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20140218

पापा की वजह से बदला शीषर्क : सलमान खान


फिल्म दबंग 2 के बाद एक बार फिर सलमान खान की दर्शकों के साथ जय हो की गूंज करने जा रहे हैं.

सलमान, पहले आपकी फिल्म का नाम मेंटल था. फिर अचानक फिल्म का नाम जय हो रख दिया. कोई खास वजह?
वजह साफ थी कि हमारे डैड ने कहा कि मेंटल नाम अच्छा नहीं है. लोग इस फिल्म के बाद हो सकता है कि मुझे मेंटल खान कहने लगते और डैड ये नहीं चाहते थे. सो, उन्होंने हमसे पूछा कि फिल्म में तुम्हारे किरदार का नाम क्या है. मैंने बताया कि जय है तो उन्होंने कहा कि जय हो रख दो. चूंकि फिल्म में जय का किरदार आम आदमी का किरदार है और वह हमेशा भ्रष्टाचार मिटाने की कोशिशों में जुटा रहता है और इसी तरह फिल्म में लोग जय की जय जय कार कहते हैं.
तो सलीम खान ही आपकी फिल्मों का स्क्रिप्ट सुपरविजन करते हैं?
जी हां, बिल्कुल जब घर में इतने महान लेखक हैं तो हम बाहर क्यों जायें. हम तीनों ही भाई अगर कई दिनों तक किसी सीन पर अटके हुए हैं और सोच रहे हैं कि आखिर क्या किया जाये. तो सीधे डैड को ही फोन लगाते हैं. फिल्म में हमने संवाद लिखा है कि आम आदमी कोई पॉलिटिकल पार्टी नहीं होता. आम आदमी आम आदमी होता है. ऐसे संवाद डैड ही बता सकते हैं. उन्होंने दुनिया देखी है. वे जानते हैं कि कहां क्या सटीक चीजें लिखी जा सकती हैं. तो बाप तो बाप ही होता है. उनके ऊपर तो हम नहीं. भाड़ में जाये दुनिया हम तीनों के लिए डैड  महत्वपूर्ण हैं. उन्होंने कह दिया कि नहीं रखना तो भले ही हमने शीषर्क पर कितने भी पैसे खर्च कर दिये हों. हम नहीं रखेंगे.
कभी सलीम खान साहब को आप तीनों भाई यह कर मनाने की कोशिश नहीं करते कि उन्हें दोबारा लिखना चाहिए?
वह हमारे बाप हैं हम उनके नहीं और ऐसा नहीं कि वे लेखन से दूर हुए हैं. जब मौके मिलते हैं तो वह लिखते हैं. हमारे ही होम प्रोडक् शन की फिल्में उनके सुपरविजन से ही बनती हैं. इंशाह अल्लाह वह लिखे तो हमें खुशी होगी.
सोहेल खान को काफी लंबा इंतजार करा दिया आपने. इस बीच अरबाज के लिए दो फिल्में बना ली तो सोहेल नाराज नहीं हुए?
अरे भाई है मेरा. मुझे पता है कि किस वक्त क्या सही होगा. अपने घर की बात है. जब जय हो जैसी फिल्म का समय आया तो कर रहा हूं. उस वक्त दबंग नहीं करता तो दबंग का क्रेज खत्म हो जाता है. सबका अपना टाइम होता है. पैसे तो घर से ही जा रहे हैं या आ रहे हैं.
तो कभी भाईयों में मतभेद नहीं होता इन बातों को लेकर?
इन बातों को लेकर तो नहीं होता कि भाई आपने अरबाज की फिल्में कर दीं. मेरी नहीं. हां, संवाद को लेकर होता है. तो हम डिस्कस करते हैं. वह लड़ाई तो अच्छी लड़ाई है.
अगर सोहेल और अरबाज दोनों को बतौर निर्देशक के रूप में परिभाषित करना हो तो किस तरह करेंगे?
सोहेल और अरबाज दोनों की फिल्में बनाने का अंदाज अलग है. दोनों दो लोग हैं. दोनों को अलग तरह की कहानियां पसंद आती हैं. सीन को लेकर लोगों का अप्रोच अलग है.
