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20151126

फिल्मों में नहीं साहित्य में है मीरा को दिलचस्पी : शाहिद


फिल्म हैदर से जब शाहिद कपूर को एक बड़ी कामयाबी मिली, तो उन्होंने तय किया कि वे सिर्फ गंभीर फिल्में करके यह साबित करने की कोशिश नहीं करेंगे कि वे अब सिर्फ सीरियस फिल्में ही करना चाहते हंै और यही वजह है कि उन्होंने शानदार को हां कहा.

हैदर के बाद अचानक बिल्कुल शानदार जैसी फिल्में क्यों?
चूंकि मैं नहीं चाहता था कि लोग मुझे किसी एक छवि में फिर से बांधें और सोचें कि मैं अब सिर्फ हैदर जैसी गंभीर फिल्में ही कर सकता हूं. चूंकि मुझे लगता है कि अब मेरा दौर आया है और अब मैं खुद को बांध कर नहीं रखना चाहता. शानदार एक खास फिल्म इसलिए है मेरे लिए क्योंकि इसे विकास बहल निर्देशित कर रहे हैं, जिनकी फिल्म क्वीन ने काफी सफलता हासिल की. लोगों को इस फिल्म से काफी प्यार मिला है. विकास का कैरेक्टर्स को लेकर, अपनी सीन को लेकर एक अलग टेक होता है. वो हमेशा बहुत हैप्पी फिल्म बनाते हैं. जैसे अगर आप क्वीन देखें तो कहानी फिल्म की डिप्रेशिंग थी कि एक लड़की है और उसको शादी से पहले लड़के ने न कह दिया है. लेकिन उन्होंने इसमें जो फन डाला, ड्रामा डाला. मैं उससे काफी प्रभावित था. शानदार भी हंसी खुशी वाली पोजिटिव अप्रोच वाली ही फिल्म है. इससे पहले मुझे लगता है कि ऐसी डेस्टीनेशन वेडिंग वाली फिल्म बनी नहीं है तो यह भी एक स्पेशल बात है इस फिल्म की.
आप कभी डेस्टीनेशन वेडिंग का हिस्सा बने हैं?
नहीं, मैं कभी किसी की डेस्टीनेशन वेडिंग में नहीं गया हूं. लेकिन मेरे दोस्त यार बताते रहते हैं कि डेस्टीनेशन वेडिंग में ये होता है. वो होता है. ऐसी मस्ती होती है. तो मुझे वह सब सुनने का मौका मिला है. तो डेस्टीनेशन वेडिंग में कुछ ऐसा वातावरण होता है कि जहां सबकुछ काफी एंटरटेनिंग होता है, क्योंकि एक जगह कई नये लोग एक दूसरे से मिलते हैं. नाच गाना होता है. तो ये सारी चीजें नये अंदाज में विकास ने दिखाने की कोशिश की है.मैं इस बात से भी खुश हूं कि इस फिल्म में मेरी और आलिया की जोड़ी पहली बार दर्शकों को देखने को मिलेगी.
आपने भी हाल ही में असल जिंदगी में भी वैवाहिक जीवन में कदम रखा है मीरा के साथ. तो अपने नये अनुभव के बारे में बताएं?
काफी लोग मुझसे ये सवाल लगातार पूछ रहे हैं. लेकिन हकीकत यह है कि जिंदगी में कुछ खास बदलाव नहीं आये हैं. हां, मीरा की जिंदगी थोड़ी सी बदली इस लिहाज से है कि मीरा को अधिक मीडिया या पब्लिक अटेंशन की आदत नहीं रही और इन दिनों वह कहीं भी जाती है तो उसे वह सब फेस करना पड़ता तो वह मुझे आकर बताती भी है कि किस तरह मॉल में लोग उसे घूर कर देखते हैं तो उसे बुरा लगता है. मीरा को फिल्मों में उतनी भी दिलचस्पी नहीं रही है कि वह हर रोज फिल्में