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20140425

इम्तियाज इस फिल्म के हीरो हैं : आलिया


आलिया भट्ट अभी बस एक ही फिल्म पुरानी हुई हैं. लेकिन हाइ वे में वे जिस तरह वह मंझी हुई अभिनेत्री के रूप में नजर आ रही हैं. तसवीर स्पष्ट है कि आनेवाले समय में वह बॉलीवुड की सफलतम अभिनेत्रियों में से एक होंगी. वे चेहरे से जितनी मासूम और नादान-सी नजर आती हैं
 
आलिया, आपकी पहली फिल्म स्टूडेंट आॅफ द ईयर में बहुत ग्लैमर था. लेकिन हाइवे में इसके उलट आप बिना किसी मेकअप, एक अलग ही रूप में नजर आ रही हैं. तो कैसा रहा यह पूरा अनुभव?
 जी हां, यह सही है कि हाइवे मेरी पहली फिल्म स्टूडेंट आॅफ द ईयर से बिल्कुल अलग है. उस फिल्म में हमें लैविश लोकेशन मिले थे और लगभग पूरी फिल्म एक ही जगह पर शूट हो गयी है. जबकि इस फिल्म में मुझे बहुत बहुत सफर करना पड़ा. लेकिन मुझे इसे अनुभव करने में बहुत मजा आया. हालांकि सच कहूं तो मुझे ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ी. चूंकि पूरी तैयारी तो इम्तियाज ने कर रखी थी. दरअसल, वही इस फिल्म के हीरो हैं. मैं बस मेकअप नहीं करती थी. बालों में कंघी करना मना था. और खासतौर से इम्तियाज ने यह कह रखा था कि एक्टिंग मत करो, जो तुम हो. जैसी हो वैसी ही दिखो. हैटिक था. चूंकि पता नहीं होता था कि अगले दिन शूटिंग कहां होगी. पड़ाव क्या होगा.किस मोड़ पर  क्या होगा. मौसम किस तरह बदलेगा. स्रो से लेकर बारिश तक़ फिर बिल्कुल मरुस्थल से बिल्कुल पहाड़ पर. लेकिन मैं खुश हूं कि मुझे ये सब करने का मौका मिला. मुझे इस फिल्म में इमोशनली, फिजिकली. हर तरह से काम करने में मजा आया. हां, सफर के दौरान काफी बीमार पड़ी. बॉडी में काफी पेन रहता था. लेकिन जो अनुभव मिला वह इस दर्द के बिना शायद ही मिल पाता.लेकिन इम्तियाज उस पेन को भी कैमरे पर रियल तरीके से कैप्चर कर लेते थे. यह फिल्म आपको बिल्कुल बनावटी फिल्म नहीं लगेगी.
इससे पहले  कभी भारत को इस नजरिये से देखा था?
नहीं इससे पहले मैंने भारत को इस नजरिये से न कभी देखा था. न कभी एक्सपीरियंस किया था. मैं जब स्कूल में थी तो शिमला गयी थी.  उस वक्त रोड से ट्रैवल करते थे. टूर पर जाती रहती थी. लेकिन हम दोस्तों में ही इतने बिजी रहते थे. आपस में ही बात करते हुए कि कभी इस तरह से बाहर की सिनरीज या रास्ते को देखते ही नहीं थे. लेकिन इस बार इम्तियाज की नजर से जब ये सब देखा तो काफी एंजॉय किया.
इम्तियाज ने आपको यह फिल्म आपकी पहली फिल्म से पहले ही आॅफर कर दिया था. कैसा लगा था आपको जब यह फिल्म आॅफर हुई?
मैं काफी खुश थी कि मुझे इम्तियाज की फिल्म करने का मौका मिल रहा है. चूंकि मैंने इम्तियाज की सारी फिल्में देखी है और वह जिस अप्रोच से फिल्में बनाते हैं. वह अंदाज बिल्कुल अलग होता है. इसमें कोई संदेह नहीं. वे प्रेम को जिस तरह से प्रेजेंट करते हैं. वैसा शायद ही कोई और निर्देशक करते होंगे. मैंने इम्तियाज की फिल्म जब वी मेट न जाने कितनी बार देखी होगी. मेरी विश लिस्ट में करन जौहर, इम्तियाज अली दोनों थे और दूसरी ही फिल्म में उनका साथ मिलना मुझे बहुत कुछ दे गया. और ऐसे मौके मिलते नहीं हर रोज कि आपको इम्तियाज के साथ काम करने का मौका मिले.
करन और इम्तियाज दोनों के साथ ही आपने काम किया है. आपको दोनों के निर्देशन के अंदाज में क्या विभिन्नताएं नजर आयीं?
इम्तियाज ज्यादा लाइवली हैं. वे लाइव ज्यादा देखते हैं. करन मॉनिटर के पीछे ज्यादा देखते हैं.दोनों का अप्रोच फिल्मों को लेकर अलग है. दोनों का अपना अपना अंदाज है.विषय का चुनाव सबकुछ अलग है दोनों का.
आलिया, हाइवे में पूरी तरह से आप फिल्म की हीरो नजर आ रही हैं. तो कैसी जिम्मेदारियां महसूस कर रही हैं आप?
