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20150318

प्लस साइज को ट्रीब्यूट


ऐश्वर्य राय बच्चन जब मां बनीं तो उनका वजन काफी बढ़ गया था और इस बात को लेकर ऐश्वर्य पर कई चुटकुले बने. उनका माखौल उड़ाया गया. परिणीति चोपड़ा पर भी आये दिन वजन की वजह से सवाल उठाये जाते हैं. विद्या बालन ने कई बार वजन को लेकर लोगों के ताने सुने हैं. वे अभिनेत्रियां हैं. फिर भी इस ताने ने उनका पीछा नहीं छोड़ा. फिर आम जिंदगी में उन लड़कियों को कितने ताने सुनते पड़ते होंगे, जो आम हैं. निर्देशक शरत कटारिया की फिल्म दम लगाके हईशा उन तमाम लोगों के मुंह पर तमाचा जड़ती है. शरत ने फिल्म के माध्यम से एक बेहतरीन संदेश दिया है और जाहिर है इससे वे लड़कियां खुद को जरूर कनेक्ट कर पायेंगी, जिन्होंने मोटी होने की वजह से काफी जिल्लत सही है. फिर वह अपने घर के लोगों के बीच में हों, या फिर अपने ससुराल में.चूंकि दरअसल, यहां परेशानी किसी के शारीरिक वजन का नहीं बल्कि सोच के वजन का है. हमारे समाज में आज भी शादी के लिए सुशील सुंदर कन्या के साथ साथ लड़की का फिगर बहुत अधिक मायने रखता है. ताकि शादी के बाद ससुराल में होने वाले बहूभात में सास ससूर और पति सीना चौड़ा कर लोगों को सुना सकें कि चांद सी दुल्हन लाये हैं हम. वे लड़कियां जिनकी उम्र महज 25 हैं लेकिन अधिक वजन की वजह है, उन्हें बड़ी उम्र के वर के साथ इसलिए व्याह दिया जाता है क्योंकि वे मोटी हैं. लेकिन दम लगाके हईशा की अभिनेत्री संध्या को जिस तरह खुद सो हीन भावना न करते हुए दिखाया गया है. शरत बताते हैं कि इस फिल्म के लिए यशराज की कास्टिंग हेड शानु ने ही भूमि को कास्ट करने के लिए दबाव दिया था. चूंकि शानु का भी वजन अधिक है. सो, निश्चिततौर पर इस फिल्म से बहुत हद तक कनेक्ट कर पायी होंगी. दरअसल, यह फिल्म उन तमाम प्लस साईज सुशील लड़कियों को ट्रीब्यूट है.

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