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20140802

'वीडियो एलबम का वह दौर

कुछ दिनों पहले पीवीआर जूहू से लौटने के दौरान एक महिला सेलिब्रिटी पर नजर गयी.  हेमा सरदेसाई के गीत पिया से मिल के आये नैन में वे नजर आयी थीं. बाद में कुछ फिल्मों में भी नजर आयीं. उसी दिन उसी जगह एक और अभिनेत्री पर नजर गयीं. इन्हें आपने हाथों में लिख दे मेहंदी से सजना का नाम...में देखा है. इन दो अभिनेत्रियों को देखने के बाद वाकई मैं अचानक उस दौर में चली गयीं, जब वीडियो एलबम बेहद लोकप्रिय हुआ करते थे. डीवीडी या सीडी का दौर नहीं था वह. कैसेट हुआ करते थे. मैं उस वक्त स्कूल में थी. बोकारो में. मेरा पूरा परिवार और मेरे पड़ोस की सहेलियों में उन वीडियो एलबम के बारे में ही चर्चा होती रहती थी. लकी अली, सोनू निगम, बाली सागु, जैसे कई नाम हैं, जिनसे मेरा जुड़ाव वीडियो एलबम के माध्यम से ही हुआ. वीडियो एलबम देख कर ही एहसास हुआ कि प्यार के कितने रूप हो सकते हैं. चूंकि अधिकतर एलबम प्रेम पर आधारित होते थे. शाहिद कपूर की पहली झलक वीडियो एलबम से ही मिली. मुझे अच्छी तरह याद है, उस वक्त प्रेमी युगल जो अपनी बात अपनी प्रेमिका तक पहुंचाना चाहते थे. वे इन्हीं वीडियो एलबम के कलेक् शन के कैसेट गिफ्ट किया करते थे. इसी दौर में जॉन अब्राह्म पहली बार परदे पर नजर आये थे. पकंज उधास के छम छम करके कहते हैं पायलिया के बोल..., चांदी जैसा रंग है तेरा...जैसे गीत लोकप्रिय हुए. सच कहूं तो संगीत की दुनिया से जुड़ने की शुरुआत इन्हीं वजहों से हुई. मलायैका अरोड़ा जैसी तमाम अभिनेत्रियों ने अपनी पहचान इसी माध्यम से बनायी. फिल्मों में एंट्री का यह खास माध्यम होता था. स्मृति ईरानी, द्रष्टि धामी समेत कई टीवी अभिनेत्रियां आपको पुराने वीडियोज में नजर आ जायेंगी. वह दौर भी गीत संगीत का बेहतरीन दौर था. यह सुनापन अब भी छोटे परदे पर कचोटता है. क्षति है ये हमारी

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