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20140910

दान का गुणगान


 इन दिनों बॉलीवुड, हॉलीवुड के सेलिब्रिटी एक दूसरे को आइस बकेट चैलेंज दे रहे हैं. यह एक चैरिटी के लिए है. जिसका उद्देश्य है कि जो सेलिब्रिटी यह चैलेंज न ले पाये. उसे उस चैरिटेबल संस्था को कुछ पैसे दान करने होंगे. चैरिटी का यह चैलेंज इस कदर लोकप्रिय है कि कई सेलिब्रिटी अपने दोस्तों को इसके लिए चैलेंज कर रहे. हालांकि यह एक विदेशी संस्था है, और उसका उद्देश्य भी नेक ही है. लेकिन इस जवाब में राइस बकेट चैलेंज लेकर कलानिधि आयी हैं. उन्होंने तय किया है कि वे अपनी संस्था के माध्यम से वैसे लोगों को एक बाल्टी चावल मुहैया करायेंगी, जिन्हें जरूरत है. इसके लिए उन्होंने दक्षिण के कई कलाकारों को भी शामिल किया है और वे खुशी खुशी इसमें शरीक भी हो रहे हैं. लेकिन फिलवक्त तक कोई हिंदी फिल्मी सितारा इससे जुड़ा नजर नहीं आ रहा है. तो क्या इससे यह बात साफ होती है कि हमारे लिए चैरिटी भी ओहदे को देख कर होती है. चूंकि आइस बकेट चैलेंज में सभी हॉलीवुड के बड़े सितारा शामिल हो रहे हैं. सो, बॉलीवुड इससे जुड़ना अपना सम्मान समझ रहा है. हालांकि अब तक सलमान खान, जो कि अपनी दरियादिली के लिए जाने जाते हैं. वे किसी भी संस्था से नहीं जुड़े. कलानिधि  ने अपनी इस मुंिहम के बारे में जो सोच रखी है, वह भी अदभुत है और वह उनकी सोच को दर्शाता है. कलानिधि कहती हैं कि भारत चावल निर्यात देश है और ऐसे में जरूरतमंदों को चावल देने से उनकी भूख शांत होगी और लोगों को दुआ मिलेगी. वाकई ऐसी कलानिधि की भारत में जरूरत है, जो इस सोच के साथ आगे आयें, कि उन्हें इसके बदले में कुछ और नहीं चाहिए. वे निश्छल मन से अपना मान सम्मान देते हैं. वे चैरिटी को दया नहीं बल्कि सम्मान के रूप में देखते हैं और यही दान की वास्तविक सोच भी है कि आपने जो दान किया उसका गुणगान न हो.

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