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20150420

दर्शक व शख्सियत


एक पाकिस्तानी धारावाहिक डाइजेस्ट राइटर में लेखकों के साथ होनेवाली जादद्ती को बखूबी परदे पर उकेरा गया है, कि किस तरह इस शो बिजनेस में बड़े नाम मजबूर लेकिन होनहार और हुनरमंद लोगों का इस्तेमाल करते हैं. वे किस तरह उनकी मजबूरियों का फायदा उठा कर उनका हुनर खरीदते हैं और बदले में उन्हें न तो नाम मिलती है और न ही उनके हिस्से की शोहरत. साथ ही लेखक की जिंदगी का एक और अहम हिस्सा भी शो में खूबसूरती से नजर आता है, कि कई बार कल्पना की दुनिया वास्तविकता पर इस कदर हावी हो जाता है कि आम आदमी उसी काल्पनिक दुनिया को सच मान बैठता है और उसका मुरीद हो जाता है. जैसे इस शो में  लेखिका से उनका फैन प्रेम कर बैठता है. लेकिन दरअसल, उसे प्यार उस लेखिका के लेखन शैली से है, जिसमें वे अपनी वास्तविक जिंदगी की नहीं, सपनों की कहानियां बुनती हैं. दरअसल, सिनेमा, लेखन, साहित्य की दुनिया इस कदर काल्पनिक होने के बावजूद अपना जादू बिखेरती है कि उस तिलिस्म में डूबा रहनेवाला दर्शक ही उसकी लोकप्रियता बढ़ा सकता है. चूंकि वह हकीकत से कोसो दूर है. इसलिए खुश है. संतुष्ट है. बॉलीवुड की ग्लैमर की दुनिया इसी झूठ पर ही आधारित है या यूं कह लें दर्शकों के उस झूठे विश्वास पर ही आधारित है जो वे स्टार्स पर करते हैं. जिस तरह स्टार्स उन्हें आकर्षित करते हैं और आमतौर पर मोहने की कोशिश करते हैं. वास्तविक जिंदगी में स्टार्स के लिए वे दर्शक खास मायने नहीं रखते. यही वजह है कि आज भी फैन और शख्सियत में हमेशा एक दीवार बना कर रखी जाती रही है. चूंकि जिस दिन दर्शकों के सामने हकीकत आयी. वे धराशायी हो जायेंगे. वह तिलिस्म समाप्त  हो जायेगा और शायद तब सिनेमा खत्म हो जाये. इसलिए उस तिलिस्म का बरकरार रहना भी जरूरी है.

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