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20160219

खय्याम साहब का अनमोल तोहफा

खय्याम साहब ने हाल ही में 90 वें बसंत में प्रवेश कर गये. खय्याम साहब के फिल्मी योगदानों के साथ-साथ एक खास बात उन्हें औरों से मुख्तलिफ करती है, कि उन्होंने अपनी पत् नी को ताउम्र अपनी जिंदगी में सबसे अधिक तवज्जो दी. यह बात जगजाहिर हैं, कि उन्होंने कभी अपने अस्टिेंट या कोई टीम नहीं रखीं. वे हमेशा अपनी पत् नी को क्रेडिट दिया करते थे. उन्होंने अपने कई गीतों में खय्याम जगजीत कौर का नाम शामिल किया है. जहां एक तरफ कई गीतकार कई रिकॉर्डस बनाते चले गये. खय्याम साहब को इस बात की कोई शिकायत नहीं कि उन्होंने महज 50 फिल्में अपने नाम की. लेकिन उन्होंने हमेशा इस बात से परहेज किया कि वे बेफिजूल के गाने कंपोज करेंगे. उन्होंने अपनी गुणवता के आड़े किसी को नहीं आने दिया. यही वजह है कि उमरावजान के गीत आज भी सदाबहार हैं और दर्शकों की जुबां पर हैं. मैं पल दो पल का शायर हूं...गीत आज भी कई शायरों के दिलों की धड़कन है. कभी-कभी मेरे दिल में ख्याल आता है... आज भी माहौल में रुमानियत भरने के लिए काफी है. खय्याम साहब से जब भी मुलाकात हुई है, उन्होंने हमेशा स्वीकारा है कि उन्हें जितना सुकून अजान सुन कर मिलता है, उतनी ही तसल्ली उन्हें भजनों को सुन कर भी मिलती है.  यह उनका अलग अंदाज ही था, जो बेगम अख्तर और मीना कुमारी के वे पसंदीदा म्यूजिक निर्देशक रहे. बेगम अख्तर यह बात हमेशा स्वीकारती रही हैं कि उन्होंने खय्याम के साथ सबसे श्रेष्ठ गीत गाये हैं. संगीत के क्षेत्र में इससे बड़ा योगदान और क्या होगा कि उन्होंने अपनी 12 करोड़ की संपत्ति को उन लोगों को समर्पित किया है, जो संगीत के क्षेत्र में संघर्षरत हैं. हिंदी सिनेमा उनका ऋणी रहेगा. शायद आज वे और उनका यह योगदान लोगों को प्रासंगिक  न लगे. लेकिन इस रूप में भी कम लोग ही अपना योगदान दे पाने का दिल रखते हैं

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