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20130513

मुबारक बेगम, गायिका



 शमशाद बेगम जैसी आवाज की फनकार न तो कभी और आयी और न ही कभी आयेंगी. शमशाद बेगम  जितनी शार्प आवाज में गाती थीं. इतनी शार्प आवाज में शायद ही और कोई गाता हो. वे अपन रिकॉर्डिंग के वक्त काफी रिहर्सल करती थीं. एक खास बात यह भी थी कि वह नये कलाकारों, गायक-गायिका का मजाक नहीं उड़ाती थी. वे सबको सम्मान देती थीं. वे कहती थीं कि रिस्पेक्ट सबसे ज्यादा जरूरी है. मैंने उनके साथ फिल्म मुगलएआजम में एक गाना गाया था. सरकार के दीवाने हैं... लेकिन वह गाना बाद में के आसिफ ने हटा दिया था. क्योंकि उन्हें मेरी आवाज पतली लगी थी. बाद में पूरा गाना शमशाद ने ही गाया था. लेकिन उन्होंने मुझसे कहा था कि मन छोटा मत करो. ऐसे मौके हमेशा आते रहेंगे. इसके बाद हमें औलाद फिल्म में गाना गाने का मौका मिला था. गाना था आज घर वाले नहीं भईया...यह गीत भी हम दोनों ने गाया था और काफी लोकप्रिय हुआ था वह गीत. उनकी गायिकी की एक खास बात यह भी थी कि वह खुशमिजाजी को हमेशा बरकरार रखती थीं. इसलिए उनकी गायिकी में भी वह जिंदादिली थी. आप कभी खराब शब्द तो उनकी जुबां पर आ ही नहीं सकते थे. वे कभी किसी से ईर्ष्या नहीं करती थीं. बल्कि हौंसलाअफजाई करती थीं. मैं जब भी नर्वस होती थी. सभी भले ही और डरा दें. वह कभी नहीं डराती थी. कई लोगों को कई दिनों तक लगा कि हम दोनों बहनें हैं, क्योंकि मेरा नाम भी बेगम था और शमशादजी का. लेकिन यह अपनी किस्मत थी कि उनके साथ जुड़ने का मौका मिला. मुझे याद है हमारे अब्बा ने हमारे लिए सलवार  कमीज बनवाई थी. हम वह पहन कर एक दिन गये थे रिकॉर्डिंग में तो. वहां पहुंचे तो शमशाद बेगम ने एकदम बच्चों की तरह आवाज लगायी कि वाह मुबारक आज को साडी कुड्डी जवान लगती है. यही सारी बातें हमेशा याद आती रहेंगी. यह सच है कि बाद के दौर में हमारी ज्यादा मुलाकातें नहीं हुई. लेकिन फिर भी उनकी सिखाई गयी बातें हमेशा मुझे याद रहेंगी. वे हमेशा कहा करती थीं कि अपनी काम की सबसे पहले रिस्पेक्ट खुद करो. फिर लोग करेंगे. खुद को छोटा न समझो और बस मेहनत से रियाज जारी रखो. शमशाद जी को दिल से नमन करती हूं.
प्रस्तुति : अनुप्रिया अनंत

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