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20140425

फिल्में मेरा शौक हैं : फरहान अख्तर

           

निर्माता, निर्देशक,अभिनेता, लेखक, गायक फरहान अख्तर इन दिनों अभिनेता के तौर पर इंडस्ट्री में अपनी जगह पुख्ता कर चुके हैं. भाग मिल्खा भाग के लिए इन दिनों हर एवार्ड समारोह में जमकर पुरस्कार बटोर रहे फरहान जल्द ही कॉमेडी फिल्म शादी के साइड़ इफेक्टस में नजर आएंगे. वे अभिनेता के तौर पर अलग अलग किरदारों और जॉनर की फिल्मों के जरिए खुद को चुनौती देना चाहते हैं. 
 
मेरा किरदार भगौडे किस्म का:  
 यह फिल्म तृषा(विद्या बालन) और सिद्धार्थ(मैं) की कहानी है. शादी और फिर बच्चे के बाद इनकी जिंदगी में किस तरह से प्यार गायब हो जाता है इसी की कहानी यह फिल्म है. जहां तक मेरे किरदार की बात है सिद्धार्थ भगौडे किस्म का है जो हर परिस्थितियों से भागता रहता है. उसकी अपनी काल्पनिक दुनिया है और वह उसी में रहना चाहता है. उसे लगता है कि शादी के बाद उसका बैचलरहुड खत्म हो गया है. जिम्मेदारियों के नाम पर वह म्यूजिशियन बनने का अपना सपना कहीं खो बैठा है. उसे लगता है कि शादी और फिर बच्चे ने उससे उसकी सभी खुशी और सपने छीन लिए हैं.

शादी नहीं जिम्मेदारियां जिंदगी बदलती है: मेरा मानना है कि शादी नहीं उससे जुड़ी जिम्मेदारियां जिंदगी बदलती हैं. जिम्मेदारियां हर कोई नहीं निभा सकता है. यही वजह है कि लोग शादी को दोष देने लगते हैं खुद को दोष नहीं देते हैं.

सफल शादी के मंत्र: सफल शादी के मंत्र आप हमेशा सॉरी बोलने को तैयार रहें फिर चाहे गलती आपकी पत्नी की ही क्यों न हो. मजाक कर रहा था. हकीकत में अगर आपको अपनी शादी को सफल बनाए रखना है तो अपने पार्टनर की जिन खूबियों की वजह से आपने उससे शादी की थी. उसे हमेशा याद रखिए और छोटी मोटी गलतियों को नजरअंदाज करना सीखें.

ग्लैमर वर्ल्ड में शादियां नहीं टिकती गलत धारणा: 
इन दिनों ग्लैमर वर्ल्ड की एक दो शादियां टूट गयी है तो उससे एक बहस ही शुरु हो गयी है. उस बहस के बारे में मैं एक शब्द में कहूं तो हमें दूसरी की निजता का सम्मान करना चाहिए इसलिए मैं किसी की भी पर्सनल लाइफ पर कमेंट करना पसंद नहीं करता हूं. जहां तक बात ग्लैमर वर्ल्ड की है तो ग्लैमर इंडस्ट्री से जुड़े होने की वजह से शादियां चलती है या नहीं चलती ऐसा नहीं है.  मुझे लगता है कि इंसान इंसान होते हैं. उनके प्रोफेशन से उनका कुछ लेना देना नहीं होता है. यह पूरी तरह से गलत धारणा है.

 मेरी शादी पर भी हुई है टीका टिप्पणी: 
शादियों के बनने या टूटने से पहले मीडिया की रिपोर्ट पहले ही शुरु हो जाती है. इनकी शादी होने वाली हैं. इनकी शादी टूटने वाली है. मैं भी ऐसे खबरों से दो चार हुआ हूं कि मेरा और मेरी पत्नी अधूना के बीच सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है और भी न जाने क्या क्या लेकिन मैंने इन सब पर रिएक्ट नहीं किया आखिरकार थककर गॉसिप करने वाले रुक ही गए थे. अधूना और मैं पति पत्नी होने के अलावा एक दूसरे के बहुत अच्छे दोस्त भी हैं. दोस्ती का रिश्ता विश्वास का होता है.  यही वजह है कि मैं अधूना पर आंख बंद करके विश्वास कर सकता हूं. वह भी मुझ पर उतना ही भरोसा करती है.

