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20160110

हर सीन में बदलता था मेकअप और हेयरस्टाइल: शिल्पा शिरोडकर


शिल्पा शिरोडकर ने छोटे परदे पर धारावाहिक एक मुट्ठी आसमान से शुरूआत की और एक बार फिर वे स्टार प्लस के शो सिलसिला है प्यार का में एक अहम भूमिका निभा रही हैं. खास बात यह है कि उनके पहले शो से इस शो के अवतार में काफी बदलाव है. शिल्पा खुश हैं कि उन्हें छोटे परदे पर अलग तरह के किरदार निभाने के मौके मिल रहे हैं. 
इस शो से कैसे जुड़ीं
जब मेरा पहला शो बंद हो रहा था. उसी वक्त रश्मि जी( शो की प्रोडयूसर) का फोन मेरे पास आया था. हालांकि वह कोई और शो था.लेकिन वह शो बन नहीं पाया. लेकिन रश्मि जी को मैंने यह कहा था कि अब अगर मैं कोई शो करूंगी तो रिप्यूटेड चैनल के साथ करूंगी. मुझे प्राइम टाइम स्लॉट चाहिए और कहानी मेरे ही इर्द गिर्द होनी चाहिए.रश्मि जी ने मुझे कुछ महीनों बुलाया और फिर कहानी सुनायी तो मैं काफी उत्साहित हो गयी.मेरे लिए रश्मि जी का पहला फोन था, जब एक मुट्ठी बंद हो रहा है. उस वक्त रश्मि जी ने मुझसे कहा कि नया शो साथ करेंगे. तो मैं खुशनसीब हूं कि मुझे दोबारा नया मौका मिला. 
टेलीविजन में अब तक के सफर को किस तरह देखती हैं?
मैं अपने आप को लकी मानती हूं क्योंकि मैंने पहला शो किया था. लीडिंग चैनल के साथ किया. और काफी लीडिंग प्रोडक् शन हाउस के साथ काम किया और फिर से मुझे लीडिंग चैनल के साथ ही काम करने का मौका मिला है तो मेरे लिए यह खुशी की बात है. मैं इसे अपने लिए गोल्डन एरा मानती हूं क्योंकि इस एरा में काम मिले और लोगों को काम पसंद आये तो यह मेरे लिए ब्लेसिंग है. मैं ऊपर वाले पर विश्वास करती हूं, क्योंकि इस इंडस्ट्री में बहुत कठिन है खुद को सस्टेन कर पाना.अपनी पहचान बनाना और काम मिलना.तो इस लिहाज से बहुत खुशनसीब हूं कि अच्छे मौके मिल रहे हैं.
फिल्मों की दुनिया को मिस करती हैं?
मैं जरूर फिल्में करना चाहंूगी. मैं फिल्में देख देख कर ही बड़ी हुई हूं. उसी ने मुझे अभिनय सिखाया है. जो पहचान मिली है उसी से मिली है. मुझे हमेशा से एक्टिंग में दिलचस्पी रही है और मैं मानती हूं कि इस वक्त फिल्म इंडस्ट्री काफी बेहतरीन बदलाव आये हैं. अब ज्यादा अच्छी फिल्में बनने लगी हैं. अच्छे विषय आ चुके हैं. किसी एक्टर के लिए यह बेहतर दौर है, जब वह एक्टिंग कर सकता है. और हमने जब शुरूआत की थी. उस वक्त से अधिक स्टारडम आज मिल सकती है. मेरा बचपन से ही सपना था कि एक्टिंग करूंगी.और वही करूंगी. एक्टिंग के अलावा मैं किसी और एसपैक्ट पर नहीं सोच पाती हूं.
सिनेमा में किस तरह के बदलाव महसूस कर रही हैं?
हाल के दौर में मैंने तलवार देखी. मुझे काफी पसंद आयी. आज की आॅडियंस इतनी समझदार हो गयी है कि अगर उन्हें कुछ बकवास दिखाया जाये तो वह तुरंत रियेक्ट करती है. इस लिहाज से भी काफी बदला है सिनेमा. इसलिए अब अच्छे विषय आने लगे हैं कि आप आॅडियंस को बेवकूफ नहीं बना सकते.
आपने जब शुरूआत की थी और जब आज न्यू कमर्स आते हैं. कितना बदलाव देखती हैं उनके और अपने दौर के संघर्ष में?
