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20140802

किरदार में स्टार


 हाल ही में एक अखबार को दिये इंटरव्यू में अजय देवगन ने स्वीकारा है कि उन्होंने अब तक जितने भी किरदार निभाये हैं. फिल्म जख्म का किरदार उनके लिए बेहद खास था और वह चाहते हंै कि उन्हें वैसी स्क्रिप्ट मिले. लेकिन उन्हें वैसी स्क्रिप्ट नहीं मिल पा रही है. उन्होंने इस इंटरव्यू में जिक्र किया है कि इस फिल्म की स्क्रिप्ट उन्हें इतनी अच्छी लगी थी कि उन्होंने महेश भट्ट से इजाजत मांगी थी. वह उन्हें इस किरदार में खुद ढल जाने दें. उनसे एक्टिंग न करायें. और यही वजह है कि अजय इसे बखूबी निभा पाये और इस फिल्म के लिए उन्हें राष्टÑीय पुरस्कार भी मिला. दिलीप कुमार ने एक दौर के बाद ट्रेजिडी वाली फिल्में इसलिए करनी बंद कर दी थी, क्योंकि वे किरदार से बाहर नहीं निकल पाते थे. फिल्म की शूटिंग के  बाद भी वे निजी जिंदगी में दुखी रहने लगे थे. चूंकि वह किरदार को जीने लगते थे. हाल के दौर में विद्या बालन किरदारों में खुद को डुबोना पसंद करती हैं. वे मानती हैं कि उन्हें द डर्टी पिक्चर्स के किरदार में खुद को ढालने के लिए काफी मेहनत करनी पड़ी थी.चूंकि रेफरेंस बहुत सारे मौजूद नहीं थे. फिल्म कहानी के लिए शूटिंग करने के दौरान उन्होंने यह महसूस किया कि कोई मां जब अपने बच्चे को कोख में ही खो देती है तो उसका दर्द क्या होता है. वह काफी दिन तक उस किरदार से बाहर नहीं निकल पाई थीं. दरअसल, हकीकत यही है कि एक कलाकार के लिए वे ही किरदार उनके अहम और खास किरदार हो जाते हैं, जिसे उन्होंने शिद्दत से जीने की कोशिश की हो. शाहरुख खान स्वीकारते हैं कि चख दे इंडिया में उन्होंने खुद को अपने पिता की जगह रख कर उस किरदार को निभाया था. चूंकि उनके पिता हॉकी के शौकीन थे. फिल्म तलाश के बाद आमिर पैरानॉर्मल एक्ट के बारे में काफी जानकारी हासिल करने लगे थे. इससे स्पष्ट होता है कि किरदार आपको प्रभावित करते हैं

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