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20130118

शुरुआत अच्छी है


अनुराग बसु ने फिल्म बर्फी में अपनी फिल्म के शुरुआत से पहले पिक्चर शुरू हो गयी बोल वाले एक गीत का प्रदर्शन किया था. इस गाने के बोल में आज का प्यार कैसा दो मिनट नूडल्स जैसा...जैसे शब्दों के बहाने प्यार की वास्तविक रूपरेखा प्रस्तुत की थी. रीमा कागती ने अपनी फिल्म तलाश में ओपनिंग सांग में मुस्कानें झूठी हैं...गीत का इस्तेमाल मुंबई के कई दृश्यों को दिखाते हुए की है. हाल ही में रिलीज हुई विशाल भारद्वाज की फिल्म मटरू की बिजली का मंडोला में विशाल ने न सिर्फ गाने का इस्तेमाल कास्ट और क्रू के क्रेडिट के लिए इस्तेमाल किया है, बल्कि विशाल ने धू्रमपान न करने के लिए एक छोटा लेकिन प्रभावशाली गीत भी फिल्माया है. (इन दिनों थियेटर में धू्रमपान के बारे में लगभग हर कलाकार अपनी आवाज में लोगों को सलाह दे रहे हैं) ऐसे में विशाल का यह अंदाज बेहतरीन है. चूंकि वह खुद संगीत की अच्छी समझ रखते हैं. सो, उन्होंने एक अच्छा तरीका अपनाया है. यही नहीं फिल्म के अंतराल में उन्होंने इंटरवल लिखने की बजाय हरियाणवी शब्द अध्धा का इस्तेमाल किया है. चूंकि पूरी की पूरी फिल्म हरिणानवी पृष्ठभूमि पर आधारित है. दरअसल, हिंदी सिनेमा में इन दिनों हर निर्देशक लगातार कुछ न कुछ नया और अलग गढ़ने की कोशिश कर रहे हैं. न सिर्फ फिल्मों की कहानी में बल्कि प्रेजटेंशन में भी. इस फिल्म के प्रमोशन में लगातार विशाल ने एक शराब की बोतल का इस्तेमाल किया था. उनका कहना था कि फिल्म में इसकी अहम भूमिका है. और यह हकीकत भी है. इन दिनों निर्देशक हर तरह से खुद को अलग साबित करना चाहते हैं और यह सकारात्मक संकेत है, इससे दर्शकों को हर बार कुछ न कुछ नया देखने का मौका मिल रहा है. यह एक नयी और सार्थक शुरुआत है. इन्हें लगातार सराहना मिलती रहे.

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