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20140218

नाम नामात्र नहीं

दीया मिर्जा फिल्म निर्माता बन कर बेहद खुश हंै और उनके चेहरे से उनकी यह खुशी साफ झलकती है. उनका मानना है कि हिंदी फिल्मों में अभिनेत्रियां जब जब फिल्म निर्माण से जुड़ती हैं लोग उनके बारे में यह बातें बनाने लगते हैं कि वे प्रोडयूसर बनी हैं क्योंकि उन्हें फिल्मों में काम नहीं मिल रहा या फिल्मों में सफल नहीं हो पायीं. दीया को इन बातों से तकलीफ होती है और दुख भी होता है कि अब भी बॉलीवुड में महिला निर्मात्री को लेकर इस तरह की बातें क्यों की जाती हैं. जबकि लोग अगर देखें तो महिला निर्मात्री में एकता कपूर जैसी सफल निर्मात्री ने यह साबित कर दिया है कि महिलाएं भी सफल अभिनेत्री हो सकती हैं और उन्हें सिर्फ फिल्मों में नाम नहीं चाहिए. किसी दौर तक गौरी खान का नाम फिल्मों में यूं ही जाता रहा. लेकिन हकीकत यह है कि अब गौरी खान भी फिल्मों की मेकिंग और उनके प्रोडक् शन में दखल देने लगी हैं. इससे स्पष्ट है कि फिल्मों में अब अभिनेत्रियां केवल अपना नाम नामात्र नहीं रखना चाहतीं. वे चाहती हैं कि उन्हें के्रडिट तभी मिले. जब उन्होंने वाकई उस नाम के लिए काम किया हो. दीया मिर्जा ने साफ किया है कि लोग यह न सोचें कि निर्माता का मतलब केवल चेक काटने का होता है. ऐसा नहीं है दीया फिल्म के हर क्रियेटिव विभाग में दिलचस्पी ले रही हैं.और उन्हें लगता है कि यह महिलाओं के लिए एक बेहतरीन क्षेत्र है. जल्द ही अमीषा पटेल अपने प्रोडक् शन की पहली फिल्म लेकर आ रही हैं और अभी से इस बात की चर्चा शुरू हो चुकी है कि वह बुरी फिल्म का ही निर्माण करेंगी. चूंकि वह अभिनेत्री के रूप में सफल नहीं रही हैं. इसका यह कतई मतलब नहीं कि एक असफल अभिनेत्री सफल निर्माता नहीं हो सकती. बॉलीवुड भविष्यवाणियों से ग्रसित है. जबकि जो नयी अभिनेत्रियां फिल्मों के साथ निर्माण का क्षेत्र चुन रही हैं. उनका प्रोत्साहन बढ़ाया जाना चाहिए

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