लेकिन अचानक एक् शन फिल्में बनाते हुए आम आदमी व भ्रष्टाचार की फिल्में क्यों?
मुझे काफी दिनों से इच्छा थी कि कोई ऐसी फिल्म करूं. मैं आमतौर पर भी सामाजिक चीजों में दिलचस्पी लेता हूं और मुझे लगता है कि ऐसे विषयों पर हमें फिल्में बनानी चाहिए क्योंकि लोग आपको अगर सुनते हैं तो फिल्म में दिखाई गयी चीजों पर भी विश्वास करेंगे.
आप जब भी किसी फिल्म को लेकर आते हैं. लोगों की उम्मीदें पहले से ही काफी बढ़ जाती है कि फिल्म सुपरहिट होगी. आप बॉक्स आॅफिस की सफलता को किस तरह से देखते हैं?
मैं चाहता हूं कि मेरी फिल्में फ्लॉप न हो. मेरी कोशिश होती है कि मैं उसी तरह की कहानियों पर फिल्में बनाऊं, जिसे मैं देखना पसंद करूंगा. मुझे फिल्मों में हर हाल में इमोशनल कोशेंट चाहिए. अब आप देखें तो बॉडीगार्ड फिल्म सिर्फ लास्ट के 20 मिनट के कारण चली.जहां इमोशल कोशेंट था. भैयाजी आ रही है उसमें तो सबसे ज्यादा है इमोशन. दबंग में मां और बेटे का इमोशन फिर पिता के साथ जो कि उसका अपना पिता भी नहीं होता. फिर पत् नी के दिखाया गया रोमांस तो मेरे लिए इमोशनल कोशेंट होना फिल्म के लिए जरूरी है. वह है तभी मैं फिल्में करता हूं, फिर चाहे कॉमेडी हो या कोई आम फिल्म.
डैजी फिल्म में मुख्य किरदार निभा सकती हैं. जेहन में यह ख्याल कैसे आया?
मुझे याद है कहीं किसी फिल्म की शूटिंग चल रही थी. डैजी वहां कोरियोग्राफर के रूप में थी. मैंने उसे दूर से देखा तो अपने लोगों से पूछा कि ये लड़की कौन है. पता चला कि कोरियोग्राफर है. मैंने बोला कि अरे इसे तो एक्टिंग करनी चाहिए. हालांकि वह तैयार नहीं हुई. बोली नहीं नहीं जो मैं कर रही वही ठीक है. लेकिन उसे कंनविंस किया. मुझे नये लोगों को मौके देना अच्छा लगता है. जल्द ही आदित्य पंचोली के बेटे को लांच करूंगा. अरे जब टैलेंट को निखार सकते हो तो निखारना चाहिए.
बिइंग हुमन का कई बार लोग गलत फायदा भी उठाते हैं. इस बारे में क्या कहना चाहेंगे आप?
हां, मुझे ऐसे लोगों पर बहुत गुस्सा आता है जो आकर कहते हैं कि मुझे 4 लाख देदो घर खरीदना है. शादी करनी है. मुझे लगता है मैं थप्पड़ मारूं कि जाओ काम करो. मैं चाहता हूं कि जो जरूरतमंद है. उसकी मदद हो न कि आप कुछ भी करो.
इस बार शाहरुख ने आपका रिकॉर्ड तोड़ा तो क्या उम्मीद है कि आप जय हो से उनका रिकॉर्ड तोड़ पायेंगे.
यह सब आंकड़ें आप लोगों की ही देन है और आप लोग ही इसके बारे में अधिक बता पायेंगे.मैं बस इतना जानता हूं कि हां, एक दूसरे से हेल्दी कांप्टीशन हो तो ही अच्छा. दर्शक मेरी फिल्में देखें. सिंगल स्क्रीन में तालियां बजें. तो मैं उसमें ही संतुष्ट हूं. मैं कोई इमेज से बंधा नहीं हूं और किसी भ्रम में भी नहीं कि अरे देखो मेरी फिल्म कम बिजनेस कर रही तो मैं लॉस में हूं. हां बस इतना चाहता हूं कि जिन्होंने पैसे लगाये हैं. उन्हें मिल जाये.
आपकी आनेवाली फिल्में
किक और सूरज की फिल्म. सूरज की फिल्म से आपको वापस रोमांटिक प्रेम को देखने का मौका मिलेगा.

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