मुझे तो लगता है कि इस फिल्म  के हीरो इम्तियाज हैं. मैं तो बस फिल्म की कैटेलिस्ट हूं.हां, मगर एक प्रेशर है कि यह मेरी दूसरी फिल्म है. लेकिन साथ ही साथ मैं यह मान रही हूं कि यह फिल्म मुझे अलग तरह की अभिनेत्री के लीग में लाकर खड़ा कर देगा.रणदीप ने मुझसे कहा कि जब वह फिल्में पूरी कर लेते हैं तो वह उस किरदार से खुद को अलग करके दूसरी फिल्म में चले जाते हैं. लेकिन मेरे लिए ऐसा नहीं है. मैं खुद को किरदारों से डिटैच नहीं कर पाती. हाइवे मेरे लिए हमेशा खास फिल्म इसलिए भी रहेगी कि इससे मैंने जिंदगी के वे अनुभव कर लिये जो शायद ही कभी किसी और फिल्म के माध्यम से कर पाती. लेकिन अभी बहुत नयी हूं तो नर्वस हूं.
आपकी पहली फिल्म के दौरान जब आपसे बातचीत हुई थी तो आपने कहा था कि आप स्टार बनना चाहती हैं. लेकिन क्या अब भी आपका जवाब वहीं है.
नहीं अब मैं कहूंगी कि मैं अच्छी एक्ट्रेस बनना चाहंूगी और अब स्टार नहीं सुपरस्टार बनना चाहूंगी. चूंकि मुझे अभी बहुत सारा काम करना है. एक्ट्रेस इसलिए बनना चाहती कि अच्छे काम मिले और सुपरस्टार इसलिए चूंकि उनका एक आॅरा हो जाता है. उस आॅरा को मुझे जीना है. जैसे हम जब सुपरस्टार की बात करते हैं तो उनका नाम लेना ही काफी होता है. जैसे शाहरुख सुपरस्टार हैं तो उनका आॅरा है. लोग उसे देखना चाहते हैं. वह जीना चाहते हैं. मैं भी वही जिंदगी जीना चाहती हूं. इसे आप सुपरस्टार का एट्टीटयूड का भी नाम दे सकते हैं.
इम्तियाज अली के साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा?
मुझे लगता है कि इम्तियाज अली इस बात को सबसे अच्छे तरीके से समझते हैं कि किस तरह वह अपनी कास्टिंग से ही फिल्म को अलग कर देते हैं. उन्हें पता है कि उन्हें क्या नहीं चाहिए. वे अपने कास्ट क्रू का बहुत ख्याल रखते हैं और उनका हर चीज पर कमांड है. अगर बुरे हालात भी आते थे. वह मैनेज करते. उनके दिमाग में उनका राइटर दिमाग चलता रहता है. अगर किसी वजह से तय शॉट नहीं हुए तो वह तुरंत कुछ अलग सोच कर अलग जगह पर शूट कर लेते थे. उनकी सबसे खास बात. उन्हें मेकअप नहीं. काम से मतलब था. वह कहते थे कि आलिया वीरा के किरदार को महसूस करो. कुछ दिन के लिए उसे जीयो. वह खुद भी वह सब कुछ एक्सपीरियंस करते थे. कश्मीर में घास पर सोना. राजस्थान में रेत पर चलना. हरियाणा में वहां की महिलाओं से बातचीत करना सबकुछ बहुत दिलचस्प था. इम्तियाज कहते कि एक्टिंग मत करो. वास्तविक दिखो. सो, मुझे तो वह जीनियस निर्देशक नजर आये.
अब आप एक सेलिब्रिटी बन चुकी हैं. तो आये दिन लींक अप और तरह-तरह की खबरें आती रहती हैं तो इस तरह की खबरों के साथ कैसे डील करती हैं?
मैं उन्हें इग्नोर करती हूं. हालांकि मेरी मम्मी मेरे से पूछती रहती है कि आलिया बताओ न जो बातें हो रही हैं. वह कहां तक सच है. वह मेरे लिए हर मां की तरह फिक्रमंद रहती हैं. मैं बाकी बातों पर तो ध्यान नहीं देतीं. लेकिन हां, बात जब मेरे परिवार की होती है और मेरे परिवार के बारे में कोई उलटी सीधी बातें करता है तो मुझे बिल्कुल अच्छा नहीं लगता और मैं उस वक्त गुस्से में आ जाती हूं और बहुत सारी बातें सुना जाती हूं. मैं अपना आपा खो देती. ड्रेसिंग सेंस को लेकर खबरें आती हैं तो मुझे लगता है कि उस व्यक्ति से मिलूं जो खबर लिख रहा है और एक बार उसकी ड्रेसिंग सेंस देखूं. फिर बात करूं.
आलिया , जब आप शूटिंग नहीं कर रही होती हैं तो आपको क्या करना अच्छा लगता है?
मुझे खाना, सोना सच कहूं तो होलीडे करना बहुत पसंद है. लेकिन मुझे वक्त कम मिल पाता है. मुझे स्वीमिंग में भी काफी मजा आता है.
आपकी पहली फिल्म के को स्टार वरुण और सिद्धार्थ की भी दूसरी फिल्में आ रही हैं. तो उन्हें प्रतिद्वंदी के रूप में देख रही हैं या दोस्त?
जाहिर सी बात है कि वे मेरे अच्छे दोस्तों में से एक हैं और मैं खुश हूं कि हम तीनों अलग अलग तरह की फिल्में और अपनी मिजाज की फिल्में कर रहे हैं. सिड की फिल्म हंसी तो फंसी मैंने देखी और मैंने तो उसके लिए खूब सीटियां बजायी.
आपकी आनेवाली फिल्में?
हंपटी शर्मा की दुल्हनिया और टू स्टेट्स

