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20151126

सूरज बढ़ाते आये हैं हौंसला : सलमान खान


सलमान खान और सूरज बड़जात्या 16 सालों के बाद फिर से एक साथ आये हैं और यही वजह है कि सलमान प्रेम रतन धन पायो को अपने करियर की अनोखी फिल्मों में से एक मानते हैं.  लेकिन उससे भी महत्वपूर्ण सलमान अपनी और सूरज की दोस्ती को मानते हैं. 

 सूरज सबकुछ हैं
मैं सूरज बड़जात्या सूरज बाबू की बहुत इज्जत करता हूं. मेरे ख्याल से मैं जितनी इज्जत सूरज बाबू की करता हूं. उतनी किसी की भ ीनहीं करता हूं. वजह यह नहीं कि उन्होंने मुझे मेरी पहली फिल्म दी. बल्कि इस वजह से कि सूरज एक बहुत अच्छे इंसान हैं और लोगों को सूरज बाबू से सीखना चाहिए कि ग्लैमर की चकाचौंध में भी कोई व्यक्ति इतना सामान्य, इतना सरल कैसे हो सकता है. मुझे यह कहने में कोई हिचक नहीं है कि सूरज बाबू की वजह से मैं एक अच्छा इंसान बना हूं.और उनकी फिल्में मुझे और मेरे परिवार वालों को और करीब लाती हैं. इसलिए मैं सूरज बाबू को बहुत इज्जत देता हूं.
सूरज बाबू का सुबह उठाना
कम ही लोग यह जानते हैं कि मुझे सुबह उठना बिल्कुल पसंद नहीं है. मैं अपनी फिल्मों के सेट पर भी सेकेंड हाफ में जाता हूं और उसी अनुसार शेडयूलिंग भी होती है. लेकिन एकमात्र सूरज बाबू वैसे निर्देशक हैं, जिनके लिए मैं सुबह में उठता था और आज भी उठता हूं. मुझे याद है, जब मैंने प्यार किया कि शूटिंग हो रही थी. सूरज बाबू मुझे कॉल टाइम 4 बजे सुबह का देते थे और मैं सुबह सुबह भाग भाग कर, पहुंच जाता था. कार से जा रहा हूं और अगर ट्रैफिक लग जाये तो मैं दीवार फांद फांद कर स्टूडियो में जाता था. आज भी सूरज बाबू मॉंिर्नंग में आकर मुझे जगाते थे. कहते थे कि चलो ब्रेकफास्ट कर लो. अब काम शुरू करना है. सूरज के लिए मैं जितना मैनेज करता हूं. शायद ही किसी के लिए कर पाऊं. वजह यह है कि सूरज की मैं सबसे अधिक इज्जत करता हूं.
भाग्यश्री नहीं शबाना दत्त होतीं 
जी हां, यह जान कर आपको आश्चर्य हो, ेलकिन हकीकत यही है कि फिल्म मैंने प्यार किया में पहले शबाना दत्त नाम की अभिनेत्री काम करने वाली थीं. उन्होंने ही मेरा नाम सूरज बड़जात्या को सजेस्ट किया था. खास बात यह थी कि मैं उस वक्त काम के लिए मारा मारा फिर रहा था. एक हवाई चप्पल का एड कर रहा था और सूरज को यह लग रहा था कि सलीम खान का बेटा हूं. क्या मैं उसकी फिल्म करूंगा. और मैं यहां मारा मारा फिर रहा था. शबाना दत्त ही हम दोनों के बीच की सेतू बनी थीं. लेकिन बाद में शबाना से कोई कांटेक्ट ही नहीं हुआ तो बाद में भाग्य श्री आयी. एक बार नीलम के नाम पर भी विचार किये गये थे. लेकिन भाग्यश्री का नाम ही चर्चे में आया.
मैंने सूरज को कहा था डब कर लो
मुझे याद है, जब मैं बीवी हो तो ऐसी देख कर आया था तो मुझे लग रहा था कि मैंने कितनी बड़ी गलती कर दी है. बीवी हो तो ऐसी में मुझे बिल्कुल अपना काम पसंद नहीं आया था. मुझे लग रहा था कि मैं कहां चेहरा छुपा लूं. यहां तक कि फिल्म अरबाज और सोहेल ने देखी थी तो उनलोगों को भी पसंद नहीं आयी थी. मुझे लगा कि इसका असर सूरज की फिल्म पर भी होगा. मैंने सूरज बाबू से कहा कि आप फिल्म में मेरी आवाज की डबिंग करवा लो. वरना, फिल्म नहीं चल पायेगी. लेकिन सूरज ने कहा कि वह मेरी ही आवाज रखेंगे. और आखिरकार उन्होंने मेरी बात नहीं मानी. उन्होंने मुझे बताया कि उनके पिताजी ने उन्हें यह बात कही कि नया लड़का है, अगर हम आवाज डब कर देंगे तो उसका हौंसला टूटेगा. मुझे जब यह बात पता चली थी मैं बहुत खुश हुआ था और बड़जात्या परिवार के लिए मेरा सम्मान और बढ़ गया था.
सूरज का प्रेम
अक्सर लोग सूरज बाबू से पूछते हैं कि उस दौर में प्रेम नाम उन्हें कैसे पसंद आया था. दरअसल, सूरज बाबू व उनके परिवार का मानना था और विश्वास था कि यह नाम उनके परिवार की फिल्मों के लिए लकी रहा है. उनकी जितनी भी फिल्मों में हीरो का नाम प्रेम था. वे फिल्में कामयाब हुई थीं. सो, इस वजह से सूरज ने प्रेम नाम सोचा और वह इस कदर हिट हुआ कि आज भी लोग इसे पसंद करते हैं.
जानवरों की उपस्थिति
सूरज की फिल्मों में जानवरों की उपस्थिति खास रही है और मैंने इस बार भी सूरज को कहा था कि फिल्म में कुछ ऐसे दृश्य रखते हैं, जिनमें जानवर हों. हालांकि फिल्म में छोटे दृश्य हैं, जिसमें तोता आइलव यू बोलता है. सूरज की फिल्मों की खासियत तो उनकी मासूमियत ही है.

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