देखे. वह साहित्य में दिलचस्पी रखती है और वह साहित्य काफी पढ़ती है. वह हमेशा से अच्छे मार्क्स लाने वाली लड़की रही है. पढ़ने लिखने वाली तो उसे फिल्मों को लेकर खास दिलचस्पी नहीं है. ऐसी भी खबरें आ रही हैं कि वह बॉलीवुड में शुरुआत करने वाली हैं तो ये सारी बातें अफवाह ही हैं. फिलहाल उसे अभिनय में कोई दिलचस्पी नहीं है और मैं अपनी पसंद नापसंद उस पर थोपने वाला नहीं हूं.
अपने अब तक के करियर को आप किस तरह से देखते हैं?
मेरा करियर बहुत आसान नहीं रहा है. मैंने काफी संघर्ष देखा है. जब मैं आया था.तब भी.और जब मैंने कुछ अच्छी फिल्में कर ली तब भी.मेरे लिए कठिन दौर रहा. कुछ सालों पहले तक लोगों ने मान लिया था कि मेरा चैप्टर क्लोज होने वाला है. जब लगातार मेरी फिल्में कामयाब नहीं हो रही थीं. लेकिन मैंने दोबारा बहुत मेहनत की है और खासतौर से विशाल भारद्वाज सर की इसमें अहम भूमिका रही है. उन्होंने कमीने से लेकर रंगून तक मुझ पर भरोसा किया है. उनकी फिल्मों का हिस्सा मैं रहा हूं. हैदर से तो उन्होंने मुझे मेरी जिंदगी का अहम किरदार दे दिया. जब लोग मुझे सिर्फ चॉकलेटी हीरो वाले किरदार में ही देख रहे थे. विशाल सर को कुछ अलग नजर आया. और उन्होेंने मुझे हैदर जैसा किरदार दिया.उस फिल्म को लेकर भी काफी लोग आशंका जता रहे थे. लोगों को लग रहा था कि यह आॅफबीट से भी आॅफबीट फिल्म है. और अगर वाकई लोग उसे न स्वीकारते तो मेरे लिए चुनौती बड़ी हो जाती. लेकिन विशाल सर ने इस फिल्म को जिस तरह बनाया और लोगों तक यह फिल्म पहुंची.मैं मानता हूं कि क्रेडिट विशाल सर का है. अब लोगों का नजरिया भी बदला है मेरे प्रति. अब जिस तरह की फिल्में मेरे पास आ रही हैं. सारी कंटेट ड्राइवेन हैं. उड़ता पंजाब भी मेरी जिंदगी की अहम फिल्मों में से एक होगा. और रंगून को भी मैं खास फिल्म मानता हूं. उम्मीद करता हूं कि यह अच्छा वक्त मेरी जिंदगी में कायम रहेगा.
इस फिल्म में आपके पिता पंकज कपूर और बहन सनाह कपूर भी हैं. परिवार के दो सदस्यों के साथ काम करने का सफर कैसा रहा?
खुश हूं कि इस फिल्म से सनाह लांच हो रही हैं. मैं  तो काफी एक्साइटेड था. उसे मैंने पहला शॉट देते देखा तो मैं तो काफी खुश था. पापा भी खुश थे. पापा के साथ मौसम के सेट पर मुझे अधिक डर लगता था. इस फिल्म में तो पापा भी बिल्कुल मस्ती के मूड में थे. वे हर शॉट के बाद आकर मुझसे पूछते थे कि मेरा शॉट ठीक तो है, मैं हंसता भी था कि मुझसे पूछ रहे भारत के महान कलाकारों में से एक. लेकिन खुशी भी होती थी कि पापा अब इस काबिल तो समझ रहे.सनाह ने मुझे मौसम के दौरान शॉट देते देखा था. उस वक्त वह पापा को अस्टिट कर रही थी और अब एक्टिंग में वह शुरुआत कर रही है तो मेरे लिए यह प्राउड मोमेंट ही है. 

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