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20140218

छोटे शहरों में गोविंदा छाप

 कॉमेडी नाइट्स विद कपिल में कुछ हफ्तों पहले गोविंदा आये थे. गोविंदा एक दौर में हिंदी सिनेमा के लोकप्रिय हास्य अभिनेताओं में से एक रहे. जिन्होंने अपने अंदाज से खासतौर से सिंगल स्क्रीन थियेटर के दर्शकों के लिए ट्रेंड तय किया था. उनकी अदाकारी का अंदाज व डांस के स्टेप आज भी छोटे शहरों में सबसे अधिक लोकप्रिय हैं. मुझे याद है मेरे अपने शहर बोकारो स्टील सिटी में किस तरह गोविंदा की फिल्में आने पर मोहल्ले के सभी लोग स्टॉल में बैठ कर भी फिल्में देखना पसंद करते थे. मैंने फिल्म आंखें बिहार के कटिहार के एक सिनेमा हॉल में देखी थी. तब मंै बेहद छोटी थी. और उस वक्त फिल्मों की सफला का सीधा मापदंड फिल्म का हाउसफुल होना ही होता था. इसके अलावा मुझे कोई शब्दावली आती भी नहीं थी. उस वक्त की वह भीड़ आज भी मेरे जेहन में जिंदा है. लोग सीढ़ियों पर बैठ कर गोविंदा की फिल्में देख रहे थे. और उनके हर गाने पर सिटियां और तालियां बज रही थीं. लेकिन आज वही गोविंदा फिल्मों में सहयोगी कलाकार के रूप में नजर आते हैं. हाल में जब वह कॉमेडी नाइट्स में आये तो लगा फिर से पुराने दौर का गोविंदा लौट आया है. वही गोविंदा जिनके गानों पर सबसे अधिक सेंसर की कैंची चलाई जाती थी.  शादी और पार्टी गोविंदा छाप गानों के बगैर संभव ही नहीं था. खुद अयान मुखर्जी व बड़ी हस्तियां मानते हैं कि आज भी गोविंदा छाप गानों पर डांस करते हैं. दरअसल, हकीकत यही है कि हम खुद को बौद्धिक जताने की कोशिश करें लेकिन हकीकत यही है कि मस्ती के वक्त हम गोविंदा की मस्ती ही याद करते हैं. गोविंदा वास्तविक जिंदगी में पहले की अपेक्षा अधिक गंभीर हो चुके हैं. लेकिन कॉमेडी नाइट्स में जिस तरह वे कॉमेडी किंग कपिल को भी अपने बातों को जाल में लपेट रहे थे. इससे यह तो स्पष्ट है कि गोविंदा का दौर न खत्म हुआ है न होगा.

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