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20140910

निर्देशक और दर्शक का रिश्ता


रानी मुखर्जी ने आदित्य चोपड़ा के बारे में बताया कि आदित्य आज भी सारी फिल्में थियेटर में आम लोगों के बीच देखते हैं. चूंकि वह लोगों के रियेक् शन को देखना चाहते हैं और समझना चाहते हैं. और यही वजह है कि आदित्य मीडिया या किसी पब्लिसिटी में नहीं रहना चाहते. ठीक इसी तरह सूरज बड़जात्या आज भी सारी फिल्में आम लोगों के साथ बैठ कर थियेटर में देखना पसंद करते हैं. चूंकि वह भी देखना चाहते हैं कि दर्शक किस तरह की बातों पर हंस रहे हैं. किन बातों पर लोगों को निर्देशक की बात अच्छी नहीं लगी. सूरज भी इसी वजह से दर्शकों के  सामने नहीं आना चाहते. सूरज बताते हैं कि जब हम आपके हैं कौन उन्होंने इंडस्ट्री के लोगों को दिखायी तो सभी ने कह दिया था कि यह फिल्म फ्लॉप होगी. लेकिन जब सूरज फिल्म देखने आम थियेटर में गये तो उन्होंने महसूस किया कि दर्शक किस तरह फिल्म एंजॉय कर रहे. खास कर रेणुका सहाणे की मौत पर थियेटर में बैठे लोगों की आंखों में आंसू आ गये थे. दरअसल, हकीकत यही है कि किसी फिल्म के प्रति अगर आपको नजरिया समझना है तो आप उसे किसी बुद्धिजीवी की नजर से देख कर आंक नहीं सकते. यह हर निर्देशक की सोच होनी चाहिए कि वह अपने दर्शक को समझे और अगर फिल्म में कुछ कमियां भी है तो उन्हें सुनने की हिम्मत रखे. तभी वह वास्तविक फिल्मकार है. आपकी फिल्म आपको पसंद आयी. दर्शकों को नहीं. इससे साफ है कि वह फिल्म दर्शकों को जोड़ नहीं पायी. और अगर कोई निर्देशक अपनी स्वपनीली दुनिया में रहता है और खुश होता है कि उसने बेहतरीन फिल्म बनाई है तो वह उसकी अतिश्योक्ति ही होगी और वर्तमान में इससे ग्रस्त कई निर्देशक हैं. सूरज और आदित्य जैसे निर्देशकों की जरूरत है. जो आज भी दर्शकों को महत्व देते हैं. और यही सच्चाई है कि दर्शक है तो सिनेमा है.

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