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20150130

कंगना को सम्मान


 कंगना रनौट ने बहुत पहले ही यह घोषणा कर दी थी कि वे फिल्मी अवार्ड समारोह की हिस्सा नहीं बनेंगी. चूंकि उनका मानना है कि अवार्ड समारोह में न सिर्फ वक्त की बर्बादी होती है, बल्कि पैसों की भी बर्बादी होती है. उन्हें हरगिज पसंद नहीं कि अवार्ड समारोह में वे जो परिधान पहना करती थीं. बाद में वह परिधान वह दोबारा दोहरा नहीं पाती थीं, जिसे बनाने में उन्हें काफी पैसे खर्च करने पड़ते थे. लोकप्रिय अभिनेत्रियों में कंगना शायद पहली अभिनेत्री होंगी, जिन्होंने फिल्मी अवार्ड समारोह की अनदेखी करनी शुरू की है. लेकिन इसका यह कतई मतलब नहीं कि वे किसी अवार्ड की हकदार नहीं. वर्ष 2014 में सभी जानते हैं कि क्वीन बॉलीवुड की न सिर्फ सर्वश्रेष्ठ फिल्मों में से एक रहीं. बल्कि फिल्म में महिलाओं के लिए कई संदेश हैं. निश्चित तौर पर प्रियंका चोपड़ा की फिल्म मैरी कॉम के अलावा कोई भी क्वीन को टक्कर नही देता. लेकिन प्रियंका से भी अधिक कंगना अवार्ड की हकदार हैं. चूंकि क्वीन में आम लड़की का जो किरदार उन्होंने निभाया है. वे उसे भलिभांति निभा गयी हैं. लेकिन चूंकि कंगना ने खुद को समारोह से दूर रखने का निर्णय ले लिया है. सो, प्रायोजकों ने यह मान लिया है कि उन्हें निमंत्रण भेजना का क्या फायदा. सो, वे उन्हें पुरस्कार थमा रहे, जो अवार्ड समारोह में उपस्थिति दर्ज करा सकें. वर्ष 2013 में भले ही दीपिका पादुकोण सर्वश्रेष्ठ  अभिनेत्री की हकदार थीं. लेकिन वर्ष 2015 में उनकी फिल्म हैप्पी न्यू ईयर या फाइडिंग फैनी कहीं से प्रियंका और कंगना का मुकाबला नहीं करतीं. खुद दीपिका भी यह बात मंच पर स्वीकार चुकी हंै. दरअसल, इन दिनों पैसों का खेल बन चुका है अवार्ड समारोह. कुछ चुनिंदा अवार्ड समारोहों से उम्मीदें भी थीं. तो धीरे धीरे वे भी अपना विश्वसनीयता खो रहे हैं. आनेवाले सालों में ऐसे अवार्ड समारोह के प्रति कलाकार और उदासीन होंगे

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