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20140802

कहानियों को वीजा नहीं लगता : शैलजा


एक ख्वाब था जो अधूरा रह गया था. उन्हें दो मूल्कों को करीब लाना था. उन्होंने कोशिशें भी की थी. लेकिन उस वक्त वह अधूरी रह गयी. लेकिन उन्होंने हौंसला नहीं हारा. कई वर्षों पहले टेलीविजन के माध्यम से दो मूल्कों को जोड़ने की वह कोशिश अब जाकर कामयाब हुई जिंदगी के रूप में. जिंदगी को दर्शकों का भरपूर प्यार मिल रहा है. वर्षों बाद वाकई टेलीविजन ने सांस ली है. सांस है नये अंदाज व कलेवर के धारावाहिकों की. पाकिस्तान के खास शोज को बिना किसी विजा के भारत तक लाने के इस सफर में सोच और मेहनत लगी है शैलजा केजरीवाल की. जिंदगी को किस तरह जिंदगी प्रदान की शैलजा ने. अनुप्रिया अनंत से उन्होंने अपने अनुभव सांझा किये

अधूरा था जो सपना
 मैं हमेशा से इन दो मूल्कों को इस माध्यम से जोड़ना चाहती थी. चूंकि मैं जानती हूं कि दोनों ही मूल्कों के लोग एक दूसरे के बारे में जानना चाहते हैं. उन्हें समझना चाहते हैं. उनकी जिंदगी से वाकिफ होना चाहते हंै. इसकी शुुरुआत कई सालों पहले की थी. वर्ष 1999  में एक शो आया था तन्हा. हसीना मोइन ने लिखा था वह शो. लेकिन उस वक्त राजनैतिक दबार की वजह से सीरियल का टेलीकास्ट बंद करना पड़ा था. फिर मैं केबीसी और बाकी कामों में व्यस्त हो गयी थी. लेकिन एक दर्शक के रूप जब मैंने अपनी तरफ देखा तो मैंने महसूस किया कि मैं खुद वही चीजें परोसत परोसते बोर सो चुकी हूं. खुद का काम बुरा लग रहा था. इसी दौरान मेरे वे दोस्त जो पाकिस्तान में रहते हैं. वहां के शोज की सीडीज मुझे भेजते रहते थे.  और मैंने जब सारे शोज देखने शुरू किये तो मुझे फिर से आइडिया आया कि मुझे इस पर काम करना चाहिए. मैं पाकिस्तान गयी. वहां के लोगों से मिली और जो मुझे वहां के लोगों से बेइतहां प्यार मिला कि मैं न्योछावर हो गयी. मैं इंडिया आयी. फिर मैं यहां के लगभग 37 छोटे शहरों में गयी. भारत के लोगों को मैंने सीडी दिखाई इन शोज के. मैं आश्चर्यचकित थी कि उन्हें वे सारे शोज कितने पसंद आये. तब जाकर मैं ब्रॉडकास्टर से मिली. जी से बात की. उन्हें कनविंस किया कि कोई भी दर्शक एक मूड से कोई चैनल देखता है. तो सिर्फ एक स्लॉट से बात नहीं बनेगी और अंतत: मेहनत रंग लायी. जिंदगी चैनल अस्तित्व में आया.

जिंदगी का नाम
हमने इस चैनल का नाम जिंदगी इसलिए रखा चूंकि जिंदगी शब्द से हर कोई रूबरू है और हर कोई जिंदगी शब्द से कनेक्ट कर पायेगा. साथ ही इसमें जी टीवी का जेड भी आ जाता है. मेरा मानना था कि जिंदगी में कोई बॉर्डर नहीं होते. ये सबसे सहज नाम है. मैंने तय किया कि मैंने ऐसे भी इस चैनल की शुरुआत कर एक चांस ही लिया था तो मैंने गिव लाइफ अ चांस की फिलॉसफी पर अमल किया और इसे जिंदगी नाम दे दिया,
मैच्योर हुए हैं दर्शक
जब यह कांसप्ट लेकर मैं जी के पास गयी थी, तो उस वक्त हममें काफी डिबेट हुए. मुझे भी इस बात की चिंता थी कि हमें कोई थ्रेट न मिले, कोई राजनीतिक पचड़ों में हम न फंसे. मैं इस बात से भी डरी थी कि पता नहीं दर्शकों की क्या प्रतिक्रिया होगी. लेकिन जिस तरह जिंदगी चैनल को प्यार मिल रहा है और लोग इसके फ्रेशनेस की बात कर रहे हैं. मैं बेहद खुश हूं.

लव हेट रिलेशनशीप
 दरअसल, दोनों मूल्कों में लव हेट रिलेशनशीप है. वहां के लोग यहां के लोगों से बेहद प्यार करते हैं. लेकिन दिखाते नहीं हैं. दुख होता है ये सोच कर कि पहले ये दो मूल्क एक देश थे. लेकिन अब वहां क्या हो रहा. हम नहीं जानते. दूसरी बात है कि पाकिस्तान के लोग तो बॉलीवुड के माध्यम से भारत को देख लेते हैं. लेकिन भारत के लोगों के मन में पाकिस्तान को लेकर डर बना हुआ है. चूंकि वे पाकिस्तान की वही दुनिया देखते हैं जो न्यूज में दिखाया जाता है. सो, यह बेहद जरूरी था कि अलग पाकिस्तान की छवि प्रस्तुत की जाये. आज जब लोग कह रहे कि यह चैनल वाकई क्रांति लेकर आया है.कई सालों बाद सास बहू, शादी ब्याह, नाच गाने से इतर कुछ नयी चीजें सामने आयी हैं तो बेहद खुशी मिल रही है.लोग कह रहे कि इस चैनल से वे नयी जुबान सीख रहे. खुशी है कि अपनी कोशिश में कामयाब हुई

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