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20150630

हास्य रस व कार्य स्थल


ऋषि कपूर ने हाल ही में एक इंटरव्यू में इस बात की चर्चा की है कि अमिताभ बच्चन और वे जिन दिनों में साथ काम किया करते थे. उस दौर में अमिताभ सेट पर लोगों से अधिक न तो बातें करते थे और न ही हंसी मजाक का दौर उस वक्त चलता था. लेकिन वही दूसरी तरफ अभिषेक बच्चन और ऋषि कपूर कुछ ही दिनों में करीब आ गये हैं. चूंकि अभिषेक बच्चन काफी बातूनी और मिलनसार हैं. जाहिर है ऋषि ने अमिताभ को उस दौर में देखा है, जब वे मिलेनियम स्टार नहीं थे और कई फिल्मों में साथ काम किया है. उस वक्त अमिताभ फिल्मों की केंद्र भूमिकाओं में हुआ करते थे. लेकिन वर्तमान दौर में अमिताभ के को स्टार्स बताते हैं कि वे बेहद हंसमुख व्यक्ति हैं और सेट पर प्रैंक खेलने में तो सबसे ज्यादा उस्ताद हैं. उनकी नयी फिल्म पीकू के प्रोमोज देखें या परदे के पीछे के दृश्य देखें तो अमिताभ का बच्चा वाला दिल नजर आता है. लेकिन इसका यह कतई मतलब नहीं कि ऋषि गलत बता रहे हैं. दरअसल, वक्त के साथ कई बदलाव आते हैं. यह बिल्कुल मुमकिन है कि अमिताभ उस वक्त वे मुखर न हों. चूंकि वे एक अलग वेग में थे. उन्हें खुद को स्थापित करना था. अक्सर जब अपनी पहचान स्थापित करने की धुन चढ़ती है तो इंसान गंभीर हो जाता है. लेकिन एक दौर के बाद उसे महसूस होता है कि उसने क्या मिस किया है. चूंकि वक्त निकल गया होता है. हो सकता है कि अमिताभ को अब यह एहसास हो कि फिल्म का सेट भी उसी मंच की तरह है, जहां वे सबसे अधिक वक्त गुजारते हैं. और वहां उन्हें हंसना बोलना चाहिए. कभी कभी हम सबकुछ पाने की सोच में छोटी खुशियां खोते चले जाते हैं. ऋषि कपूर के ही बेटे रणबीर की फिल्म ये जवानी...में नायिका उन्हें समझाती है कि चाहे कितना भी घूम लो. कुछ न कुछ छुटेगा ही. तो क्यों न जो वक्त मिला है. उसे ही अच्छे से जी लें.

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