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20160118

स्टार व स्टारडम की गंभीरता


आर माधवन ने अपनी हाल ही में हुई बातचीत में कहा कि उनकी कोशिश होती है कि वे जिस ईमानदारी से अपने किरदारों को परदे पर निभाते हैं. वास्तविक जिंदगी में भी वे इतने ही सरल बने रहें. उन्हें हर वक्त स्टारडम से घिरे रहना पसंद नहीं हैं. उन्होंने बताया कि हाल ही में जब वह एयरपोर्ट पर थे. मियां-बीवी की आपस में लड़ाई हो रही थी. और वे वहां से गुजरे. दोनों मियां-बीवी अपनी लड़ाई भूल कर माधवन को मैडी मैडी कह कर पुकारने लगे और फिर दोनों ने हंसते-मुस्कुराते हुए तसवीरें खींचवायीं और दोनों के चेहरे पर मुस्कान आ गयी. माधवन को ये बातें प्रभावित करती हैं. वे स्वीकारते हैं कि मैं स्टार हूं. लेकिन यह भी नहीं भूल सकता कि मेरी उम्र क्या है. मेरे अगल बाल सफेद हो चुके हैं तो हो चुके हैं. मैं उन्हें हरगिज डाइ नहीं करूंगा. जब तलक किरदार की डिमांड न हों. वे यह भी स्वीकारते हैं कि इंडस्ट्री ऐसे कितने स्टार्स हैं,( फिल्म तनु वेड्स मनु रिटर्न्स के एक संवाद की तरफ ईशारा करते हुए),जो यह किरदार के रूप में भी सुनने के लिए तैयार होते हैं कि अदरक के जैसे फैलते जा रहे हो. दरअसल, अपने व्यक्तिगत अनुभव के आधार पर मैंने भी महसूस किया है कि बॉलीवुड में स्टारडम की परिभाषा कुछ और है. यहां नये नये सितारे भी हर वक्त सार्वजनिक  स्थानों पर महंगे और डिजाइनर आउटफिट पहने ही नजर आते हैं. जबकि बॉलीवुड से इतर दक्षिण सिनेमा के स्टार आम अंदाज में ही दर्शकों के सामने आते हैं. रजनीकांत जैसे सुपरस्टार्स के बारे में हमेशा ही खबरें आती रही हैं कि वे आम जिंदगी में कितने आम होते हैं.कुछ सालों पहले एक वीडियो,  जिसमें जैकी चान को सुपरस्टार्स की मौजूदगी में मंच की सफाई करते देख चुके हैं. इन बातों से यही स्पष्ट होता है कि कौन से स्टार स्टारडम को कितनी गंभीरता से लेते हैं. 

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