20160116

आनेवाला दौर विषयपरक फिल्मों का ही होगा : अक्षय व निमरत



अक्षय कुमार और निमरत कौर एक साथ एक महत्वपूर्ण फिल्म लेकर आ रहे हैं. फिल्म एयरलिफ्ट की कहानी कुवैत की एक ऐसी घटना से जुड़ी है, जिसकी वजह से भारत एक दौर में काफी प्रभावित हुआ था.
एयरलिफ्ट में दिखाई जा  रही घटना के बारे में खास जानकारी नहीं है लोगों को. ऐसे में फिल्म के लिए तथ्य एकत्रित करने में परेशानी हुई?
अक्षय : मुझे लगता है कि मेरे निर्देशक राज इस बारे में अच्छी तरह से वाकिफ थे कि वह किस तरह की कहानी कहने जा रहे हैं और उनके पास काफी कुछ फैक्ट्स हैं, इसके बारे में.मेरे डायरेक्टर साउथ इंडियन हैं और उनके अपने अंकल वहां फंस गये थे. तो उनको काफी जानकारी है. फैक्ट्स को तो छुपाया नहीं जा सकता. लेकिन मैं हैरान हूं कि किस तरह सरकार ने इस खबर को छुपा कर रखा और सिर्फ एक न्यूजपेपर में इसकी जानकारी आने दी थी. जबकि यह घटना गिनीस बुक आॅफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में शामिल है.और विश्व के सबसे बड़ी घटनाओं में से एक है.
निमरत, आप इस घटना के बारे में पहले से वाकिफ थीं?
निमरत : नहीं, मुझे भी इस बारे में बिल्कुल जानकारी नहीं थी.और जब मैंने इस घटना पर अपनी स्क्रिप्ट सुनी तो मैं हैरान थी. और मुझे हैरानी हुई थी कि मैं इतिहास और राजनीति सारी चीजों की अच्छी जानकारी रखती हूं और मैं भी इस बारे में अनजान थी. और मुझे यह बात चुभी कि मेरी तरह अवयेर रहने वाले मेरे जेनरेशन के लोग अगर इतनी बड़ी बात नहीं जानते हैं तो यह अफसोसजनक है.और मुझे खुशी है कि इस फिल्म के माध्यम से मैं वह कहानी दर्शकों के सामने ला पा रही हूं और लोग निश्चित तौर पर इस कहानी से अटैच हो जायेंगे. इसके अलावा अक्षय जैसे सुपरस्टार जब फिल्म से जुड़ते हैं तो इस तरह की कहानियों को और हिम्मत मिलती है, क्योंकि अक्षय की वजह से लोग इस फिल्म को देखने आयेंगे. और लोगों को यह फिल्म देखना जरूरी है, क्योंकि यह मेरी फिल्म है इसलिए नहीं, बल्कि महत्वपूर्ण विषय पर है इसलिए.
अक्षय, लेकिन आपकी बाकी फिल्मों की तूलना में इस तरह की फिल्में जैसे बेबी, स्पेशल 26, हॉलीडे 100 करोड़ का आंकड़ा पार नहीं कर पातीं और राउडी, सिंह इज ब्लिंग जैसी मसाला फिल्में काफी धमाल मचा जाती हैं. आपको क्या लगता है क्या वजह है?
 हां, मुझे दुख होता है इन बातों का कि इस तरह की फिल्में 90 करोड़ तक ही रह जाती है, क्योंकि देशभक्ति के बारे में लोग बात करते हैं.लेकिन लोग पैसे खर्च करके उस पर आधारित फिल्में देखना पसंद नहीं करते. लोग कर्मशियल फिल्में ही देखना पसंद करते हैं. कॉमेडी, फाइट्स, गाड़ियां उड़ रही हैं...वगैरह वगैरह, लेकिन मैं भी गिव अप नहीं करने वाला क्योंकि नंबर्स कम आ रहे बॉक्स आॅफिस पर. मैं तब भी फिल्में करूंगा और कोशिश करूंगा कि धीरे धीरे ही सही अधिक दर्शकों को शामिल करूं. हैट्स आॅफ टू एयर इंडिया के पाइलेट्स को जो वार जोन में उस दौर में गये.