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20160217

कट्रीना टीम प्लेयर हैं : आदित्य रॉय कपूर


आदित्य रॉय कपूर फिल्म फितूर में एक  प्रेमी की भूमिका में हैं, जो अपने इश्क के लिए किसी भी हद तक जा सकता है. फिल्म आशिकी 2 के बाद एक बार फिर वह प्रेम कहानी में नजर आ रहे हैं.

 फिल्म से जुड़ना कैसे हुआ?
मैंने किताब पढ़ी थी और मैंने किसी दिन यह खबर पढ़ी थी कि अभिषेक यह फिल्म सुशांत के साथ बना रहे हैं और मुझे बहुत अच्छा लगा था कि इस विषय पर फिल्म बन रही है. मैंने मन में सोचा था कि इस तरह की फिल्म बननी चाहिए. तो जब गट्टू का फोन आया, और उसने कहा कि इस फिल्म के सिलसिले में मिलना चाहते हैं तो ऐसा लगा कि अरे जो सोचा था वह हो गया. मैं मिला, सीन पढ़ा. और फिर मैंने हमेशा अभिषेक की फिल्में देखी हैं और मंै जानता था कि मैं उनकी सेंसिबिलिटी से वाकिफ हूं तो मुझे लगा कि वे इस विषय पर अच्छी फिल्म बनायेंगे. 
काफी इंटेंस फिल्म है. तो टफ था क्या किरदार में ढलना?
अलग अलग तरीके से टफ था यह किरदार. मैं फिल्म में कश्मीरी लोअर मीडिल क्लास की भूमिका में हूं. लोअर क्लास ब्वॉय का कर रहा हूं. तो उसकी  प्रॉब्लम, लाइफ को समझना, तो मैंने काफी वक्त कश्मीर में लोकल लोगों के बीच गुजारा. वहां की मैनेरिज्म समझने की कोशिश की. स्टेट आॅफ माइंड को समझना. दूसरी बात यह है कि जब से ये लड़का है कि वह एक लड़की से प्यार करता है. उसको फितूर चढ़ा है. मेरी लाइफ में मेरे साथ कभी ऐसा नहीं ुहुआ कि मैं किसी एक के प्यार में पागल हो जाऊं. तो इस किरदार को समझना. मुश्किल था. कि आप जिससे प्यार करते हो. लेकिन वह फिर भी आपको प्यार नहीं करता है. और आप उससे कई सालों से प्यार करते हैं. और इस तरह का प्यार देखना मुश्किल है. आज के दौर में तो इसे जीना कठिन है. इसके अलावा यह किरदार आर्टिस्ट है तो मुझे क्लासेज लेनी पड़ी ताकि मैं आर्टिस्ट के जैसा दिखूं. स्केचिंग और ड्राइंग क्लासेज ली है. 
कश्मीर में आपका अनुभव क्या रहा?
हमारी फिल्म पोलिटिकल इनक्लाइंड फिल्म नहीं है. वहां के लोगों के बारे में मैंने महसूस किया कि वहां के लोग काफी सेंसिटिव लोग हैं. काफी मेहमाननवाजी करते हैं. मासूम हैं. अधिक दुनियादारी में नहीं जीते. मुझे वह शहर काफी अच्छा लगा.
आपकी जिंदगी में आपका फितूर रहा है?
हां, मगर मैंने फेजेज में किया है. मैं जब छोटा था तो मार्शल आर्टस करता था. ब्रूशली के पीछे ैमैं पागल था. मैं मार्शल आर्टिस्ट बनने का ख्वाब भी देखने लगा था. बाद में मैं क्रिकेटर बनना चाहता था. मेरे पेरेंट्स चाहते थे कि पढ़ाई को लेकर मेरा फितूर हो. लेकिन वह कभी हुआ नहीं. फिर गिटार को लेकर काफी फितूर रहा. इस फिल्म की तैयारी में मैंने अपना वजन कम किया है. वह भी फितूर था.