विद्या प्रोफेशनल एक्टर: विद्या की जितनी तारीफ की जाए कम है. यह उनके साथ मेरी पहली फिल्म है. विद्या एक बहुत अच्छी को स्टार होने के अलावा काफी प्रोफेशनल स्टार हैं. यह बात मेरे लिए बहुत मायने रखती है क्योंकि मुझे प्रोफेशनल लोग बहुत पसंद है.इसके अलावा वह काफी खुशमिजाजमहिला हैं सो काफी चीजेंऔर आसान हो जाती हैं. काम करने में मजा आता है.


 एक्टिंग डायरेक्शन सब करना चाहता हूं:  मैंने जब से अभिनय शुरु किया है. यह चर्चा शुरु हो गयी है कि अब मैं निर्देशन नहीं करने वाला हं. सच कहूं तो मैं एक्टिंग डायरेक्शन सब करना चाहता हूं. फिल्में मेरा शौक है.  मैं हमेशा फिल्मों से जुड़ा रहना चाहता हूं. फिल्म का निर्देशन और लेखन हीं मेरी ताकत है. मैने दिल चाहता है,लक्ष्य और  डॉन  जैसी फिल्में बनायी तब मुझे लगा कि मुझे अभिनय के क्षेत्र में भी काम करना चाहिए. मै फिल्मों में काम करके बेहद खुश हूं. हां फिलहाल  अभिनेता के रूप में मेरा अनुभव काफी अच्छा रहा है. मै आगे भी काम करते रहना चाहता हूं. जहां तक निर्देशन की बात है तो उसके लिए मुझे समय चाहिए. मुझे पढ़ना पढेगा. जो चीजें मुझे प्रभावित करेंगी. उस पर कहानी लिखूंगा दैन मैं निर्देशन के बारें में सोचूंगा.

मसाला फिल्मों से परहेज नहीं: मुझे किसी भी काम से कोई परहेज नहीं है. मैं नेवर शे नेवर एटिट्यूड़ में विश्वास करता हूं. हो सकता है कि भविष्य में मुझे ऐसी कोई फिल्म मिले जिसमें मैं स्पूफ के तौर पर साइलेंट हो नहीं तो मैं वाइलेंट हो जाऊंगा जैसे डायलॉग बोलता नजर आऊं. आप कब क्या करेंगे आपको भी पता नहीं होता है.


एक्टिंग करते हुए डायरेक्टर दूर रखता हूं: 
मैं डायरेक्टर हूं इसका मतलब यह नहीं कि एक्टिंग करते हुए मैं अपने डायरेक्टर को यह सीखाता रहता हूं कि यह सीन ऐसे शूट करो. वह वैसे. दरअसल एक्टर का डाइरेक्टर पर हावी होना संभव ही नहीं है क्योंकि स्क्रि प्ट महीने पहले लॉक हो जाती है और साथ ही डाइरेक्टर कोक्या चाहिए वह पहले ही एक्टर को बता देता है. यकीन कीजिए शूटिंग शुरू होने से पहले दोनों के बीच इतनी बातें हो चुकी होती है कि शूटिंग के दौरान किसी तरह कीतनातनी नहीं होती. हां अगर कभी लगता है कि ये सीन ऐसा होता तो ज्यादा अच्छा होता ऐसे में अपनी राय दे देता हूं. मानना न मानना निर्देशक पर ही है. निजी तौर पर मैं एक्टिंग करते हुए अपने अंदर के डायरेक्टर को दूर ही रखता हूं. यह दोनों जिम्मेदारियां मैं एक साथ नहीं निभा सकता हूं.

 मर्द कैंपेन: 
मैंने मर्द के रूप में जो कैंपेन की शुरु आत की थी. उसका उद्देश्य यही था कि हमारे देश के पुरु ष वर्गों को सचेत किया जाये और उन्हें यह बताया जाये कि जो हम कर रहे हैं, वह कितना गलत कर रहे हैं. अगर आप असली मर्द हैं तो महिला की इज्जत करना सीखिए. मर्द होने का मतलब अपनी ताकत दिखा कर किसी का बलात्कार करना नहीं है. किसी का अपमान करना नहीं है. मर्द का मतलब औरतों की इज्जत करना हैयह हमारा मुख्य उद्देश्य था.  मैं इसे सफलता ही मानता हूं कि आपने इस बारें में पूछा. हां, यह सच है कि इतनी सी चीज से हम सबकुछ बदल नहीं लेंगे. लेकिन मैं अवेयरनेस में यकीन रखता हूं. जैसे अवेयर करो तो फिल्में लोगों तक पहुंचती हैं तो मुझे लगता है कि लोगों तक बात भी पहुंचेगी.


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