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20150420

उर्दू दुरुस्त किया इस शो के बहाने : अहसान


जिंदगी चैनल पर प्रसारित हो रहे धारावाहिक वक्त ने किया क्या हसीं सितम में सलीम की भूमिका निभा रहे  अहसान खान इस बात से बेहद खुश हैं कि उन्हें भारत में दर्शकों का बेहद प्यार मिल रहा है.हाल ही में उन्होंने वीडियो कांफ्रेसिंग के माध्यम से अनुप्रिया अनंत से बातचीत की. 

अहसान, वक्त ने किया क्या हसीं सितम एक उपन्यास पर आधारित है और इस शो में भारत-पाकिस्तान विभाजन के कई मुद्दों को भी दर्शाया गया है.तो आपने सलीम के लिए किस तरह से तैयारी की?
मुझे जब निर्देशक ने इस शो के बारे में बताया तो उन्होंने मुझे बानो उपन्यास दिया था. यह शो पाकिस्तान में दास्तां नाम से प्रसारित हुआ और दर्शकों ने काफी पसंद किया. मैंने उस उपन्यास को पढ़ने के बाद खुद उस दर्द को महसूस किया कि जब पाकिस्तान और भारत अलग हुए होंगे तो दोनों मुल्कों ने क्या क्या दुख दर्द झेला होगा. कितने परिवार बर्बाद हुए होंगे. मैं इस शो में एक मुसलमान हूं. लेकिन फिर भी मैं हिंदुस्तान का हिमायती हूं. सो, उस लिहाज से यह शो बहुत प्रासंगिक है कि इसमें सिर्फ किसी एक मुल्क की तरफदारी नहीं की गयी है. यह शो मेरे करियर का सबसे कठिन शो है. चूंकि पीरियड होने के साथ साथ इसमें जो इमोशन दिखाना था. टफ था. साथ  ही इसके अल्फाज़. मेरी उर्दू बहुत दुरुस्त नहीं, क्योंकि मैं पाकिस्तान में बहुत नहीं रहा. लेकिन निर्देशक की वजह से मैंने अपना उर्दू ठीक किया. और मैं खुशनसीब हूं कि मुझे इतने बेहतरीन शो में काम करने का मौका मिला.
एक पीरियड ड्रामा में काम करना कितना कठिन होता है? 
बहुत कठिन होता है. चूंकि आपको उस दौर में जाकर उस दौर के कपड़े, उस दौर के तौर तरीकों को समझना होता है. उस दौर की परेशानी. उस दौर के समाज़. उस दौर की सामाजिक संरचना सबकुछ समझना होता है. उस दौर में लोग किस तरह से बात करते थे. क्या बातें होती थीं. खासतौर से मुद्दा अगर विभाजन को लेकर है तो और ज्यादा सावधानी बरतनी पड़ती है. साथ ही निर्देशक के लिए यह बेहद कठिन है कि वह आज के दौर में बीते दौर की बात करे और वह भी सीमित संसाधन में. तो कोशिश भी यही होती थी कि हम उन्हें पूरी तरह से सपोर्ट करें. मुझे इस शो में काम करने के दौरान इस बात का भी सुकून है कि इसी बहाने मैंने वह दौर जिया. जो कि बेहद खुशनुमा था. सभी मिल कर रहते थे. एक दूसरे पर जान छिड़कते थे. हिंदू या मुसलमान की भावना नहीं थी. आपसी प्रेम था. उस दौर के लोकगीत सबकुछ जीवंत तरीके से इस शो में नजर आया.
अहसान, फवाद और अली जफर बॉलीवुड में काफी लोकप्रिय हैं. क्या आपको मौका मिला तो आप भी बॉलीवुड का हिस्सा बनना चाहेंगे?
जी हां, बिल्कुल बनना चाहूंगा. यह मेरी खुशनसीबी होगी. मुझे आमिर खान का काम बहुत पसंद है. मैं चाहूंगा कि कभी अगर मुझे उनकी तरह के किरदार निभाने  के मौके मिलें तो मैं खुशी खुशी करूं. मुझे फक्र है कि फवाद और अली इन दो कलाकारों को वहां के दर्शकों ने बेशुमार प्यार दिया है. निस्संदेह बॉलीवुड काफी लोकप्रिय है. हम सभी पाकिस्तानी कलाकार फैन हैं बॉलीवुड के. कभी मौका मिले तो मैं जरूर हिस्सा बनना चाहंूगा.जिंदगी चैनल के माध्यम से हमें भारतीय दर्शकों से रूबरू होने का मौका मिल रहा है. वरना, पहले सिर्फ हम वहां का बॉलीवुड देख पाते थे. और हमारे शोज सिर्फ पाकिस्तान में ही दिख कर बंद हो जाते थे. लेकिन जिंदगी चैनल की वजह से पूरे मुल्क में फैले भारतीय दर्शक हमें पसंद करते हैं. मेरे पास कई इमेल आते हैं तो बेहद खुशी होती है कि अब हमारा दायरा बढ़ा है. एक कलाकार के लिए इससे खुशी की बात क्या होगी कि उन्हें ज्यादा से ज्यादा दर्शक मिले.
इस शो में कई ऐसे संवाद व दृश्य भी हैं, जो हिंदुस्तान के पक्ष में नहीं हैं तो जब इसके प्रसारण की बात भारत में हुई थी तो कहीं से मन में भय था कि कोई विवाद हो सकते हैं?
जैसा कि मैंने आपको पहले भी कहा कि यह शो उपन्सास पर आधारित है तो जाहिर  है, इसमें मनगढंत बातें नहीं हैं. साथ ही आप शो देखेंगे तो महसूस करेंगे इसमें किसी की तरफदारी नहीं है. आप देखेंगे कि किस तरह दो हिंदू हैं. लेकिन एक के मन में पाप है. लेकिन दूसरा मदद करता है. कुछ इसी तरह एक मुसलमान गलत सोच रखता है तो दूसरा मदद के लिए हाथ आगे बढ़ाता है. एक हिंदू किस तरह पाकिस्तान के मुसलिम की मदद करता है. तो मुझे नहीं लगता कि इस पर विवाद की बात है. निर्देशक ने यह प्रेम कहानी मानवता को ध्यान में रखते  हुए दिखाई है कि कैसे दो प्रेमी विभाजन की वजह से अपना प्रेम खो बैठते हैं और चाह कर भी पहले की तरह  हालात नहीं हो पाये. मैं जब यह शो कर रहा था तो कई बार सपने में बुरे ख्याल आ जाते थे तो आंखें खोलने के बाद अल्लाह का शुक्रिया बोलता था कि मेरे परिवार वालों ने यह दर्द नहीं झेला. वरना, मुझ पर क्या बीतती.

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