मेरे अनुसार जब मैं इंडस्ट्री में आयी थी तो सीधे सेट पर एक्टिंग सीखने वाले दौर में आयी थी.हमलोग के लिए कोई मेंटर नहीं था. हमलोग हर फिल्म से ग्रो होते गये. आजकल सभी पूरी तरह से तैयार होकर आते हैं, और यह जरूरी भी है, क्योंकि उस दौर में 10 लड़कियां थीं. आज 100 लड़कियां हैं. तो कंप्टीशन टफ है. आपके पास वक्त नहीं है कि आप पहले सीखें फिर काम करें. सो, आपको फास्ट रहना ही होगा. ट्रेंड होना ही होगा. आज अच्छा है कि लोग ट्रेंड आते हैं. आजकल फिल्मों में पैसे भी इतने लगते हैं कि आप अफोर्ड नहीं कर सकते कि आपको पहले सिखाये फिर मौके दें. सबकुछ बदला है. तकनीक मेकअप सबकुछ. हमारे दौर में मेकअप भी अलग था. हमलोग कहीं भी मेकअप करते थे. कैसे भी करते थे. वैनिटी वैन नहीं होने पर भी मेकअप करते थे. हर सीन में हमारा मेकअप और हमारा हेयरस्टाइल बदल जाता था. हम पैन केक लगा लेते थे. पाउडर लगा लेते थे. आजकल टेक्चर बदल चुका है.लाइटिंग पूरी तरह बदल चुकी है शूटिंग की. जहां जरूरत ही नहीं है कि आप मेकअप करो. वह लाइटिंग से ही कमाल कर लेते हैं.उस वक्त तो मॉनिटर नहीं होता था कि हमलोग देख पायें कि जो हमारी शूटिंग हुई है, वह कैसी हुई है. आज जो मॉनिटर है. हम खुद को देख कर इंप्रूव कर सकते हैं. लेकिन आज देखें रियल हुआ है सिनेमा. एक फिल्म का एक लुक होता है. अभिनेत्रियां उसी लुक में नजर आती हैं. अब कलाकारों का नहीं फिल्म का लुक होता है और वह काफी रियलिस्टिक भी लगता है. दीपिका पादुकोण का काम मुझे काफी पसंद है.मुझे लगता है कि दीपिका के पास सिंपल ब्यूटी है. और टैलेंटेड है. प्रियंका चोपड़ा मुझे बहुत पसंद है. मुझे लगता है कि वह सिर्फ ग्रो कर रही हैं.अपनी पर्सनैलिटी में.ऐतराज से लेकर क्वानटिको  तक उन्होंने बेहतरीन काम किया है. अभिनेताओं में मुझे सलमान और ऋतिक पसंद हैं.
अगर आपको कभी मौका मिले तो अपनी कौन सी फिल्मों को दोबारा जीना चाहेंगी?
मुझे अपनी फिल्में टीवी पर देखना बहुत पसंद हैं. मैं उन्हें देखती हूं तो लगता है कि आज शायद मैं वह किरदार करती तो अलग तरह से करती. मुझे हम और खुदागवाह काफी पसंद है. इसके अलावा मुझे अपनी फिल्मों में मृत्युदंड में काम करके काफी मजा आया था. वह किरदार दोबारा मिले तो फिर करना चाहूंगी. हास्य फिल्मों में मुझे गोपी किशन काफी पसंद है, किशन कन्हैया को देखती हूं. तो लगता है कि उस किरदार को आज मैं काफी अच्छे से निभा सकती थी.
बॉलीवुड में अब भी किसी से संपर्क में हैं. अपने को स्टार या निर्देशकों से?
बॉलीवुड में मेरे दोस्त कम हैं. मेरे तीन ही फ्रेंड्स हैं. मैं उनके साथ ही रहना पसंद करती हूं. लेकिन इंडस्ट्री के लोग मिलते हैं तो मैं पूरे इज्जत से उनसे मिलती हूं. मेरे कम दोस्त हंै.
उस दौर में फैन से जुड़ना किस तरह होता था. चूंकि उस दौर में सोशल मीडिया नहीं थी.
उस दौर में मीडिया का इतना इंटरफेयरेंस नहीं था. न ही उतनी मीडिया थी. हम अपने फैन्स से ढेर सारे लेटर्स आते थे. तसवीरें आती थीं. हम उस वक्त उन्हें तसवीरों में अपने आॅटोग्राफ भेजते थे. पोस्टकार्ड भेजते थे. उसी के माध्यम से फैन हमारे बारे में इंप्रेशन बनाते थे. अखबारों में जो पढ़ते थे उससे ही. हम अपना क्लेरिफिकेशन नहीं दे पाते थे.मुझे याद है हम साउथ अफ्रीका गये थे. एक रेडियो इंटरव्यू देने. वहां एक फैन आया और उन्होंने कहा कि मैं आपको लगातार 20 मिनट से देख रहा हूं. और मैं आपसे यह बात शेयर करना चाहूंगा कि मैंने आपके बारे में पढ़ा था कि आप घमंडी हैं, लेकिन आज आपको देख कर ऐसा नहीं लगा. फैन यही मानते थे कि हमलोग की दुनिया अलग होती हैै. मुझे लगता है कि मीडिया ने हमेशा एक स्टार की गू्रमिंग में महत्वपूर्ण काम किया है. क्योंकि लोग इस पर विश्वास करते थे.

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