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20150630

arya

बिग बॉस सीजन के इस सीजन में विवादित प्रतिभागी रहने के बाद अब आर्य बब्बर धारावाहिक संकटमोचन हनुमान में रावण की भूमिका में नजर आ रहे हैं. 

आर्य, बिग बॉस जैसे शो के बार आप अचानक किसी धार्मिक शो से जुड़ रहे हैं, कोई खास वजह?
हाहाहा, नहीं ऐसी कोई खास वजह नहीं है. मैं बचपन से रामानंद सागर के रामायण को देखा करता था और मुझे हमेशा से रावण का किरदार बेहद पसंद है. सो, मुझे जब प्रोडक् शन हाउस से यह शो आॅफर ह ुआ तो मैं भी थोड़ा चौका था. लेकिन फिर जब किरदार के बारे में पता चला तो मैंने तुरंत हां कर दी.
लेकिन रामायण पहले भी दिखाये जा चुके हैं. हनुमान पर भी काफी शोज पहले आ चुके हैं. फिर इस शो में नया क्या होगा?
मुझे ऐसा लगता है कि हां, इससे पहले भी रामायण और हनुमान पर कई शोज आये हैं. लेकिन आज देखें किसी की भी लोकप्रियता कम नहीं हुई है. मुझे लगता है कि हर जेनरेशन के लिए हर बार इसे दिखाया जाना जरूरी है. चूंकि हमने जो रामानंद सागर वाला रामायण याद रखा है. लेकिन आज के बच्चे तो उन्हें याद नहीं रख सकते. तो हनुमान या रामायण ऐसे विषय हैं जो हमेशा प्रासंगिक रहेंगे.
रावण के किरदार के लिए किस तरह तैयारियां की हैं?
इस बार आप रावण का शरारती अंदाज देखेंगे. मुझे लगता है कि मैंने अब तक जो भी किरदार निभाये हैं फिल्मों में भी. उनमें से यह किरदार मेरे लिए सबसे महत्वपूर्ण है. चंूकि रावण की छवि पहले से स्थापित है और उसे अपने अंदाज में प्रस्तुत करना कठिन है. लेकिन इस बार रावण के किरदार से भी लोगों को प्यार हो जायेगा. मैंने असुर नामक किताब पढ़ी है, जिसके माध्यम से मुझे रावण की जिंदगी, उनके परिवार उनके संघर्ष के बारे में जानकारी मिली. किस तरह वह लंकेश्वर बने. इन तमाम बातों की जानकारी है मुझे. लेकिन हां, चूंकि शो भारत के लिए है तो हम रावण को उसी छवि में दिखायेंगे. लेकिन अलग तरीके से.
आपकी मां नादिरा बब्बर थियेटर की दुनिया की प्रतिष्ठित शख्सियत मानी जाती हैं. उनसे अभिनय के क्या क्या टिप्स लिये हैं?
मैं खुशनसीब हूं कि मेरी मां नादिरा हैं और उनकी वजह से हम भाई बहनों की बोली इतनी स्पष्ट है. हमने थियेटर काफी किया है और मां शुरू से ही हमें भाषा को ठीक करने की राय देती रहती थीं तो निस्संदेह उनकी वजह से ही मेरी भाषा अच्छी है और अभिनय करने के दौरान स्पष्ट भाषा का होना तो बहुत जरूरी है. खासतौर से जब आप किसी धार्मिक या पौराणिक शोज से जुड़े हैं तो. उन्होंने काफी मदद की है. अब उनकी सीख को आकार देने का समय आया है. हालांकि फिल्मों में भी मैं काम करता रहा हूं. लेकिन वहां एक फिल्म होती है. टीवी में अधिक ध्यान देना पड़ता है. हर दिन खुद को बेस्ट साबित करने की कोशिश करनी पड़ती है. सो, यह महत्वपूर्ण है कि थियेटर की सीख को यहां इस्तेमाल किया जाये. पापा राज बब्बर से भी समय समय पर टिप्स मिलते रहते हैं. वे अपने अनुभव हमसे शेयर करते हैं और उनके अनुभव में भी काफी कुछ सीखने की बात होती है. उन्हीं से सीखने की कोशिश करता हूं.
आपने हाल ही में किताब भी लिखी है. फिल्में भी कर रहे तो डेली सोप में काम करने का वक्त कैसे निकाल पायेंगे?
जी मैं तो खुश हूं कि मेरे पास वक्त नहीं. मैंने इस दिन का लंबे समय से इंतजार किया है. अब तो काम करने का वक्त है तो मैं तो बहुत काम करना चाहता. मैं फिलहाल सुभाष सिंह की फिल्म कर रहा और पूरी मेहनत कर रहा. हां, एक बात तय है कि टेलीविजन ने इतना बड़ा मौका दिया है तो मैं लोगों को निराश नहीं करूंगा. पूरी मेहनत करूंगा और मुझे उम्मीद है कि मेरा काम लोगों को पसंद आयेगा.
आर्य अगर दोस्तों की बात करें तो आपको लगता है कि फिल्म इंडस्ट्री या यू ं कह लें एंटरटेनमेंट की दुनिया के लोगों से सच्ची दोस्ती की अपेक्षा की जा सकती है?
हांं , क्यों नहीं. लोगों को लगता है कि हमारी पूरी दुनिया ही फेक है. हम फेक जिंदगी ही जीते हैं. लेकिन ऐसा नहीं है. हम भी आम लोग हैं और हमें भी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. और हम भी अच्छे दोस्त बना सकते. मेरे कई दोस्त हैं और शुभ चिंतक हैं, जिन्होंने बुरे दौर में मेरा साथ दिया. और वे इसी इंडस्ट्री से हैं तो सिर्फ बुरा नहीं. अच्छा पक्ष भी देखना ही चाहिए सभी को.

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