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20160223

तंज और दोस्ती के बीच की लकीर

हाल ही में शत्रुघ्न सिन्हा ने भारती प्रधान द्वारा लिखित अपनी जीवनी पुस्तक की लांचिंग की. इस समारोह में अमिताभ और शत्रु दोनों उपस्थित थे. अमिताभ को बकायदा मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया था. अमिताभ और शत्रुघ्न सिन्हा के खट्टे-मीठे रिश्तों की दास्तां जगजाहिर है. दोनों का यह अंदाज इस समारोह में भी सामने आया. एक सवाल पर कि क्या शत्रुघ्न सिन्हा ने जानबूझ कर अमिताभ के अपनी आपसी रिश्तों की व्याख्या बार-बार की है, ताकि उनकी किताब को अधिक लोकप्रियता मिल सके. इस पर शत्रुघ्न ने जवाब दिया कि दोस्तों में सिर्फ प्यार नहीं होता, तकरार भी होता है. लेकिन इससे रिश्तों में दरारें नहीं आतीं. अमिताभ ने अपने जवाब में बस इतना कहा कि शत्रुघ्न अभिनय की दुनिया में उनसे पहले आये हैं. लेकिन उम्र में उनसे छोटे हैं, सो, छोटों को हक बनता है और उन्होंने बड़ी ही चतुरता से देखन में छोटन लगे...घाव करे गंभीर वाली कहावत दोहरा दी. दरअसल, हकीकत यही है कि कलाकारों में आपसी रंजिश हर दौर में रही है और यह आम दुनियादारी का भी नियम है. इस बात की मलाल हर कलाकार, हर शख्स को नागंवार मंजूर होती है कि कोई बाद में आकर भी हमसे आगे कैसे निकल गया. शत्रुघ्न यह बात बार-बार दोहराते हैं कि वह स्टार बन चुके थे. जब अमिताभ आये थे. लेकिन अमिताभ इस लिहाज से आज भी औरों से अलग कलाकार हैं कि उन्होंने कभी अपने मुख से यह नहीं स्वीकारा है कि वह बड़े स्टार हैं. वह मिलेनियम स्टार हैं. अमिताभ का यह स्वभाव कई बार मीडियाकर्मियों को उनकी अतिश्योक्ति लगती है. लेकिन यह उनका स्वभाव है. वे कभी नहीं कहते कि उनकी जिंदगी एक प्रेरणा है और युवाओं को उनसे सीखना चाहिए.दरअसल, उन्होंने जिंदगी में सदेव काम को प्रमुखता दी है. यही वजह है कि उनकी न तो कई लोगों से दोस्ती है और न ही कई लोग उन्हें खुल कर तंज दे पाते हैं. उन्होंने दोस्ती और तंज के रिश्ते के बीच एक महीन लकीर खींच रखी है. 

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