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20140401

परंपरा का निर्वाह


 हाल ही में अमिताभ बच्चन ने हाथों से लिखा एक पत्र कंगना को भिजवाया, जिसमें उन्होंने कंगना की बेहद तारीफ की थी. फिल्म क्वीन के लिए. कंगना इस बात से बेहद खुश थीं कि उन्हें अमिताभ बच्चन जैसे महानायक से यह पत्र मिला. यह पहली बार नहीं है जब अमिताभ बच्चन ने किसी अभिनेत्री को प्रशंसनीय पत्र लिखा है. दरअसल, अमिताभ फिलवक्त हिंदी सिनेमा के उन बुजुर्ग अभिनेताओं में से एक हैं, जो फिलहाल सक्रिय हैं और उन्होंने इस परंपरा को अब भी खत्म नहीं किया है. इससे पहले उन्होंने विद्या बालन को फिल्म द डर्टी पिक्चर्स, दीपिका पादुकोण और रणवीर सिंह को फिल्म रामलीला के लिए प्रशंसनीय पत्र लिखा. परिणीति चोपड़ा, प्रियंका को भी अमिताभ बच्चन ने पत्र भिजवाया था. अमिताभ ही हिंदी सिनेमा में एकमात्र ऐसी शख्सियत हैं, जो किसी न किसी रूप में अब भी पुराने दौर से नये दौर का ताल्लुख करवाते रहते हैं. दोनों दौर के बीच के सेतु हैं वे. वे खुद नयी पीढ़ी के साथ चलना पसंद करते हैं. लेकिन कुछ परंपराओं को उन्होंने बोझ के रूप में नहीं बल्कि विरासत के रूप में अपने साथ रखा है और वे इसकी इज्जत करते हैं. नयी पीढ़ी को उनसे यह प्रेरणा तो लेनी ही चाहिए कि किस तरह नये दौर के साथ चलते हुए भी आप पुरानी परंपरा का निर्वाह कर सकते हैं. नयी पीढ़ी के लिए यह बेहद जरूरी भी है कि हम उस सोच के साथ निरंतर चलते रहें. किसी दौर में देव आनंद, राज कपूर और दिलीप कुमार साहब इस परंपरा का निर्वाह करते थे. वे एक दूसरे को हर फिल्म के बारे में अपनी रिव्यू एक पत्र से देते थे. उस दौर में निमंत्रण भी पत्र से दिये जाते थे. एक दूसरे को शुभकामनाएं भी भेजी जाती थी. खुद देव साहब ने अपने इंटरव्यू में इन बातों का जिक्र ंकिया था कि उस दौर में अगर किसी के घर बुलावे पर न जाओ तो खत के माध्यम से क्षमा मांगी जाती थी.

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