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20140910

जज्बे की सीख

जैकी श्राफ ने हाल ही में फिल्म हैप्पी न्यू ईयर के ट्रेलर लांच के दौरान बातचीत के क्रम में स्वीकारा कि उन्होंने कभी चाहत नहीं की थी कि वे फिल्मों में नायक बनें. उन्होंने शुरुआती दौर से ही महसूस कर लिया था कि वे खलनायक ही बनेंगे. उन्हें अपनी पहली फिल्म स्वामी दादा के दौरान ही इस बात का एहसास हो गया था कि उनके पास शक्ल और सूरत नहीं हैं. तो वे कैसे नायक बन पायेंगे. लेकिन उन्हें मौके मिलते गये और उन्हें नायक बनने का मौका मिला. किसी जमाने में अभिषेक जैकी दा के फैन हुआ करते थे. जैकी श्राफ ने यह बात खुद शेयर की कि वह अमिताभ बच्चन के फैन थे. लेकिन उनके बच्चे यानि श्वेता और अभिषेक जैकी के फैन थे और एक बार चेन्नई में शूट के दौरान अमिताभ बच्चन ने आकर जैकी से मुलाकात की थी और अपने बच्चों को आॅटोग्राफ  दिलाया. जैकी मानते हैं कि उन्हें जिंदगी में वह सबकुछ मिला, जिसकी कल्पना उन्होंने नहीं की थी. जैकी का बीरू बोल कर बात करने का अंदाज आज भी बरकरार है. जैकी उन चुनिंदा अभिनेताओं में से एक हैं, जो आज भी दिल से बोलते हैं और सच बोलते हैं. उनकी सादगी अब भी बरकरार है. उन्होंने जिस जगह से शुरुआत की थी और आज जो मुकाम हासिल किया है. उस लिहाज से वह चाहते थे तो खुद को अपने जड़ से जुदा कर सकते थे. लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया. चूंकि उन्हें अपने जड़ से प्यार है. जैकी स्पष्ट शब्दों में कहते हैं कि लोगों को शाहरुख से सीखना चाहिए कि किस तरह छोटा सा लड़का मुंबई से बाहर से आया. मेहनत करके आज वह बॉलीवुड का बादशाह है. दरअसल, वाकई ग्लैमर के पक्ष कुछ भी हों. लेकिन वाकई जैकी श्राफ, अक्षय कुमार, शाहरुख खान जैसी शख्सीयत से यह सीखने की कोशिश करनी चाहिए कि जज्बा हो तो मुकाम मिल ही जाता है.

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