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20150318

एक बिंदू पर मेल


 सैफ अली खान की फिल्म फैंटम की कहानी अक्षय कुमार की फिल्म बेबी से मिलती जुलती है. और यही वजह है कि फिल्म के मेकर्स ने स्क्रिप्ट में फिर से बदलाव करने का निर्णय लिया है. अब फिल्म अप्रैल में नहीं अगस्त में रिलीज होगी. यह पहली बार नहीं, जब बॉलीवुड में कहानियों को लेकर इस तरह के क्लैश न हुए हों. ताजा उदाहरण राजकुमार हिरानी की फिल्म पीके और ओह माइ गॉड है. दोनों फिल्मों की तुलना खूब हुई. चंूकि दोनों का विषय एक ही था. इससे पहले राजकुमार हिरानी ने स्वीकारा कि उनकी फिल्म की कहानी पहले विदेशी फिल्म इंसेप्शन से भी मिलती जुलती थी. लेकिन बाद में उन्होंने बदलाव किया. उनकी फिल्म मुन्नाभाई चले अमरीका की कहानी भी माइ नेम इज खान से मिलती जुलती थी. सो, अंतत: राजू को वह फिल्म वही रोकनी पड़ी. फिल्मों में ही नहीं, छोटे परदे पर भी ऐसी कई कहानियां हैं, जो मेल खाती हैं. वर्तमान में यमदेव पर दो धारावाहिक प्रसारित हो रहे हैं. हैल्लो प्रतिभा और सोनी टीवी के शो एक नयी पहचान की कहानी एक सी थी. दरअसल, इस बात से सिर्फ यह अनुमान लगा पाना गलत है कि फिल्म के लेखक निर्देशक एक दूसरे की नकल करते हैं. चूंकि सृजनशीलता भी कहीं न कहीं किसी न किसी स्थान पर एक दूसरे से प्रभावित होती है. यह भी संभव है कि जिन तथ्यों, या खबर या किसी एक घटना से एक व्यक्ति प्रभावित होता है. अन्य भी हो सकता. शायद यही वजह है कि ऐसी कहानियां अधिकतर कामयाब रही हैं. चूंकि अगर वे कहानियां किसी रूप में भी एक से अधिक सृृजनशील व्यक्ति को प्रभावित करती है. तो वह व्यक्ति भी तो दर्शकों के बीच का ही हिस्सा है. और यही वजह है कि दर्शक ऐसी कहानियों से जुड़ पाते हैं.यह खेल उस एक बिंदू पर है, जहां सभी केंद्रित होते हैं. इसे महज नकल का नाम देना उचित नहीं होगा. 

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