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20130513

कैसा ट्रीब्यूट किसको ट्रीब्यूट


अनुराग कश्यप, जोया अख्तर, दिबाकर बनर्जी और करन जौहर ने मिल कर 100 साल के सिनेमा के अवसर पर एक फिल्म का निर्माण किया है. बांबे टॉकीज़. इस फिल्म के अंत में एक खास गाने का आयोजन किया है. जिसमें हिंदी सिनेमा के वर्तमान के कई सुपरस्टार अभिनेता व अभिनेत्री शामिल हंै. यह बात रेखांकित है. वर्तमान के सुपरस्टार. यह गाना लगभग 6 मिनट की अवधि का है. और इस गाने में पुराने जमाने के कई गानों की झलकियां प्रस्तुत की गयी है. लेकिन दुख की बात यह है कि फिल्म में जिन सुपरस्टार्स की झलकियां दिखाई जा रही हैं, वे केवल वर्तमान के अभिनेता अभिनेत्री हैं. जबकि मेरा मानना है कि हिंदी सिनेमा बिना नोस्टोलोजिया के कुछ भी नहीं. इस गाने में गुजरे जमाने के कोई भी कलाकार शामिल नहीं. न ही धर्मेंद्र, न ही हेमा मालिनी, रेखा, वहीदा रहमान, आशा पारेख, ऋषि कपूर कोई भी शामिल नहीं. यह सच है कि हिंदी सिनेमा को किसी एक गाने में समेटना संभव नहीं. और सभी शख्सियतों को शामिल करना भी मुमकिन नहीं था. लेकिन कुछ शख्स जिनकी वजह से हिंदी सिनेमा आम दर्शक का सिनेमा बनता है, जिनमें दिलीप कुमार साहब भी अहम है. उन्हें शामिल नहीं किया गया. फिर यह एक ट्रीब्यूट कैसे. गौरतलब है कि इस गाने में जिस तरह हम सभी कलाकारों को एक साथ खड़े देख कर रहे हैं. दरअसल, इसकी शूटिंग में सभी कलाकार साथ नहीं. सभी ने अलग अलग आकर शूटिंग की है. फिर तकनीकी मदद से इन्हें एक साथ क्रम में जोड़ा गया है. यह भी हिंदी सिनेमा की विडंबना ही है कि आज तकनीक हम पर इस कदर हावी है कि फिल्मी सितारें एक ट्रीब्यूट गाने के लिए भी एक साथ इक्ट्ठे नहीं हो पाते. जबकि किसी दौर में टीवी विज्ञापन के गीत के लिए सभी स्टार्स एकत्रित हो जाते थे. तो क्या है असल 100 साल के हिंदी सिनेमा

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