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20140411

नोटा और भूतनाथ


फिल्म भूतनाथ रिटर्न्स के ट्रेलर से यह बात स्पष्ट रूप से नजर आ रही है कि फिल्म में एक भूत चुनाव लड़ता है. फिलवक्त माहौल भी पूरी तरह से चुनावी है. इस बार पहली बार मतदाताओं के सामने नन आॅफ द एवव के विकल्प रखे जा रहे हैं. मतलब अगर आपकी नजर में सभी पार्टी एक सी है और आप किसी को भी अपना मत नहीं देना चाहते तो वह इनमें से कोई नहीं में भी अपना वोट दे सकते हैं और उसकी भी काउंटिंग भी होंगी. फिल्म भूतनाथ के ट्रेलर को गौर से देखें तो वाकई वर्तमान में जो स्थिति है, उसमें एक ऐसे ही अदृश्य नेता की जरूरत है. जो अपने लिये नहीं बल्कि दूसरों के लिए सोचता हो. जैसे वह फिल्मों में सबकी बैंड बजाता है. हकीकत में भी वह नेताओं की बैंड बजाये. निर्देशक नितेश तीवारी ने एक बेहतरीन कहानी कहने की कोशिश की है कि जब एक भूत चुनाव लड़ता है तो क्या होता है. नितेश निश्चित तौर पर व्यंग्यात्मक तरीके से यह समझाने की कोशिश की है कि एक भूत जो कि अदृश्य है. वह वास्तविक जिंदगी में भी आ सकता है. अगर वाकई आप किसी नेता से खुश नहीं तो आप बहुमत से इनमें  से कोई नहीं विकल्प को चुने. चुनाव पर इससे पहले भी फिल्में बनी हैं. लेकिन भूत को चुनाव लड़ते पहली बार दिखाया जा रहा है. और यह महज संयोग है कि पहली बार चुनाव में इनमें से कोई नहीं विकल्प को भी शामिल किया गया है.दौर बदल रहा है. अब लोगों को बसंती नहीं चाहिए. खामोश को भी लोग खामोश कराना चाहते. अब फिल्मी हस्तियों का इस्तेमाल कर किसी को बेवकूफ बनाना नामुमकिन है. मीडिया के हर माध्यम से आपको आगाह करने की कोशिश की जा रही है. लेकिन यह निर्भर आप पर करता है कि आप किस तरह अपने मत का सही प्रयोग करें. चूंकि रिहर्सल कैसा भी हो. परफॉरमेंस ही महत्व रखता है. सो, जरूरी है आप जागरूक रहें

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