20130629

आंखों की भाषा


बिरजू महाराज ने हाल ही में सोनाक्षी सिन्हा की आंखों की तारीफ करते हुए कहा कि सोनाक्षी की आंखें बेहद एक्सप्रेसिव हंै और वह चाहें तो केवल अपनी आंखों से भी भावपूर्ण अभिनय कर सकती हैं. बिरजू महाराज ने इससे पहले माधुरी दीक्षित की आंखों के बारे में भी यही कहा था. माधुरी जब नृत्य करती हैं तो अपनी आंखों से भी नृत्य करती हैं. किसी दौर में मीना कुमारी अपनी आंखों से अभिनय करती थीं. मधुबाला की आंखें भी एक्टिंग किया करती थी. मधुबाला पर फिल्माये गीतों पर गौर करें तो लगभग सभी फिल्मों के गीतों में उनके चेहरे व आंखों पर मुख्य रूप से केंद्रित किया जाता रहा है. बैजयंतीमाला भी अपनी आंखों की वजह से काफी लोकप्रिय थी. दरअसल, हकीकत यही है कि नृत्य के भाव में आंखों की अहम भूमिका होती है. और जिन अभिनेत्रियों ने भी डांस को अपने अभिनय का हिस्सा माना है. उन्होंने इसकी बारीकियों पर ध्यान दिया है. ऐश्वर्य राय बच्चन से जब यह सवाल किया गया था कि वह दुनिया से जाने के बाद किस एक चीज को दुनिया को देना चाहेंगी तो उन्होंने कहा था कि वह चाहेंगी कि वे अपने आंखें दान दें दें. ताकि कोई और उससे पूरी दुनिया को देखे. ऐश्वर्य राय बच्चन का यह दान जीवनदान है. किसी जमाने में ललिता पवार को भगवान दादा ने शूटिंग के दौरान इतना जोर का थप्पड़ मारा था कि उनकी आंखें बिगड़ गयी थीं. साथ ही उनका चेहरा भी बिगड़ गया और बाद में वे वैसे किरदार नहीं निभा पायीं, जिनमें आंखों की अहम भूमिका होती थी. चूंकि यह हकीकत है कि किसी अभिनेत्री की जिंदगी में उसकी आंखों की अहमियत भी खास होती है. और खासतौर से तब जब वह इससे अभिनय करने में माहिर हों. साधना, राखी, रेखा और शर्मिला टैगोर जैसी अभिनेत्रियों ने भी आंखों के सहारे उम्दा अभिनय लगातार निभाया है. 

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