 फिल्मी बातें:
 फिल्म पाकिजा की शूटिंग के दौरान मीना कुमारी बुरी तरह बीमार थीं. लेकिन चूंकि उन्होंने फिल्म साइन कर दी थी और वह काम को लेकर प्रतिबध थीं. सो, जब वह फिल्म की शूटिंग पर आतीं, वह बिस्तर पर लेटी रहतीं. कैमरा आॅन होते ही वह निर्जीव से सजीव हो जातीं और भलिभांति अपने किरदार के मुताबिक शॉट देतीं. यह मीना कुमारी
के ही मंझी हुई अदाकारी का ही नतीजा था कि मीना कुमारी बीमार होने के बावजूद बेहतरीन अभिनय कर लेती थीं.
-आशा भोंसले ने अपनी पहली कमाई प्राप्त करने की खुशी में मुंबई के ठेलों पर जाकर गोलगप्पे और वड़ा पाव खाये थे. चूंकि उन्हें इस बात की बेहद खुशी थी कि अब वह भी घर के लोगों की आर्थिक मदद कर पायेंगी और अब वह अपने पैरों पर खड़ी हो गयी हैं.
- गायक उदित नारायण को पहला मौका संगीतकार राजेश रोशन ने दिया था. उदित पहले दिन जब रिकॉर्डिंग स्टूडियो में आये थे बहुत नर्वस थे. संगीतकार राजेश रोशन ने उन्हें चाय पिला कर उनका हौंसला बढ़ाया था.
- ऐ मेरे वतन के लोगों...गीत हम सब लता मंगेशकर की आवाज में सुनते हैं. लेकिन पहले यह गीत आशा भोंसले जी से गवाया जाना तय हुआ था. लेकिन बाद में कुछ विरोधाभास होने की वजह से लता मंगेशकर ने यह गीत गाया.
- किसी दौर में जब पृथ्वी थियेटर काफी नुकसान में था. उस वक्त भी राज कपूर ने वहां के सारे स्टाफ्स को लगातार सैलेरी दी. यह सिलसिला कई सालों तक चला. वहां के स्टाफ को बिना काम किये उनका मेहनताना मिलता रहा.


