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20160217

नटसम्राट-एक आवश्यक फिल्म


हाल ही में महेश मांजरेकर की फिल्म नटसम्राट देखने का मौका मिला.नाना पाटेकर ने फिल्म में मुख्य अभिनय किया है. फिल्म की कहानी एक अभिनेता की जिंदगी के इर्द-गिर्द है. एक एक्टर बतौर थियेटर आर्टिस्ट ने अपने 40 साल थियेटर को दिया और उसके बाद उसने रिटायर होने का फैसला किया. लेकिन जिंदगी की असल कहानी उसे उस वक्त पता चली, जब उसने अभिनय छोड़ा. फिल्म के कई संवाद, कई दृश्य एक कलाकार की जिंदगी की हकीकत को बयां करते हैं. एक अभिनेता को हमेशा एक एक्टर के रूप में ही प्राण छोड़ने चाहिए... फिल्म में इस बात को बखूबी चरितार्थ किया गया है. एक एक्टर हमेशा किस तरह असुरक्षित जिंदगी जीता है और दूसरा कलाकार किस तरह हमेशा उससे ईर्ष्या करता. इसे भी संवेदना के साथ दर्शाया गया है. वही दूसरी तरफ ऐसा अक्सर होता है, कि कोई कलाकार किसी दूसरे कलाकार से कमतर हो. मगर फिर भी वह अधिक कामयाब है. यह बात की किसी अधिक काबिल कलाकार को अंत तक सालती रहती है. फिल्म के एक दृश्य में नाना का किरदार अपने निभाये गये सभी पात्रों से सवाल करते हैं, कि मैंने तुम्हारे दर्द को 40 साल तक झेला है. क्या कोई मेरा दर्द इतने सालों तक झेल पायेगा. दर्शा पायेगा. दरअसल, नटसम्राट उस हर कलाकार की कहानी है, जिसने खुद को कला को पूर्ण रूप से समर्पित किया. वह थियेटर छोड़ने के बावजूद अपनी आत्मा को अभिनय से दूर नहीं कर पाता. उसकी जिंदगी में उसे जब भी मौके मिलते हैं. वह अभिनय करता है. एक कलाकार की जिंदगी की कई हकीकत इस फिल्म में बयां होते हैं और नाना ने इसे जिस संजीदगी से निभाया है. यह सिर्फ मराठी भाषा नहीं, बल्कि हर भाषा-भाषी के दर्शकों को अवश्य देखनी चाहिए, ताकि वे भी एक कलाकार की मर्म को समझें और कलाकार को इसलिए देखनी चाहिए ताकि उन्हें यह महसूस हो कि उनकी बात को किसी कलाकार ने किसी सम्मान से लोगों के सामने दर्शाया है.

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