंचबॉक्स' लेकर आ रहे हैं. इरफान इस फिल्म के अभिनेता होने के साथ सह निर्माता भी हैं. पेश है अनुप्रिया से हुई बातचीत के मुख्य अंश :
इरफान खान
इरफान खान जब भी परदे पर आते हैं, वे अपनी दमदार भूमिका से सबका दिल जीत लेते हैं. हिंदी सिनेमा में चंद कलाकार ही ऐसे हैं, जो अपनी आंखों से भी अभिनय करते हैं. बॉलीवुड में अपनी अलग पहचान स्थापित कर चुके इरफान इस बार एक ढलती उम्र के रोमांटिक किरदार में आप सबके लिए "लंचबॉक्स" लेकर आ रहे हैं. इरफान इस फिल्म के अभिनेता होने के साथ सह निर्माता भी हैं. पेश है अनुप्रिया से हुई बातचीत के मुख्य अंश :लंचबॉक्स में एक बार फिर आपका रूमानी अंदाज लोगों के सामने आ रहा है.

मैं खुशनसीब हूं कि लंबे अरसे के बाद मुझे फिर से परदे पर रोमांटिक किरदार निभाने का मौका मिला है. मैं दिल से रुमानी हूं, इसलिए मुझे ऐसे किरदारों को निभाने में काफी मजा आता है.

लंचबॉक्स से जुड़ने की क्या खास वजहें रहीं?

मैं चाहता हूं कि मैं वैसी फिल्में करूं, जो आपके साथ थियेटर से बाहर आये, वहीं न रह जाये. वह आपके दिलो-दिमाग पर छाये. आपके साथ रहे. लंचबॉक्स एक ऐसी ही प्यारी-सी कहानी है. कई बार हम जो फिल्म देखते हैं, उसके किरदार हमेशा याद रहते हैं. हमारे साथ चलते रहते हैं. कहानी याद आती है. इमोशन याद आते हैं. लंचबॉक्स के साथ भी ऐसा ही है, और यही बात मुझे प्रभावित कर गयी. मैं चाहता हूं कि लोगों का मेरी कहानियों से रिश्ता बन जाये. जैसे, जब तिग्मांशु ने लाइफ ऑफ पाइ देखी तो कहा कि यार, ये फिल्म बाद में भी मुझसे बात करती है. यही तो इफेक्ट है न फिल्म का.

कान फिल्मोत्सव में लंचबॉक्स को काफी सराहना मिली. इस पर आपकी प्रतिक्रिया?

हां, हम सभी इस बात से काफी खुश हैं. सबसे इंटरेस्टिंग बात यह रही कि कान में जब लंचबॉक्स की पहली स्क्रीनिंग रखी गयी थी, तो लोग उठ कर जाने लगे थे. इस पर फिल्म के निर्देशक रितेश बत्रा काफी अपसेट हो गये कि शायद लोगों को फिल्म पसंद नहीं आ रही है. मगर हमारे फिल्म के फ्रेंच प्रोड्यूसर ने बताया कि वे सभी फिल्म छोड़ कर नहीं जा रहे. वे इसलिए बाहर जा रहे हैं ताकि फिल्म की डीवीडी खरीद लें. कहीं ये खत्म न हो जाये. आपको खुश होना चाहिए कि सभी को फिल्म काफी पसंद आयी है. कान में किसी हिंदी फिल्म के साथ ऐसा पहली बार ऐसा हुआ है, जब उसकी डीवीडी रातों-रात बिक गयी. पिक्चर ऑल ओवर द वर्ल्ड बिकी है. हमारे साथ सबसे बड़ी ट्रेजडी यह थी कि अमेरिका में फिल्म को कौन खरीदेगा? लेकिन खुशी की बात है कि सोनी क्लासिक ने इसे देखा और सराहा. उन्होंने फिल्म के बारे में इतना कुछ सुना था कि हमें ज्यादा प्रयास नहीं करना पड़ा. यह फिल्म ऐसी है, जिसकी यूनिवर्सल लैंग्वेज है, कहीं की भी ऑडियंस इसे देख सकती है. अब हमारी कोशिश यही है कि यह भारत से ऑस्कर के लिए चुनी जाये.

फिल्म की कहानी मुंबई की डब्बा संस्कृति के माध्यम से पहुंची है. लेकिन फिर भी यह पूरे विश्व को अपील कर रही है?

डब्बा तो फिल्म का केवल डिवाइस है. इसकी जगह पर कुछ भी हो सकता था. यह यूनिक सर्विस है, इसलिए चुनी गयी. जैसे मुंबई में डब्बा कल्चर काफी अनुशासन के साथ काम करता है. पुराने जमाने में जैसा था, आज भी ऐसा ही होता है. इसी तरह हमारी कहानी भी आज के रोमांस से थोड़ी अलग रोमांटिक फिल्म है.

जब आपके पास यह कहानी आयी थी. क्या उसी वक्त आपने तय कर लिया था कि आप फिल्म के निर्माता भी बनंेगे?

नहीं, शुरू से नहीं. मैं ऐसी फिल्में प्रोड्यूस करना चाहता हूं जिसकी कहानियों पर आपको भरोसा हो. साथ ही जिन पर आपका कंट्रोल हो. मतलब आप जानते हो कि रिलीज कब होगी. कैसे होगी. लंचबॉक्स के साथ मुझे यह सबकुछ नजर आया. इसकी कहानी, इमोशन, किरदार व कहने का ढंग सभी पसंद आया. तभी फिल्म से जुड़ गया.

क्या हिंदी फिल्म इंडस्ट्री या भारत में ऐसी फिल्मों का मार्केट है?

इस फिल्म का मार्केट पूरी दुनिया है. इस फिल्म की सफलता भारत के बॉक्स ऑफिस की कमायी पर आधारित नहीं होगी. जिस क्वालिटी की यह फिल्म है, इसकी रिकवरी तो पहले ही हो गयी है. इतनी जगहों पर दिखायी गयी है फिल्म. अब तो जो भी आयेगा वह मुनाफा ही होगा. जितने ज्यादा लोगों तक पहुंच जाये, वही सक्सेस होगा. अगर इस फिल्म का सक्सेस आंकना हो, तो पूरे वर्ल्ड का जो बिजनेस होगा, उस आधार पर आंकें. यहां तो दो दिनों की कमाई पर तय करने लगते हैं, कि फिल्म अच्छी है या नहीं

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