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20151126

कविता के कदम

टेलीविजन की लोकप्रिय अभिनेत्री कविता कौशिक ने हाल ही में एक डांस रियलिटी शो के फिनाले में अपनी नाराजगी स्पष्ट रूप से जतायी. उन्हें यह बात बिल्कुल पसंद नहीं आयी कि कुछ कॉमेडी सितारों ने जबरन उनका मजाक उड़ाया. इन दिनों एक टेलीविजन शो में कुछ सेलिब्रिटिज को बुला कर उन्हें आदर सम्मान के साथ बिठा कर, उनका मजाक उड़ाया जा रहा है और शो काफी हिट भी हो रहा है. शायद वजह यह है कि हमें वे बातें हमेशा आकर्षित करती हैं, जब हम किसी और का मजाक बनते देखते हैं. इन दिनों सोशल साइट्स पर वैसे वीडियोज सबसे अधिक लोकप्रिय होते हैं, जहां किसी का माखौल उड़ाया जा रहा होता है. एक दौर में कार्टून की डिमांड अखबारों में इसलिए बढ़ी थी कि वे व्यंग्यात्मक तरीके से पॉलिटिकल पार्टिज और राजनीति की तह तक घाव करेगी. एक विज्ञापन में दिखाया जाता  है कि आजकल अखबारों में कार्टून कौन देखता है और उस कार्टूनिस्ट को नौकरी से निकाल दिया जाता है. हकीकत यह है कि हमें अब कार्टून के महत्व को भूल चुके हैं. अब हमें लोगों को जोकर बना कर ही हंसने में मजा आता है. राह चलते व्यक्ति को गिराने में नहीं, बल्कि गिरे हुए गड्ढे में उन्हें देख कर चुस्कियां लेना ही हमारी फितरत बन चुकी है. एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में यह बहुत आम बात हो चुकी है. लेकिन टेलीविजन में जिस तरह से फूहड़ता प्रस्तुत की जा रही है.वह अशोभनीय है. ऐसे में कविता इस इंडस्ट्री का हिस्सा होते हुए भी यह कदम उठाती हैं . अपनी आवाज बुलंद करती हैं तो यह काबिलएतारीफ है. चूंकि किरदार में खुद का या व्यक्ति का मजाक उड़ाना किरदार की डिमांड है. सतीश कौशिक भी इस तरह की फूहड़ता के खिलाफ अपनी असहमति दर्ज कर चुके हैं.

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