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20150905

बाहुबली में प्रभास के आवाज की डबिंग मैंने की है : शरद केलकर

शरद केलकर टेलीविजन के साथ साथ फिल्मों में भी अपनी पहचान स्थापित करने में कामयाब हो चुके हैं. फिलवक्त वे एंड टीवी के धारावाहिक एजेंट राघव में नजर आ रहे हैं. 

खुश हूं कि लगातार अच्छे मौके मिल रहे हैं
मैं बिल्कुल संतुष्ट हूं कि मुझे लगातार अच्छे मौके मिल रहे हैं. फिर चाहे वह फिल्मों में हो या धारावाहिकों में. मैं अपने काम को लेकर ज्यादा फिक्र नहीं करता. मैं बहुत टेंशन नहीं लेता. जो सोचता हूं वह करता हूं और अच्छे काम करने की कोशिश करता हूं. एक सा काम करके मैं बोर हो जाता हूं तो कोशिश होती है कि हमेशा नये तरीके के काम करता रहूं. फिल्मों में काम करने के बारे में कभी सोचा नहीं था. लेकिन मुझे लगातार अच्छे मौके मिल रहे हैं. फिर चाहे वह रामलीला फिल्म हो या फिर हीरो या फिर लय भारी. लय भारी से काफी सफलता मिली है. लोगों ने उस फिल्म से मुझे काफी नोटिस करना शुरू किया है. तो अच्छा फेज चल रहा है मेरे करियर का.
हिंदी भाषा पर है पकड़
यहां जब मैं किसी से हिंदी में बातचीत करता हूं और शुद्ध हिंदी में बात करता हूं तो लोग चौंकते हैं कि मैं एक्टर होने के बावजूद अच्छी भाषा में बात कैसे कर लेता हूं. तो इसकी वजह यह है कि मैं मध्य प्रदेश से  हूं. ग्वालियर से हूं और हिंदी भाषी हूं. हिंदी भाषा पर मेरी अच्छी पकड़ है. और इस वजह से मेरे उच्चारण भी दुरुस्त है.
आवाज को मिली नयी पहचान
मुझे याद है, पहले लोग मेरी आवाज को कहते थे कि बाप रे कितनी भारी आवाज है. मेरे घर फोन आया और अगर मैंने फोन उठा लिया तो सामने वाले मेरी भारी आवाज को सुनते तो कहते कि अरे जरा अपनी बेटी से बातचीत करा दीजिए. जबकि उन्हें मेरी बहन से बातचीत करनी होती थी. और उसी आवाज की जब आज लोग तारीफ करते हैं तो मुझे काफी खुशी मिलती है. आपको सुन कर आश्चर्य होगा लेकिन यह हकीकत है कि फिल्म बाहुबली में प्रभास, जिन्होंने लीड किरदार निभाया है. उनकी डबिंग मैंने ही की है हिंदी भाषा में. राजमौली ने पहले किसी और से डबिंग करायी थी. लेकिन उन्हें आवाज पसंद नहीं आयी थी तो फिर उन्होंने मेरी आवाज सुनी और उन्हें काफी पसंद आयी. फिल्म को कामयाबी मिली है और लोगों को मेरी आवाज पसंद आयी है. मैं एक्टिंग के साथ साथ इसलिए डबिंग भी करता रहता हूं. इससे मेरी आवाज की प्रैक्टिस तो होती ही है. साथ ही साथ एक अलग जोन में काम करने का मौका भी मिलता है.
गोपीनाथ मुंडे की बायोपिक
मैंने कभी सोचा नहीं था कि मुझे कभी किसी बायोपिक फिल्म के भी आॅफर मिल सकते हैं. लेकिन मुझे मराठी फिल्म के निर्देशक ने जब गोपीनाथ मुंडे की बायोपिक फिल्म का आॅफर दिया तो मैं चौंका और मैंने उनसे पूछा भी कि क्या आपको लगता है कि मैं कर पाऊंगा. उन्होंने विश्वास जताया तो मैंने गोपीनाथ के वेश में अपनी फोयोग्राफी करायी. और फिर इंडस्ट्री में लोगों को दिखाया तो लोगों ने कहा कि ये तो गोपीनाथ मुंडे की तसवीर है. तुम क्यों लेकर घूम रहे हो. तब मुझे लगा कि अगर लोग अभी तसवीरों में नहीं पहचान पा रहे हैं तो शायद वाकई मैं कर पाऊंगा. तो उस पर काम जारी है.
बेटी से ही बहुत लगाव
मैं अपनी बेटी से बहुत करीब हूं. बल्कि मैं अपनी जिंदगी में तीन औरतों को काफी महत्व देता हूं. अपनी पत् नी, मां और बेटी को. तीनों से ही मुझे बेहद प्यार है. इन दिनों बेटी को ज्यादा प्यार दे रहा हूं. उसके साथ वक्त बिताने का समय कम मिलता है. तो लगता है कि पता नहीं मैं अच्छा पापा हूं कि नहीं. इन दिनों मैं उसे सेट पर ही बुला लेता हूं और फिर उसके साथ वक्त बिताता हूं. तो अच्छा लगता है.
एजेंट राघव वाले गुण
यह हकीकत है कि मुझ में भी एजेंट राघव वाले कई गुण हैं, जैसे मुझे लोगों के चेहरे बहुत याद रहते हैं. अगर मैं दो बार किसी से मिल लूं तो समझ जाता हूं कि सामने वाला व्यक्ति अच्छा है या नहीं. मुझे भविष्यवाणी हो जाती है. व्यक्ति को देख कर उसके बारे में अनुमान लगा लेता हूं कि वह किस तरह का आदमी है और मुझसे क्यों जुड़ना चाहता है. मेरी मेमोरी भी बहुत शार्प है. फोटोग्राफी मेमोरी है. दिमाग में बातें और चेहरे दर्ज हो जाते हैं. इस गुण के कारण मेरी जिंदगी में जो भी मेरे दोस्त बने हैं. वे अच्छे दोस्त बने हैं. बुरे लोगों को आस पास भटकने भी नहीं देता.
मेरे स्वभाव के बारे में गलतफहमी
कई लोगों को मेरे स्वभाव के बारे में गलतफहमी है कि मैं वास्तविक जिंदगी में काफी गंभीर रहनेवाले लोगों में से हूं. हकीकत तो यह है कि मैं बहुत बातुनी हूं. अपने दोस्तों में सबसे ज्यादा बातें मैं करता हूं. काफी मस्ती करता हूं. मैं गंभीर बिल्कुल नहीं हूं. जिंदगी को एंजॉय करके जीता हूं. और जिंदादिली से जीता हूं.

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