 कैसे बने रफी नौशाद की पसंद
मशहूर संगीतकार नौशाद अपने अधिकतर गाने तलत महमूद से गवाते थे.  एक बार उन्होंने रिकार्डिंग के दौरान महमूद को सिगरेट पीते देख लिया था. इसके बाद वे उनसे चिढ़ गए और अपनी फिल्म बैजू बावरा के लिए उन्होंने रफी को साइन किया.रफी के बारे में यह माना जाता था कि वे धर्मपरायण मुसलमान थे. वे सिगरेट, शराब तथा अन्य प्रकार के नशे से दूर ही रहा करते थे. इन गीतों ने मोहम्मद रफी को और प्रसिद्ध बना दिया.रफी की गायिकी ने नौशाद पर ऐसा जादू किया कि वे उनके पसंदीदा गायक बन गए.इसके बाद नौशाद ने लगभग अपने सभी गानों के लिए मोहम्मद रफी को गवाया.

 एक रुपये में प्राण ने की थी बॉबी 
परदे पर अपनी खलनायकी के लिए मशहूर प्राण निजी जिंदगी में मददगार और रहमदिल इंसान थे. वे हमेशा दूसरो की मदद के लिए तत्पर रहते थे. उनकी दरियादिली की ढेरों कहानियां हैं. इसी कहानियों में से एक बॉबी फिल्म में मात्र एक रुपया लेकर अभिनय करना भी है. दरअसल वर्ष 1970 में प्रदिर्शत फिल्म मेरा नाम जोकर की असफलता के बाद शो-मैन राजकपूर टीनएज प्रेमकथा पर आधारित बॉबी का निर्माण कर रहे थे. इस फिल्म के लिए प्राण को राज कपूर लेना चाहते थे, लेकिन प्राण उन दिनों बॉलीवुड में सर्वाधिक पैसे लेने वाले कलाकारों में शामिल थे. राज कपूर की वित्तीय हालत उन दिनों अच्छी नही थी, इसलिए वे चाहकर भी प्राण को अपनी फिल्म के लिए अप्रोच नहीं कर पा रहे थे.प्राण को जब इस बात का पता चला तो उन्होंने राज कपूर की बॉबी में काम करने के लिए हां कह दिया और पारिश्रिमक के तौर पर महज एक रु पया शगुन के तौर पर लिया था. 

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