अब तक के सफर को कैसे देखते हैं?
लोगों को लगता है कि मुझे आशिकी 2 में जैसी सफलता मिली. मैंने उसको ठीक तरीके से इस्तेमाल नहीं किया है. उसका एडवांटेज नहीं लिया है. लेकिन मैं शायद ऐसा ही हूं. मुझे बहुत प्लानिंग पसंद नहीं. कुछ हाइप क्रियेट करना पसंद नहीं. मेरा यह लर्निंग है कि मुझे और फिल्में करनी है. जब मैं सेट पर हूं तो मैं सबसे ज्यादा हैप्पी रहता हूं. क्योंकि मैं जो करना चाहता था. वह कर रहा हूं. मैं फेम के पीछे नहीं भाग रहा हूं. मुझे लगता है कि फिल्में करते रहूंगा तो सबकुछ मिलेगा. 
आशिकी 2 में भी आपका इंटेंस किरदार रहा?
मुझे लगता है कि  इस तरह के किरदार आपके साथ रह जाते हैं. आशिकी 2 के बाद मुझे उससे अलग होने में थोड़ा समय लगा था.  मुझे उस फिल्म से जुदा होने में वक्त लगा था. मेरी  जो लास्ट फिल्म थी. दावतएइश्क, वह एक पोजिटिव किरदार था. फिर भी मेरे साथ रह गया था. लविंग कैरेक्टर भी रह जाता है. इस फिल्म में ब्रेक काफी हुए हैं तो बहुत ज्यादा अफेक्ट नहीं हुआ हूं किरदार से. आशिकी 2 में 55 दिनों तक लगातार काम किया था. इसलिए अधिक अफेक्ट हुआ.
कभी स्केचिंग में दिलचस्पी रही है?
दिलचस्पी तो रही है. लेकिन मैं अच्छी  स्केचिंग नहीं करता था, लेकिन मजा आया. इसे सीखा तो. मजा आया.
कट्रीना के साथ कैसा रहा अनुभव?
मुझे इस तरह की फिल्म में काम करना अच्छा लगा. क्योंकि निर्देशक अच्छे हैं. कहानी अच्छी है. हर किसी का कहानी में बिलिव है तो जब आप ऐसे माहौल में काम कर रहे होते हैं तो आपको बहुत मजा आता है. हर किसी के साथ. कट्रीना टीम प्लेयर हैं.  काफी आर्टिस्ट अपने आप में ही रहना पसंद करते हैं. लेकिन कैट वैसी नहीं हैं. उन्हें हर किसी की चिंता रहती थी.वह सेलफिश नहीं हैं. उनके लिए सीन महत्वपूर्ण थे. वह नहीं. तो वह काफी अच्छी चीज लगी. हमने हालांकि साथ में कोई वर्कशॉप नहीं किया था. अभिषेक में भी एक ओपनेस हैं. वह सबका सुनते हैं. हर कोई उनसे सलाह दे सकते हैं. वह इगोइस्टिक नहीं है. वह फ्रीडम देते हैं कि आप अपना क्रियेटिवीटी अपने तरीके से एक्सप्लोर करें. 
फिल्म का हिस्सा पहले रेखा थी. फिर तब्बू जी आयीं. आपके लिए कैसा रहा एक्सपीरियंस?
मैंने रेखा जी के साथ काम किया था. बहुत लर्निंग एक्सपीरियंस थी. थोड़ा था टाइम लगा. फिव जब चेंजेंज हुआ. लेकिन उस वक्त खुद को रिएडजस्टमेंट करना काफी दिलचस्प था. तब्बू के साथ अच्छा रहा. काफी मजा आया.
आपका थॉट प्रोसेज क्या है अभिनय का?
मैं हर तरह से काम करता हूं. लोगों को अबजॉर्ब करता हूं. कभी कभी अकेला रह कर भी करना पड़ता है. कभी कभी सिर्फ लोगों को देख कर सीखते रहते हैं. तो मैं हर तरह से काम करता हूं. 

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