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20140802

हमारे यहां छोटा परदा ही है बड़ा परदा : सनम सईद


 जिंदगी पर प्रसारित हो रहा शो जिंदगी गुलजार है इन दिनों दर्शकों के दिलों की धड़कन बन चुका है. खासतौर से कशफ मुतर्जा का किरदार निभा रहीं सनम सईद को दर्शक बेहद पसंद कर रहे हैं. पाकिस्तान को लेकर लोगों के जेहन में कई गलतफहमियां हैं, लेकिन टीवी के इन शोज के माध्यम से दो मूल्क आपस में जुड़ रहे हैं. इसे एक बड़ी सफलता मानती हैं सनम. 

 सनम, पाकिस्तान के साथ साथ भारत में भी दर्शकों से आपको काफी तारीफ सुनने को मिल रही हैं. ऐसी प्रतिक्रिया पर क्या महसूस कर रही हैं आप?
मैं बेहद खुश हूं कि दो मूल्कों को जोड़ने का काम कर रहा है यह चैनल जिंदगी. यह हमारी खुशनसीबी है, कि हमारी इतनी इज्जत अफजाई हो रही है. मुझे लगता है कि दो मूल्कों के जो मसले हैं वे बेफिजूल के गढ़े गये हैं. आपसी प्यार को तो इसी बहाने दर्शकों तक पहुंचाया जा सकता है. इस प्रयास की तारीफ होनी ही चाहिए.
शो में कशफ का जो आप किरदार निभा रही हैं. निजी जिंदगी में आप वैसी हैं या उससे जुदा?
जी बहुत हद तक कशफ से मेल खाती हूं. रिश्तों को लेकर मैं भी काफी इनसेक्योर रहती हूं. कह सकते हैं ओवर प्रोटेक्टीव रहती हूं और जिस तरह कशफ काफी मेहनती और इंडीपेंडेंट हैं. मैं भी अपनी निजी जिंदगी में वैसे ही रहना पसंद करती हूं.
भारत में अब भी फिल्में बड़ा परदा है और टीवी से ज्यादा फिल्मों को अहमियत मिलती है. पाकिस्तान की इंडस्ट्री में क्या स्थिति है.
जी हमारे यहां फिल्मों से अधिक टीवी को इज्जत मिलती है और यही वजह है कि हम लगातार अच्छे शोज का निर्माण कर रहे हैं. भारत में सिनेमा के माध्यम का जिस तरह से इस्तेमाल होता है अलग अलग तरह की कहानियों को कहने में. हमारे यहां हम टीवी के माध्यम से लोगों तक वे बातें पहुंचाते हैं. हमारे यहां फिल्में बेहद कम बनती हैं और यहां थियेटर भी उतने नहीं हैं. सो, हम टीवी पर अपना पूरा ध्यान देते हैं. खास बात यह है कि टीवी के माध्यम से भी खूबसूरत प्रेम कहानियां और समाज से जुड़ी कहानियां दिखाई जा रही हैं. एक खास बात यह भी है कि चूंकि हमारे यहां ामतौर पर जो भाषा बोली जाती है, वह उर्दू है और भाषा साहित्य को उर्दू को खास बना देती है. उसका लेवल बढ़ा देती है तो यह हमें अल्लाह से मिला एक नायाब तोहफा है, सो, हमारी जुबान भी बेहद पसंद आती है.
हम देख रहे हैं कि जितने भी शोज हैं, उनमें महिलाएं अपने पति  से या किसी न किसी रूप में धोखे खाती है. क्या यह वहां के वर्तमान समाज की छवि है?
आप इसे इस नजरिये से देखें कि हमारे यहां औरतें कितनी मजबूत हैं. आप देखेंगे कि किस शोज में औरत को मजबूर नहीं दिखाया गया है. जिंदगी गुलजार में ही मेरी अम्मी का जो किरदार निभा रहीं. उन्होंने अपनी तीन बेटियों को कैसे पढ़ाया. अपने दम पर. तो आप उस नजरिये से देखें और ऐसी बातें कहांं नहीं होतीं.
यह अवधारणा बनी हुई है कि पाकिस्तान में लोगों में संकीर्णता बहुत है. खासतौर से पहनावे को लेकर. आपकी नजर में फैशन के मायने क्या हैं?
नहीं ऐसा नहीं है. हां, यह जरूर है कि हमारे मेकर्स से यह बात कही जाती है कि आप ऐसे लिबाज में अपने कलाकारों को न दिखाएं, जो उत्तेजित करने वाले हैं. हमारे यहां इस बात की सख्ती है कि आप टीवी पूरे परिवार के साथ देख रहे होते हैं तो लिबाज पर नहीं कहानी पर ध्यान जाये. शायद हमारी कहानियां इतनी रिच इसलिए है कि हम कहानियों के सिवा किसी बात पर ध्यान ही नहीं देते. मेरे लिहाज से भी फैशन का मतलब वलगैरिटी तो होनी ही नहीं चाहिए. मैं खुद मॉडल रह चुकी हूं और मैं भी ऐसी चीजों से तौबा करती हूं. मेरे वालिद( जो कि खुद अभिनेता रह चुके हैं) भी तो मेरे शोज देख रहे होते हैं. हमारी सादगी में भी खासियत है और वही बात दर्शकों को छू जाती है.
और अगर मेहनताना की बात की जाये तो. बॉलीवुड हो या टेलीवुड हमारे यहां अब भी पुरुष की तूलना में महिलाओं को कम मेहनताना मिलता है.
हमारे यहां हर लिहाज से औरतों का दर्जा ऊंचा है. हमें पुरुषों से अधिक आमदनी मिलती है. चूंकि यहां भी टीवी पर महिलाओं का ही हक है. हां, कुछ बेहद लोकप्रिय स्टार हैं, वह कुछेक ही हैं. उनके अलावा हमें अपना हक मिलता है. तभी हम ताजगी और ईमानदारी से काम भी कर पाते हैं.
अभिनय के अलावा किन चीजों में दिलचस्पी है?
मुझे बच्चों के बीच रहना अच्छा लगता है, ट्रैवलिंग करना पसंद है, किताबें पढ़ना, कविताएं लिखना, समुद्र देखना अच्छा लगता है. 

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