और लोगों को बचाया. जिन्होंने उन लोगों की मदद की. वह उनके परिवार के सदस्य नहीं थे. लेकिन एक इंसान के रूप में लोगों की मदद के लिए वे आगे आये.और मैंने जो किरदार निभाया है. वह भी आम है और वह चाहता है कि लोगों की मदद करें और वह करता है. उसके पास मौका था कि वह उस वक्त लंदन जा सकता था.लेकिन वह भागा नहीं. लेकिन धीरे धीरे लोग इन फिल्मों के बारे में अवेयर हो रहे हैं और आनेवाले सालों में लोग बोलने वाले हैं हम लोगों से कि बेकार की फिल्में मत दिखाओ. कुछ अलग दिखाओ.
निमरत आप क्या सोच रखती हैं बॉक्स आॅफिस को लेकर.
निमरत : मुझे लगता है कि दर्शकों का माइंडसेट धीरे धीरे बदल रहा है. सोशल साइट्स पर इस फिल्म को लेकर काफी उत्सुकता है. लोग धीरे धीरे ही सही लेकिन मिनिंगफुल फिल्मों के तरफ रुख करेंगे और मेरी पिछली फिल्म लंचबॉक्स की कामयाबी यही साबित करती है. मैं बहुत होफ फुल हूं.
अक्षय, आप लगातार यह कह रहे हैं कि इस तरह के विषय हमारी टेक्स्ट बुक में आने चाहिए?
जी हां, मैं बिल्कुल कह रहा हूं. मेरा मानना है कि अकबर, बिरबल हमने सब पढ़ लिया. जान लिया कि उन्होंने क्या इतिहास रचा था. क्या क्या कारनामें नहीं किये. लेकिन अब यह भी जरूरी है कि हमारे इतिहास के रियल हीरोज की कहानी लोगों के सामने आये. यह तभी संभव है जब इन सारी कहानियों को टेक्स्ट बुक में लाया जाये. तभी आने वाले जेनरेशन को यह पूरी कहानी पता चलेगी. 
निमरत, आप कम फिल्में कर रही हैं, कोई खास वजह?
मैंने हिंदी फिल्मों में शुरुआत लंचबॉक्स जैसी फिल्म से की है तो कुछ वक्त तो मुझे ही निर्देशकों को यह बताने में लगा कि मैं कर्मशियल फिल्में भी करने के लिए तैयार हैं. कई लोग मुझे इसलिए आॅफर नहीं करते थे कि उन्हें लगता था कि शायद मैं वैसी फिल्में करना ही नहीं चाहूंगी. लेकिन अब धीरे धीरे शुरुआत कर रही हूं. लेकिन म्ोरी कोशिश होगी कि मैं विषयपरक वाली कर्मशियल फिल्म में काम करूं.
फिल्मी अवार्डस को लेकर अक्षय आपका अंदाज हमेशा व्यंगात्मक होता है. क्यों?
क्योंकि मुझे पता है कि कौन कौन लोग हैं जो अवार्ड खरीदते हैं. मुझे जब कभी स्टेज पर अवार्ड देने के लिए बुलाया भी जाता है तो मैं पहले आगे वाली रो देखते हंूं और समझ जाता हूं कि किसे अवार्ड मिलने वाला है. यह एक गेस गेम बन गया है.
आपने रोबोट 2को क्यों हां कहा?
क्योंकि मुझे लगता है कि तमिल या साउथ की फिल्मों में कभी किसी हिंदी के सुपरस्टार ने काम नहीं किया है और वह एक बड़ी उपलब्धि है. मेरा किरदार बेहतरीन है. मैंने अपने करियर के शुरुआती दौर में एक कन्नड़ फिल्म की थी. और अब यह फिल्म कर रहा हूं. मेरी पसंद का जॉनर है. इसलिए मैं उत्साहित हूं इसे करने के लिए. 

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