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20130930

गोरी तेरे गांव में

 करीना कपूर इस बात से बेहद खुश हैं कि उन्हें पहली बार फिल्म गोरी तेरे प्यार में के बहाने किसी गांव में रहने का मौका मिला.उन्हें गांव की कई बातें बेहद अच्छी लगी कि वहां के लोग काफी सहयोगी मिजाज के होते हैं और वातावरण में काफी ताजगी थी. इससे पहले करीना ने फिल्म रिफ्यूजी में गांव की लड़की का किरदार निभाया था. लेकिन उस वक्त करीना बिल्कुल नयी थीं और शायद उस वक्त उन्हें ये सब खास पसंद न आया हो. चूंकि वे शुरू से ही शहरों में पली बढ़ी हैं. तो निश्चित तौर पर उन्हें शहर के ऐशो आराम से निकल कर कभी किसी गांव में जाने का मौका नहीं मिला होगा. लेकिन इसी फिल्म के बहाने उन्होंने गांव की जिंदगी को जिया है. रणबीर कपूर ने फिल्म रॉकस्टार के दौरान कई वैसी चीजें की, जो उन्होंने पहले कभी नहीं की थी. हालांकि फिल्म में वह दृश्य रखा नहीं गया. लेकिन उन्होंने इम्तियाज अली की इस फिल्म के एक दृश्य के लिए वे ग्वाला भी बने थे. दरअसल, हिंदी सिनेमा में इन दिनों कलाकारों को गांव की जिंदगी जीने का मौका भी इसलिए नहीं मिल पाता. चूंकि या तो गांव की संस्कृति पर फिल्में नहीं बनतीं. या फिर जो बनती हैं उनके सेट मुंबई के स्टूडियो में ही तैयार कर लिये जाते हैं. किसी दौर में मदर इंडिया जैसी फिल्मों में अभिनय करने के बाद सुनील दत्त इस कदर  बड़ौदा के एक  गांव में लोकप्रिय हो गये थे कि बाद में भी सुनील दत्त उन गांवों में जाकर समय बिताया करते थे. जब संजय के बारे में यह खबर आयी थी कि उन्हें जेल होने वाली है. उस पूरे गांव ने दुख जताया था. इन दिनों मुंबई का गांव मुंबई के निकट स्थित वाई है. वही गांव के सेट बनाये जाते हैं और शूटिंग होती है. हिंदी सिनेमा में नया दौर, तीसरी कसम, दो बीघा जमीन जैसे वास्तविक गांव अरसे से नजर नहीं आये. हालांकि पीपली गांव जैसी कुछेक फिल्मों में वास्तविक गांव दिखे हैं. 

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