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20151126

कलाकार व ट्रेंड मार्क


हाल ही में रिलीज हुई फिल्म वेलकम बैक में अनिल कपूर और नाना पाटेकर की जोड़ी मजनू और उदय भाई को काफी पसंद किया गया. पूरी फिल्म की जिम्मेदारी ही इन्हीं के कंधे पर थी. गौर करें, तो हिंदी सिनेमा में शोले के जय वीरू की दोस्ती और उनकी जोड़ी को जिस कदर याद किया जाता रहा है. हिंदी सिनेमा की और भी कई ऐसी जोड़ियां हैं, जो जय वीरू की जोड़ी की टक्कर की हैं. लेकिन यह हमारा दुर्भाग्य है कि हिंदी सिनेमा या बॉलीवुड में ट्रेंड की ही तूती बोलती है. जय वीरू ने जो स्थापित कर दिया बाद में उनसे महारथी भी आये. लेकिन हमने उन्हें स्वीकारा नहीं. यह बात सिर्फ जय वीरू की जोड़ी पर ही नहीं, कलाकारों के अन्य कारनामों व ट्रेंड मार्क को लेकर भी है. अनिल कपूर का झक्कास स्टाइल इतना लोकप्रिय है कि आज भी वे किसी रियलिटी शो की टीआरपी सिर्फ इससे ही बढ़ा सकते हैं और शायद यही वजह है कि वे जब टीवी पर किसी फिल्म के प्रोमोशन में आते हैं तो उनके आइकॉनिक गीत ही सुनाई देते हैं और वही पसंद किये जाते हैं. कुछ ऐसा ही ऋषि कपूर के साथ है. उनका गीत बचना ऐ हसीनो... आज भी इस कदर लोकप्रिय है कि टीवी शो में उनसे इसी गाने पर परफॉर्म करने की डिमांड होती है. हमें नयी चीजें स्वीकारने में वक्त लगता है. अनुराग कश्यप से जुड़ी हर बात में कह के लेंगे...की बात जरूर आ जाती है.खुद रमेश सिप्पी भी जानते हैं कि उन्हें जो सम्मान शोले से मिला, वह आज भी शोेले की छत्रछाया से निकल नहीं पाये हैं. लेकिन शोले से संबंधित सवालों से अब उन्हें परहेज होने लगा है. दरअसल, हकीकत यही है कि ऐतिहासिक बातों को सम्मानित बनाये रखने के लिए उसका शांत रहना जरूरी है. न कि उसे बार बार उछाला जाना, बार बार जाहिर किया जाना. तभी नये ट्रेंडमार्क सेट हो सकेंगे. लेकिन बॉलीवुड में यह कम संभव है.

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