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20150905

पढ़ने की संस्कृति

अभिषेक बच्चन ने हाल ही में हुई बातचीत में बताया कि अमिताभ बच्चन अपनी पोती आराध्या को जब भी वक्त मिलता है, हरिवंश राय बच्चन की कविताएं सुनाते हैं.आराध्या अभी केवल 3 साल की हैं, लेकिन उनकी जो प्रतिक्रियाएं होती हैं. वह पूरे परिवार को अभिभूत कर देती है. यही नहीं अमिताभ बच्चन जब भी घर पर वक्त बिताते हैं और पूरा परिवार इकट्ठा होता है. तो वे कविता पाठ करते हैं और पूरे परिवार को हरिवंश राय की कृतियां सुनाते हैं. अमिताभ अपने पिता के बेहद करीब रहे हैं और वे सदी के महानायक होने के बावजूद यह बात मानते हैं कि उनके पिता को जिस तरह लोग याद करते हैं या करेंगे भविष्य में उन्हें नहीं याद करेंगे.दिबाकर बनर्जी से भी कुछ दिनों पहले जब बातचीत हुई थी तो उन्होंने इस बात का जिक्र किया था कि उनके अपने परिवार में यह संस्कृति की थी कि हर उम्र में उन्हें क्या पढ़ना है. सभी आपस में चर्चा करते थे और किताबें पढ़ा करते थे. यही वजह है कि उन्हें पढ़ने की आदत लगी. दरअसल, हकीकत भी यही है कि पढ़ने की संस्कृति की शुरुआत घर से ही होनी चाहिए. बचपन से माता पिता के जेहन में यह बातें रहती हैं कि बच्चों को किन बातों पर पाबंदियां लगानी हैं. उन्हें क्या पढ़ने से रोकना है, क्या देखने से रोकना है. लेकिन क्या पढ़ना है. इन पर कभी जोर नहीं होता. यही वजह है कि मस्तराम जैसे लेखकों को आज भी हमारे घरों में गलत निगाह से देखा जाता है.वर्तमान दौर में पॉर्न वेबसाइट्स पर बैन लगाये जा रहे हैं. यह स्पष्ट करता है कि हम आज भी अपने घर के उस दायरे से बाहर नहीं निकल पाये हैं, पाबंदियां किसी व्यक्ति को और अधिक देखने, सुनने के लिए उकसाती है. लेकिन अगर घर में ऐसा माहौल हो, जहां हर तरह के साहित्य, हर तरह की फिल्मों की चर्चा हो तो खुद ब खुद बच्चों की सोच बदलेगी और नजरिया मिलेगा. यही हकीकत है.

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