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20140425

विशाल और फिल्म निर्माण

विशाल भारद्वाज ने निर्णय लिया है कि अब वह फिल्में प्रोडयूस नहीं करेंगे. इसकी वजह यह है कि उनका मानना है कि उन फिल्मों को जिसे विशाल प्रोडयूस करते हैं. उनमें वे सिर्फ अपने पैसे नहीं बल्कि अपनी ऊर्जा भी लगाते हैं. लेकिन जब वे फिल्में सफल नहीं हो पाती हैं तो दुख होता है. विशाल भारद्वाज ने स्पष्ट कहा कि वे इश्किया 3 की कोई योजना नहीं बना रहे, क्योंकि डेढ़  इश्किया कामयाब नहीं रहीं. विशाल के इस निर्णय से साफ होता है कि सिनेमा सिर्फ सृजन प्रक्रिया नहीं है. इसमें आपकी ऊर्जा और पैसे दोनों जाते हैं और फिर अगर उसे सफलता न मिले तो दुख होता है. किसी दौर में राजकपूर की कई फिल्में काम.ाब नहीं रहीं. वे मानते थे कि उनकी सबसे पसंदीदा और अच्छी फिल्म मेरा नाम जोकर है. लेकिन दर्शकों ने उसे नकार दिया था. बाद में उन्होंने बॉबी और राम तेरी गंगा मैली जैसी फिल्मों से पैसे कमाये. राज कपूर के पास उस दौर में इतने पैसे भी नहीं थे कि वह प्राण को उनकी फीस दे सकें. ऐसे में प्राण ने दोस्ती के नाते केवल 11 रुपये में काम करना स्वीकार कर लिया था. संजय लीला भंसाली दो साल पहले ही बतौर निर्माता राउड़ी राठौर और गब्बर जैसी कमर्शियल फिल्मों का निर्माण करने लगे हैं और उनकी जेब को इसका फायदा भी हो रहा है. लेकिन विशाल ने कमर्शियल फिल्मों और अपने क्राफ्ट के साथ समझौता करने की बजाय उसे दरकिनार करना ही मुनासिब समझा है. निश्चित तौर पर इसका दुख उन्हें खुद होगा. चूंकि विशाल गुलजार के एक्सटेंशन रहे हैं और गुलजार से निखरे विशाल ने अभिषेक  चौबे जैसे विचारक निर्देशक को निखारने और लोगों तक पहुंचाने की कोशिश की.यूं ही हिंदी सिनेमा में क्रियेटिव निर्माता जिन्हें सिनेमा की क्राफ्ट की समझ हो, उनकी संख्या कम है. ऐसे में विशाल का यह निर्णय निराशाजनक है. 

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